28/06/2026
#आचार
गाँव घर का अचार सिर्फ अचार नही होता उसमें तमाम मसालों के साथ रहता है माँ दादी नानी का प्यार आशीर्वाद ममत्व और उनका विश्वास की ये अचार जहां भी जाएगा वहां खुशियां लाएगा।ख़ुश किस्मत है वो लोग जो गांव से आज भी जुड़े हुए हैं वो इस आम के अचार का महत्व जानते हैं।एक प्रवासी से पूछिए जो साल भर इंतज़ार करता है कि अबकी गाँव जाएंगे त मां या दादी के हाथ का बना अचार खाएंगे आ बांध के दिल्ली बम्बे ले जाएंगे।जब कभी किसी कारणवश घर का लाल गांव नही आता है न त माँ बड़े ही प्रेम से होर्लिक्स के शीशी में भर के अचार किसी न किसी के हाथ से भिजवा देती हैं ताकि परदेश में रहने वाला उनका बच्चा मां के हाथों का बना अचार चख सके और अपनी यादें ताजा कर सके।गाँव में बनने वाला अचार रिश्तों में गहराई लाता है रिश्तों को मजबूत करता है अचार प्रेम का प्रतीक है लेकिन शहरी चकाचौंध अब गांव में भी अछूती नहीं रही है गांव में भी अब आधुनिकता ने पैर पसार लिए हैं शायद यही मैं गलत नही हूँ तो हमारी मां और दादी वाली ये अंतिम पीढ़ी है जो माँ के हाथों से बना हुआ अचार का आनंद ले पा रहा है ।
कोई सीखना ही नही चाहता है इन घरेलू अचार को बनाने की विधियां अब गांव घर मे भी इक्का दुक्का भाभी दीदी लोग होंगी जिनको अचार बनाने आता होगा लेकिन उनका भी समय के साथ गाँव से पलायन जारी ही रहता है। आने वाले आधुनिक समय में हमारे पास सब कुछ तो होगा परन्तु याद आएंगे गांव से जुड़े हर वो चीज जो शहर में बस यादें बन कर साथ होंगी.......बाजार के अचार का मतलब एक दम लाल तेल और खूब सारे मसाले वहीं घर के अचार वो भी पीली नहीं काली वाली सरसों को दरके बनाया गया बस सौंफ, सरसों और हल्दी, नमक, मिर्च और ज्यादा करो तो कलौंजी बस और स्वाद ।माँ के हाथों का अचार मतलब स्वाद में लाज़वाब और एकदम बेजोड़, शहर में देश विदेश में रहने वाले अब क्या ही जाने इस आम के अचार का स्वाद । बड़े शहरों में तो झट से सुपर मार्केट से अचार का महंगा मंहगा शीशी ले आते है जिसमें भयंकर प्रयोग किया जाता है प्रिजर्वेटिवस और केमिकल्स का और अचार के नाम पर खिलवाड़ करते हैं।आज कल के नए जेनरेशन के लोग जिनके पास समय का आभाव है वो कहाँ इन झमेलों में पड़ने की कोशिश करते हैं वो सब इसको ओल्ड फैशन्ड वेस्ट ऑफ टाईम बोल कर टाल देते हैं क्योंकि उनको तो पैसा फेंको तमाशा देखो वाला आदत लग चुका है।खरीदुआ अचार खाने वाले लोग क्या जाने गए गाँव के आम के अचार की खुश्बू को डिब्बा खुलते ही सरसो के तेल की तेज महक और राई मसालों की घनघोर मंत्र मुग्ध कर देने वाली खुश्बू मानो तन बदन को नई ऊर्जा प्रदान कर देती हो ।आम का अचार बनाते हुए गाँव घर में कई किस्से बनते बिगड़ते हैं हर घर की आचार की अपनी एक अलग कहानी होती है।अचार बनते बनते ही कई बार पुराने राज खुलते हैं कि कैसे माँ का बचपन बीता कैसे दादी लोग अपनी माँ का हाथ बटाती थी कैसे गाँव के गाछी से सब लोग सहेली सब के साथ आन्ही में आम लूटने जाते है कैसे टिकोला तोड़ के नमक से साथ गपक जाते थे।
#अनूप