02/05/2026
जहाँ तक “पटना की इस गौरवशाली पहचान” सुल्तान पैलेस की बात है, यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि इतिहास की धड़कनों को अपने भीतर संजोए एक जीवित विरासत है। यह वही आवास है जहाँ कभी महान बैरिस्टर सर सैयद सुल्तान अहमद (1880–1963) रहा करते थे। एक ऐसा व्यक्तित्व, जिसने अपने ज्ञान, न्यायप्रियता और दूरदृष्टि से न केवल पटना, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया।
पटना हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में उनकी गरिमा, वायसराय की एक्जीक्यूटिव कौंसिल में उनकी भागीदारी, और राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में भारत की आवाज़ बनना, ये सब उनकी असाधारण यात्रा के अध्याय हैं। लेकिन उनकी सबसे अमूल्य देन शायद शिक्षा के क्षेत्र में रही।
पटना विश्वविद्यालय के पहले भारतीय कुलपति के रूप में उनका कार्यकाल (1923–1930) सचमुच एक स्वर्णिम युग था। उन्हीं के नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने अपनी पहचान पाई। स्थायी कार्यालय भवन खड़ा हुआ, व्हीलर सीनेट हाउस ने आकार लिया, और साइंस कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, तिब्बी कॉलेज, आयुर्वेद कॉलेज और वेटनरी कॉलेज जैसे संस्थानों की नींव रखी गई। यह सिर्फ इमारतें नहीं थीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सपनों का आधार थीं।
सर सुल्तान केवल एक प्रशासक या न्यायविद नहीं थे—वे कला, संस्कृति और संगीत के सच्चे प्रेमी और संरक्षक भी थे। समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और विभिन्न संस्थाओं से उनका जुड़ाव, उनके विशाल हृदय का प्रमाण था।
आज जब हम सुल्तान पैलेस को देखते हैं, तो यह केवल ईंट और पत्थरों का ढांचा नहीं दिखता। यह एक युग की कहानी कहता है, एक महान आत्मा की विरासत को जीवित रखता है। इसकी दीवारें जैसे अब भी उन सुनहरे दिनों की गूंज सुनाती हैं, और हर आने-जाने वाले से एक ही सवाल पूछती हैं। क्या हम अपनी इस अमूल्य धरोहर को बचा पाएंगे?
Sultan Palace Patna: Heritage Under Threat? Full Story Explained