12/09/2026
सीतामढ़ी में खाकी पर उठे गंभीर सवाल: जान का खतरा बताने के बाद भी नहीं मिली सुरक्षा, पार्षद पति हत्याकांड में डुमरा थानाध्यक्ष व आईओ निलंबित
द वॉइस ऑफ बिहार न्यूज़ (विशेष प्रतिनिधि)
सीतामढ़ी। डुमरा थाना क्षेत्र के केथरिया गांव में जिला परिषद क्षेत्र संख्या-13 की सदस्य दिलखुश देवी के पति बैद्यनाथ महतो की दिनदहाड़े हुई निर्मम हत्या के मामले में पुलिस महकमे में बड़ा हड़कंप मच गया है। मृतक द्वारा अपनी जान को गंभीर खतरा बताते हुए बार-बार सुरक्षा की गुहार लगाने के बावजूद डुमरा पुलिस की उदासीनता सामने आई है, जिसकी परिणति एक जनप्रतिनिधि प्रतिनिधि की हत्या के रूप में हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कप्तान (एसपी) अमित रंजन ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए डुमरा थानाध्यक्ष और केस के अनुसंधानकर्ता (आईओ) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
कांड संख्या 432/26 में घोर लापरवाही पर गिरी गाज
एसपी अमित रंजन ने जारी जिलादेश में स्पष्ट किया कि कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, अपराध नियंत्रण में विफलता और विधि-व्यवस्था में गंभीर शिथिलता बरतने के आरोप में डुमरा थानाध्यक्ष सह पुलिस इंस्पेक्टर मुकेश कुमार और कांड के अनुसंधानकर्ता (IO) पुलिस अवर निरीक्षक (पुअनि) आदित्य कुमार को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान दोनों पदाधिकारियों का मुख्यालय पुलिस केंद्र (लाइन हाजिर) सीतामढ़ी निर्धारित किया गया है। एसपी ने दोनों निलंबित अधिकारियों से 5 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया है, वहीं पूरे मामले की जांच का जिम्मा सदर एसडीपीओ-2 आशीष आनंद को सौंपते हुए 48 घंटे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
29 अगस्त को ही दे दी थी हत्या के प्रयास की लिखित शिकायत
आधिकारिक आदेश के अनुसार, मृतक बैद्यनाथ महतो ने गत 29 अगस्त को ही डुमरा थाने में लिखित आवेदन देकर नामजद शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उल्लेख था कि 28 अगस्त की देर रात करीब 1:15 बजे चार बाइकों पर सवार होकर पहुंचे त्रिभुवन कुमार, मो. एजाज अहमद, मो. एहसान अहमद एवं चार अज्ञात बदमाशों ने घर पर जान मारने की नीयत से ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। पुलिस ने मौके से जिंदा खोखा भी बरामद किया था, लेकिन इसके बावजूद थानाध्यक्ष और अनुसंधानकर्ता ने नामजद आरोपियों को गिरफ्तार करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
आरोपी के पिता को बिना सूचना दिए थाने से छोड़ा, अगले ही दिन मर्डर
जांच में यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि 11 सितंबर को पुलिस ने एक मुख्य आरोपी के पिता को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था, लेकिन बिना वरीय अधिकारियों को संज्ञान में दिए उसे थाने से छोड़ दिया गया। पुलिस की इसी ढिलाई और लापरवाही का फायदा उठाकर बेखौफ अपराधियों ने 12 सितंबर की सुबह करीब 6 बजे मॉर्निंग वॉक पर निकले बैद्यनाथ महतो को गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया। इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में पुलिस प्रशासन के खिलाफ आक्रोश चरम पर है।
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