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पीएम सूर्य घर योजना में लोन का बड़ा अड़ंगा! 33,534 आवेदनों में 13,610 खारिज, सिर्फ 3,502 को मिली ऋण राशिबिहार में पीएम स...
23/08/2026

पीएम सूर्य घर योजना में लोन का बड़ा अड़ंगा! 33,534 आवेदनों में 13,610 खारिज, सिर्फ 3,502 को मिली ऋण राशि

बिहार में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को गति देने के लिए सरकार जोर दे रही है, लेकिन योजना के तहत बैंक से ऋण लेने में बड़ी परेशानी सामने आई है। 10 अगस्त तक राज्य के 21 बैंकों में ऋण के लिए 33,534 आवेदन पहुंचे थे। इनमें से 13,610 आवेदन यानी करीब 40 फीसदी अलग-अलग कारणों से खारिज कर दिए गए। वहीं, अब तक सिर्फ 3,502 आवेदकों के खाते में ऋण की राशि पहुंच पाई है।

बैंकों की ओर से बड़ी संख्या में आवेदन खारिज किए जाने पर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने भी नाराजगी जताई है। ऊर्जा विभाग और बैंकों के अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने निर्देश दिया कि ऋण आवेदन को मंजूरी देने में लगने वाला समय 18 दिन से घटाकर 10 दिन किया जाए। साथ ही आवेदकों से तय दस्तावेजों के अलावा कोई अतिरिक्त कागज नहीं मांगने को कहा गया है।

बैंकों के आंकड़ों में सबसे ज्यादा आवेदन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पास पहुंचे। एसबीआई में 14,951 आवेदन आए, जिनमें 8,369 स्वीकृत हुए। 5,552 आवेदन खारिज किए गए और 1,030 आवेदकों को ऋण की राशि जारी हुई।

पंजाब नेशनल बैंक में 6,004 आवेदन पहुंचे। इनमें 3,065 आवेदन स्वीकृत किए गए, जबकि 2,361 यानी 39.3 फीसदी आवेदन निरस्त हुए। बैंक ने 578 आवेदकों को ऋण की राशि जारी की।

केनरा बैंक में 2,725 आवेदन आए। इनमें 1,289 आवेदन स्वीकृत हुए, 1,211 यानी 44.4 फीसदी आवेदन खारिज किए गए और 225 आवेदकों को ऋण मिला।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 1,693 आवेदन पहुंचे। इनमें 472 आवेदन स्वीकृत हुए, 732 आवेदन निरस्त किए गए और 489 आवेदकों को ऋण की राशि जारी हुई। वहीं बैंक ऑफ इंडिया में 1,949 आवेदन आए, जिनमें 761 स्वीकृत, 830 निरस्त और 358 आवेदकों को ऋण जारी किया गया।

बाकी बैंकों की स्थिति भी अलग-अलग रही। बैंक ऑफ बड़ौदा में 1,790 आवेदन आए, 790 स्वीकृत हुए, 818 निरस्त और 182 को राशि मिली। बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 299 आवेदन में 133 स्वीकृत, 137 निरस्त और 29 को राशि मिली। बिहार ग्रामीण बैंक में 576 आवेदन में 250 स्वीकृत, 247 निरस्त और 79 को राशि मिली।

इंडियन बैंक में 1,441 आवेदन आए, जिनमें 521 स्वीकृत, 743 निरस्त और 177 को ऋण मिला। इंडियन ओवरसीज बैंक में 185 आवेदन में 100 स्वीकृत, 71 निरस्त और 14 को राशि जारी हुई। यूको बैंक में 651 आवेदन में 210 स्वीकृत, 334 निरस्त और 107 को राशि मिली। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में 1,100 आवेदन में 435 स्वीकृत, 515 निरस्त और 150 आवेदकों को राशि जारी हुई।

इसके अलावा एचडीएफसी बैंक में 39 आवेदन में 30 स्वीकृत, 9 निरस्त और 30 को राशि मिली। आईडीबीआई बैंक में 69 आवेदन में 8 स्वीकृत, 25 निरस्त और 36 को राशि जारी हुई। पंजाब एंड सिंध बैंक में 50 आवेदन में 18 स्वीकृत, 22 निरस्त और 10 को राशि मिली। जम्मू एंड कश्मीर बैंक में 3 आवेदन में 2 स्वीकृत, 1 निरस्त और 1 को राशि मिली।

क्रेडिट पेचयर बैंक के सभी 5 आवेदन स्वीकृत हुए और सभी 5 को राशि भी जारी हुई। आईआरबीआई बैंक में एक आवेदन आया, जो स्वीकृत हुआ और राशि भी जारी की गई। गुजरातलाबागा (पटना) में एक आवेदन स्वीकृत हुआ, जबकि राशि जारी नहीं हुई। आंध्र प्रदेश ग्रामीण बैंक और दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक में एक-एक आवेदन आया, दोनों निरस्त हुए।

अब सरकार का जोर बैंक स्तर पर आवेदन प्रक्रिया को तेज करने और अनावश्यक दस्तावेजों की मांग रोकने पर है, ताकि पीएम सूर्य घर योजना के तहत अधिक आवेदकों को समय पर ऋण मिल सके।

रात 9:55 के बाद DJ बजाया तो होगी कार्रवाई! पटना हाईकोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण पर कसे शिकंजा, जानिए नए नियम...बिहार में अब रा...
23/08/2026

रात 9:55 के बाद DJ बजाया तो होगी कार्रवाई! पटना हाईकोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण पर कसे शिकंजा, जानिए नए नियम...

बिहार में अब रात के समय डीजे और लाउडस्पीकर बजाने वालों को सावधान रहना होगा। पटना हाईकोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। रात 9:55 बजे के बाद डीजे या लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। कोर्ट ने सभी जिलाधिकारियों, एसपी, एसडीओ और थाना अध्यक्षों को ध्वनि प्रदूषण नियम, 2000 और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 का सख्ती से पालन कराने को कहा है। आदेश की प्रतियां परिवहन सचिव और पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव को भी भेजी जाएंगी। सरकारी वकील प्रशांत प्रताप ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि आदेश तुरंत सभी प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।

इस नियम का दायरा सिर्फ डीजे संचालकों तक सीमित नहीं रहेगा। मैरिज हॉल और बैंक्वेट हॉल में भी रात 9:55 बजे के बाद साउंड सिस्टम नहीं बजाया जा सकेगा। दिन में भी आवाज तय डेसिबल सीमा के भीतर रखनी होगी। नियम टूटने पर संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करनी होगी।

ध्वनि प्रदूषण पर नजर रखने के लिए बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सार्वजनिक जगहों पर डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाने का निर्देश दिया गया है। इन बोर्डों के जरिए लोगों को ध्वनि की निर्धारित सीमा और उससे होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाएगी।

गाड़ियों में लगाए जाने वाले प्रेशर हॉर्न पर भी हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने इससे होने वाली परेशानी और दुर्घटनाओं पर चिंता जताते हुए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190(2) के तहत चालान काटने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान कटिहार के पोठिया का उदाहरण भी दिया गया, जहां एक सप्ताह में 1.10 लाख रुपये का जुर्माना किया गया।

स्कूल और अस्पतालों के आसपास भी नियम और सख्त होंगे। इनके 100 मीटर के दायरे को साइलेंस जोन माना जाएगा। यहां डीजे और हॉर्न बजाने की अनुमति नहीं होगी। इन इलाकों में ‘नो हॉर्न, नो लाउडस्पीकर’ के बोर्ड लगाए जाएंगे और डीजे संचालकों व वाहन चालकों को गुजरते समय शांति बनाए रखनी होगी।

इसके अलावा डीजे, लाउडस्पीकर और मैरिज हॉल संचालकों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। संचालकों को स्थानीय एसडीओ कार्यालय में अपना पंजीकरण कराना होगा और इसकी पूरी जानकारी संबंधित थानों को भी दी जाएगी, ताकि नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई की जा सके।

बिहार के छात्रों के लिए बड़ी राहत! अब शिक्षा लोन के कई रास्ते, 10 लाख तक की पढ़ाई का खर्च जुटाना होगा आसानबिहार के छात्र...
22/08/2026

बिहार के छात्रों के लिए बड़ी राहत! अब शिक्षा लोन के कई रास्ते, 10 लाख तक की पढ़ाई का खर्च जुटाना होगा आसान

बिहार के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए अब शिक्षा लोन के ज्यादा विकल्प मिलेंगे। उच्च शिक्षा सचिव के अनुसार, 2 लाख रुपये तक का शिक्षा लोन बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम के माध्यम से मिलेगा, जबकि 2 लाख से 4 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों से उपलब्ध कराई जाएगी। पहले बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम के जरिए ही 4 लाख रुपये तक की राशि मिलती थी।

इसके साथ ही बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन योजना, पीएम विद्यालक्ष्मी पोर्टल और बैंकों से जोड़ा जा रहा है। इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए संस्थागत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। वहीं, पीएम विद्यालक्ष्मी योजना के जरिए 10 लाख रुपये तक का शिक्षा लोन भी मिल सकेगा। यानी उच्च शिक्षा के लिए छात्रों के पास पहले की तुलना में वित्तीय मदद के ज्यादा रास्ते होंगे।

सरकार ने इस योजना के लिए बजट भी बढ़ाया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 886 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी गई थी। अब वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 950 करोड़ रुपये के व्यय को मंजूरी मिली है। यानी पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस बार योजना के लिए 64 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए जाएंगे।

22/08/2026

मोबाइल के लिए रूठा बेटा… कुछ ही मिनटों में उजड़ गया पूरा परिवार!

कभी-कभी जिंदगी में होने वाली छोटी-सी बहस… ऐसा दर्द दे जाती है, जिसकी भरपाई पूरी जिंदगी भी नहीं हो सकती।

छत्रपति संभाजीनगर से सामने आई एक बेहद दुखद घटना ने हर किसी को झकझोर दिया। 19 साल का कुनाल मोबाइल फोन को लेकर अपने माता-पिता से नाराज होकर पहाड़ी पर चला गया। माता-पिता उसे समझाने पीछे पहुंचे। पुलिस भी मौके पर पहुंची, लेकिन हालात संभल नहीं सके।

कुनाल को रोकने की कोशिश में उसके पिता भी पहाड़ी से गिर गए। पति और बेटे को गिरते देख मां ने भी अपनी जान गंवा दी।

कुछ ही मिनटों में एक पूरा परिवार खत्म हो गया।

सोचिए… एक मोबाइल फोन, जिसकी कीमत कुछ हजार रुपये हो सकती है, उसके लिए तीन जिंदगियों की कीमत कैसे चुकाई जा सकती है?

हर माता-पिता अपने बच्चों की हर इच्छा पूरी नहीं कर सकते। और हर बच्चे को भी अपने माता-पिता की मजबूरियों और हालात को समझना चाहिए।

गुस्सा कुछ मिनट का होता है… लेकिन उसके फैसले का दर्द पूरी जिंदगी रह सकता है।
किसी भी चीज से ज्यादा कीमती जिंदगी है।

परिसीमन का आधार तय: पंचायत-समिति के लिए प्रखंड, जिला परिषद के लिए जिला; वार्ड-पंच के लिए ग्राम पंचायत...बिहार में आगामी ...
22/08/2026

परिसीमन का आधार तय: पंचायत-समिति के लिए प्रखंड, जिला परिषद के लिए जिला; वार्ड-पंच के लिए ग्राम पंचायत...

बिहार में आगामी पंचायत चुनाव से पहले पंचायतीराज संस्थाओं के परिसीमन की प्रक्रिया का खाका तैयार कर लिया गया है। इसमें अलग-अलग स्तर के परिसीमन के लिए प्रशासनिक इकाई भी तय की गई है। ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के परिसीमन के लिए प्रखंड प्रशासनिक इकाई होगा, जबकि जिला परिषद के लिए जिला प्रशासनिक इकाई माना जाएगा। वहीं वार्ड पार्षद और पंच के परिसीमन के लिए ग्राम पंचायत को आधार बनाया जाएगा।

ग्राम पंचायतों की नई सीमा तय करने की प्रक्रिया नीचे से शुरू होगी। मौजूदा पंचायत के पंचायत सचिव, राजस्व कर्मी और अंचल अमीन मिलकर परिसीमन का प्रस्ताव तैयार करेंगे। इसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि पंचायत की सीमा में कौन-कौन से क्षेत्र शामिल होंगे। ग्रामीण इलाकों के लोग अपने पंचायत के इन कर्मियों से परिसीमन से जुड़ी अद्यतन जानकारी भी ले सकेंगे।

प्रस्ताव तैयार होने के बाद इसे संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के पास भेजा जाएगा। बीडीओ तय समय-सीमा के भीतर आम लोगों से प्रस्ताव पर दावा-आपत्ति मांगेंगे। यानी किसी व्यक्ति को पंचायत की प्रस्तावित सीमा में कोई आपत्ति या सुझाव है, तो वह इस चरण में अपनी बात रख सकेगा।

दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा और आगे अनुमंडल पदाधिकारी के पास भेजा जाएगा। इस तरह पंचायत की सीमा तय करने की प्रक्रिया गांव स्तर से शुरू होकर प्रखंड और फिर अनुमंडल स्तर तक आगे बढ़ेगी।

पेपरलेस होते ही जमीन रजिस्ट्री में भारी गिरावट, 4 दिन में 2195 ही दस्तावेज; डीडराइटरों के सहयोग पर उठे सवाल...बिहार के स...
22/08/2026

पेपरलेस होते ही जमीन रजिस्ट्री में भारी गिरावट, 4 दिन में 2195 ही दस्तावेज; डीडराइटरों के सहयोग पर उठे सवाल...

बिहार के सभी 141 निबंधन कार्यालय पेपरलेस होने के बाद जमीन-मकान की रजिस्ट्री में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई है। 17 से 20 अगस्त के बीच राज्यभर में सिर्फ 2,195 रजिस्ट्री हुईं, जबकि इसके ठीक पहले 13 से 16 अगस्त तक 16,210 मकान और जमीन के दस्तावेज रजिस्टर्ड हुए थे। यानी चार दिनों में रजिस्ट्री की संख्या में करीब 80 फीसदी की कमी आई है।

इस गिरावट की एक बड़ी वजह राज्य के करीब 12 हजार दस्तावेजनवीस यानी डीडराइटर या कातिब के नई व्यवस्था में सहयोग नहीं करने को बताया जा रहा है। पेपरलेस व्यवस्था लागू होने से पहले राज्य में रोजाना औसतन करीब 6 हजार रजिस्ट्री होती थीं, जो अब घटकर करीब 250 प्रतिदिन रह गई हैं। 17 से 20 अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक, 141 निबंधन कार्यालयों में औसतन हर कार्यालय में रोज 15 से 16 रजिस्ट्री हुईं। इसके मुकाबले 13 से 16 अगस्त के बीच यह औसत करीब 114 से 120 रजिस्ट्री प्रतिदिन था।

दरअसल, बिहार में निबंधन कार्यालयों को चरणबद्ध तरीके से पेपरलेस किया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 11 जुलाई को हाजीपुर निबंधन कार्यालय से इसकी शुरुआत की थी। उस दिन 10 कार्यालय पेपरलेस हुए थे, जबकि 17 जुलाई को 40 और कार्यालय इस व्यवस्था में शामिल किए गए। इसके बाद 17 अगस्त तक राज्य के सभी 141 निबंधन कार्यालय पेपरलेस हो गए।

विभाग का कहना है कि रजिस्ट्री में कमी की वजह नई व्यवस्था को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अनुसार पेपरलेस व्यवस्था से जमीन, मकान और फ्लैट की रजिस्ट्री पहले से अधिक सुविधाजनक हुई है। दस्तावेजनवीस और स्टांप विक्रेताओं को सेवा प्रदाता बनाया गया है और किसी को व्यवस्था से हटाया नहीं गया है। विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था में उन्हें काम का अधिक अवसर भी दिया गया है।

नई व्यवस्था में अनुज्ञप्ति प्राप्त सेवा प्रदाताओं को दस्तावेज तैयार करने के लिए पारिश्रमिक भी तय किया गया है। एक लाख रुपये तक के दस्तावेज पर 1,000 रुपये, एक लाख से अधिक और पांच लाख रुपये तक के दस्तावेज पर 2,500 रुपये और पांच लाख रुपये से अधिक मूल्य के दस्तावेज पर 5,000 रुपये पारिश्रमिक निर्धारित है।

मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री मदन सहनी ने भी माना कि पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री घटी है। उन्होंने कहा कि दस्तावेजनवीस सहयोग नहीं कर रहे हैं और उनसे सहयोग करने की अपील की है। मंत्री के मुताबिक नई व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है और इससे जमीन रजिस्ट्री में फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी।

पंचायत प्रतिनिधि की कार्यकाल में मौत हुई तो परिवार को मिलेंगे 5 लाख रुपये, जानिए किसे मिलेगा लाभ और कैसे मिलेगी राशि...ब...
21/08/2026

पंचायत प्रतिनिधि की कार्यकाल में मौत हुई तो परिवार को मिलेंगे 5 लाख रुपये, जानिए किसे मिलेगा लाभ और कैसे मिलेगी राशि...

बिहार में पंचायत प्रतिनिधियों के परिवारों के लिए सरकार ने आर्थिक सुरक्षा का प्रावधान किया है। त्रिस्तरीय पंचायत के किसी निर्वाचित प्रतिनिधि की कार्यकाल के दौरान मृत्यु होने पर उसके आश्रित परिवार को 5 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान दिया जाएगा। यह व्यवस्था 27 जून 2025 से लागू है। इसका मकसद जनसेवा से जुड़े प्रतिनिधि की अचानक मौत के बाद उसके परिवार को आर्थिक परेशानी से बचाना है।

यह लाभ त्रिस्तरीय पंचायत के पात्र निर्वाचित प्रतिनिधियों के परिवार को मिलेगा। नियम के अनुसार, निर्वाचित होने की घोषणा की तारीख से लेकर पद पर बने रहने की अवधि तक यदि किसी पात्र प्रतिनिधि की मृत्यु होती है, तो उसके आश्रित परिवार को अनुग्रह अनुदान दिया जाएगा।

इस व्यवस्था की खास बात यह है कि सहायता केवल दुर्घटना या किसी विशेष परिस्थिति में हुई मौत पर ही नहीं मिलेगी। कार्यकाल के दौरान सामान्य मृत्यु होने पर भी पात्र पंचायत प्रतिनिधि के आश्रित परिवार को 5 लाख रुपये देने का प्रावधान है। यानी मृत्यु की परिस्थिति के आधार पर सहायता को सीमित नहीं किया गया है।

पंचायत प्रतिनिधि की मृत्यु के बाद परिवार को यह राशि पाने के लिए निर्धारित सरकारी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। संबंधित मामले में पहले पात्रता की जांच और जरूरी सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद सक्षम स्तर से स्वीकृति मिलने पर अनुग्रह अनुदान देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके लिए परिवार को आवेदन और आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

स्वीकृति के बाद सहायता राशि लाभार्थी तक पहुंचाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। राशि सीधे बैंक खाते के माध्यम से देने की व्यवस्था से भुगतान में पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलेगी और परिवार को आर्थिक सहायता मिलने की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है।

पंचायत स्तर पर मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, वार्ड सदस्य और पंच जैसे निर्वाचित प्रतिनिधि गांव की स्थानीय व्यवस्था और लोगों की समस्याओं से जुड़े रहते हैं। ऐसे में कार्यकाल के दौरान किसी प्रतिनिधि की मृत्यु होने पर परिवार के सामने अचानक आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। 5 लाख रुपये का यह अनुग्रह अनुदान ऐसे समय में परिवार के लिए आर्थिक सहारा बनेगा।

बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में गतिविधियां तेज होने के बीच इस व्यवस्था की अहमियत और बढ़ जाती है। पंचायत प्रतिनिधियों से जुड़ी आर्थिक सुरक्षा का यह प्रावधान चुनाव लड़ने वाले और निर्वाचित प्रतिनिधियों के परिवारों में भी सुरक्षा का भरोसा बढ़ा सकता है।

सरकार की इस व्यवस्था का सीधा उद्देश्य यही है कि पंचायत प्रतिनिधि की मृत्यु के बाद उसके आश्रित परिवार को मुश्किल समय में आर्थिक मदद मिल सके और अचानक पैदा हुए आर्थिक संकट से उसे तत्काल राहत दी जा सके।

Online Registry शुरू होते ही जमीन की खरीद-बिक्री सुस्त, Munger में 16 दिन में सिर्फ 5 रजिस्ट्री; साइबर ठगी और OTP को लेक...
21/08/2026

Online Registry शुरू होते ही जमीन की खरीद-बिक्री सुस्त, Munger में 16 दिन में सिर्फ 5 रजिस्ट्री; साइबर ठगी और OTP को लेकर भी सवाल...

बिहार में जमीन रजिस्ट्री को कागज रहित बनाने की नई व्यवस्था शुरू होते ही कई जगह इसका असर कामकाज पर दिखने लगा है। कुछ रजिस्ट्री कार्यालयों में लोगों की संख्या काफी कम हो गई है, तो कई जगह दस्तावेज लेखक और स्टांप विक्रेता काम बंद कर विरोध कर रहे हैं। नई प्रक्रिया को लेकर जमीन खरीदने-बेचने वालों में भी असमंजस है। इसका असर रजिस्ट्री की संख्या के साथ सरकार के राजस्व पर भी पड़ रहा है। मुंगेर में स्थिति सबसे ज्यादा चर्चा में है।

मुंगेर में 3 अगस्त से कागज रहित रजिस्ट्री शुरू हुई थी। 16 दिन बाद जिला निबंधन कार्यालय में सिर्फ पांच दस्तावेजों की रजिस्ट्री हो सकी। खड़गपुर में भी अब तक केवल एक दस्तावेज की रजिस्ट्री हुई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नई व्यवस्था के बाद रजिस्ट्री का काम कितनी धीमी रफ्तार से चल रहा है।

इसका सीधा असर सरकारी राजस्व पर भी पड़ा है। मुंगेर में पांच रजिस्ट्री से करीब 10 लाख 14 हजार 629 रुपये राजस्व मिला, जबकि जुलाई में 461 दस्तावेजों की रजिस्ट्री से सरकार को 6 करोड़ 32 लाख 65 हजार 507 रुपये की आय हुई थी। इस वित्तीय वर्ष में मुंगेर जिला निबंधन कार्यालय को 65 करोड़ 7 लाख रुपये राजस्व जुटाने का लक्ष्य दिया गया है। ऐसे में रजिस्ट्री की रफ्तार कम होना इस लक्ष्य के लिए चुनौती बन सकता है।

नई व्यवस्था में रजिस्ट्री के लिए कागज के दस्तावेज जमा करने की जगह उनकी पीडीएफ ऑनलाइन जमा करनी होगी। जमीन खरीदने और बेचने वाले लोगों की पहचान भी ऑनलाइन होगी। इसके बाद डिजिटल हस्ताक्षर और ई-केवाईसी के जरिए आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे रजिस्ट्री की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और पारदर्शी होगी।

हालांकि, इसी ऑनलाइन प्रक्रिया को लेकर दस्तावेज लेखक और स्टांप विक्रेता कई सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि मोबाइल और OTP पर आधारित प्रक्रिया बुजुर्गों और कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए मुश्किल हो सकती है। डिजिटल हस्ताक्षर, ऑनलाइन दस्तावेज और OTP जैसी प्रक्रिया समझने में परेशानी के साथ इनके गलत इस्तेमाल की आशंका भी जताई जा रही है। उनका कहना है कि लोगों को नई व्यवस्था की सही जानकारी दिए बिना इसे अपनाना मुश्किल होगा।

ऑनलाइन रजिस्ट्री में साइबर ठगी को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। दस्तावेज लेखकों का कहना है कि फर्जी वेबसाइट या लिंक के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा सकता है। OTP की ठगी, मोबाइल और ईमेल में सेंध जैसी आशंकाएं भी हैं। वे यह भी जानना चाहते हैं कि अगर ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए किसी की जमीन के साथ धोखा होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।

मुंगेर के अलावा आरा, पूर्णिया, सासाराम समेत कई जिलों में भी नई व्यवस्था को लेकर विरोध और असमंजस की स्थिति है। कई जगह दस्तावेज लेखक और स्टांप विक्रेता काम बंद कर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से उनके काम और रोजगार पर असर पड़ सकता है और वे सरकार से अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं।

वहीं, निबंधन विभाग के अधिकारी दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं की सभी आशंकाओं से सहमत नहीं हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन जमा किए गए जमीन के दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें बैंक या अदालत में भी ऑनलाइन देखा जा सकेगा। विभाग के अनुसार कागज रहित व्यवस्था से दस्तावेजों में छेड़छाड़ और फर्जीवाड़े की संभावना भी कम होगी।

कागज रहित रजिस्ट्री का उद्देश्य प्रक्रिया को आसान, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है, लेकिन शुरुआती दौर में कई जगह इसकी वजह से काम प्रभावित हुआ है। अब चुनौती यह है कि लोगों को नई प्रक्रिया समझाई जाए और दस्तावेज लेखक व स्टांप विक्रेताओं की चिंताओं को दूर किया जाए। तभी सुविधा के लिए शुरू की गई यह व्यवस्था जमीन खरीदने-बेचने वालों के लिए वास्तव में आसान बन पाएगी।

‘जिंदा रहते साथ दें…’, आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता की भावुक अपील; 22 अगस्त को राजभवन मार्च, जानिए क्यों नहीं थम रहा आंद...
21/08/2026

‘जिंदा रहते साथ दें…’, आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता की भावुक अपील; 22 अगस्त को राजभवन मार्च, जानिए क्यों नहीं थम रहा आंदोलन...

बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। पटना के गर्दनीबाग में भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक, लंबित बहाली और परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव जैसी मांगों को लेकर छात्रों का महाआंदोलन जारी है। अब इसमें शिक्षक भर्ती और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दे भी शामिल हो गए हैं। कई पीएचडी स्कॉलर भी धरने पर बैठे हैं।

गर्दनीबाग में कई छात्र आमरण अनशन कर रहे हैं। छात्र नेता अमन कुमार पिछले चार दिनों से अन्न-जल त्यागकर अनशन पर हैं और लगातार उनकी तबीयत बिगड़ रही है। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखने की बात कही है। वीडियो संदेश के जरिए उन्होंने बिहार के छात्रों और युवाओं से आंदोलन में शामिल होने की अपील की।

अमन कुमार का कहना है कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि बिहार के युवाओं के भविष्य की है। उनके मुताबिक प्रमुख भर्तियों में कथित गड़बड़ी, सेटिंग, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में देरी से युवा परेशान हैं। परीक्षा कैलेंडर जारी होने के बावजूद उस पर समय से अमल नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अपनी बुनियादी मांगों के लिए युवाओं को भूख हड़ताल तक क्यों करनी पड़ रही है।

अपने संदेश में अमन ने भावुक अपील करते हुए कहा कि वह अभी जिंदा हैं, इसलिए अपनी बात लोगों तक पहुंचा पा रहे हैं। अगर 20-30 दिन बाद वह नहीं रहे तो बाद में समर्थन देने का कोई मतलब नहीं होगा। उन्होंने छात्रों से कहा कि ‘जिंदा रहते लड़ाई में साथ दें’ और अभी आंदोलन का हिस्सा बनें। दिल्ली के जंतर-मंतर, पटना के गांधी मैदान और रांची के आंदोलनों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं की एकजुट आवाज सरकारों पर दबाव बनाती है।

इसी आंदोलन में पीएचडी होल्डर कुमुद पटेल भी आमरण अनशन पर हैं। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को उनके अनशन का 18वां दिन है, लेकिन अब तक सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं आया है। उनका कहना है कि झारखंड में देवेंद्रनाथ महतो के अनशन के 16वें दिन सरकार ने बात की थी, जबकि बिहार में 18 दिन बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि 22 अगस्त को वे लोग व्हीलचेयर के सहारे लोक भवन मार्च करेंगे।

TRE-4 का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद भी आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। शिक्षक भर्ती परीक्षा-4 के तहत 32,388 शिक्षकों की भर्ती होनी है और आवेदन 1 सितंबर से 30 सितंबर तक लिए जाएंगे। लेकिन अभ्यर्थियों की मांग केवल भर्ती शुरू करने तक सीमित नहीं है। वे TRE-4 में दो-स्तरीय परीक्षा की जगह एकल परीक्षा कराने और निगेटिव मार्किंग खत्म करने की मांग कर रहे हैं।

इसके साथ BSSC की लंबित परीक्षाएं भी आंदोलन का बड़ा मुद्दा हैं। अभ्यर्थी लंबे समय से अटकी परीक्षाओं की तारीख जल्द घोषित करने और पूरी भर्ती प्रक्रिया तय समय में पूरी करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि केवल परीक्षा कैलेंडर जारी करना पर्याप्त नहीं, उस पर समय से अमल भी होना चाहिए।

आंदोलनकारी संविदाकर्मियों को भर्ती में मिलने वाले अतिरिक्त अंकों यानी वेटेज का भी विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलना चाहिए। इसके अलावा 1799 दरोगा भर्ती की मेंस परीक्षा और BPSC से जुड़े मुद्दे भी उनकी मांगों में शामिल हैं।

अब छात्रों ने आंदोलन को गर्दनीबाग से आगे ले जाने की तैयारी कर ली है। 22 अगस्त को छात्र, रिसर्च स्कॉलर और गेस्ट टीचर आर-ब्लॉक स्थित वीर कुंवर सिंह पार्क से राजभवन मार्च निकालेंगे और लोक भवन तक जाएंगे। इस मार्च में TRE-4 की दो-स्तरीय परीक्षा वापस लेने, असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के नियमों में बदलाव और खाली पदों को भरने जैसी मांगें उठाई जाएंगी।

आंदोलनकारियों के मुताबिक उनकी मांगें करीब 13 से 14 सूत्रीय हैं, जिनमें BPSC, BSSC, दरोगा भर्ती, TRE-4 और BET से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। अमन कुमार का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक वह अपना आमरण अनशन खत्म नहीं करेंगे।

फिलहाल गर्दनीबाग में आंदोलन जारी है। एक तरफ आमरण अनशन कर रहे छात्रों की तबीयत बिगड़ रही है, वहीं दूसरी ओर 22 अगस्त के राजभवन मार्च की तैयारी हो रही है। छात्रों की नाराजगी सिर्फ नई भर्ती के नोटिफिकेशन को लेकर नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने तथा लंबित परीक्षाओं को पूरा कराने को लेकर है।

कोर्ट केस लटकाने वाले 13 CO पर DM सख्त, मांगा स्पष्टीकरण; 1,456 शिकायतें भी जल्द निपटाने का निर्देश...पटना जिले में कोर्...
21/08/2026

कोर्ट केस लटकाने वाले 13 CO पर DM सख्त, मांगा स्पष्टीकरण; 1,456 शिकायतें भी जल्द निपटाने का निर्देश...

पटना जिले में कोर्ट केस से जुड़े मामलों के समय पर निपटारे में लापरवाही पर जिलाधिकारी कुन्दन कुमार ने 13 अंचल पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। इनमें संपतचक, पटना सिटी, दीदारगंज, खुसरूपुर, दनियावां, फतुहा, नौबतपुर, दुल्हिन बाजार, विक्रम, पालीगंज, पंडारक, बाढ़ और मोकामा के सीओ शामिल हैं। डीएम ने साफ किया कि जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

साप्ताहिक समन्वय समिति की बैठक में विभिन्न विभागों के कामकाज की समीक्षा के दौरान यह कार्रवाई की गई। डीएम ने कहा कि किसी योजना के क्रियान्वयन में दूसरे विभाग से जुड़ी कोई अड़चन हो तो उसे समन्वय समिति की बैठक में रखा जाए, ताकि उसका समाधान तुरंत किया जा सके। साथ ही बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम के तहत लोगों को सेवाएं तय समय में उपलब्ध कराने और उन्हें अनावश्यक परेशानी से बचाने पर भी जोर दिया।

बैठक में शिकायतों के निपटारे की भी समीक्षा हुई। डीएम ने सहयोग पोर्टल पर लंबित मामलों को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया। जिले में अब तक 30,265 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें 28,809 मामलों का निपटारा हो चुका है। अब 1,456 मामले लंबित हैं, जिन्हें जल्द पूरा करने को कहा गया है।

इसके अलावा 36 मामलों में शोकॉज का जवाब और संबंधित रिपोर्ट सहयोग पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश भी दिया गया। यानी अब अधिकारियों के कामकाज के साथ शिकायतों के समय पर निपटारे और कार्रवाई की रिपोर्ट पर भी सीधी नजर रखी जाएगी।

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