18/08/2024
नज़्म
** सालग़िरह **
तुम्हारी पिछली
सालग़िरह की ही तो
बात है
सोंचा था
तुम्हारे अगले ' बथ॓ डे ' पर
तुम्हें अपनी
एक नज़्म
नज़र करुँगा
पर
कोई नज़्म
सुझते भी तो नहीं
लफ़्ज़ों की
क़िल्लत जो
कर दी है तुमने
ज़ेहन में
बचे-खुचे
कुछ लफ़्ज़ तो हैं
पर वो भी
सारे के सारे
बेमानी से
उन्हें तो
तुम्हारे कलम की
आदत लग चुकी है
कमबख़्त
मेरी सुनते ही कहाँ
समझ में नहीं आता
इन कमज़ोर , बीमार
लफ़्ज़ों से
तुम्हारी
सालग़िरह का नज़्म
मैं लिखूं भी तो कैसे
लगता है
इस मत॓बा भी
उन्हीं घिसे-पीटे
लफ़्ज़ों से ही
तुम्हारी सालग़िरह का जश्न
मनाना पड़ेगा
बुरा तो नहीं
लगेगा तुम्हें
चलो फ़िर
मेरा ' विश '
क़बूल तो करो
' 90 वीं सालग़िरह
बहुत - बहुत मुबारक़ हो
' गुलज़ार साहब ' ... !!!
@ कुन्दन श्रीवास्तव