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जब मासूम आंखों में अपनों से बिछड़ने का डर था, तब पौड़ी पुलिस बानी भरोसे का सहारा; बिछड़ी दो बालिकाओं को परिजनों से मिलाया...
11/06/2026

जब मासूम आंखों में अपनों से बिछड़ने का डर था, तब पौड़ी पुलिस बानी भरोसे का सहारा; बिछड़ी दो बालिकाओं को परिजनों से मिलाया.

​कोटद्वार। लक्ष्मणझूला और रामझूला क्षेत्र में बीते दिन (10 जून 2026) का नज़ारा बेहद भावुक था, जहाँ दो मासूम बालिकाएं अपनों से बिछड़कर घबराई और रोते हुए पाई गईं। लेकिन, पौड़ी पुलिस की तत्परता और संवेदनशीलता ने न केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि कुछ ही घंटों के भीतर उन्हें सुरक्षित उनके परिजनों की गोद में पहुँचा दिया।

बुधवार, 10 जून को लक्ष्मणझूला और रामझूला के भीड़भाड़ वाले इलाकों में दो अलग-अलग घटनाएं सामने आईं। लक्ष्मणझूला क्षेत्र में लगभग 7 साल की एक बच्ची और रामझूला में हरियाणा के पानीपत की एक बालिका अपने परिजनों से अलग होकर अकेली और डरी-सहमी हुई मिली। दोनों ही स्थितियों में कोई भी अभिभावक उनके साथ नहीं था।

​पुलिस बनी 'देवदूत'
ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों ने इस स्थिति को भाँपते ही तुरंत कदम उठाए। उन्होंने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बालिकाओं को अपने संरक्षण में लिया और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया। लक्ष्मणझूला क्षेत्र में मिली बच्ची को थाना लाकर बाल कल्याण अधिकारी की देखरेख में रखा गया, जबकि रामझूला वाली बच्ची को पुलिस चौकी में सुरक्षित रखा गया।
​तकनीकी और मानवीय प्रयासों से मिली सफलता
परिजनों की खोज के लिए पौड़ी पुलिस ने युद्धस्तर पर अभियान चलाया। सभी चौकियों, चीता मोबाइल और ड्यूटी कर्मियों को अलर्ट कर फोटो साझा किए गए। पुलिस टीम ने बालिकाओं द्वारा दी गई सीमित जानकारी के आधार पर तकनीक और मानवीय संसाधनों का बेहतरीन तालमेल बिठाया।
​इसका परिणाम यह रहा कि कुछ ही समय में दोनों बालिकाओं के परिवारों से संपर्क हो गया:
परिजनों से मिलने के बाद बालिकाओं के चेहरों पर जो मुस्कान लौटी, उसने पुलिस की इस कार्यशैली को और भी सराहनीय बना दिया।

11/06/2026

कोटद्वार।

गर्मी का कहर: प्यास बुझाने के लिए तहसील की छत पर चढ़े बेजुबान....

अतिक्रमण की आड़ में वसूली: दो आउट सोर्स कर्मचारियों की बर्खास्तगी, असली 'मास्टरमाइंड' कब आएंगे जद में?कोटद्वार। नगर निगम ...
11/06/2026

अतिक्रमण की आड़ में वसूली: दो आउट सोर्स कर्मचारियों की बर्खास्तगी, असली 'मास्टरमाइंड' कब आएंगे जद में?

कोटद्वार। नगर निगम द्वारा हाल ही में अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान जब्त सामान को छोड़ने के नाम पर अवैध वसूली करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर निगम ने दो आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
निगम प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई ने एक ओर जहाँ भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का संदेश दिया है, वहीं दूसरी ओर आम जनता और स्थानीय निवासियों के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या सिर्फ आउटसोर्स कर्मचारियों की बर्खास्तगी ही पर्याप्त है?

​क्या है पूरा मामला?
ज्ञात हो कि बीते दिनों निगम की अतिक्रमण विरोधी टीम द्वारा की गई कार्रवाई में कई दुकानदारों का सामान जब्त किया गया था। आरोप है कि निगम के दो आउटसोर्स कर्मचारियों ने इस जब्त सामान को बिना रसीद या कम शुल्क लेकर वापस करने के नाम पर अवैध वसूली की। इस मामले का वीडियो वायरल होने के बाद निगम प्रशासन ने आनन-फानन में इन दोनों कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया।

​बड़े अधिकारियों पर कब होगी जांच?

उत्तराखण्ड विकास पार्टी के अध्यक्ष मुजीब नैथानी और जागरूक नागरिकों का कहना है कि निगम में इस प्रकार की अवैध वसूली का 'नेटवर्क' बिना वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या इतने निचले स्तर के कर्मचारी बिना अपने उच्चाधिकारियों के संरक्षण के इतना बड़ा साहस कर सकते हैं?
​निगम की कार्यप्रणाली पर उठ रहे इन सवालों के बीच अब आम जनता और जनप्रतिनिधियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन केवल 'छोटे मोहरों' पर कार्रवाई कर खानापूर्ति करेगा या संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी ठोस दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिनकी देखरेख में यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।

संरक्षण का सवाल: क्या विभाग के संबंधित अधिकारियों को लंबे समय से चल रही इस अवैध वसूली की भनक नहीं थी?
​जिम्मेदारी तय क्यों नहीं: यदि कर्मचारी मनमानी कर रहे थे, तो उन अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई जिनके नेतृत्व में ये कर्मचारी काम कर रहे थे?
​भ्रष्टाचार की जड़: विभाग में वर्षों से तैनात अधिकारी और उनके चहेते कर्मचारियों के बीच की साठगांठ की गहन जांच क्यों नहीं की जा रही है?

बेकाबू ट्रैक्टर-ट्रॉली बनी काल! कलालघाटी में बाइक सवार को मारी टक्कर, युवक घायलबिना नंबर प्लेट, लाइट और इंडिकेटर के सड़क...
11/06/2026

बेकाबू ट्रैक्टर-ट्रॉली बनी काल! कलालघाटी में बाइक सवार को मारी टक्कर, युवक घायल

बिना नंबर प्लेट, लाइट और इंडिकेटर के सड़कों पर दौड़ रहे वाहन, जिम्मेदार विभाग मौन

कोटद्वार। कलालघाटी चौकी क्षेत्र में देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। जानकारी के अनुसार विपरीत दिशा से आ रही एक ट्रैक्टर-ट्रॉली ने बाइक सवार युवक को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया।

सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से घायल को तत्काल कलालघाटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद बेस हॉस्पिटल कोटद्वार रेफर कर दिया।

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि कलालघाटी क्षेत्र में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दिन-रात यमराज बनकर सड़कों पर दौड़ रही हैं। अधिकांश वाहनों पर न तो नंबर प्लेट लगी है, न ही रेडियम पट्टी, लाइट और इंडिकेटर जैसी जरूरी सुरक्षा व्यवस्थाएं मौजूद हैं। इसके बावजूद ऐसे वाहन खुलेआम सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं, जिससे आए दिन हादसों का खतरा बना रहता है।

लोगों ने प्रशासन और परिवहन विभाग से ऐसे वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

10/06/2026

कोटद्वार। नगर निगम कोटद्वार के हल्दुखाता कंचनपुरी में बन रहे ट्रेचिंग ग्राउंड के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे नगर वासियों के बीच पहुंचे भाजपा पूर्व जिला अध्यक्ष वीरेंद्र रावत सुनिए क्या कहा उन्होने.....

पौड़ी के देवार क्षेत्र में गुलदार का खौफ, घास काटने गई महिला का शिकारपौड़ी।  जनपद के देवार क्षेत्र स्थित वाड़ी गांव में ...
09/06/2026

पौड़ी के देवार क्षेत्र में गुलदार का खौफ, घास काटने गई महिला का शिकार

पौड़ी। जनपद के देवार क्षेत्र स्थित वाड़ी गांव में गुलदार के हमले ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। घास काटने गई 55 वर्षीय एक महिला को गुलदार ने अपना निवाला बना लिया।

जानकारी के अनुसार, मृतका अपने घर के समीप स्थित खेतों में पशुओं के लिए घास लेने गई थी। घात लगाए बैठे गुलदार ने अचानक उस पर हमला कर दिया और उसे खींचकर पास के ही एक खंडहरनुमा मकान में ले गया। हमला इतना भयानक था कि गुलदार ने महिला के शव को बुरी तरह क्षत-विक्षत कर दिया और सिर को धड़ से अलग कर दिया। ग्रामीणों के शोर मचाने पर गुलदार मौके से भाग खड़ा हुआ।

​घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची। इस बर्बर घटना के बाद से क्षेत्र के निवासियों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों ने वन विभाग पर क्षेत्र में वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियों को रोकने में विफलता का आरोप लगाया है और सुरक्षा के कड़े इंतजामों की मांग की है।

घटना के बाद पूरे वाड़ी गांव में मातम और डर का माहौल है। लोग अपने घरों से बाहर निकलने में भी डर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाए और गश्त बढ़ाई जाए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

कण्वाश्रम का नलकूप बना शोपीस: जल संस्थान की लापरवाही से बिजली कनेक्शन का इंतजारस्थानीय विधायक व विधानसभा अध्यक्ष की छवि ...
08/06/2026

कण्वाश्रम का नलकूप बना शोपीस: जल संस्थान की लापरवाही से बिजली कनेक्शन का इंतजार

स्थानीय विधायक व विधानसभा अध्यक्ष की छवि खराब करने पर जुटा विभाग

​कोटद्वार। कण्वाश्रम क्षेत्र के चौकी घाटा में बना जल संस्थान का नलकूप विभाग की घोर लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। लाखों की लागत से बनी इस नलकूप परियोजना का ढांचा तो 8 महीने पूर्व तैयार खड़ा है, लेकिन बिजली का कनेक्शन न मिलने के कारण यह मशीनें केवल कागजों और बंद कमरों तक ही सीमित रह गई हैं।

​स्थानीय निवासियों का कहना है कि नलकूप का निर्माण 8 महीने पहले होने के बावजूद उन्हें पीने के पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी विभागीय अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। नलकूप कक्ष पूरी तरह बनकर तैयार है और उस पर ताला लटका हुआ है, जबकि क्षेत्र की जनता जल संकट से जूझ रही है।

वही ​एक तरफ सरकार 'हर घर नल, हर घर जल' का सपना देख रही है, वहीं दूसरी ओर विभाग की यह उदासीनता सरकार की योजनाओं को पलीता लगा रही है।

अब देखना यह होगा कि कब तक प्रशासन नींद से जागता है और इस नलकूप को चालू कर स्थानीय लोगों को राहत प्रदान करता है।

08/06/2026

ट्रेंचिंग ग्राउंड के नाम पर ली गई फॉरेस्ट भूमि बनी अवैध खनन का अड्डा, जिम्मेदार अधिकारी 'मौन'।

कोटद्वार। एक ओर जहाँ पर्यावरण संरक्षण के दावे किए जा रहे हैं, वहीं कोटद्वार में नगर निगम की घोर लापरवाही और अधिकारियों की मिलीभगत की एक बड़ी तस्वीर सामने आई है। जिस भूमि को कुछ वर्ष पूर्व नगर निगम को 'ट्रेंचिंग ग्राउंड' (कचरा निस्तारण केंद्र) बनाने के लिए फॉरेस्ट विभाग से हस्तांतरित (Transfer) करवाया गया था, आज वह भूमि अवैध खनन माफियाओं का गढ़ बन गई है।

सूत्रों के अनुसार, हलदुखाता कंचनपुरी में ट्रेंचिंग ग्राउंड के नाम पर आवंटित इस महत्वपूर्ण भूमि पर पिछले कुछ समय से बेधड़क अवैध खनन किया जा रहा है। भारी मशीनों और ट्रकों के जरिए जमीन को खोदकर मिट्टी और खनिज निकाला जा रहा है, जिससे न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान हो रहा है, बल्कि क्षेत्र के पर्यावरण को भी भारी क्षति पहुँच रही है। हैरानी की बात यह है कि निगम के जिम्मेदार अधिकारी इस पूरी घटना पर पूरी तरह 'मौन' साधे हुए हैं।

​फॉरेस्ट नियमों का उल्लंघन:-
कंचनपुरी में यह भूमि वन विभाग से विशेष शर्तों पर ट्रेंचिंग ग्राउंड के लिए ली गई थी। नियमों के अनुसार, इस भूमि का उपयोग केवल कचरा प्रबंधन के लिए किया जाना था। लेकिन अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रेंचिंग ग्राउंड के नाम पर फॉरेस्ट की जमीन हड़पने की साजिश रची गई थी? यदि यह भूमि ट्रेंचिंग ग्राउंड के काम नहीं आ रही थी, तो इसे खनन माफियाओं के हवाले क्यों होने दिया गया?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना अधिकारियों की मिलीभगत के इतना बड़ा अवैध खनन कार्य संभव नहीं है। लोगों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और अवैध खनन में शामिल अधिकारियों व माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए।

​अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद क्या नगर निगम प्रशासन नींद से जागता है या फिर 'खामोशी' का यह खेल जारी रहेगा?

वही पूरे मामले पर सहायक नगर आयुक्त ने कहा कि उस भूमि पर पूर्व में भी खनन हुआ था और वर्तमान में अगर हो रहा है तो मामला संज्ञान में नहीं, यह कौन लोग करवा रहे हैं इसकी जानकारी जुटाई जाएगी।

दिल्ली अग्निकांड में शेफ केशव नेगी की गिरफ्तारी पर भड़की उत्तराखंड विकास पार्टी; अध्यक्ष मुजीब नैथानी ने की न्यायिक जांच ...
07/06/2026

दिल्ली अग्निकांड में शेफ केशव नेगी की गिरफ्तारी पर भड़की उत्तराखंड विकास पार्टी; अध्यक्ष मुजीब नैथानी ने की न्यायिक जांच की मांग

​कोटद्वार। दिल्ली के मालवीय नगर में हुए हालिया अग्निकांड के बाद पुलिस द्वारा एक शेफ, केशव नेगी की गिरफ्तारी पर उत्तराखंड विकास पार्टी (उविपा) ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। पार्टी ने इस गिरफ्तारी को अन्यायपूर्ण बताते हुए इसे असली दोषियों को बचाने की साजिश करार दिया है।

​अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल-

उत्तराखंड विकास पार्टी के अध्यक्ष मुजीब नैथानी ने प्रेसवार्ता में कहा कि गोवा और गुजरात अग्निकांड के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट गाइडलाइन जारी की थी, लेकिन अफसोस है कि जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं आया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि इमारत अवैध थी, तो सबसे पहले उन अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किया था। यदि सर्टिफिकेट नहीं लिया गया था, तो संबंधित विभाग ने अब तक इमारत को सील या ध्वस्त क्यों नहीं किया?

​'बुलडोजर संस्कृति' पर साधा निशाना-

मुजीब नैथानी ने प्रशासन की दोहरी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा, "जब गरीबों के आशियाने तोड़ने की बात आती है, तो प्रशासन का बुलडोजर तुरंत चल पड़ता है। फिर इन अवैध व्यावसायिक इमारतों पर यह बुलडोजर क्यों खामोश है?" उन्होंने कहा कि एक शेफ को बलि का बकरा बनाना न्यायोचित नहीं है।

​कोटद्वार में हादसे की आशंका पर चिंता-

अध्यक्ष ने अपनी चिंता का दायरा बढ़ाते हुए कहा कि नैनीताल हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद कोटद्वार में अवैध इमारतों में व्यावसायिक गतिविधियां धड़ल्ले से चल रही हैं। उन्होंने कहा कि कोटद्वार में कोई बड़ा हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी किस की होगी।

निगम का अतिक्रमण हटाओ' अभियान बना कमाई का जरिया: सामान जब्त कर छोड़ने के लिए हो रही खुलेआम अवैध वसूली।कोटद्वार: नगर निगम...
07/06/2026

निगम का अतिक्रमण हटाओ' अभियान बना कमाई का जरिया: सामान जब्त कर छोड़ने के लिए हो रही खुलेआम अवैध वसूली।

कोटद्वार: नगर निगम कोटद्वार में अतिक्रमण हटाओ अभियान अब विवादों के घेरे में आ गया है। स्थानीय दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों का आरोप है कि नगर निगम के कर्मचारी अतिक्रमण हटाने के नाम पर खुलेआम 'वसूली' कर रहे हैं।

​क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, निगम की टीम जब अतिक्रमण हटाने निकलती है, तो वह दुकानदारों का सामान जब्त कर गाड़ी में लाद लेती है। आरोप है कि यह सामान निगम के गोदाम में जमा करने के बजाय, संबंधित कर्मचारी सामान छोड़ने की एवज में दुकानदारों से अवैध धन की मांग करते हैं। जो दुकानदार 'सुविधा शुल्क' देने से इनकार करता है, उसका सामान जब्त कर उसे भारी जुर्माने और कानूनी कार्यवाही का डर दिखाया जाता है।

​अधिकारियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल-
कुछ रेहड़ी फल वालो ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले से पूरी तरह वाकिफ हैं, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय उन्होंने चुप्पी साध रखी है। रेहड़ी फल वालो का तर्क है कि बिना वरिष्ठ अधिकारियों की सहमति या ढिलाई के, निचले स्तर के कर्मचारी इतनी हिम्मत नहीं जुटा सकते। इस मिलीभगत के चलते जहां एक ओर गरीब व्यापारियों का शोषण हो रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर में अतिक्रमण की समस्या जस की तस बनी हुई है क्योंकि कार्रवाई केवल 'वसूली' तक ही सीमित है।

वही पूरे मामले पर मेयर शैलेन्द्र रावत ने कहा कि अगर कोई कर्मचारी इस तरह का कार्य कर रहा तो उस पर कार्यवाही की जायेगी।

वहीं पूरे मामले पर उत्तराखंड विकास पार्टी ने कहा कि नगर निगम के द्वारा अतिक्रमण के नाम पर गरीब दुकानदारों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर नगर निगम ने अपनी कार्यशैली मैं सुधार नहीं किया तो शहरी विकास विभाग में कोटद्वार नगर निगम के अधिकारियों की शिकायत की जाएगी।

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