13/10/2026
ऐसा लिखने का भी मन नहीं करता, लेकिन मजबूरी में लिखना पड़ रहा है।
बिहार में एक ब्राह्मण महिला के बेटे प्रिंस कुमार तिवारी की बाढ़ में डूबने से मौत हो गई। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि उनके पास बेटे का श्राद्ध करने तक के पैसे नहीं हैं। मां खुद कई दिनों से बांध पर रहने को मजबूर हैं और अब मदद के लिए खान सर से गुहार लगा रही हैं।
खान सर आज जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। जाति और धर्म से ऊपर उठकर लोगों के दुख-दर्द में साथ खड़े हो रहे हैं। यह वाकई सराहनीय काम है।
लेकिन एक सवाल उन लोगों से भी है, जो खुद को कट्टर हिंदू कहते हैं और हिंदुत्व की बात करते हैं। ऐसी मुश्किल घड़ी में इस महिला और दूसरे पीड़ित हिंदू परिवारों की मदद के लिए कितने लोग आगे आ रहे हैं?
आखिर एक गरीब ब्राह्मण महिला को अपने बेटे का श्राद्ध करने के लिए मदद की गुहार क्यों लगानी पड़ रही है?
दुख इस बात का भी है कि आज जो खान सर इंसानियत के नाते लोगों की मदद कर रहे हैं, बाढ़ का पानी उतरने के बाद हो सकता है कि वही लोग उनके धर्म को लेकर तरह-तरह की बातें करें। आज उनकी मदद ली जाएगी, लेकिन कल उन्हें मुसलमान कहकर निशाना बनाया जा सकता है।
खान सर इंसानियत के लिए जो कर रहे हैं, वह काबिल-ए-तारीफ है। जरूरत इस बात की है कि समाज के हर वर्ग के लोग आगे आएं और ऐसे परिवारों का सहारा बनें।