G.k.g yadav

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फ्रेम में जो दिख रहे हैं एक हैं प्रकाश झा और है दुसरी है आरोही यादव जो कि दोनों fassbook insta पर वीडियो बनाते हैं अब आत...
22/08/2026

फ्रेम में जो दिख रहे हैं एक हैं प्रकाश झा और है दुसरी है आरोही यादव जो कि दोनों fassbook insta पर वीडियो बनाते हैं अब आते हैं मेन मुद्दा पर!

प्रकाश झा सुरु से ही भोजपुरी गानों पर reels टाइप का वीडियो बनाते हैं और आरोही यादव सुरु से ही सरकार से अपनी लहजा मे सवाल करती है अब एक वीडियो मे ये उस ल़डकि को यदि मुल्ली कहते हैं अब ये जिस जाती हैं उस जाति के लोग ज्यादा तर अपने आप सर्व श्रेष्ठ मानता है!!

हम यादव के खून मे ही समाजवाद होता है हमारा लराई किसी ब्राम्हण से नहीं उनके सामंती सोच से होता हैं हमारा संस्कार ऐसा नहीं है कि हम इनको गाली दे लेकिन इनको इनका औकात तो दिखाना है पडेगा ना तो सुन रे गदहा जिस भारत या जिस सनातन की बात करते हो जिस समय तुम्हारा बाप दादा इधर उधर का रास्ता देख रहा था उस समय हम यादव हमारे पूर्वज खूँटा ठोक के सब को जवाब दे रहा था जब तुम्हारे बाप दादा अंग्रेजी फ़ौज में भर्ती हो रहे थे तब हमारे पूर्वज अंग्रेजों से दो दो हाथ कर रहे थे वीर मावीरन अलुगुमुथु कोने 1750 से 1759 तक गोरिल्ला युद्ध लड़ा जनरल मोहन लाल यादव 1757 राव तुलाराम सिंह यादव 1857 राव गोपाल देव और प्राण सुख यादव 1857 अहीरानी जिरियावती देवी (बिहार)1942 मूलचंद यादव 1928 से 1942 गणपति बाल यादव 1943 बाबू राम लखन सिंह यादव (बिहार) 1942 से 1947 रास बिहारी लाल मंडल 1911 ये हमारा इतिहास है जब तुम्हारा बाप दादा अंग्रेजों के दलाली करने मे लगा था तब भी हमारे पूर्वज ईमानदारी से लर रहे थे और आज भी जब तुम्हारे जैसे चोटा सामंती लोग नफरत नफरत और हिंसा फैलाने की काम करते हो तो इस दौर मे भी हम सीना तान कर भाई चारा और एकता की बात करते हैं यही हमारी बिचार धारा और यही हमारी सोच है

#आरोही_यादव #समाजवाद

19/08/2026
राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन अगर बहस का स्तर इतना गिर जाए कि किसी महिला की AI से एडिट की हुई आपत्तिजनक तस्...
02/08/2026

राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन अगर बहस का स्तर इतना गिर जाए कि किसी महिला की AI से एडिट की हुई आपत्तिजनक तस्वीरें बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल की जाएँ, तो यह राजनीति नहीं, कायरता की पराकाष्ठा है।

जब तर्क खत्म हो जाते हैं, तब कुछ लोग चरित्रहनन का सहारा लेते हैं। किसी भी लड़की या महिला की छवि धूमिल करने, उसकी गरिमा से खिलवाड़ करने और उसे मानसिक प्रताड़ना देने का किसी को कोई अधिकार नहीं है।

विचारधारा से लड़िए, विचारों से बहस कीजिए,लेकिन किसी की इज्जत को निशाना बनाना न कानून स्वीकार करता है, न समाज।

ऐसे कृत्य की जितनी निंदा की जाए, उतनी कम है। यदि किसी ने द्वेषवश AI का दुरुपयोग कर किसी महिला की फर्जी या आपत्तिजनक सामग्री बनाई और फैलाई है, तो दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

Er Khushbu Roy का कथित तौर पर AI से एडिट की गई आपत्तिजनक फोटो फैलाना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि हर उस महिला पर हमला है जो सार्वजनिक जीवन में अपनी पहचान बना रही है।

पहले तो इनके जाती को लेकर निशाना बनाया उनसे नहीं झुके तो Ai से निशाना बनाया लेकिन ये भूल गया जिस Ai तुम इस शेरनी को बदनाम किए हो उसी Ai से तुम्हारे बहन को उस जगह पर बैठा दिया जाय तो कैसा रहेगा सा*** चु**** !!

पुजारा, विराट, रोहित और अश्विन के बाद आज अजिंक्य रहाणे ने भी मैदान के बाहर से टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया। दोपहर में...
31/07/2026

पुजारा, विराट, रोहित और अश्विन के बाद आज अजिंक्य रहाणे ने भी मैदान के बाहर से टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया। दोपहर में रिटायरमेंट का वीडियो जारी करते हुए वह काफी भावुक नजर आए।

अजिंक्य रहाणे ने विदेशी पिचों और सेना देशों में उन्होंने कई ऐसी पारियां खेलीं जो हमेशा याद रखी जाएंगी। लॉर्ड्स और मेलबर्न के शतक भारतीय क्रिकेट इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं। 2020-21 में विराट कोहली के ऑस्ट्रेलिया दौरे से लौटने के बाद जिस तरह रहाणे ने टीम की कप्तानी संभाली और ऐतिहासिक श्रृंखला जिताई, वह भारतीय क्रिकेट के सबसे सुनहरे अध्यायों में से एक है। गाबा की जीत आज भी करोड़ों भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की यादों में ताजा है।

रहाणे पुराने दौर के क्रिकेटर थे। तकनीक से मजबूत, स्वभाव से शांत और संघर्ष करने की अद्भुत क्षमता रखने वाले। जब भी सेना देशों में गेंद स्विंग और सीम हो रही होती थी, तब अक्सर रहाणे ही भारतीय बल्लेबाजी की सबसे मजबूत दीवार बनकर खड़े दिखाई देते थे।

पिछले तीन वर्षों से वह टीम से बाहर थे। हाल ही में श्रीलंका दौरे के लिए भी चयन नहीं हुआ तो आखिरकार उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला कर लिया।

रहाणे को केवल उनकी बल्लेबाजी के लिए नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व के लिए भी याद रखा जाएगा। अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच के बाद जिस तरह उन्होंने विपक्षी टीम को ट्रॉफी समारोह में शामिल होने के लिए बुलाया था, वह उनके सज्जन स्वभाव का प्रमाण था।

एक कप्तान के रूप में भी उनका रिकॉर्ड शानदार रहा। उनकी कप्तानी में भारत कोई टेस्ट मैच नहीं हारा और एक दिलचस्प संयोग यह भी रहा कि जब-जब अजिंक्य रहाणे ने टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाया, भारत ने वह मैच जीता।

आपकी कुछ पारियां, आपकी कप्तानी, आपका संघर्ष और आपका सौम्य व्यक्तित्व हमेशा याद रखा जाएगा। भारतीय क्रिकेट आपको एक लड़ाकू, भरोसेमंद और बेहद सम्मानित क्रिकेटर के रूप में हमेशा याद रखेगा। ~गोविंद परिहार 🙏
ुजारा, विराट, रोहित और अश्विन के बाद आज अजिंक्य रहाणे ने भी मैदान के बाहर से टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया। दोपहर में रिटायरमेंट का वीडियो जारी करते हुए वह काफी भावुक नजर आए।

अजिंक्य रहाणे ने विदेशी पिचों और सेना देशों में उन्होंने कई ऐसी पारियां खेलीं जो हमेशा याद रखी जाएंगी। लॉर्ड्स और मेलबर्न के शतक भारतीय क्रिकेट इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं। 2020-21 में विराट कोहली के ऑस्ट्रेलिया दौरे से लौटने के बाद जिस तरह रहाणे ने टीम की कप्तानी संभाली और ऐतिहासिक श्रृंखला जिताई, वह भारतीय क्रिकेट के सबसे सुनहरे अध्यायों में से एक है। गाबा की जीत आज भी करोड़ों भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की यादों में ताजा है।

रहाणे पुराने दौर के क्रिकेटर थे। तकनीक से मजबूत, स्वभाव से शांत और संघर्ष करने की अद्भुत क्षमता रखने वाले। जब भी सेना देशों में गेंद स्विंग और सीम हो रही होती थी, तब अक्सर रहाणे ही भारतीय बल्लेबाजी की सबसे मजबूत दीवार बनकर खड़े दिखाई देते थे।

पिछले तीन वर्षों से वह टीम से बाहर थे। हाल ही में श्रीलंका दौरे के लिए भी चयन नहीं हुआ तो आखिरकार उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला कर लिया।

रहाणे को केवल उनकी बल्लेबाजी के लिए नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व के लिए भी याद रखा जाएगा। अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच के बाद जिस तरह उन्होंने विपक्षी टीम को ट्रॉफी समारोह में शामिल होने के लिए बुलाया था, वह उनके सज्जन स्वभाव का प्रमाण था।

एक कप्तान के रूप में भी उनका रिकॉर्ड शानदार रहा। उनकी कप्तानी में भारत कोई टेस्ट मैच नहीं हारा और एक दिलचस्प संयोग यह भी रहा कि जब-जब अजिंक्य रहाणे ने टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाया, भारत ने वह मैच जीता।

आपकी कुछ पारियां, आपकी कप्तानी, आपका संघर्ष और आपका सौम्य व्यक्तित्व हमेशा याद रखा जाएगा। भारतीय क्रिकेट आपको एक लड़ाकू, भरोसेमंद और बेहद सम्मानित क्रिकेटर के रूप में हमेशा याद रखेगा। ~गोविंद परिहार 🙏

29 साल की नेहा बोरा उत्तराखंड की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली पब्लिक स्कूल, सिलीगुड़ी से की। इसके ब...
28/07/2026

29 साल की नेहा बोरा उत्तराखंड की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली पब्लिक स्कूल, सिलीगुड़ी से की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से सोशियोलॉजी (समाजशास्त्र) में बीए और अंबेडकर यूनिवर्सिटी, दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। फिलहाल, वह जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स से पीएचडी की रिसर्च स्कॉलर हैं।

नेहा बोरा एक सामाजिक शोधकर्ता (सोशल शोधकर्ता), थिएटर आर्टिस्ट और एक्टिव छात्र नेता के रूप में जानी जाती हैं। थिएटर से जुड़े रहने की वजह से उनकी बात करने और लोगों से जुड़ने की कला और भी निखर गई। जेएनयू में पढ़ाई के दौरान वह छात्र राजनीति में एक्टिव हुईं। वह ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ीं और बाद में इसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनी गईं।

उन्होंने शिक्षा के निजीकरण (प्राइवेटाइजेशन), फीस बढ़ोतरी, हॉस्टल, स्कॉलरशिप, महिला सुरक्षा, दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक छात्रों के अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाई है। इसके अलावा, उन्होंने भीड़ द्वारा हिंसा (मॉब लिंचिंग) के खिलाफ, बिल्किस बानो के न्याय के लिए और गाजा के पीड़ितों के समर्थन में भी अपनी बात रखी है। उनका मानना है कि अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर नागरिक का अधिकार है, और इसे सिर्फ अमीर वर्ग तक सीमित नहीं होना चाहिए।

हालिया प्रदर्शनों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख छात्र नेता के रूप में पहचान दिलाई, जिससे उनके काम की तरफ देश भर का ध्यान गया। उनके भाषण आसान भाषा, मजबूत तर्कों और जनता के मुद्दों पर आधारित होने की वजह से काफी पसंद किए जाते हैं।

आपको किसी संस्थान से दिक्कत हो सकती है, लेकिन उस संस्थान के रिपोर्टर से क्या दिक्कत है? आप प्रदर्शन कीजिए, संस्थान के खि...
24/07/2026

आपको किसी संस्थान से दिक्कत हो सकती है, लेकिन उस संस्थान के रिपोर्टर से क्या दिक्कत है? आप प्रदर्शन कीजिए, संस्थान के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आप लिखते भी हैं, तो भी कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन आप किसी पत्रकार को क्यों मार रहे हैं? ये प्रिंस है जी न्यूज में काम कर रहा है, जिस तरीके से आज इसके कपड़े फाड़े गए, इस पर हाथ चलाया गया, यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है.

21/07/2026
ख़ान सर से मेरा विरोध सिर्फ़ का बात का था की ख़ान सर झूठ पर झूठ बोले और एक्सपोज़ हो गए।   लेकिन ख़ान सर झूठा के साथ बदतम...
18/07/2026

ख़ान सर से मेरा विरोध सिर्फ़ का बात का था की ख़ान सर झूठ पर झूठ बोले और एक्सपोज़ हो गए।
लेकिन ख़ान सर झूठा के साथ बदतमीज़ी और लंपट भी है और अब इस बात को मानना होगा। वो बोल रहे है की मेरे चाहने वाले मुझे ख़ान सर बोलते है और मेरे ससुराल वाले फैसल सर तो जब विधानसभा में इनको सम्मानित किया गया था तब फैज़ल ख़ान ही बोला गया था तो क्या सरकार और विधानसभा और वहाँ उपस्थित सारे लोग ख़ान सर के ससुराल वाले है??
ये इंशान लंपट ही रहेगा…

1984 में सोमन वांगचुक के पिता सोमन वांग्याल ने लद्दाख के आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलाने के लिए क्रमिक भूख...
17/07/2026

1984 में सोमन वांगचुक के पिता सोमन वांग्याल ने लद्दाख के आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलाने के लिए क्रमिक भूख हड़ताल की थीं।
इस अनशन को समाप्त करने के लिए 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी लेह गई थीं।
उन्होंने वांग्याल को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया था और लद्दाख के समुदायों को आदिवासी (ST) का दर्जा दिलाने का वादा किया था।
परंतु अब की तानाशाही सरकार सत्ता के घमंड में इतनी चूर है कि चाहे कोई मरे या जीये इसे कोई फर्क नहीं पड़ता।
सोनम वांगचुंग 19 दिनों से भूख हड़ताल पर या पर इस तानाशाही सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता।

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