09/09/2026
*तृतीय ICC इंश्योरेंस कॉन्क्लेव 2026 में उभरते जोखिमों, डिजिटल नवाचार और समावेशी बीमा पर हुआ मंथन*
पटना : 09/09/2026
इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) द्वारा आज पटना के होटल मौर्या में “Innovating Insurance for Inclusive Growth” विषय पर तृतीय ICC इंश्योरेंस कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन किया गया। कॉन्क्लेव में बीमा क्षेत्र के विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों, सरकारी संस्थानों, अस्पताल एवं वित्तीय क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भारत में बीमा की पहुंच बढ़ाने, उभरते जोखिमों के अनुरूप बीमा उत्पादों में बदलाव तथा आम नागरिकों और व्यवसायों के लिए बेहतर वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में ICC बिहार के चेयरमैन प्रभात कुमार सिन्हा ने स्वागत संबोधन दिया। इसके पश्चात ICICI Lombard के Deputy Vice President देवब्रत पांडे ने कॉन्क्लेव के विषय पर अपने विचार रखे। LIC के Regional Manager (CRM/Claim) श्री प्रशांत कुमार प्रसाद, Ruban Patliputra Hospital, Patna के Director डॉ. सत्यजीत सिंह, BIA के President श्री राम लाल खेतान तथा Employee State Insurance Corporation के Regional Director CA निरंजन कुमार ने भी विशेष संबोधन दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार थे। उन्होंने बीमा क्षेत्र की भूमिका, आर्थिक सुरक्षा तथा व्यापक जनभागीदारी के महत्व पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में ICC बिहार राज्य परिषद की Finance Committee के Chairman CA रितेश आनंद ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
कॉन्क्लेव के पहले तकनीकी सत्र का विषय था “From Insurance to Resilience: Reimagining General Insurance for India’s Emerging Risks”। सत्र में इस बात पर चर्चा हुई कि भारत में जोखिम का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाएं, साइबर खतरे, बिजनेस इंटरप्शन, सप्लाई चेन में व्यवधान, इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी जोखिम, नई मोबिलिटी, देयता संबंधी जोखिम और MSME से जुड़े नए जोखिम पारंपरिक बीमा समाधानों के सामने नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों ने जोखिम आधारित बीमा उत्पादों में नवाचार, किफायती एवं कस्टमाइज्ड कवरेज, तकनीक आधारित त्वरित क्लेम सेटलमेंट, कैटास्ट्रॉफी एवं क्लाइमेट रिस्क प्रोटेक्शन, साइबर इंश्योरेंस, MSME इंश्योरेंस तथा डेटा आधारित अंडरराइटिंग जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया।
सत्र का संचालन CA रितेश आनंद, Chairman, Finance, ICC Bihar State Council ने किया। पैनल में CA निरंजन कुमार, Regional Director (I/C), ESIC; श्री अदीब अनवर, Associate Vice President, ICICI Lombard GIC Ltd.; श्री रितेश कुमार सिन्हा, Chief Regional Manager, National Insurance Company; श्री रंजीत सिंह, Sr. VP, Tata AIG General Insurance Co. Ltd.; तथा श्री मनोरंजन प्रसाद, Dy. Secretary, Office of Insurance Ombudsman, Patna शामिल रहे।
*अगले 100 मिलियन परिवारों तक जीवन बीमा की पहुंच बढ़ाने पर मंथन*
दूसरे तकनीकी सत्र का विषय था “From Policies to Protection: Reimagining Life Insurance for India’s Next 100 Million Families”। सत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जीवन बीमा की सफलता केवल अधिक पॉलिसियां बेचने में नहीं, बल्कि परिवारों को उनकी वास्तविक जरूरत के अनुरूप पर्याप्त, किफायती और प्रभावी वित्तीय सुरक्षा उपलब्ध कराने में है।
चर्चा में टर्म इंश्योरेंस, उत्पादों की उपयुक्तता, बीमा की affordability, वित्तीय साक्षरता, वितरण व्यवस्था, ग्राहक विश्वास और क्लेम अनुभव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार किया गया। विशेषज्ञों ने मध्यवर्गीय परिवारों, युवा कमाने वालों, MSME उद्यमियों, स्वरोजगार से जुड़े पेशेवरों, ग्रामीण परिवारों और उभरते कार्यबल की बदलती बीमा जरूरतों पर भी चर्चा की।
सत्र में यह भी रेखांकित किया गया कि AI, डेटा-आधारित अंडरराइटिंग, डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन और सरल बीमा उत्पाद जीवन बीमा को अधिक सुलभ एवं ग्राहक-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही, तकनीक के उपयोग के दौरान यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया कि डिजिटल माध्यम अनुपयुक्त बीमा बिक्री का नया माध्यम न बन जाए।
सत्र का संचालन CA ललित कुमार, Co-Chairman, Finance, Taxation & Economic Affairs Committee, ICC Bihar State Council ने किया। पैनल में श्री संजीव कुमार, Regional Manager (CLIA), East Central Zone, Patna; श्री जीवन झा, Project Head, JEEVIKA; तथा कृष्ण कुमार, Deputy Director of Agency, Tata AIA Life Insurance शामिल रहे।
बीमा को जोखिम प्रबंधन और आर्थिक सशक्तिकरण का रणनीतिक साधन बनाने की आवश्यकता कॉन्क्लेव में इस व्यापक दृष्टिकोण पर सहमति बनी कि भारत जैसे तेजी से विकसित हो रहे बाजार में बीमा को केवल नुकसान की भरपाई करने वाले वित्तीय उत्पाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बदलते आर्थिक, तकनीकी, जलवायु एवं सामाजिक जोखिमों को देखते हुए बीमा को जोखिम की रोकथाम, जोखिम प्रबंधन और वित्तीय सुरक्षा के रणनीतिक साधन के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों ने इस बात पर भी जोर दिया कि बीमा की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ ग्राहकों को सही उत्पाद की जानकारी, सरल प्रक्रियाएं, पारदर्शिता और बेहतर क्लेम अनुभव उपलब्ध कराना आवश्यक है। इसका उद्देश्य भारत में “Insurance Sold” से आगे बढ़कर “Lives Genuinely Protected” की दिशा में आगे बढ़ना होना चाहिए।