23/05/2020
#महावीर_मन्दिर_का_इतिहास।
महावीर मन्दिर पटना देश में अग्रणी हनुमान मन्दिरों में से एक है। हज़ारों भक्तों ने श्री हनुमानजी की आराधना और मन्दिर की यात्रा की। यह एक मनोकामना मन्दिर है, जहां भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है, और यह मन्दिर में भक्तों की बढ़ती संख्या का कारण है।
अतीत में सन् 1948 ई. में पटना उच्च न्यायालय ने इसे सार्वजनिक मन्दिर घोषित कर दिया। नए भव्य मन्दिर का विनिर्माण सन् 1983 ई. से सन् 1985 ई. के बीच माननीय आचार्य किशोर कुणाल और उनके भक्तो के योगदान से किया गया था, और वर्तमान में ये देश के विश्व प्रसिद्ध मन्दिरों में से एक है।
मन्दिर में श्री हनुमान जी की दो युग्म प्रतिमाएं एक साथ हैं, पहली परित्राणाय साधूनाम् जिसका अर्थ है अच्छे व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए और दूसरी विनाशाय च दुष्कृताम् जिसका अर्थ है दुष्ट व्यक्तियों की बुराई दूर करने के लिए। ये मन्दिर सन् 1900 ई. के पहले तक रामानंद संप्रदाय के अंतर्गत रहा। बीच में कुछ अवधि के लिए यानी सन् 1948 ई. तक गोसाईं सन्यासियों के संप्रदाय के अधीन था।
सन् 1948 ई. में पटना उच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार मन्दिर अज्ञात काल से मौजूद है। ऐतिहासिक शोधों से संकेत मिलते हैं कि यह मन्दिर मूल रूप से स्वामी बालानंद द्वारा 1720 ई. में स्थापित किया गया था।
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