बिहार विधानसभा के फ़्लोर टेस्ट में पास हुई नीतीश कुमार की सरकार.
वोटिंग से पहले विपक्षी विधायकों ने वाकआउट किया. एनडीए को पक्ष में 130 वोट पड़े.
12/02/2024
राष्ट्रीय जनता दल के तीन विधायक चेतन आनंद, प्रह्लाद यादव और नीलम देवी एनडीए के खेमे में बैठे हैं.
पूर्व आईएएस अधिकारी जी कृष्णैया के हत्यारे आनंद मोहन सिंह के बेटे हैं चेतन आनंद.
खबर है कि आनंद मोहन अपनी पत्नी लवली आनंद को लोकसभा का टिकट दिलाने के लिए पाला बदल कर एनडीए की ओर बैठ गए हैं.
इन्हीं चेतन आनंद की कल तेजस्वी आवास में गाना गाते, क्रिकेट खेलते तस्वीर वीडियो वायरल हो रहे थे.
आनंद मोहन और इनके परिवार ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि राजपूतों में जयचंद का होना एक सार्वभौमिक सत्य होना है.
12/02/2024
आज साबित करना होगा बिहार में नीतीश कुमार के शासन वाली सरकार को बहुमत.
विधानसभा अध्यक्ष आरजेडी के अवध बिहार चौधरी को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव. लेकिन उसके लिए चाहिए 122 का आँकड़ा आँकड़ा.
तमाम सियासत दलों द्वारा पिछले दो-तीन दिनों के दौरान की गई अपने विधायकों की बाड़ेबंदी, नज़रबंदी और घेराबंदी के बाद आज फ़्लोर टेस्ट की अग्निपरीक्षा.
की टीम पहुँच चुकी है बिहार के ल्यूट्यन कहे जाने वाले नेताओं, मंत्रियों एंव विधानमंडल के क़रीब जहां से हम आपको देते रहेंगे आगे की पल-पल की प्रमाणिक एवं विश्वसनीय जानकारी. बने रहें हमारे साथ.
अभी तक दोनों ओर के गठबंधनों का है दावा-“ हमारे पास है बहुमत का आँकड़ा “.
फ़्लोर टेस्ट से पहले बिहार विधान मंडल परिसर के अंदर भारी पुलिस बल की मौजूदगी.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहुँचे विधानसभा. बाक़ी अन्य विधायकों का आना भी धीरे-धीरे जारी.
आज से विधानसभा के बजट सत्र की कार्यवाही शुरू हो रही है. राज्यपाल के अभिभाषण के बाद शुरू होगी कार्यवाही.
05/02/2024
शंकर महादेवन के म्यूज़िक बैंड ‘शक्ति’ के एल्बम को बेस्ट ग्लोबल म्यूज़िक एल्बम का ग्रैमी अवॉर्ड मिला है.
शक्ति बैंड में गिटारिस्ट जॉन मैकलॉफ़लिन, तबला वादक उस्ताद ज़ाकिर हुसैन हैं और गायक शंकर महादेवन हैं. यह फ़्यूजन बैंड है.
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दुनिया के पहले लोकतंत्र की जमीन से हैं हम. मकसद डेफिनीट है. लोक (PEOPLE) को तंत्र (SYSTEM) से जोड़ना.
देह की सत्ता कितनी भी प्रभावी हो जाए, बनारस के उन घाटों पर औकात में आ जाती है जिनसे विचरते हुए हमने DPILLAR की नींव रखी.
यकीन मानिए ! आदिवासी निराशावादी नहीं हैं, हमारे शेष जीवन के वाहक हैं. उन्हीं से होकर आए हैं हम. उनके लिए लड़ेंगे, खुद से लड़ने के वास्ते.
हमें भी पता है कि सिस्टम थेथर हो गया है. बहुत बेरहम भी. हम भगत सिंह को कड़ी बनाएंगे. बिस्मिल, बोस, आजाद और अशफाक को ढूंढ़ लाएंगे.
क्रान्ति ना लेफ्ट में होती है, ना राइट में. बीच का रास्ता भी होता है. जब पटना से फरियाया जा सकता है तो दिल्ली और बंबई से क्यों लड़ें !
इंतजार तकलीफदेह होता है. हमें खयाल है इस बात का भी. डिजिटल इंडिया कभी नहीं होगा, जो भी होगा वो भारत का नागरिक होगा.
हर गली- हर गांव से, हर शहर- हर ठांव पर कोई भगत होगा. फिर से संसद में पर्चे लहराए जाएंगे. ताज हिलाए जाएंगे. कोई कुंदन प्रेम लिखेगा. वो कामरेड भी होगा जिसके संग ही में किसी महापुरुष का अवतरण होगा. समाजवादी लड़का ऐसा होगा जिसमें लोहिया और जेपी भी उतने ही रमते हैं जितने मुलायम और लालू. ईस्ट-वेस्ट, जाति-धर्म, अमीरी-गरीबी और रंग-कौशल के लफड़े से दूर एक और भी लड़का होगा जो इतिहास लिखेगा.
कल्पना करिए. ऐसी D for Democracy कैसा P for Pillar बनाएगी. चलिए बनाते हैं DPILLAR.
प्रस्तावना
जो कर रहे हैं उसका मकसद धनोपार्जन नहीं है. हम अथवा आप यदि इस मकसद से साथ जुड़े हैं तो हमें अभी के अभी खुद को अलग कर लेना चाहिए.
जो देखेंगे वही दिखाएंगे. यानी जहां होंगे, वहीं की बात करेंगे.
जो जैसा होगा, उसे वैसे ही पेश करेंगे.
जिसकी कॉपी होगी, उसकी मनमर्जी से पेश भी की जाएगी.
खबर किसी के खिलाफ भी हो सकती है या फिर किसी के साथ भी, मगर जब भी होगी आम जनता के लिए होगी.
साथी या तो खबर लिखेंगे, या फिर आपबीती.
किसी के काम को (जिसके लिए उसे दुनिया जानती है, या फिर जो उसे सौंपा गया है) लिखेंगे, किसी के जीवन के बारे में लिखने का हमें कोई अधिकार नहीं है.
जिससे हमें पैसा मिलेगा उसके लिए कभी नहीं लिखेंगे.
जाति, धर्म, समुदाय, रंग और कौशल में भेद नहीं करेंगे.
भारतीय संविधान का अक्षरशः पालन करेंगे.
पत्रकारिय धर्म का पालन करते हुए ये सुनिश्चित करेंगे कि राष्ट्रीय कर्तव्यों का निर्वहन हर हाल में कर सकें.
भारत को ठीक वैसा ही बनाने के लिए काम करेंगे जैसा संविधान की प्रस्तावना में निहित है.
विरासत में मिले लोकतंत्र के वरदान को अगली पीढ़ियों के लिए सहेज कर रखने का काम करेंगे.
हम आखिर तक सत्ता से सवाल करेंगे. मर जाएंगे, मगर सत्ता के साथ नहीं देंगे.