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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर कर्मचारियों का अनोखा विरोध: ₹1100 बोनस पर भड़के कर्मचारी, दो घंटे फ्री रहा टोल21 अक्टूबर 2025 क...
27/10/2025

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर कर्मचारियों का अनोखा विरोध: ₹1100 बोनस पर भड़के कर्मचारी, दो घंटे फ्री रहा टोल

21 अक्टूबर 2025 की रात उत्तर प्रदेश के आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर एक चौंकाने वाली घटना घटी। एक्सप्रेसवे के फतेहाबाद टोल प्लाज़ा पर कार्यरत कर्मचारियों को दिवाली के अवसर पर मात्र ₹1100 का बोनस दिया गया। यह राशि कर्मचारियों को बेहद कम लगी, क्योंकि उनका मानना था कि सालभर लगातार कठिन परिश्रम करने के बाद इतना कम बोनस उनके साथ अन्याय है। इसी नाराज़गी ने धीरे-धीरे विरोध का रूप ले लिया।

रात के समय जब यातायात सामान्य था, तब कर्मचारियों ने अचानक सभी टोल गेट खोल दिए और वाहनों से शुल्क वसूलना बंद कर दिया। टोल के बैरियर ऊपर कर दिए गए, जिससे लगभग दो घंटे तक लगातार गाड़ियाँ बिना रुके पार होती रहीं। इस दौरान करीब 10,000 से अधिक वाहन टोल शुल्क दिए बिना एक्सप्रेसवे से गुज़र गए। सोशल मीडिया पर इसके कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें चालक खुश होकर कहते दिखे कि “आज तो टोल फ्री हो गया।”

इस अप्रत्याशित कदम से कंपनी को करीब ₹30 लाख का आर्थिक नुकसान हुआ। टोल संचालन कंपनी के प्रबंधन को जब इस घटना की जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत स्थानीय पुलिस और प्रशासन को सूचित किया। प्रशासन ने मौके पर पहुँचकर कर्मचारियों से बातचीत की और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने शांति बनाए रखी और किसी प्रकार की हिंसा नहीं हुई।

कर्मचारियों का कहना था कि कंपनी हर साल त्योहारों के मौके पर उन्हें उचित बोनस देने का वादा करती है, लेकिन इस बार सिर्फ ₹1100 की राशि देकर “औपचारिकता” निभाई गई। उनका आरोप था कि प्रबंधन लगातार लाभ कमा रहा है, परंतु कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की जा रही है। वहीं कंपनी के अधिकारियों ने बयान दिया कि बोनस राशि नीति के अनुसार तय की गई थी, लेकिन विरोध के बाद वे बोनस नीति पर पुनर्विचार करेंगे।

इस घटना के बाद एक्सप्रेसवे पर दो घंटे तक पूरी तरह टोल फ्री यात्रा का फायदा आम जनता को मिला, मगर साथ ही यह भी साफ हो गया कि कर्मचारियों की असंतुष्टि किसी भी समय बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। स्थानीय प्रशासन ने टोल संचालन को सामान्य करने के लिए रातभर प्रयास किया और अंततः स्थिति नियंत्रण में आई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना इस बात का प्रतीक है कि अगर कर्मचारियों के साथ संवाद की कमी हो, या उन्हें उनके श्रम के अनुरूप सम्मान न मिले, तो नाराज़गी विरोध का रूप ले सकती है। यह सिर्फ टोल कंपनी का नुकसान नहीं बल्कि सिस्टम की एक चेतावनी है कि कर्मचारियों की संतुष्टि किसी भी संगठन की स्थिरता के लिए जरूरी है।

अंततः कंपनी ने कर्मचारियों से बातचीत के बाद उनके वेतन में 10% की वृद्धि और बोनस नीति में बदलाव का आश्वासन दिया। हालांकि इस घटना ने टोल प्रबंधन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

📅 तारीख: 21 अक्टूबर 2025
📍 स्थान: फतेहाबाद टोल प्लाज़ा, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे
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यह किस प्रकार का छठ पूजा हैकिसी को पता हो तो बताए
26/10/2025

यह किस प्रकार का छठ पूजा हैकिसी को पता हो तो बताए

परेश रावल की फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ का ट्रेलर रिलीज, 31 अक्टूबर को होगी भव्य रिलीजभारतीय सिनेमा के बेहतरीन कलाकारों में से...
26/10/2025

परेश रावल की फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ का ट्रेलर रिलीज, 31 अक्टूबर को होगी भव्य रिलीज

भारतीय सिनेमा के बेहतरीन कलाकारों में से एक परेश रावल एक बार फिर एक दमदार किरदार के साथ बड़े पर्दे पर लौट रहे हैं। उनकी आने वाली फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज किया गया है, जिसने दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता जगा दी है। इस फिल्म की रिलीज डेट 31 अक्तूबर 2025 तय की गई है, और इसे ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में रची गई एक प्रभावशाली कहानी बताया जा रहा है।

फिल्म के ट्रेलर में परेश रावल एक ऐसे किरदार के रूप में नजर आते हैं जो ताजमहल की उत्पत्ति और उसके इतिहास पर सवाल उठाते हैं। कहानी एक कोर्टरूम ड्रामा के रूप में सामने आती है, जहां इतिहास, आस्था और तथ्यों के बीच एक तीव्र बहस दिखाई देती है। परेश रावल के तीखे संवाद, भावनात्मक अभिव्यक्ति और गंभीर अभिनय ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या यह फिल्म केवल मनोरंजन है या एक गहरी सामाजिक और ऐतिहासिक विमर्श।

‘द ताज स्टोरी’ का निर्देशन अनिल शर्मा ने किया है, जो अपनी फिल्मों में राष्ट्रवाद और इतिहास की परतों को उधेड़ने के लिए जाने जाते हैं। फिल्म में परेश रावल के अलावा कुछ नए चेहरे भी नजर आएंगे, जो कहानी में नए दृष्टिकोण जोड़ते हैं। संगीतकार संदीप शिरोडकर ने फिल्म का संगीत तैयार किया है, जो ट्रेलर में ही अपनी छाप छोड़ता है।

ट्रेलर के लॉन्च के दौरान परेश रावल ने कहा कि “यह फिल्म इतिहास पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि लोगों को सोचने का मौका देती है। हमें यह समझना चाहिए कि हमारी विरासत केवल ईंट और पत्थर से नहीं, बल्कि हमारे विचारों और संवादों से बनती है।”

फिल्म के दृश्यांकन में ताजमहल की खूबसूरती को नए दृष्टिकोण से दिखाने की कोशिश की गई है। कैमरे का काम और विज़ुअल इफेक्ट्स दर्शकों को 17वीं शताब्दी की दुनिया में ले जाते हैं। वहीं, कहानी के वर्तमान घटनाक्रमों को जोड़ते हुए यह फिल्म बताती है कि कैसे एक ऐतिहासिक इमारत आज भी हमारी पहचान और विचारधारा का हिस्सा बनी हुई है।

‘द ताज स्टोरी’ न केवल एक ऐतिहासिक ड्रामा है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विविधता, धार्मिक सह-अस्तित्व और पहचान की जड़ों को समझने का प्रयास भी है। परेश रावल जैसे अभिनेता के होने से फिल्म की विश्वसनीयता और भी बढ़ जाती है, क्योंकि वह हर बार अपने किरदार में एक अलग गहराई लेकर आते हैं।
अब जब ट्रेलर दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म रिलीज होने के बाद दर्शकों और आलोचकों से कैसी प्रतिक्रिया मिलती है।

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🎬 मुख्य जानकारी एक नज़र में

फिल्म का नाम: द ताज स्टोरी
मुख्य अभिनेता: परेश रावल
निर्देशक: अनिल शर्मा
रिलीज डेट: 31 अक्तूबर 2025
शैली: ऐतिहासिक कोर्टरूम ड्रामा

हैदराबाद के प्रोफेसर सतीश कुमार: कचरे से ईंधन बनाने की क्रांतिकारी सोचआज पूरी दुनिया जिस समस्या से सबसे ज़्यादा परेशान ह...
26/10/2025

हैदराबाद के प्रोफेसर सतीश कुमार: कचरे से ईंधन बनाने की क्रांतिकारी सोच
आज पूरी दुनिया जिस समस्या से सबसे ज़्यादा परेशान है, वह है प्लास्टिक प्रदूषण। हर दिन लाखों टन प्लास्टिक कचरा हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहा है। समुद्रों में, नदियों में, सड़कों पर और यहाँ तक कि हवा में भी अब प्लास्टिक के सूक्ष्म कण मिल चुके हैं। इसी गंभीर चुनौती के बीच भारत के हैदराबाद शहर के एक वैज्ञानिक, प्रोफेसर सतीश कुमार, ने एक ऐसा नवाचार किया है जो इस समस्या का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है। उन्होंने प्लास्टिक को पेट्रोल और डीज़ल जैसे ईंधन में बदलने की तकनीक विकसित की है। यह उपलब्धि न केवल पर्यावरण के लिए वरदान है, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में भी एक नया अध्याय खोलती है।
नवाचार की शुरुआत
प्रोफेसर सतीश कुमार ने 2016 में इस दिशा में काम करना शुरू किया। उनका उद्देश्य था ऐसा तरीका खोजा जाए जिससे बेकार प्लास्टिक को उपयोगी ईंधन में बदला जा सके। भारत जैसे देश में, जहाँ हर दिन हजारों टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है, यह एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन उन्होंने लगातार प्रयोग और अनुसंधान जारी रखा। कई बार असफलताएँ भी आईं, पर उन्होंने हार नहीं मानी। आखिरकार, उन्होंने प्लास्टिक को पेट्रोल, डीज़ल और गैस में बदलने की तकनीक को सफलतापूर्वक विकसित कर लिया।
प्रक्रिया: प्लास्टिक से पेट्रोल तक
यह प्रक्रिया थर्मल पायरोलीसिस (Thermal Pyrolysis) कहलाती है। इसमें प्लास्टिक को ऑक्सीजन-रहित वातावरण में बहुत अधिक तापमान (लगभग 300 से 500 डिग्री सेल्सियस) पर गर्म किया जाता है। जब प्लास्टिक इस तापमान पर पहुँचता है, तो यह अपने मूल तत्वों में टूटकर हाइड्रोकार्बन गैसों में बदल जाता है। इन्हीं गैसों को ठंडा करने पर वे तरल रूप में पेट्रोल, डीज़ल या अन्य ईंधनों में परिवर्तित हो जाती हैं। यह पूरी प्रक्रिया सुरक्षित, पर्यावरण-हितैषी और कुशल है क्योंकि इसमें किसी तरह का हानिकारक धुआँ या गैस नहीं निकलता। प्लास्टिक से निकलने वाली गैर-तरल गैसों को भी प्रोफेसर सतीश कुमार ने अपने प्लांट में ऊर्जा के रूप में पुनः उपयोग करने की व्यवस्था की है, जिससे पूरी प्रक्रिया आत्मनिर्भर बन जाती है।
उत्पादन और उपलब्धि
साल 2016 से अब तक, प्रोफेसर सतीश कुमार और उनकी टीम करीब 50 टन से अधिक प्लास्टिक कचरे को ईंधन में बदल चुके हैं। उनके संयंत्र से हर दिन लगभग 200 लीटर पेट्रोल तैयार होता है। यह पेट्रोल फिलहाल स्थानीय उद्योगों को दिया जा रहा है, जहाँ इसका इस्तेमाल मशीनों और जेनरेटरों में किया जा रहा है। इस पेट्रोल की लागत मात्र 40 से 50 रुपये प्रति लीटर आती है — जो बाजार में मिलने वाले पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में लगभग आधी कीमत है। इसका मतलब है कि अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर अपनाई जाती है, तो साधारण जनता को भी सस्ता ईंधन मिल सकेगा, और साथ ही प्लास्टिक कचरे की समस्या में भी भारी कमी आएगी।
पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ
इस तकनीक के अनेक लाभ हैं। पहला, यह प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में मदद करती है क्योंकि जो प्लास्टिक लैंडफिल या समुद्र में फेंका जाता है, उसे अब उपयोगी ईंधन में बदला जा सकता है। दूसरा, यह सस्ता और स्वदेशी ईंधन प्रदान करती है जिससे भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता घटेगी और अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। तीसरा, यह नई तकनीक रोजगार सृजन में भी सहायक बन सकती है क्योंकि यदि हर शहर में छोटे स्तर पर ऐसे संयंत्र लगाए जाएँ तो हज़ारों लोगों को रोजगार मिल सकता है। चौथा, इस प्रक्रिया से कार्बन उत्सर्जन भी बहुत कम होता है, जिससे जलवायु परिवर्तन पर सकारात्मक असर पड़ता है।
सरकारी और वैज्ञानिक मान्यता की दिशा में कदम
फिलहाल यह ईंधन स्थानीय उद्योगों में परीक्षण के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे आम जनता के लिए उपलब्ध कराने से पहले इसे सरकारी मानकों पर परखा जाना आवश्यक है। परीक्षण और प्रमाणन की प्रक्रिया जारी है। एक बार यह परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा हो जाए, तो यह तकनीक पूरे देश में लागू की जा सकती है। अगर सरकार और निजी उद्योग मिलकर इस तकनीक को अपनाएँ, तो यह न केवल भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी बल्कि स्वच्छ भारत मिशन और ग्रीन एनर्जी अभियान को भी मजबूती प्रदान करेगी।
एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व
प्रोफेसर सतीश कुमार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने इस काम को किसी बड़े कॉर्पोरेट निवेश या सरकारी अनुदान के बिना शुरू किया। उन्होंने अपनी बचत, छोटे स्तर के संसाधनों और जुनून के बल पर इसे सफल बनाया। यह दिखाता है कि अगर इच्छाशक्ति और वैज्ञानिक सोच हो, तो सीमित साधनों में भी बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। उनकी सोच थी — “अगर हम ही अपने देश के कचरे को नहीं संभालेंगे, तो कौन संभालेगा?” यही भावना उन्हें हर दिन प्रेरित करती रही।
भविष्य की संभावनाएँ
यह तकनीक केवल पेट्रोल तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों का मानना है कि थोड़े और सुधार के साथ इससे डीज़ल, केरोसीन और विमान ईंधन (एविएशन फ्यूल) भी तैयार किया जा सकता है। साथ ही, इस प्रक्रिया से उत्पन्न अवशेषों का उपयोग निर्माण सामग्री या कार्बन ब्लैक के रूप में किया जा सकता है। अगर इस तकनीक को भारत के हर जिले में छोटे संयंत्रों के रूप में लागू किया जाए, तो देश में प्लास्टिक-मुक्त भारत का सपना हकीकत बन सकता है। यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। प्रोफेसर सतीश कुमार का यह कार्य विज्ञान, पर्यावरण और समाज—तीनों के लिए एक प्रेरणा बन चुका है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि मन में ठान ली जाए तो कचरा भी देश की ऊर्जा बन सकता है। 🌿🇮🇳

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26/10/2025
26/10/2025
25/10/2025

श्रीदेवी और ऐश्वर्या राय — भारतीय सिनेमा की दो अनुपम नायिकाएँ, जिन्होंने सुंदरता, प्रतिभा और गरिमा को एक नए आयाम पर पहुँ...
25/10/2025

श्रीदेवी और ऐश्वर्या राय — भारतीय सिनेमा की दो अनुपम नायिकाएँ, जिन्होंने सुंदरता, प्रतिभा और गरिमा को एक नए आयाम पर पहुँचाया। दोनों ही कलाकारों ने अपने अभिनय, अभिव्यक्ति और व्यक्तित्व से यह साबित किया कि सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक जीवंत कला है जो आत्मा को छू लेती है।

श्रीदेवी, भारतीय फिल्म जगत की पहली महिला सुपरस्टार, ने अपने असाधारण अभिनय और भावनाओं की गहराई से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सदमा, चांदनी, मिस्टर इंडिया और इंग्लिश विंग्लिश जैसी फिल्मों में उन्होंने मासूमियत, हास्य और संवेदनशीलता का ऐसा संगम प्रस्तुत किया, जो उन्हें सच्चे अर्थों में एक ‘लीजेंड’ बनाता है। उनके हर किरदार में एक नई चमक थी, जो आज भी सिनेमा के आसमान में जगमगा रही है।

ऐश्वर्या राय, जिन्हें विश्व की सबसे सुंदर महिलाओं में स्थान प्राप्त है, ने अपनी मोहक सुंदरता के साथ-साथ बुद्धिमत्ता, आत्मविश्वास और अभिनय कौशल से भी सबको प्रभावित किया। हम दिल दे चुके सनम, देवदास, गुरु और पोन्नियिन सेलवन जैसी फिल्मों में उन्होंने जिस तरह भावनाओं को पर्दे पर जीवंत किया, उसने उन्हें एक वैश्विक प्रतीक के रूप में स्थापित किया। उन्होंने भारतीय सिनेमा की गरिमा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बखूबी प्रस्तुत किया है।

दोनों मिलकर, श्रीदेवी और ऐश्वर्या राय भारतीय नारीत्व की कालजयी सुंदरता, कलात्मकता और आत्मबल की प्रतीक हैं — ऐसी दो दिव्य हस्तियाँ जिनकी आभा समय की सीमाओं से परे है, और जिनकी विरासत सदैव प्रेरणा देती रहेगी।

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25/10/2025
नहाय खाय, छठ पूजा के प्रथम दिन की हार्दिक शुभकामनाएं
25/10/2025

नहाय खाय, छठ पूजा के प्रथम दिन की हार्दिक शुभकामनाएं

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