Matti Ki Pukar

Matti Ki Pukar माटी की पुकार एक मंथली न्यूज़ पत्रिका है और प्रयासरत है साप्ताहिक अंक के लिए weekly paper & monthly magzine

12/06/2026

🚨 Social Media Par Do Mudde, Ek Badi Bahas 🚨

🔹 Sijal Pawar ke comedy content par vivaad
🔹 Shehnaa Goswami ke relationship statement par charcha

Kya freedom of expression ki koi seema honi chahiye?
Kya modern relationship values badal rahi hain?
Aur samaj is sab ko kis nazar se dekhta hai?

🎙️ Shubhendu Prakash ki rai।

Category: Social
Platform: Aware News 24

इश्क में बेशर्मी भी जरूरी है,माना अगर है उसको खुदा, फिर खुदा से क्या शर्माना है! Radhe-Radhe. 🙏🏻🌿“Ishq mein besharmi bhi...
08/06/2026

इश्क में बेशर्मी भी जरूरी है,
माना अगर है उसको खुदा,
फिर खुदा से क्या शर्माना है!
Radhe-Radhe. 🙏🏻🌿
“Ishq mein besharmi bhi zaroori hai… ❤️

Maana agar hai usko khuda,
phir khuda se kya sharmaana hai!” ✨🌿

Radhe-Radhe 🙏🏻

Platform: Aware News 24
Column: Sahitya Ki Mehfil
Vicharak: Shubhendu Prakash

“Khush Rahiye…” 🌿Bade buzurgo ka yeh aashirvaad sirf shabd nahi,jeevan ka saar hai।Jispar Bhagwan ki kripa bani rahegi,u...
07/06/2026

“Khush Rahiye…” 🌿

Bade buzurgo ka yeh aashirvaad sirf shabd nahi,
jeevan ka saar hai।

Jispar Bhagwan ki kripa bani rahegi,
uska man kaam me lagega,
samriddhi aayegi
aur gaurav bhi। ✨

📿 Vastav me hum gyaan ko pranam karte hain।
Aur Bhagavad Gita me Bhagwan Krishna kehte hain —
“Main Gyaan hoon।”

Sanskar ka nirvahan kijiye,
logon ko bina ohda dekhe samman dijiye।

Kalyan ho jayega। 🙏

Radhe Radhe 🌿

Platform: Aware News 24
Category/Column: Dharm Ka Marm
Shubhendu Prakash Ki Kalam Se


बड़े बुजर्गो का आशीर्वाद खुश रहिये माने क्या ? खुश रहने का मतलब है तुम पर भगवान् की कृपा रहे, अब इससे होगा क्या ? तो इस आशीर्वाद से आप खुश रहेंगे तो आपका काम में मन लगेगा और काम में मन लगेगा तो समृधि आएगी और उसी से गौरव भी आएगा, इश्लाम में अस-सलाम-वालेकुम कहा जाता है बदले में व्व्लेकुम सलाम लोग बोलते हैं मतलब वही है अलाह की रहमत बरकरार रहे और सामने से जिसको कहा गया वो कहता है वालेकुम सलाम, तो रहमत या कृपा बरकार रहेगी तो आप खुश रहेंगे इसलिए अपने बड़े बुजर्ग से आशीर्वाद लीजिये, सनातन में क्या है की अहम ब्राह्म्ष्मी का भी कांसेप्ट है तो सिंपल है सामने वाला डायरेक्ट कहता है खुश रहिये, जिसकी जितनी उम्र उसके पास उतना अनुभव और उतना ही ज्ञान, वास्तव में हम ज्ञान को प्रणाम करते हैं और ज्ञान क्या है कृष्ण, भगवान् भगवद गीता में कहते हैं मै ज्ञान हु अर्थात जितना ज्ञान बढेगा वो उतना इश्वर के करीब जाएगा और जो इश्वर के करीब है उसके करीब आप हो लीजिये बस राधे राधे हो जाएगा हर व्यक्ति में अलग अलग तरह का ज्ञान है इसलिए कोई भी व्यक्ति सबसे अधिक ज्ञानी नही हो सकता इसलिए संस्कार का निर्वहन करे सम्मान दे लोगो को बिना ओहदा देखे कल्याण हो जाएगा राधे राधे

AI बिना मनुष्य के ज्ञान के अधूरा है, और मनुष्य बिना विवेक के खतरनाक। यही आज के समय का सबसे बड़ा सत्य है।आज लोग ChatGPT य...
05/06/2026

AI बिना मनुष्य के ज्ञान के अधूरा है, और मनुष्य बिना विवेक के खतरनाक। यही आज के समय का सबसे बड़ा सत्य है।

आज लोग ChatGPT या किसी भी AI मॉडल को देखकर या तो अत्यधिक उत्साहित हो जाते हैं या फिर डर जाते हैं। लेकिन सच्चाई इन दोनों के बीच में कहीं खड़ी है। AI एक शक्तिशाली मशीन है, लेकिन मशीन आखिर मशीन ही है। उसमें न भाव है, न चेतना, न अनुभूति और न ही समग्र दर्शन। वह आपके शब्दों को समझ सकता है, लेकिन आपके भीतर चल रही संवेदना को नहीं। वह डेटा पढ़ सकता है, लेकिन जीवन नहीं।

ChatGPT या कोई भी AI मॉडल बिना आपके knowledge के लगभग बेकार है। सवाल पूछने की क्षमता, संदर्भ जोड़ने की समझ, बहस करने का हुनर और चीजों को अलग-अलग कोण से देखने की दृष्टि अगर आपके अंदर नहीं है, तो AI आपको आधा-अधूरा और कई बार गलत उत्तर देगा। एक बार में सही उत्तर मिल ही जाए, यह जरूरी नहीं। आपको उसे दिशा देनी पड़ती है। Circumstances जोड़ने पड़ते हैं। संदर्भ समझाना पड़ता है।

AI fact check कर सकता है। आपके लिखे को सजा सकता है। SEO कर सकता है। अच्छी image बना सकता है। लेख लिख सकता है। लेकिन उसमें “भाव” नहीं है। दर्शन को AI नहीं समझता। वह pattern समझता है। Probability समझता है। Language समझता है। लेकिन “अनुभव” नहीं समझता।

मेरे अपने अनुभव में भी यही बात सामने आई है। Water Grid, जीविका और कई जटिल सामाजिक-राजनीतिक विषयों पर हमने ChatGPT के साथ घंटों चर्चा की। कई बार शुरुआत में उसने किसी चीज़ को सही बताया, लेकिन लंबे संवाद और लगातार प्रश्नों के बाद खुद अपने निष्कर्ष बदल दिए। इसका प्रमाण आज भी YouTube पर “Podcast with ChatGPT” के रूप में मौजूद है। यानी AI का उत्तर अंतिम सत्य नहीं होता। वह आपके इनपुट, आपके प्रश्न और आपके संदर्भ के अनुसार evolve करता है।

AI की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वह आपके सोचने के तरीके को धीरे-धीरे copy करने लगता है। वह आपकी writing style पकड़ लेता है। आपके narrative को समझने लगता है। लेकिन जहां संदर्भ बदलता है, जहां दर्शन बदलता है, जहां परिस्थिति के अनुसार विचार बदलते हैं — वहां AI अक्सर भ्रमित हो जाता है। मेरे case में भी यही होता है। उसे कई बार समझ में नहीं आता कि मैं किस पक्ष में हूं, क्योंकि मैं fixed ideology से operate नहीं करता। मैं संदर्भ और परिस्थिति के अनुसार विश्लेषण करता हूं।

यही कारण है कि AI को judge की कुर्सी देना खतरनाक हो सकता है। क्योंकि उसमें समग्रता की कमी है। वह आये दिन गलत निर्णय देता है और फिर कहता है — “क्षमा कीजिये, सटीकता की कमी थी।” कारण साफ है — उसमें भावना नहीं है, अनुभव नहीं है, जीवन का प्रत्यक्ष बोध नहीं है।

और सबसे खतरनाक चीज़ क्या है?

नुक्ते का हेर-फेर।

एक छोटा सा punctuation, एक छोटा सा शब्द, एक छोटा सा संदर्भ — और अर्थ पूरी तरह बदल सकता है। “खुदा” को “जुदा” बनने में समय नहीं लगता। मशीन शब्द देखती है, मनुष्य भाव देखता है। इसलिए अंतिम नियंत्रण हमेशा मनुष्य के पास ही रहना चाहिए।

AI आवश्यक है। उपयोगी है। शक्तिशाली है। लेकिन उस पर पूर्ण निर्भरता ठीक नहीं। मशीन का उपयोग कीजिए, उसके भरोसे समाज, न्याय, शिक्षा और निर्णय प्रणाली को मत छोड़ दीजिए। Human oversight आवश्यक है।

क्योंकि ज्ञान सिर्फ सूचना नहीं होता।
ज्ञान अनुभव, संवेदना, विवेक और समग्रता का योग होता है।

राधे राधे।

Har rang mein khud ko vyakt kar raha hu… 🌿Kisi bhi avastha ko dikhane mein sahaj ban raha hu।Kal ko agar duniya se kisi ...
05/06/2026

Har rang mein khud ko vyakt kar raha hu… 🌿

Kisi bhi avastha ko dikhane mein sahaj ban raha hu।

Kal ko agar duniya se kisi bhi rang milta hu,
dekhkar duniya pehchaan le — bas yahi chahta hu।

Sahaj hu,
main saral hu,
aur is bhaav ko mehsoos kar raha hu।

Manzil ki pravah nahi,
bas safar ka maza le raha hu…” ✨

Platform: Aware News 24
Category/Column: Sahitya Ki Mehfil
Shubhendu Prakash Ki Kalam Se

जीवन एक ज्ञान का घड़ा है, पहले शिक्षा फिर उसको जिवन में लागू,, फिर उसका अनुभव और फिर जो प्राप्त हुआ (अच्छा/बुरा) वो ज्ञा...
05/06/2026

जीवन एक ज्ञान का घड़ा है,
पहले शिक्षा फिर उसको जिवन में लागू,,
फिर उसका अनुभव और फिर जो प्राप्त हुआ (अच्छा/बुरा) वो ज्ञान है,
बुडा अनुभव प्राप्त हुआ तो गलत पढ़ा/समझा,
अच्छा अनुभव हुआ तो सही पढ़ा/समझा,
समझने के लिए गुरु की सरण लो
बाद बांकी प्राप्त अच्छे अनुभव/समझ को जीवन में लागू करते जाइए
और बुरे अनुभव/समझ से सीखिए,
हरे कृष्णा
Platform :- Aware News 24,
Category/column :- धर्म का मर्म,
शुभेन्दु प्रकाश की कलम से
“Jeevan ek gyaan ka ghada hai…” 🌿

Pehle shiksha,
phir usko jeevan mein lagu karna,
phir uska anubhav —
aur jo prapt hua wahi gyaan hai। ✨

Bura anubhav mila toh kahin galat samjha,
achha anubhav mila toh sahi disha mili।

📿 Guru ki sharan lo,
seekhte raho,
aur jeevan ko samajhte raho।

Hare Krishna 🙏

Platform: Aware News 24
Category/Column: Dharm Ka Marm
Shubhendu Prakash Ki Kalam Se

04/03/2026
01/03/2026

उन्हें कोई मतलब नहीं है हमसे,
चिट्ठी के थोड़े से गुलाल से चिढ़े हैं हमसे
पैगाम ए इश्क का एहतराम भी न दिया
ख़त लौटा भी तो सकते थे फाड़ क्यों दिया!
इजहार ए इश्क का जवाब इंकार भी तो हो सकता था !
लाल गुलाब का जवाब सफेद भी तो हो सकता था!
बम नहीं इश्क भेजा था,
लहू नहीं रंग भेजा था.
तुम्हारे हाँ और ना के जवाब का —
ये आशिक मोहताज नहीं
फागुन हैं ये सावन नहीं,
रंगभूमि है ये रणभूमि नहीं
इश्क का मुकाम जो कुछ भी हो रंग भूमि में तो आओ
गुलाल न सही पानी से ही नहलाओ
शायद हैसियत देख कर ख़फ़ा है हमसे!
रोग-ए-इश्क उसे भी न लग जाए इसलिए छिपा है हमसे!

ख्यालby Shubhendu Prakash
❤️❤️❤️❤️

25/02/2026
देखिए…हर इंसान पर गीता का प्रभाव अलग-अलग होता है।कोई उसे नेगेटिव तरीके से लेता है।जैसे कोई कहेगा:👉 “अभिमन्यु को अधूरे ज्...
25/02/2026

देखिए…

हर इंसान पर गीता का प्रभाव अलग-अलग होता है।
कोई उसे नेगेटिव तरीके से लेता है।

जैसे कोई कहेगा:

👉 “अभिमन्यु को अधूरे ज्ञान में युद्ध नहीं करना चाहिए था।”

लेकिन समग्र सोच क्या कहती है?

👉 “युद्ध आए या ना आए —
जब बात अपने परिजनों की सुरक्षा की हो,
तो कूद जाओ रण में।
जो होगा, सो देखा जाएगा।”

उदाहरण के लिए…

धीरूभाई अंबानी को व्यवसाय नहीं आता था।
करते-करते सीखा।

हार और जीत तो माधव के हाथ में है।

क्या पता…

अभिमन्यु को बचाने माधव ना आए,
मुझे बचाने आ जाएँ।

किसकी नियति क्या है —
पहले से तय करना भी ठीक नहीं।

कभी-कभी…

हम रणभूमि में ही तलवार चलाना सीखते हैं।
करते-करते सीखते हैं।

Practice makes a man perfect.

इसलिए ये बहाना देना:

❌ “ये काम मुझे नहीं आता, इसलिए नहीं करेंगे”

उचित नहीं।

देखना चाहिए:

✔ उस काम का प्रभाव सिर्फ हम पर पड़ेगा?
✔ या किसी और को भी प्रभावित करेगा?

उदाहरण…

अगर कार चलाना नहीं आता:

🚫 यात्री को बैठाकर मत चलाओ।

लेकिन…

✔ सीखने में क्या बुराई है?

खुले मैदान में सीखिए,
जहाँ किसी को क्षति न पहुँचे।

कुछ ही दिनों में चालक बन जाएँगे।

धंधे में भी यही नियम…

✔ लोगों से मिलिए
✔ उनकी accounting समझिए
✔ उन्होंने registration कहाँ से लिया
✔ कैसे operate करते हैं

सीखने के दो रास्ते:

👉 नौकर बनकर सीखिए
👉 या मालिक बनकर

(मैंने सीखने में भी पैसा बना लिया…
और आज भी बना रहा हूँ 😌)

कुल मिलाकर…

विद्या अगर पहले नहीं भी है —
लगातार प्रयास से जीत संभव है।

शर्त:

🔥 ललक सीखने की हो
❌ अपेक्षा फल की नहीं

बच्चों को वीडियो गेम खेलकर क्या मिलता है?
मुझे chess खेलकर क्या मिलता है?

👉 आनंद।

ठीक यही आनंद…

जब हम काम में खोज लेते हैं —
तो outcome भटकेगा कहाँ?

समय लगेगा,
लेकिन एक दिन…

आप उस खेल के माहिर खिलाड़ी बनेंगे।

इसलिए…

✨ कर्मण्येवाधिकारस्ते
मा फलेषु कदाचन ✨

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+918789021735

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