17/04/2024
किश्तों में खुदकुशी कर रही है ये जिन्दगी, 🌻
इंतज़ार तेरा मुझे पूरा मरने भी नहीं देता। 🙈🙂🤐🙈
निगाहों में कोई भी दूसरा चेहरा नहीं आया, 😎
भरोसा ही कुछ ऐसा था तुम्हारे लौट आने का। 🙏🙃🙏👌
उनके खत की आरज़ू है उनकी आमद का ख्याल, 😲
किस कदर फैला है ये कारोबार-ए-इंतज़ार। 🌈💐😲🌺
जो तेरी मुंतज़िर थीं वो आँखें ही बुझ गई, 🌈
अब क्यों सजा रहा है चिरागों से शाम को। 😎🙂🙈🙏
- via bobble.in/shayaris