11/03/2026
लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव : डॉ. संतोष कुमार सुमन
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Abhishek Avik
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पटना, अभिषेक कुमार, 11-03-2026 / लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भारतीय संसदीय परंपराओं के साथ खिलवाड़ है। यह कदम विपक्ष की राजनीतिक हताशा और निराशा को दर्शाता है। लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन संसद की सर्वोच्च संस्थाओं को राजनीतिक विवाद का विषय बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि भारत की संसदीय परंपरा में लोकसभा अध्यक्ष के पद को हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर रखा गया है। इतिहास गवाह है कि तीखे राजनीतिक संघर्ष के दौर में भी इस पद की गरिमा को बनाए रखा गया।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2008 में जब केंद्र की यूपीए सरकार के खिलाफ परमाणु समझौते को लेकर भारी राजनीतिक संकट खड़ा हुआ और सरकार पर विश्वास मत आया, उस समय भी सदन में तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप हुए, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष के पद को विवाद में घसीटने की कोशिश नहीं की गई।
इसी प्रकार 2018 में जब लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, तब भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, लेकिन सदन की कार्यवाही चलाने वाले अध्यक्ष के पद की निष्पक्षता पर इस प्रकार से राजनीतिक हमला नहीं किया गया।
डॉ. सुमन ने कहा कि संसद में असहमति और बहस लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन आज विपक्ष जिस तरह लोकसभा अध्यक्ष जैसे गरिमामय पद को राजनीतिक हथियार बना रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे यह स्पष्ट होता है कि विपक्ष के पास जनहित के मुद्दों पर ठोस राजनीति करने के बजाय केवल टकराव की राजनीति बची है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है कि संसद और उसकी संस्थाओं की गरिमा को बनाए रखा जाए। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (से.) यह मानती है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन संस्थाओं का सम्मान हर दल की जिम्मेदारी है।