23/08/2023
प्रश्न - पुरुषत्व एवं नारीत्व से क्या अभिप्राय है ? इसके गुण एवं आवश्यकता की विवेचना करें । उत्तर — बालक तथा बालिकायें ही भविष्य में जाकर पुरुष तथा स्त्रियाँ बनते हैं। मनुष्य जब जन्म लेता है तो वह शिशु जन्म से पूर्व गर्भावस्था में भ्रूण के रूप में जाना जाता । जन्म के पश्चात् शैशवावस्था, बाल्यावस्था, किशोरावस्था, युवावस्था तथा प्रौढ़ावस्था इत्यादि अवस्थायें आती हैं । जन्म के पश्चात् लिंग के आधार पर वे बालक तथा बालिकायें कहलाते हैं और लिंगीय गुण भी हमें देखने को प्राप्त होते हैं । बालक तथा बालिकाओं की रुचियाँ, रहन-सहन, पसन्द और नापसन्द पर उनके लिंगीय गुणों का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, परन्तु यहाँ पर वे सामान्य रूप से एक-दूसरे के साथ खेलते हैं और अन्य क्रियाकलाप करते हैं । किशोरावस्था की दहलीज पर कदम रखने के साथ-ही-साथ बालकों और बालिकाओं के बालसुलभ गुण तथा खेलकूद गायब होने लगते हैं। अब उनकी रुचियाँ और एक-दूसरे के प्रति व्यवहार में परिवर्तन आने लगता है। यह अवस्था बालकों तथा बालिकाओं दोनों के लिए तूफान की होती है, क्योंकि उनमें शारीरिक तथा हार्मोन्स सम्बन्धी परिवर्तन बड़ी ही तेजी से होते हैं । ये परिवर्तन बालकों की अपेक्षा बालिकाओं में शीघ्र प्रारम्भ होते हैं । ।...
पुरुषत्व एवं नारीत्व से क्या अभिप्राय है ? इसके गुण एवं आवश्यकता की विवेचना करें । - पुरुषत्व एवं नारीत्व से क्या अभ...