06/09/2022
: किंग या किंग मेकर - सिर्फ दिल्लगी या गुल खिलाएगा दिल्ली का सफर
: किंग बनेंगे नीतीश कुमार या बनेंगे किंग मेकर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए विपक्षी दलों को एकजुट करने की मुहिम के साथ-साथ ये सवाल भी चल रहे हैं. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली के सफर पर हैं. भाजपा कह रहा है ये सफर महज दिल्लगी है. जदयू कह रहा है 2024 में मोदी को सत्ता से बेदखल करने की शुरुआत है. इस बीच 25 सितंबर को हरियाणा के फतेहाबाद में सजने वाले ओम प्रकाश चौटाला के मंच पर विपक्षी दलों के नेताओं के हाथ में हाथ डाल साथ खड़े होने की अटकलें लग रही है. दावा किया जा रहा है कि कर्नाटक में हुए कुमार स्वामी के शपथ-ग्रहण समारोह वाले दृश्य एक बार फिर देखे जा सकते हैं. कुमार स्वामी के शपथग्रहण में कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी, उनकी मां कांग्रेस की वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गांधी, समाजवादी पार्टी के नेता यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, बसपा सुप्रीमो मायावती, आंध्र प्रदेश के तत्कालीन सीएम चंद्र बाबू नायडू, राजद नेता बिहार के वर्तमान उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के नेता सीताराम येचुरी और एनसीपी के शरद पवार सहित कई नेता मौजूद थे. 2019 के लोकसभा चुनाव से लगभग एक साल पहले मंच पर 'एकजुटता' के सीन को तब भी नरेंद्र मोदी के खिलाफ विकल्प की तस्वीर बताया गया था. 25 सितंबर की चौटाला की रैली में भी नीतीश कुमार, ममता बनर्जी, प्रकाश सिंह बादल, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव के मंच पर साथ रहने का दावा किया जा रहा है. नीतीश ने दिल्ली सफर के दौरान मंगलवार को ओम प्रकाश चौटाला से मुलाकात की है. नीतीश दो दिनों के भीतर दिल्ली में राहुल गांधी, सीताराम येचुरी, डी. राजा, कुमार स्वामी और अरविंद केजरीवाल सरीखे शीर्ष नेताओं से भी मिल चुके हैं. नीतीश ने मुलाकात की शुरुआत लालू प्रसाद - राबड़ी देवी - तेजस्वी यादव से मिलकर की है.
नीतीश की मुलाकातों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा स्वाभाविक है. वजह है नीतीश का मोदी को 2024 में बेदखल कर देने का दावा. पहले तो नीतीश ने भाजपा को 50 सीटों के भीतर सिमटा देने का दावा भी कर दिया था. हालांकि अगले ही दिन पलटी मारते हुए उन्होंने कहा था कि संख्या-वंख्या की बात नहीं करते. प्रधानमंत्री पद के चेहरे पर भी नीतीश अब खुद की दावेदारी से इंकार कर रहे हैं. मतलब गोलबंदी कर नीतीश किंग मेकर की भूमिका में रहना चाहते हैं. हालांकि उनके बॉडी लैंग्वेज से राजनीतिक विश्लेषक किंग मेकर वाली भूमिका को पचा नहीं पा रहे.
नीतीश की ऐसी कोशिशों की सफलता पर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है. वजह है विपक्षी एकजुटता के अब तक हुए प्रयासों की असफलता. किंग बनने के सवाल पर तलवारें आपस में ही खिंच जाती है. ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, के. चंद्रशेखर राव सहित दर्जन भर चेहरे सामने आ जाते हैं. सवाल लाजिमी है कि नीतीश का प्रयास सिर्फ दिल्लगी बनकर रह जाएगा या गुल खिलाकर मोेदी की कुर्सी हिला पाएगा.
बिहार के उपमुख्यमंत्री रहे सुशील कुमार मोदी तो कहते हैं - बिहार बाढ और सूखे की दोहरी मार झेल रहा है, तब नीतीश कुुमार केवल सुर्खियों में रहने के लिए दिल्ली के राजनीतिक पर्यटन पर हैं. नीतीश कुमार उन दलों को कांग्रेस के साथ लाने के असंभव अभियान पर हैं, जो विभिन्न राज्यों में कांग्रेस से लड़ कर ही सत्ता में हैं. केरल, पश्चिम बंगाल, दिल्ली इसके प्रमाण हैं. हालांकि पटना आए के. चंद्रशेखर राव ने यह संकेत दिया था कि विपक्ष न्यूनतम साझा कार्यक्रम तय कर चुनाव लड़ सकता है. इतना तो तय है कि 2024 से पहले नीतीश अगर विपक्ष कोे एक पलड़े पर तौलने में सफल हो जाते हैं तो किंग या किंग मेकर का ताज उनके सर सजेगा.