21/09/2026
ग़ज़ा की वो मां… जो टेंट में बैठकर बच्चों का पेट पाल रही है
ग़ज़ा की उम्मे मोहम्मद का घर हाल ही में हुई बमबारी में तबाह हो गया। मजबूरी में वह अपने परिवार के 9 सदस्यों के साथ देर-अल-बलह के एक राहत कैंप में टेंट के अंदर रहने को मजबूर हैं।
घर और रोज़गार का सहारा छिन जाने के बाद उम्मे मोहम्मद अब इसी टेंट में छोटी-छोटी पेस्ट्री जैसी चीज़ें तैयार करती हैं और उन्हें बेचकर परिवार के लिए रोज़ी जुटाने की कोशिश करती हैं।
उनका बेटा मोहम्मद कभी स्कूल के अच्छे और होनहार बच्चों में गिना जाता था। उसके भी पढ़-लिखकर एक बेहतर भविष्य बनाने के सपने थे। लेकिन जंग ने उसकी पढ़ाई रोक दी।
अब किताबों की जगह वह अपनी मां के साथ सड़कों और राहत कैंप में इन चीज़ों को बेचता है, ताकि परिवार के खर्च में कुछ मदद कर सके।
जिस उम्र में एक बच्चे के हाथ में किताब और स्कूल बैग होना चाहिए, उसी उम्र में मोहम्मद अपने परिवार का सहारा बनने की कोशिश कर रहा है। उसकी कहानी ग़ज़ा में जंग के बीच बच्चों और परिवारों की मुश्किल ज़िंदगी की एक दर्दनाक तस्वीर दिखाती है।