05/09/2026
🚨 फरक्का की परेशानी ने फिर उठाया सवाल :-
साहिबगंज - मनिहारी – रेल पुल आखिर कब ? 🚆🌉🤔
न्यू फरक्का के पास रेल ट्रैक बाधित होने से पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण/पूर्वी भारत के बीच रेल परिचालन बुरी तरह चरमरा गया। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पूर्वोत्तर को जोड़ने के लिए केवल एक रूट पर निर्भर रहना कितना जोखिम भरा है। वैकल्पिक रेल मार्ग अब केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि भविष्य की अनिवार्य जरूरत बन चुका है।
मनिहारी–साहेबगंज रेल ब्रिज क्यों है बेहद जरूरी?
पूर्वोत्तर भारत के लिए मजबूत वैकल्पिक मार्ग:
फरक्का रूट पर कोई भी तकनीकी खराबी या प्राकृतिक आपदा आते ही पूर्वोत्तर और बंगाल-बिहार का संपर्क कट जाता है। मनिहारी–साहेबगंज रेल पुल इस समस्या का स्थायी समाधान बन सकता है।
दूरी और समय की बचत:
इस पुल के निर्माण से कटिहार/सीमांचल से झारखंड, ओडिशा और दक्षिण भारत की दूरी काफी कम हो जाएगी, जिससे ट्रेनों को लंबा चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी।
व्यापार और आर्थिक विकास:
बिहार और झारखंड के बीच गंगा नदी पर सीधा रेल संपर्क बनने से माल ढुलाई आसान होगी और स्थानीय व्यापार, रोजगार व उद्योग को जबरदस्त रफ्तार मिलेगी।
सामरिक व रणनीतिक दृष्टि से अहम:
सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) और पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा एवं आपातकालीन कनेक्टिविटी के लिहाज से यह दूसरा रेल मार्ग रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
रेलवे प्रशासन और केंद्र सरकार से विनम्र निवेदन है कि जनहित और राष्ट्रहित को देखते हुए मनिहारी–साहेबगंज रेल पुल परियोजना को प्राथमिकता के साथ धरातल पर उतारा जाए।