Kumar Jha

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08/06/2026

अमीर और गरीब में सच में आसमान ज़मीन का फ़र्क होता है।

कल प्यासे मर गए लेकिन — जनरल कोच में समय पर पानी नहीं मिला। अब हर जगह गर्मी इतनी ज्यादा पड़ रही है कि पानी के बिना लोग र...
08/06/2026

कल प्यासे मर गए लेकिन — जनरल कोच में समय पर पानी नहीं मिला। अब हर जगह गर्मी इतनी ज्यादा पड़ रही है कि पानी के बिना लोग रह ही नहीं पाते भले खाना मिले ना मिले लेकिन पानी जरूर मिलना चाहिए।

लेकिन कल मैं एक ट्रेन के जनरल कोच में यात्रा कर रहा था भीड़ इतनी ज्यादा थी कि लोग गेट पर लटक कर यात्रा कर रहे थे ऊपर से इस भीषण गर्मी ने अलग परेशान कर रखा था अब जनरल कोच हो या AC कोच पानी की जरूरत तो हर किसी को होती है। वैसे तो 1 लीटर की पानी बोतल थी मेरे पास लेकिन मुझे नहीं पता था कि यह पानी एक से दो घंटे में खत्म हो जाएगा और वही हुआ गर्मी में प्यास लगती गई पानी पीते गए और पानी की बोतल खत्म हो गई। अब ट्रेन के अंदर पैंट्री कोच होते हुए भी पैंट्री स्टाफ पानी बेचने के लिए नहीं आ रहे थे लोग खुद भीड़ का सामना करते हुए पैंट्री में जाते और एक से दो बोतल खुद खरीद कर ला रहे थे। लेकिन पैंट्री स्टाफ पानी लेकर नहीं आ रहा था लोग प्यास से मार रहे थे यहां तक कि मुझे खुद प्यास लगी थी लेकिन मैं अकेला था बैग छोड़कर मैं जा नहीं सकता था।

और गाड़ी नई दिल्ली से सीधा 460 किलोमीटर दूर कोटा में रुकने वाली थी बीच में कहीं पर भी नहीं अगर रूकती तो चलो कहीं स्टेशन पर पानी बोतल खरीद लिया जाए लेकिन नई दिल्ली के बाद सीधा ट्रेन कोटा में रुकने वाली थी। तो इस गर्मी में कहीं भी जाओ 2 लीटर की पानी बोतल अपने पास जरूर रखो क्या पता समय पर आपको प्यास लगे और आपको पानी ना मिले जैसा मेरे साथ हुआ। फ़िर शाम के 6:00 बजे करीब में जब ट्रेन कोटा पहुंची तो फटाफट में ट्रेन से उतरा पानी बोतल खरीदा और जब मैं पानी पिया तो इतना राहत मिला कि मैं क्या बताऊं?

इस भीषण गर्मी में भले खाना ना खाओ लेकिन पानी टाइम पर पीते रहो।

07/06/2026

पहली बार वडोदरा आया और ये खाने को मिला!

5 साल के बच्चे का भी टिकट लगता है — नहीं तो जुर्माना देना पड़ता है। जी हां सही सुना आपने अगर आपका भी बच्चा 5 साल या 5 सा...
07/06/2026

5 साल के बच्चे का भी टिकट लगता है — नहीं तो जुर्माना देना पड़ता है। जी हां सही सुना आपने अगर आपका भी बच्चा 5 साल या 5 साल से बड़ा है तो आपको ट्रेन में सफर करने के लिए उसका भी टिकट बनवाना जरूरी है नहीं तो आपको भी जुर्माना देना पड़ सकता है।

लेकिन एक महिला को शायद यह बात नहीं पता थी इसलिए उसको 700 से ₹800 का जुर्माना देना पड़ गया। महिला हडपसर रेलवे स्टेशन जो कि पुणे में पड़ता है वहां से अपने 5 साल के बच्चे के साथ बनारस आ रही थी अमृत भारत ट्रेन से महिला का 2 सीट कंफर्म था। लेकिन महिला ने अपने बच्चों का टिकट नहीं बनवाया था। अब रेलवे का नियम है कि अगर आपका बच्चा 5 साल से बड़ा है तो उस बच्चे का आधा टिकट लगेगा नहीं तो आपको जुर्माना देना पड़ेगा। और उस दिन वही हुआ जब जब TT साहब आएऔर उन्होंने पूछा कि इस बच्चे का टिकट कहां है तो टिकट तो था ही नहीं तो न चाहते हुए भी उस महिला को ₹700 से ₹800 का बड़ा झटका लग गया।

तो जब भी ट्रेन में यात्रा करें और आपके छोटे-छोटे बच्चे हो और उनकी उम्र 5 साल से ज्यादा हो तो उनका भी टिकट जरूर बनवाए उनका आधा टिकट लगेगा और आधा पैसा देना पड़ेगा। अगर टिकट नहीं बनवा तो आपको भी ₹500 से लेकर ₹1000 तक का झटका लग सकता है।

दिल्ली से सूरत — बिना जुर्माना दिये जनरल टिकट से स्लीपर में यात्रा। शायद आपको थोड़ा अजीब लग सकता है कि यह कैसे हो गया की...
07/06/2026

दिल्ली से सूरत — बिना जुर्माना दिये जनरल टिकट से स्लीपर में यात्रा। शायद आपको थोड़ा अजीब लग सकता है कि यह कैसे हो गया की कोई जनरल टिकट से स्लीपर क्लास में यात्रा करता है और उसको जुर्माना भी नहीं देना पड़ता।

लेकिन यह बात सच है। कुछ दिन पहले मैं हजरत निजामुद्दीन से मिरज के बीच चलने वाली दर्शन एक्सप्रेस में यात्रा कर रहा था। हजरत निजामुद्दीन से ट्रेन हमारी खुली थी और हम दो लोग थे। हमारा कंफर्म टिकट था लेकिन एक महिला थी जिनका टिकट कंफर्म नहीं हुआ था तो उन्होंने जनरल टिकट लिया था और स्लीपर कोच में बैठी थी। और हमसे बातचीत करते-करते हमारे सीट पर बैठ गई हमने बोला ठीक है कोई बात नहीं। TT साहब आएंगे तो जुर्माना तो देना ही पड़ेगा। लेकिन पूरी रात गुजर गई दिन भी गुजर गया लेकिन TT साहब नहीं आए। उस महिला को सूरत जाना और सच में वह महिला सूरत पहुंच भी गई लेकिन बिना जुर्माना दिया। महिला ने जरनल क्लास का टिकट लिया था और स्लीपर क्लास में यात्रा कर रही थी हमने उनको बैठने के लिए सीट भी दे दी। लेकिन टिकट चेक करने कोई आया ही नहीं वह महिला खुशी-खुशी सूरत उतर गई और अपने घर चली गई।

फिर बाद में जब ट्रेन सूरत से निकली तब जाकर टिकट चेक हुआ।

07/06/2026

अमृत भारत एक्सप्रेस का इंजन लगा शताब्दी एक्सप्रेस में

CSMT मुंबई स्टेशन — ट्रेन लेट हुई तो सिर्फ़ 110₹ में सारा सामान लॉकर में जमा करके घूमने निकल गए।  लॉकर की सुविधा हर रेलवे...
07/06/2026

CSMT मुंबई स्टेशन — ट्रेन लेट हुई तो सिर्फ़ 110₹ में सारा सामान लॉकर में जमा करके घूमने निकल गए।

लॉकर की सुविधा हर रेलवे स्टेशन पर होती है जहां पर आप कुछ घंटे के लिए अपने सामान रख सकते हैं। उस दिन जब ट्रेन हमारी पुनःनिर्धारित कर दी गई तो हमने सारा सामान लॉकर में जमा करा दिया और कुछ देर के लिए हम घूमने चले गए।

अब CSMT मुंबई से मडगांव के लिए हमारी ट्रेन थी। 10103 मंडोवी एक्सप्रेस जो मुंबई से सुबह के 7:10 पर निकलती है। लेकिन जब हम स्टेशन पहुंचे तो हमें पता चला कि हमारी ट्रेन 4 घंटे पुनःनिर्धारित हो गई है। 7:10 की बजाय अब ट्रेन 11 बजे खुलेगी। अब ट्रेन खुलने में 4 घंटे थे तो स्टेशन पर करें तो कर क्या? तो हमने सोचा चलो कहीं बाहर घूमते हैं चाय वाय पीते हैं। लेकिन इतना सारा सामान लेकर बाहर जाना पॉसिबल नहीं था इसलिए हमने स्टेशन पर क्लॉक रूम खोजा और हमें क्लॉक रूम मिल भी गया और वहीं पर हमने 3 घंटे के लिए अपना सारा सामान जमा कर दिया और स्टेशन के बाहर घूमने चले गए।

अब हर रेलवे स्टेशन पर क्लॉक रूम का चार्ज अलग-अलग होता है यहां पर शायद थोड़ा ज्यादा था लेकिन ठीक था? 110₹ 3 घंटे के लिए। और मस्त 4 घंटे बाहर में घूम थोड़ा खाए थोड़ा पिए और जैसे ही 11:00 बजने को हुआ तो हम वापस आ गए और मोबाइल नंबर और ओटीपी डालकर हमने लॉकर खोला और अपना सारा सामान लिया और ट्रेन पड़कर मडगांव के लिए निकल गए।

तो जब भी ट्रेन लेट हो जाए या समय में कुछ बदलाव आ जाए और आपके पास ज्यादा समान है तो स्टेशन पर रुकने से अच्छा सारा सामान लाकर में जमा कर दे और खाली हाथ मस्त बाहर में घूमे।

जब महिला और पुरुष एक समान है तो मेट्रो में इनको इतना आरक्षण क्यों ? आज जब मैं दिल्ली मेट्रो में यात्रा कर रहा था तो एक स...
07/06/2026

जब महिला और पुरुष एक समान है तो मेट्रो में इनको इतना आरक्षण क्यों ? आज जब मैं दिल्ली मेट्रो में यात्रा कर रहा था तो एक सीट के ऊपर लिखा था "केवल महिलाओं के लिए" जबकि दिल्ली मेट्रो में सबसे आगे वाला डब्बा भी केवल महिलाओं के लिए होता है।

मेट्रो के 8 डब्बों में से 1 डब्बा महिलाओं के लिए होता है। फिर भी हर डब्बों में अलग से महिलाओं के लिए सीट क्यों आरक्षित होती है। हम पुरुषों से क्या दुश्मनी है जो इतना भेद भाव किया जाता है। हमारे लिए कोई आरक्षण क्यों नहीं होता, हमारे लिए अलग से कोई डब्बा क्यों नहीं होता। जब हर जगह महिला पुरुष एक समान है। पढ़ाई लिखाई नौकरी हर चीज़ में महिला पुरुष एक समान होता है। तो मेट्रो में महिलाओं के लिए आरक्षण और पुरुषों के लिए कोई आरक्षण क्यों नहीं!

पुणे जंक्शन — ऑटो वाले 250₹ मांग रहे थे मैंने 150₹ में Uber कर ली। अब पहली बार मैं पुणे आया था। सुबह के 5 बज रहे थे और म...
07/06/2026

पुणे जंक्शन — ऑटो वाले 250₹ मांग रहे थे मैंने 150₹ में Uber कर ली। अब पहली बार मैं पुणे आया था। सुबह के 5 बज रहे थे और मुझे हडपसर रेलवे स्टेशन जाना था जो पुणे जंक्शन से लगभग 7 से 8 किमी दूर था।

तो जब मैंने एक ऑटो वाले से पूछा कि भैया हम 2 लोग हैं कितना पैसा लोगे हडपसर रेलवे स्टेशन जाने का तो ऑटो वाले भैया बोले ₹250 फिर हमने थोड़ा ऊपर नीचे करके रेट काम कराया। और 200₹ में मान गए। लेकिन जाने से पहले एक बार दिमाग में ख्याल आया कि क्यों ना एक बार ऑनलाइन चेक कर लिया जाए जो Ola, Uber, Rapido इन सब में कितने पैसे लगेंगे।

तो फिर मैं Uber Apps खोला और उसने चेक किया तो उसमें मुझे ऑटो का 136 रुपए दिखा रहा था और Uber Car का 153 रुपए दिखा रहा था पूरे जंक्शन से हडपसर रेलवे स्टेशन का तो फ़िर क्या जो सस्ता था वही Choose किए और 153₹ में Uber Car बुक कर ली। और मस्त Car में AC के मज़े लेते हुए हम पुणे जंक्शन से हडपसर रेलवे स्टेशन आ गए सिर्फ 153₹ में। वहीं अगर हम ऑटो से जाते तो हमें ₹200 देने पड़ जाते और ऑटो में तो AC भी नहीं होता।

तो कभी-कभी थोड़ा सा दिमाग भी लगाना चाहिए क्या पता आपको फायदा हो जाए।

ये चाय आखिर बनता कौन है — जिसे पीने के बाद मुंह से गाली ही निकलती है। सच में ट्रेन में दिया जाने वाला चाय इतना बेकार होत...
07/06/2026

ये चाय आखिर बनता कौन है — जिसे पीने के बाद मुंह से गाली ही निकलती है। सच में ट्रेन में दिया जाने वाला चाय इतना बेकार होता है इतना बेकार की हम रिश्तेदारों को भी न पिलाये।

मुझे नहीं पता कि ये लोग ट्रेन के अंदर आखिर यह चाय बनाते कैसे हैं। जो इतनी घटिया और बेकार लगती है। जब पिता हूं तो उल्टी जैसा मन होने लगता है। चाय में न दूध होता है न चायपत्ती होती है न ढंग से चीनी होती है।

आज तक इस चाय में सुधार नहीं हुआ और मुझे नहीं लगता कि आगे भी इसमें कोई सुधार होगा। जैसा चल रहा है ऐसे ही चलता रहेगा।

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