09/05/2026
इन्दिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) में पेयजल और पानी की गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएं काफी गंभीर हैं, खासकर हनुमानगढ़, बीकानेर और जैसलमेर जैसे जिलों में।
यहाँ खराब पानी की समस्या के मुख्य कारण और वर्तमान स्थिति दी गई है:
1. प्रदूषण के मुख्य कारण
औद्योगिक कचरा (Industrial Waste): पंजाब के लुधियाना और जालंधर जैसे शहरों की फैक्ट्रियों का प्रदूषित पानी सतलुज और ब्यास नदियों में मिलता है। यही पानी हरिके बैराज से होता हुआ राजस्थान की नहरों में पहुँचता है।
शहरी सीवरेज: शहरों का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के नदियों में बहा दिया जाता है, जिससे पानी में हानिकारक बैक्टीरिया और केमिकल बढ़ जाते हैं।
खेती का रन-ऑफ: खेतों में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक (pesticides) और उर्वरक (fertilizers) बारिश के साथ नहर के पानी में मिल जाते हैं।
2. पानी की गुणवत्ता पर प्रभाव
भारी धातु (Heavy Metals): पानी में यूरेनियम, लेड (सीसा) और आर्सेनिक जैसे तत्वों की अधिकता पाई गई है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक हैं।
फ्लोराइड और खारापन: कई क्षेत्रों में नहर के पानी के साथ-साथ भूजल में भी फ्लोराइड और खारापन अधिक है, जिससे हड्डियों और दांतों की बीमारियाँ (जैसे फ्लोरोसिस) होने का खतरा रहता है।
बदबू और रंग: प्रदूषण के कारण अक्सर नहर का पानी काला या गहरे रंग का हो जाता है और उसमें से दुर्गंध आने लगती है।
3. प्रमुख समस्याएं और समाधान
सेम की समस्या (Waterlogging): अत्यधिक सिंचाई के कारण पानी जमीन के ऊपर जमा हो जाता है, जिससे मिट्टी में लवणता (salinity) बढ़ जाती है और पानी पीने योग्य नहीं रहता।
फिल्ट्रेशन प्लांट: हालांकि सरकार ने कई जगहों पर 'वाटर ट्रीटमेंट प्लांट' लगाए हैं, लेकिन प्रदूषण का स्तर इतना ज्यादा होता है कि सामान्य फिल्टर तकनीक उसे पूरी तरह साफ नहीं कर पाती।
सतर्कता: 2026 की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, सरकार पंजाब के साथ मिलकर औद्योगिक कचरे को रोकने के लिए सख्त नियमों पर काम कर रही है, लेकिन अभी भी ज़मीनी स्तर पर स्थिति चुनौतीपूर्ण है।
सुझाव:
यदि आप इस पानी का उपयोग पीने के लिए कर रहे हैं, तो इसे RO (Reverse Osmosis) सिस्टम से फिल्टर करने या अच्छी तरह उबालने के बाद ही उपयोग में लें।
नहर के पानी में समय-समय पर आने वाले इस "काले पानी" की समस्या को लेकर स्थानीय प्रशासन और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) को सूचित करना भी आवश्यक है।