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कोटद्वार की बदहाल सड़कों पर फूटा पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी का गुस्सा, बोले- पुरानी सड़कों पर बने भारी-भरकम गड्ढे.....
17/09/2026

कोटद्वार की बदहाल सड़कों पर फूटा पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी का गुस्सा, बोले- पुरानी सड़कों पर बने भारी-भरकम गड्ढे...

कोटद्वार(17 सितंबर 2026)। कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र की बदहाल सड़कों को लेकर पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र सिंह नेगी ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में करीब 12 से 14 साल पहले बनी कई सड़कों की हालत आज बेहद खराब हो चुकी है। सड़कों पर जगह-जगह भारी-भरकम गड्ढे बन गए हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सुरेंद्र सिंह नेगी का आरोप है कि सड़कों की बदहाली के चलते आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और कई लोग चोटिल हो रहे हैं। इसके बावजूद सड़क जैसी बुनियादी सुविधा की समस्या पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने स्थानीय विधायक पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जनता लंबे समय से सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर परेशान है, लेकिन जनप्रतिनिधि इन समस्याओं के समाधान की ओर ध्यान देने के बजाय चैन की नींद सो रहे हैं।

पूर्व मंत्री ने कहा कि सड़कें किसी भी क्षेत्र के विकास की बुनियादी जरूरत हैं। यदि लंबे समय से खराब पड़ी सड़कों की मरम्मत नहीं की जाती है तो इससे आम लोगों की परेशानी बढ़ने के साथ-साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।

उन्होंने संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों से क्षेत्र की बदहाल सड़कों का निरीक्षण कर गड्ढों की मरम्मत और सड़क सुधारीकरण का काम जल्द शुरू कराने की मांग की।

सड़क की बदहाली को लेकर पूर्व मंत्री के बयान के बाद एक बार फिर कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण और रखरखाव को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

17/09/2026

कोटद्वार। सिडकुल सिगड्डी में श्रमिकों को नही मिल रहा पारिश्रमिक....

16/09/2026

कोटद्वार। रामणी फुलिंडा रोड पर सुबह आया मलवा.... सुबह से रोड पर यातायात बाधित... जेसीबी मशीन सड़क पर मलवा हटाने के कार्य मे जुटी....

कोटद्वार पॉलीटेक्निक के रास्ते पर खुलेआम फेंके जा रहे मरे पशु और कूड़ा, संक्रमण का खतराहल्दूखाता मुख्य मार्ग से कॉलेज पर...
16/09/2026

कोटद्वार पॉलीटेक्निक के रास्ते पर खुलेआम फेंके जा रहे मरे पशु और कूड़ा, संक्रमण का खतरा
हल्दूखाता मुख्य मार्ग से कॉलेज परिसर तक फैली गंदगी को लेकर शिकायत, नगर निगम से सफाई और कीटनाशक छिड़काव की मांग

कोटद्वार। राजकीय पॉलीटेक्निक कोटद्वार के प्रवेश मार्ग की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। हल्दूखाता मुख्य मार्ग से कॉलेज परिसर और कर्मचारी आवासीय परिसर की ओर जाने वाले संपर्क मार्ग पर अज्ञात लोगों द्वारा लगातार मृत पशु और भारी मात्रा में कूड़ा-कचरा फेंके जाने की शिकायत सामने आई है।

शिकायती पत्र में बताया गया है कि यह मार्ग जंगल और खुले क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण रात के अंधेरे में अज्ञात लोगों के द्वारा यहां मृत पशुओं और कचरे को फेंक रहे हैं। पत्र के मुताबिक, सड़े-गले शवों के कारण पूरे मार्ग पर तेज दुर्गंध फैल गई है और संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है।

शिकायत में कहा गया है कि मृत पशुओं और कूड़े के कारण महामारी एवं संक्रामक बीमारियों का खतरा पैदा हो सकता है। खास तौर पर कॉलेज आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बताई गई है।

सफाई के साथ निगरानी की मांग
मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम से मार्ग पर पड़े मृत पशुओं और कूड़े को सफाई दस्ते के माध्यम से तत्काल हटाने की मांग की गई है। साथ ही पूरे क्षेत्र में कीटनाशक/चूना का छिड़काव कराने का अनुरोध किया गया है।

पत्र में वन विभाग और नगर निगम की संयुक्त गश्त बढ़ाने की मांग भी की गई है, ताकि मृत पशु फेंकने वाले अज्ञात लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए मार्ग पर 'कूड़ा/मृत पशु फेंकना सख्त मना है' संबंधी चेतावनी बोर्ड लगाने का भी सुझाव दिया गया है।

अब सवाल यह है कि कॉलेज और कर्मचारी आवासीय परिसर तक जाने वाले इस मार्ग को गंदगी और मृत पशुओं का डंपिंग जोन बनने से कब रोका जाएगा? शिकायत के बाद संबंधित विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

लैंसडौन में दिलीप सिंह रावत की हैट्रिक के बाद अब 2027 की बारी, क्या भाजपा फिर जताएगी भरोसा?कोटद्वार। उत्तराखंड की लैंसडौ...
11/09/2026

लैंसडौन में दिलीप सिंह रावत की हैट्रिक के बाद अब 2027 की बारी, क्या भाजपा फिर जताएगी भरोसा?

कोटद्वार। उत्तराखंड की लैंसडौन विधानसभा सीट पर 2027 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन सियासी चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा के लगातार तीन बार विधायक रहे दिलीप सिंह रावत को एक बार फिर मैदान में उतारती है या पार्टी इस बार किसी नए चेहरे पर दांव लगाती है।

दिलीप सिंह रावत लैंसडौन विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन चुनाव जीत चुके हैं। हर चुनाव के बाद उनकी जीत का सबसे बड़ा आधार उनकी क्षेत्र में पकड़ और व्यक्तिगत लोकप्रियता को माना जाता रहा है। यही वजह है कि वह हर बार लैंसडौन से ही चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर करते रहे हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शुमार दिलीप सिंह रावत की एक और पहचान सिद्धबली बाबा मंदिर के महंत के रूप में भी है। धार्मिक और सामाजिक स्तर पर उनकी सक्रियता ने उन्हें क्षेत्र में एक अलग पहचान दी है। यही राजनीतिक और सामाजिक समीकरण उनके पक्ष में माहौल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हालांकि, उनके विरोधी और विपक्ष लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि विधायक के कार्यकाल में लैंसडौन विधानसभा क्षेत्र में अपेक्षित विकास नहीं हुआ। लेकिन दूसरी ओर सवाल यह भी उठता है कि यदि क्षेत्र में विधायक की पकड़ पूरी तरह कमजोर होती और जनता उनसे इतनी नाराज होती, तो लगातार तीन विधानसभा चुनावों में उन्हें जीत क्यों मिलती?

यही सवाल 2027 के चुनाव की तस्वीर को दिलचस्प बनाता है। लगातार तीन जीत किसी भी विधायक के लिए बड़ा राजनीतिक पूंजी होती है। ऐसे में भाजपा के सामने भी सवाल होगा कि पार्टी अपने लगातार जीतने वाले चेहरे पर भरोसा कायम रखे या चुनावी समीकरणों को देखते हुए किसी नए चेहरे को मौका दे।

दिलीप सिंह रावत के लिए भी 2027 का चुनाव केवल एक और विधानसभा चुनाव नहीं होगा, बल्कि यह उनकी राजनीतिक पकड़ और लगातार चार बार विधानसभा पहुंचने की कोशिश की परीक्षा होगी। दूसरी ओर भाजपा के लिए लैंसडौन सीट पर प्रत्याशी का फैसला पार्टी की रणनीति और आगामी चुनावी समीकरणों का संकेत भी दे सकता है।

फिलहाल दिलीप सिंह रावत की ओर से लैंसडौन से चुनाव लड़ने की इच्छा जताना कोई नई बात नहीं है। लेकिन अंतिम फैसला भाजपा का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व करेगा। टिकट किसे मिलेगा, यह आने वाला समय बताएगा।

लैंसडौन की सियासत में फिलहाल एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है—क्या भाजपा अपने ‘हैट्रिक’ विधायक दिलीप सिंह रावत पर चौथी बार भी भरोसा जताएगी, या 2027 में कोई नया चेहरा चुनावी मैदान में उतरेगा?

10/09/2026

कोटद्वार। कांग्रेश पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्य कांत धस्माना ने कोटद्वार के होटल में प्रेस वार्ता के दौरान क्या कहा सुनिए......

मदरलैंड्स एकेडमी में सजी आशुभाषण प्रतियोगिता, विजेताओं को मिले पुरस्कारकोटद्वार। मदर लैंड एकेडमी स्कूल, शब्बूनगर कोटद्वा...
10/09/2026

मदरलैंड्स एकेडमी में सजी आशुभाषण प्रतियोगिता, विजेताओं को मिले पुरस्कार

कोटद्वार। मदर लैंड एकेडमी स्कूल, शब्बूनगर कोटद्वार में अंतरविद्यालयी आशुभाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में शहर के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग कर अपने विचारों और वक्तृत्व कौशल का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में खंड शिक्षा अधिकारी दुगड्डा वर्षा भारद्वाज ने शिरकत की। उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए विद्यालयों एवं विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने उत्साह और स्पष्ट विचारों के साथ अपने वक्तव्य प्रस्तुत कर श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया।
प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की भूमिका डॉ. निशांत भट्ट, गार्गी नाँडियाल एवं प्रणिता कण्डवाल ने निभाई। मंच संचालन नीलम नेगी, रिया रावत एवं नीलम रावत ने किया।
प्रतियोगिता के परिणाम में प्रथम स्थान पर स्वर्णिमा नेगी (हेरिटेज एकेडमी) एवं सौम्या (ए0वी0एन0 स्कूल) रहीं। द्वितीय स्थान पर समृद्धि रावत (ब्लूमिंग वेल) एवं कविता (मदर लैंड एकेडमी) रहीं, जबकि तृतीय स्थान दिशा रावत (टी0सी0जी0 स्कूल) ने प्राप्त किया।
विजेता प्रतिभागियों को कैश प्राइज, ट्रॉफी एवं प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। विद्यालय की प्रधानाचार्य रीना चौधरी एवं कार्यक्रम इंचार्ज आशीष कुमार ने सभी विजेताओं को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम का समापन सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ, जिसमें विद्यालय के समस्त स्टाफ ने सक्रिय भूमिका निभाई।

08/09/2026

रामणी-पुलिंडा मोटर मार्ग पर बार-बार सड़क पर आया 12 हाथियों का झुंड, कई वाहन छतिग्रस्त, राहगीरों में दहशत; वन विभाग ने तैनात की क्विक रिस्पांस फोर्स

कोटद्वार। उत्तराखंड के कोटद्वार में हाथियों का झुंड अब राहगीरों के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। लैंसडौन वन प्रभाग के कोटद्वार-रामणी-पुलिंडा मोटर मार्ग पर रविवार को करीब 12 हाथियों का झुंड अचानक सड़क पर आ गया। हाथियों की मौजूदगी से सड़क पर यातायात थम गया, वहीं झुंड ने एक टीवीएस मोटरसाइकिल को क्षतिग्रस्त कर दिया।
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद हाथियों को सड़क से हटाकर जंगल की ओर खदेड़ा। करीब दोपहर 12:50 बजे यातायात सुचारू कराया गया, लेकिन खतरा टला नहीं। शाम करीब चार बजे हाथियों का झुंड एक बार फिर सड़क पर आ धमका। इस दौरान एक बुलेट मोटरसाइकिल और एक स्कूटी भी हाथियों की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गई। कुछ समय तक मार्ग पर यातायात बाधित रहा। वनकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर हाथियों को दोबारा जंगल की ओर भेजा और करीब 4:30 बजे यातायात बहाल कराया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ गौरव वर्मा ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाने, गश्त बढ़ाने और हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
वन विभाग के मुताबिक रात की गश्त के दौरान भी हाथियों से क्षतिग्रस्त वाहन और रास्ते में फंसे कुछ राहगीर मिले। वनकर्मियों ने उन्हें सुरक्षित कोटद्वार पहुंचाया। वहीं 7 सितंबर की सुबह गश्त के दौरान भी हाथियों से क्षतिग्रस्त मोटरसाइकिल और कुछ राहगीर मार्ग पर मिले, जिन्हें वन विभाग की टीम ने सुरक्षित कोटद्वार पहुंचाया।
'यह हाथियों का कॉरिडोर है'
पूरे मामले पर लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ गौरव वर्मा ने कहा कि रामणी-पुलिंडा रोड हाथियों के कॉरिडोर क्षेत्र से होकर गुजरती है और इस मार्ग पर हाथियों की आवाजाही काफी अधिक है। हाथियों का मूवमेंट अपहिल से डाउनहिल की तरफ रहता है। रविवार को हाथियों ने एक स्कूटी और दो बाइक को क्षतिग्रस्त किया।
डीएफओ ने राहगीरों से सड़क किनारे लगे चेतावनी बोर्ड को ध्यान से पढ़ने और वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मार्ग के शुरुआती हिस्से में बैरियर पर भी वन विभाग की ओर से जरूरी दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। ऐसे में वाहन चालकों को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।
सुरक्षा के लिए क्विक रिस्पांस फोर्स तैनात
डीएफओ के मुताबिक राहगीरों की सुरक्षा को देखते हुए इस मार्ग पर क्विक रिस्पांस फोर्स तैनात की गई है और वन विभाग 24 घंटे हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। राहगीरों से अपील की गई है कि वन क्षेत्र के भीतर वाहन रोककर खड़े न हों और जंगल में कहीं भी कूड़ा न फेंकें।
वन विभाग संवेदनशील स्थानों पर साइनिंग बोर्ड और जागरूकता पोस्टर भी लगा रहा है। विभाग की ओर से सड़क पर अनावश्यक रूप से रुकने वाले लोगों को जागरूक किया जाएगा।
डीएफओ गौरव वर्मा ने स्पष्ट किया कि रामणी-पुलिंडा मार्ग रिजर्व फॉरेस्ट के भीतर से गुजरता है। यदि कोई व्यक्ति जंगल के भीतर सड़क किनारे अनावश्यक रूप से खड़ा मिलता है या कूड़ा फेंकता है तो उसके खिलाफ वन अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
लगातार सड़क पर हाथियों के पहुंचने और वाहनों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं के बाद इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों में दहशत का माहौल है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि हाथियों को देखकर सुरक्षित दूरी बनाए रखें, हॉर्न या तेज आवाज न करें, हाथियों के बेहद करीब न जाएं और उनका रास्ता रोकने की कोशिश न करें।

कोटद्वार में भाजपा को बड़ा झटका! कार्यकर्ताओं की अनदेखी पड़ी भारी, वरिष्ठ नेता भुवनेश खर्कवाल कांग्रेस में शामिल.कोटद्वा...
07/09/2026

कोटद्वार में भाजपा को बड़ा झटका! कार्यकर्ताओं की अनदेखी पड़ी भारी, वरिष्ठ नेता भुवनेश खर्कवाल कांग्रेस में शामिल.

कोटद्वार। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कोटद्वार की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक पकड़ रखने वाले भुवनेश खर्कवाल देहरादून में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। उनके कांग्रेस में जाने से भाजपा के भीतर कार्यकर्ताओं और पुराने नेताओं की उपेक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं।
भुवनेश खर्कवाल को कोटद्वार क्षेत्र में भाजपा के कद्दावर नेताओं में गिना जाता रहा है। वह पूर्व ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत सदस्य भी रह चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बीसी खंडूड़ी का करीबी भी माना जाता था। ऐसे में उनका भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामना महज एक नेता के पाला बदलने के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।
खर्कवाल के कांग्रेस में शामिल होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा के पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं की नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है? लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय रहे नेताओं की अनदेखी की चर्चाओं के बीच खर्कवाल का कांग्रेस में जाना भाजपा के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

2027 से पहले बदलेंगे चुनावी समीकरण?
उत्तराखंड की राजनीति में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी जमीन मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है। ऐसे में कोटद्वार के वरिष्ठ भाजपा नेता का कांग्रेस में जाना आने वाले चुनाव में कितना असर डालेगा, यह देखने वाली बात होगी।
खर्कवाल की क्षेत्र में राजनीतिक पकड़ और पुराने संगठनात्मक संपर्कों को देखते हुए कांग्रेस को इससे फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं भाजपा के सामने अपने पुराने कार्यकर्ताओं और नेताओं को साथ बनाए रखने की चुनौती और बढ़ गई है।
राजनीतिक जानकारों के बीच यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि अगर भाजपा के असंतुष्ट और प्रभावशाली स्थानीय नेता कांग्रेस या अन्य दलों का रुख करते हैं तो इसका असर 2027 में कोटद्वार समेत आसपास की विधानसभा सीटों पर पड़ सकता है। हालांकि अभी से यह कहना जल्दबाजी होगी कि इसका सीधा परिणाम कितनी सीटों पर पड़ेगा, लेकिन इतना जरूर है कि खर्कवाल के कांग्रेस में जाने से कोटद्वार का सियासी तापमान बढ़ गया है।

अब देखना होगा कि भाजपा इस राजनीतिक नुकसान की भरपाई कैसे करती है और क्या पार्टी नेतृत्व पुराने कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने के लिए कोई बड़ा कदम उठाता है। दूसरी ओर कांग्रेस के लिए भी चुनौती होगी कि वह खर्कवाल के राजनीतिक अनुभव और जनसंपर्क का कितना प्रभावी इस्तेमाल 2027 की चुनावी तैयारी में कर पाती है।

01/09/2026

उत्तरकाशी के भटवाड़ी क्षेत्र के पापड़गाड में बाढ़ की सूचना पर यूजेवीएनएल मनेरी, जोशियाड़ा व धरासू को अलर्ट मोड पर रखा गया है। तहसील प्रशासन, SDRF, पुलिस एवं राजस्व टीम मौके पर मौजूद हैं। नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। वर्तमान में पापड़गाड की स्थिति सामान्य है।

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