22/08/2026
कौन हैं राजन सिंह जो पटना में नरेंद्र मोदी का मंदिर बनवाना चाहते हैं? क्या वे फेक किन्नर हैं?..................
पटना में मोदी का मंदिर बनाने की मुहिम चलाने और दिल्ली के प्रेस क्लब में मोदी चालीसा गाने वाले राजन सिंह इन दिनों चर्चा में भी हैं और विवादों में भी. विवाद की एक वजह यह है कि लखनऊ में एक चर्चित ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट ने उन पर एफआईआर कर दिया है कि वे फेक किन्नर हैं, वे किन्नर हैं या नहीं इसकी जांच होनी चाहिए. और वे अपने व्यक्तिगत अभियान में किन्नरों का नाम जोड़कर पूरे किन्नर समुदाय को बदनाम कर रहे हैं. ऐसे में लोगों की यह जानने में स्वाभाविक इच्छा है कि आखिर राजन सिंह कौन हैं. इसे समझने के लिए मैंने आज खुद राजन सिंह से फोन पर लंबी बात की.
राजन सिंह फिलहाल बिहार राज्य किन्नर कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष हैं और उनका कहना है कि 29 जुलाई को हुई किन्नर कल्याण बोर्ड की बैठक में उन्होंने बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक मंदिर बनाने का प्रस्ताव दिया था. बोर्ड के उस प्रस्ताव को सरकार के पास भेजा गया है, ताकि इसे कैबिनेट में स्वीकृति दी जा सके.
बिहार क्रोनिकल से बातचीत में राजन ने कहा, “देश में किसी पीएम ने ट्रांसजेंड़रों को अधिकार नहीं दिया, जैसा पीएम मोदी ने दिया है. इसलिए हम चाहते थे, अपने आराध्य का मंदिर बनाना. वही हमारे ईश्वर हैं. भगवान श्री नरेंद्र मोदी का पटना में मंदिर बने. इसका मैंने प्रस्ताव दिया और वहां मौजूद सभी लोगों ने इस पर सहमति जताई. यह पारित हुआ. हमारी मांग थी कि इसके लिए सरकार हमें पांच एकड़ जमीन और 112 करोड़ रुपये दे. प्रस्ताव को मंत्रिमंडल को फारवर्ड कर दिया गया है. अब सरकार इस मुदे से पीछे न हट जाये, इसलिए फिर हमने दिल्ली में मोदी चालीसा का पाठ किया. चालीसा मैंने लिखा है. इसा पाठ अब हर गुरुवार को होगा. अगले गुरुवार को पटना में होगा.”
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके मांग पर बीजेपी के बिहार या केंद्र के किसी बड़े नेता ने सहमति जताई है, प्रोत्साहन दिया है? तो उन्होंने मना कर दिया. कहा, “हां, ट्रांसजेडर समुदाय के बीच इसको लेकर आम सहमति है.”
हालांकि उनके दावे से उलट बिहार ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की एक अन्य सदस्य अनुप्रिया कुछ और कहती हैं. उनका कहना है, “न ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड में ऐसा कोई फैसला हुआ है, न सोशल वेलफेयर विभाग में. यह उनका अपना विचार हो सकता है. हर आदमी की अपनी श्रद्धा होती है. मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है. हो सकता है, इस तरह से उन्हें बीजेपी का टिकट मिल जाये.” वहीं लखनऊ की ट्रांसजेडर एक्टिविस्ट प्रियंका ने तो उनके खिलाफ ट्रांसजेंडरों की छवि खराब करने का मुकदमा हजरतगंज थाने में दर्ज करा दिया है. वे बिहार क्रोनिकल से बातचीत में कहती हैं, “सबसे पहले तो वे कथित तौर पर किन्नर हैं. किन्नर हैं या नहीं इसकी जांच होनी चाहिए. दूसरी बात वह बिल्कुल पढ़े लिखे नहीं है. वह जो अभी अभियान चला रहा है उससे किन्नर समुदाय की छवि खराब हो रही है. इसके खिलाफ तत्काल एक्शन लिया जाना चाहिए.”
मगर जब राजन से इस बारे में पूछा जाता है तो वे कहते हैं, “प्रियंका रघुवंशी कांग्रेसी है. चूकि मैंने राहुल गांधी के परिवार पर सवाल उठाये थे, इसलिए वह मेरे खिलाफ अभियान चला रही हैं. बाकी मेरा तो ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट बना है, वह फेक कैसे हो सकता है. वह पोलिटिकल फायदे के लिए ऐसा कर रही है. वे क्लब चलाती हैं. मुझे मालूम है कि मंदिर बनाने में कई लोग रुकावट डालेंगे, मगर मंदिर तो बनेगा.”
यह पूछे जाने पर कि आरोप तो आप पर भी लग रहा है कि आप राजनीतिक फायदे के लिये पीएम मोदी की चालीसा पढ़ रहे हैं. वे कहते हैं, “मेरा पोलिटिकल फायदा तो पीएम कर चुके हैं.” यह पूछने पर कि अगर बिहार सरकार ने पीएम मोदी के मंदिर के लिए पैसे नहीं दिये तो.. राजन कहते हैं, “फिर हम किन्नर कल्याण बोर्ड से इस्तीफा दें देंगे.”
अगस्त, 2025 में किन्नर कल्याण बोर्ड का सदस्य बनने के बाद राजन एक बार और बोर्ड से इस्तीफा दे चुके हैं. मार्च, 2026 में जब संसद ने ट्रांसजेंडर प्रोटेक्शन बिल को पारित किया था. इस कानून के बनने पर कोई भी खुद को ट्रांसजेंडर घोषित नहीं कर सकता है, वह ट्रांसजेंडर है या नहीं इसका फैसला डॉक्टरी जांच से होगा. पूरे देश के एलजीबीटीक्यू समुदाय ने इसकी आलोचना की थी. तब राजन ने भी इस्तीफा दिया था. मगर उसके इस्तीफे को राज्यपाल ने स्वीकार नहीं किया.
जब उनसे इस मुद्दे पर सवाल किया गया तो राजन का कहना था, “देखिये, मेरे विरोध की वजह से ही वह बिल अब तक नोटिफाई नहीं हुआ है. बिल रुका हुआ है.” यह याद दिलाने पर कि पूरे देश के ट्रांसजेंडर इसे काला कानून कहते हैं, यह तो पीएम मोदी और भाजपा ने कराया. फिर भी आप उनके समर्थन में हैं. इस पर वे कोई साफ बात नहीं कहते.
हालांकि वे कहते हैं कि बिहार में वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कहने पर सक्रिय हुए हैं. जब उन्होंने दिल्ली में केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ा तो अमित शाह ने उन्हें बुलाकर बिहार में सक्रिय होने कहा था. वे कहते हैं, “8 अगस्त, 2025 को अमित शाह जब जानकी मंदिर के उद्घाटन के लिए सीतामढ़ी आये. उसी दिन समाज कल्याण ने किन्नर कल्याण बोर्ड का मुझे उपाध्यक्ष बनाया.” इस तरह वे खुद पर अमित शाह की सरपरस्ती की तरफ इशारा करते हैं.
राजन मूलतः बिहार के सारण जिले के एकमा के मड़बा बसैया गांव के हैं. उनका कहना है कि 2026 में वे बीए करने के लिए दिल्ली विवि के आर्यभट्ट कालेज गये थे. वहां उन्हें इस आधार पर हटा दिया गया कि वे ट्रांसजेंडर हैं. उन पर इस जानकारी को छिपाने के आरोप थे. उन्होंने फिर मेरठ से पढ़ाई की. कुछ दिन संस्थाओं में काम किया और फिर राजनीति में सक्रिय होने लगे.
लोग यह भी बताते हैं कि वे बिहार के राजनेता नागमणि कुशवाहा के साथ भी काम कर चुके हैं. संभवतः उनके पीए के तौर पर. उन दिनों वे उनके पिता जगदेव प्रसाद के विचारों को आगे बढ़ाने का भी अभियान चलाते थे. वे कहते हैं कि उन्होंने दिल्ली में ट्रांसजेंडरों के लिए अगल टॉयलेट की लड़ाई लड़ी और 2024 लोकसभा चुनाव में दक्षिण दिल्ली सीट से चुनाव लड़ा. वोट उन्हें 324 मिले मगर मीडिया अटेंशन खूब मिला. तभी उनकी पहुंच अमित शाह तक हुई.