01/09/2026
"अस्पताल नहीं, सरकारी कसाईखाना! इलाज में लापरवाही से मरीज की मौत, बेपरवाह डॉक्टरों का महा-रोस्ट!"अरे भाई, बिहार के स्वास्थ्य विभाग और सरकारी बाबुओं की अक्ल पर 21 तोपों की सलामी देने का मन करता है!
एक तरफ तो जनता को ज्ञान बांटा जा रहा है कि ऐसा 'AI ऐप' आ रहा है जो पूरे बिहार का सिस्टम एक झटके में चकाचक कर देगा। अरे भाई, जब सारा काम ऐप ही करेगा, तो इन कुर्सी तोड़ मंत्रियों और लाल-बत्ती वाले बाबुओं को घर बैठाओ और सीधे उसी AI ऐप को मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की कुर्सी पर बैठा दो! कम से कम वो जनता का करोड़ों का टैक्स और समोसा-चाय का बिल तो नहीं डकारेगा!
अब ज़रा इन हुक्मरानों का नया कारनामा सुनिए! आरा सदर अस्पताल से लेकर बिहार के सरकारी अस्पतालों में इलाज सुधरे या न सुधरे, डॉक्टर मिले या न मिले, दवाई मिले या न मिले... लेकिन इन साहेब बहादुरों ने अपनी पोल छुपने के डर से एक नया तुगलकी फरमान जारी कर दिया—"अस्पताल के अंदर कोई वीडियो नहीं बनाएगा!"
अरे वाह रे सुशासन के पहरेदारों!
अस्पताल में स्ट्रेचर नदारद रहे—चलेगा!
आईसीयू में आवारा कुत्ते सोएं—चलेगा!
मरीज ज़मीन पर तड़प-तड़प कर दम तोड़ दे—चलेगा!
दवाइयां बाहर मेडिकल स्टोर पर बिक जाएं—चलेगा!
लेकिन अगर किसी आम इंसान ने जेब से मोबाइल निकाल कर तुम्हारी इस सड़ांध को रिकॉर्ड कर लिया... तो तुम्हारे पूरे सिस्टम की इज्जत खतरे में आ जाएगी?
और हमारी बहादुर पुलिस का जलवा भी देख लीजिए! जो पुलिस दिन-दहाड़े गोली मारने वाले, लूटने वाले और रंगदारी मांगने वाले गुंडों के सामने भीगी बिल्ली बन जाती है, वो अस्पताल की बदहाली रिकॉर्ड करने वाले लड़के को ऐसे घेरती है जैसे कोई अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी पकड़ लिया हो!
अरे हुक्मरानों, बीमारी छुपाने से कैंसर ठीक नहीं होता! कैमरे पर बैन लगाकर अपनी नाकामी छुपाने की ये नौटंकी बंद करो, और अगर थोड़ी सी भी गैरत बची है तो अस्पतालों में डॉक्टर और दवा का इंतज़ाम करो!
आपको क्या लगता है भाई, अस्पताल सुधारने के बजाय कैमरा बंद कराने वाले इन बाबुओं और मंत्रियों के इस ड्रामे पर आपका क्या कहना है? नीचे कमेंट बॉक्स में इनकी क्लास ज़रूर लगाइए!