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महाराजा सातन पासी की जयंती पर हार्दिक शुभकामनाएं ।संघर्ष: आल्हा-ऊदल जयचंद 1170 - 1182 AD          संडीला संघर्ष बख्तियार...
02/04/2026

महाराजा सातन पासी की जयंती पर हार्दिक शुभकामनाएं ।

संघर्ष: आल्हा-ऊदल जयचंद 1170 - 1182 AD
संडीला संघर्ष बख्तियार खिलजी 1202 AD

महाराजा सातन पासी कन्नौज के राजा जयचन्द के समकालीन थे। राजा जयचन्द का राज्य सन् 1170 ई. से लेकर सन् 1194 ई. मध्य तक था , इनका निरंतर 12 वर्षों तक कन्नौज के राजा जयचंद से बैर था इनकी सूझबूझ और प्रभाव से 12 साल तक जयचंद राजा सातन से जीत नहीं पाए, आगे इनकी प्रसिद्ध लड़ाई आल्हा ऊदल की सेनाओं से हुई इस युद्ध की बेहद चर्चा हुई है तब से पासी इतिहास में प्रसिद्ध हो गए,इतिहासकार यह मानते हैं कि राजा सातन पासी का राज्य सन् 1150 ई. से सन् 1202 ई. के मध्य था कुछ इतिहासकार इनकी लड़ाई बख्तियार खिलजी से संडीला में जो ( एक समय battlefield ) हुआ करती थी बख्तियार खिलजी ने सन 1202 ईस्वी के आसपास इन्हीं से हमले की शुरुवात की थी ।

Ref.no. 1 , Unnao: a Gazetteer being volume ###VIII of the District Gazetteers of the United Provinces of Agra and Oudh
by H.R. Nevill ,1903. page no.115

The north of the district was tradition¬ ally held by the Rajpasis, whose capital was the city of Ramkot, the ancient name of Bangarmau. The story goes that these Rajpasis were conquered by the banaphar chieftains Alha and Udal, who received the grant of the Rangar from the Raja Jai Chandra.

" जिले का उत्तरी भाग परंपरागत रूप से राजपासियों के कब्जे में था, जिनकी राजधानी सातन कोट शहर थी, जो बांगरमऊ का प्राचीन नाम था। कहानी यह है कि इन राजपासियों को बनाफर सरदारों आल्हा और उदल ने जीत लिया था, जिन्हें राजा जय चंद्र से बांगर का अनुदान मिला था। "

Ref.no. 2 Gazetteer of the Province of Oudh: H to M - Volume 2 - HAR Page no .65

Turbulence of the district.-Hardoi was the most violent and turbulent of all the districts of Oudh; it was divided into the chaklas of Sandíla, Sándi, Páli, and Tandiaon; the last in particular included the famous Bangar-the wild district east of and along the Sai-in which the Pásis, the ancestral lords of the soil, had taken refuge and maintained a guerilla warfare with all authority, Hindu or Moslem.

" जिले की अशांति.- हरदोई अवध के सभी जिलों में सबसे अधिक हिंसक और अशांत था; यह संडीला, सांडी, पाली और टंडियान के चकलों में विभाजित था; अंतिम में विशेष रूप से प्रसिद्ध बांगर शामिल था - सई के पूर्व और उसके साथ जंगली जिला - जिसके भूमि के पैतृक स्वामी पासी थे और सभी अधिकारियों, चाहे वो हिंदू हो या मुस्लिम सभी के साथ गुरिल्ला युद्ध जारी रखा था।

Ref.no. 3 The Chronicles of Oonao: A District in Oudh by Elliot 1862 page no.24

" In those days the town of Bangermow was not, and the sur-rounding country took its name from the city of Ramkote. Lit-tle is known of the early history of this town, but its ruins, which lie in the north west corner of the district over-looking the river Sai, still testify to its grandeur and extent. Some of the mounds which mark the site of the ancient buildings are still one hundred feet in height, and the ruins extend over a cir-cumference of several miles. This was the seat of the Rajpasis power, which extended far to the west and north of Ramkote. The Rajpasis is still found in great numbers through all the Hurdui district, and in parts of Seetapore. The last of the lords of Ramkote, Raja Sunthur by name, threw off his allegiance to Canouj, and refused to pay the annual tribute. On this Raja Jeichund gave to Ala and Oodul the grant above mentioned of all the Ganjur country, and they attacked and destroyed Ram-kote, leaving it the shapeless mass of ruins which we now find it. The streams which run between the various mounds cut away the debris, and lay bare at times the massive walls made of enormous bricks, uncemented, or some times turn up relics of the past, caskets full of dust which once was embroidered apparel but which crumbles to the touch, or gold coins and jewels with quaint and uncouth legends. But to those that find them, such treasures ever are as fairy gifts, bringing mis-fortune and misery into the family (3) and dragging the pos-sessors down to irretrievable poverty.

" उन दिनों बांगरमऊ शहर नहीं था और आस-पास के इलाके ने अपना नाम रामकोट शहर से लिया था। इस शहर के शुरुआती इतिहास के बारे में बहुत कम जानकारी है, लेकिन इसके खंडहर, जो जिले के उत्तर-पश्चिमी कोने में सई नदी के किनारे स्थित हैं, आज भी इसकी भव्यता और विस्तार की गवाही देते हैं। प्राचीन इमारतों के स्थल को चिह्नित करने वाले कुछ टीले अभी भी सौ फीट ऊँचे हैं और खंडहर कई मील की परिधि में फैले हुए हैं। यह ~राजपासी~ शक्ति का केंद्र था, जो रामकोट के पश्चिम और उत्तर में बहुत दूर तक फैला हुआ था। ~ राजपासी ~ आज भी हुरदुई जिले और सीतापुर के कुछ हिस्सों में बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। रामकोट के अंतिम शासक, राजा सातन ने कनौज के प्रति अपनी निष्ठा भंग कर दी स्वतंत्र हो गए, और वार्षिक कर देने से इनकार कर दिया। इस पर राजा जयचंद ने आल्हा और ऊदुल को गांजर क्षेत्र का उपरोक्त दान दिया और उन्होंने राम-कोट पर हमला करके उसे नष्ट कर दिया, जिससे वह खंडहरों का एक आकारहीन ढेर बन गया, जैसा कि हम अब पाते हैं। विभिन्न टीलों के बीच बहने वाली धाराएँ मलबे को काट देती हैं, और कभी-कभी विशाल ईंटों से बनी विशाल दीवारें, बिना सीमेंट की, या कभी-कभी अतीत के अवशेष, धूल से भरे ताबूत जो कभी कढ़ाई वाले कपड़े थे, लेकिन छूने पर टूट जाते हैं, या विचित्र और असभ्य किंवदंतियों के साथ सोने के सिक्के और गहने सामने आते हैं। लेकिन जो लोग उन्हें पाते हैं, उनके लिए ऐसे खजाने हमेशा परियों के उपहार की तरह होते हैं, जो परिवार में दुर्भाग्य और दुख लाते हैं (3) और मालिकों को अपूरणीय गरीबी में धकेल देते हैं।

Kunwar Pratap Rawat
The Pasi Landlords ,📯

🚩 अदम्य साहस और वीरता के प्रतीक को नमन 🚩आज 31 मार्च का यह गौरवशाली दिन हमें हमारे महान वीर पूर्वज राजा गंगा बख्श रावत पा...
31/03/2026

🚩 अदम्य साहस और वीरता के प्रतीक को नमन 🚩
आज 31 मार्च का यह गौरवशाली दिन हमें हमारे महान वीर पूर्वज राजा गंगा बख्श रावत पासी जी की अद्वितीय वीरता और शौर्य की याद दिलाता है।
उन्होंने अपनी कुशल रणनीति, अदम्य साहस और देशभक्ति के बल पर अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी और अंग्रेजी सेनापति एल्डर टोन को परास्त कर युद्ध में अंग्रेजो पर विजय प्राप्त की इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। यह केवल एक युद्ध नहीं था, बल्कि स्वाभिमान, स्वतंत्रता और सम्मान की लड़ाई थी।
ऐसे महान योद्धा के चरणों में कोटि-कोटि नमन, जिनकी वीरता हमें आज भी प्रेरणा देती है।
✨ आइए, इस विजय दिवस पर हम अपने गौरवशाली इतिहास को याद करें और उनकी विरासत पर गर्व करें। ✨
🙏 आप सभी को विजय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! 🇮🇳

सन 1170 ईसवी में जब राजा जयचंद गद्दी पर आसीन हुए, उस समय उत्तर भारत में पासी राजाओं की राजनीतिक स्थिति काफी मजबूत थी। आल...
24/03/2026

सन 1170 ईसवी में जब राजा जयचंद गद्दी पर आसीन हुए, उस समय उत्तर भारत में पासी राजाओं की राजनीतिक स्थिति काफी मजबूत थी। आल्हा खंड में वर्णन मिलता है कि गांजर क्षेत्र के स्थानीय पासी राजाओं ने लगातार 12 वर्षों तक कोई कर (Tax) नहीं भेजा।

इस कारण राजा जयचंद लंबे समय तक परेशान और असहाय बना रहा। अंततः 12 वर्ष बाद उसने आल्हा-ऊदल को जिम्मेदारी सौंपी, जिसके बाद गांजर पर युद्ध अभियान चलाया गया।

इस प्रकार 1182 ईसवी में गांजर युद्ध हुआ, जो उस समय की शक्ति संतुलन और स्थानीय प्रतिरोध का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

22/02/2026

⚔️पासी रेजीमेंट हक है हमारा ⚔️
जो भी साथी दिल्ली जंतर मंतर पर आवाज को बुलंद कर रहे हैं उनका पुरजोर समर्थन करता हूं

रुदौली निर्माता राजा रूद्रभर पासी की जयंती शिवरात्रि पर हार्दिक शुभकामनाएं                     ( संक्षिप्त इतिहास )रुदौल...
15/02/2026

रुदौली निर्माता राजा रूद्रभर पासी की जयंती शिवरात्रि पर हार्दिक शुभकामनाएं
( संक्षिप्त इतिहास )

रुदौली के शासक
राजा रुद्रमल पासी का जन्म शिवरात्रि के दिन सन 990 ईस्वी में हुआ , राज परिवार का भगवान शिव के प्रति असीम श्रद्धा के चलते पासी राज ने अपने पुत्र का नाम भगवान ( शिव) नाम के तर्ज पर अपने बड़े पुत्र का नाम ( रुद्र ) रखा जो आगे चलकर राजा रूद्रमल पासी के नाम से विख्यात हुए , राजा रुद्रमल पासी चार भाई थे जिनके किले चार पांच कोस के परिधि में आज भी खंडहर अवशेष के रूप में विद्यमान है
इनकी कहानी पर पर्दा तब उठता है जब सैयद सालार मसूद गाजी ने भारत में जेहाद छेड़ा था उसके रास्ते में कोई भी हिंदु राजा उसे चुनौती देने का प्रयास नही किया , उसका विजय रथ तब तक नही रुका जब तक अवध के शक्तिशाली जाति पासियो ने उसको चुनौती नही दी, सैयद सालार गाज़ी के अजीज रिश्तेदार और आधी सेना लखनऊ कंसमंडी के संघर्ष में समाप्त हो गई क्योंकि अवध की धरती पर कदम रखते हुए उसकी पहली लडाई पश्चिम कंसमंडी के राजपासी राजा कंस से लड़नी पड़ी और लाखन कोट के बिकट संघर्ष बाद उसका अगला पड़ाव बाराबंकी का सतरिख बना

मुसलमान आक्रमणकारियों ने इस जिले में अपनी पहली स्थायी बस्ती सतरिख में हिजरी 421, यानी 1030 में बनाई थी; वहां से उन्होंने वर्षों तक भयंकर और धर्मांतरण युद्ध छेड़ रखा था से प्रेरित थे सतरिख से सैयाद सालार के पिता सालार साहू ने युद्ध नीति रणनीति योजना बनाई और मसूद को उतराधिकारी घोषित किया, उसने सतरिख से ही युद्ध का संचालन किया ।

मसूद गाज़ी ने राजा रुद्रमल पासी को संदेश भिजवाया की वो खुद मुसलमान बन इस्लाम स्वीकार कर ले और सारी सेना मसूद के लश्कर में शामिल हो जाए अन्यथा जंग के लिए तैयार रहे ।

ऐसा संदेशा पाकर राजा रुद्रमल पासी क्रोध से आगबबूला हो गए , उन्होंने ने संदेशा भिजवाया की हमारी स्वतंत्रता ही हमारी जंग है उनको पश्चिम के हालात की जानकारी थी ही , उन्होंने फौरन डंका बजवा कर युद्ध की घोषणा कर दी।

ऐसा उत्तर पाकर मसूद गाजी तिलमिला गया उसने फौरन रुद्रावली पर हमले के आदेश अपने फौजों को दे दिया लेकीन मसूद जितना आसान सोचता था उतना आसान था नही लखनऊ में उसकी पहली हार अभी मसूद को याद थी कही गरमा गरम तेल उसकी ईह लीला न समाप्त कर दें उसने किले पर हमला ना करके बाहर मैदान में युद्ध लड़ने को चुनौती दी राजा रूद्रमल पासी स्वाभिमानी और अड़ियल राजा किसी भी चुनौती की स्वीकार करने उसको जवाब देने के लिए तैयार रहते थे वो अपनी चतुरांगी सेना के साथ युद्ध मैदान में उतर गए , देखते ही देखते मसूद की सेना पर बिकट गुर्जो के प्रहार से मासूद की सेना भयभीत होकर बाहर भाग खड़ी हुई हजारों लाशों के ढेर रुदौली निकट मैदान में भर गया वहीं स्थान आज भी गंज शाहिदा कहलाता है
सैय्यद सलार के कमांडरो ने दो तीन बार हमले किए पर विफल रहे , सैयद सालार की कोई युक्ति काम नही कर रही थी ।
जोहरा बीवी नाम की महिला जो मसूद के प्रेम में मंत्रमुग्ध थी उसने सैयद सालार के बचे हुए सिपाहियों से संदेशा भिजवाया था एक बार भेंट के बदले रूद्रमल के भेद को बताएगी , फ़ौरन सिपाहियों ने मसूद को इस बात से अवगत कराया, मसूद से जब जोहरा बीवी मिली तो उससे निकाह की शर्त रखी तब मसूद ने युद्ध समाप्ति पश्चात निकाह की हामी भरी , इस पर जोहरा बीवी ने राजा रूद्रमल की चुगली सैयद सालार मसूद से की,
राजा सहित उसकी पूरी सेना किले में रात में दारू शराब के नशे में जश्न में डूबे रहते है ढोल नगाड़ों की आवाज में बदहवास होते है उसी समय अगर हमला किया जाए तो रुदौली जीती जा सकती है इस बात को सुनकर मसूद ने अपनी सेनाओं को रात में हमला करने की तैयारी करवाता है और जब किले से ढोल नगाड़ों की आवाज़ों से धरती गगन कांपने लगती है तब मसूद को पूरा विस्वास हो जाता है सब नशे में हो गए , तब उसने किले पर चढ़ाई करने का आदेश देता है अचानक हुए इस हमले का किसी को भी अंदेशा ना था औचक हुए हमले से राजा रूद्रमल पासी स्थिति को भांप गए अपने गुर्ज को लेकर प्रांगण पर दौड़ पड़े बिकट युद्ध छिड़ गया राजा रूद्रमल ने घोर संग्राम किया उसी रात को सैकड़ों शत्रु से घिरे राजा रूद्रमल पासी
जब तक जान बची थी काया में, तब तक लड़े अंतत: वो वीर गति हुए, रुदौली पर सैयद सालार का कब्जा हो गया और सालार मोहल्ला आबाद किया गया

1034 में वह बहराइच गया जहां उसको राजा सुहेलदेव पासी ने मार गिराया

जोहरा बीवी की चुगली की उसका नतीजा यह रहा हजारों बच्चे बूढ़े मारे गए उनकी हाय ने उसको मसूद से जुदा कर दिया बाद में मसूद को मानने वालों ने जोहरा बीबी और मसूद के रिश्तों का महिमा मंडन करना शुरू किया और उनके रिश्तों को रूहानी तकतो से तुलना करनी शुरू कर उसको अमर कर दिया आज भी रुदौली में साल में सबसे बड़ा उर्स जोहरा बीबी के नाम पर होता है
और राजा रूद्रमल पासी के अमर इतिहास को पासी समाज के ( बिरातिया पसमंगता ) द्वारा सुनी जाती है रुदौली बुर्जुग मुस्लमान आज भी बताते है रूद्रमल के चार भाई थे

कई किस्से अंग्रेजो ने भी दर्ज किए है जिसमें एक किस्सा ये रहता है
" की पासियों तथा लोगो द्वारा प्राप्त कहानियों के विवरण में अक्सर देखा जाता है की इनके राजा शराब के नशे में होते थे तब हमलावर हमला करके उनको मार देते थे "
यह शराब का नशे का मसला राजा डालदेव पासी के संबध में भी है राजा हंसा पासी के संबंध में भी कई राजाओं के बारे में ये किस्सा कॉमन है

राजा रुद्रमल पासी के बारे में भी मवई के पासियो से भी सुनी है और बसौढ़ी के पासियो से भी

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कुंवर प्रताप रावत
The Pasi Landlords

#जयंती #राजा_रूद्रभर_पासी_जयंती
#रूदौली

14/02/2026

पुलवामा हमले में शहीद हुए शहीदों की शहादत को शत-शत नमन एवं विनम्र आदरांजलि। देश हमेशा आपके बलिदान का ऋणी रहेगा।

13/02/2026

राष्ट्र रक्षक महाराजा सुहेलदेव पासी अमर रहे
battle of

पासी समाज में जन्मे सभी क्रांतिकारी लोगों को बहुत बहुत धन्यवाद जो समाज को जागरूक करने में अपनी अहम भूमिका निभा रहें है ?
12/02/2026

पासी समाज में जन्मे सभी
क्रांतिकारी लोगों को बहुत बहुत धन्यवाद जो समाज को जागरूक करने में अपनी अहम भूमिका निभा रहें है ?

07/02/2026

तीर्थराज धोपाप कादीपुर सुल्तानपुर

05/02/2026

Pratapgarh 🚩
Speech yogesh pasi suheldev army chief

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