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मेरठ में माँ की हत्या और बेटी को उठाकर ले जाने का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। भाजपा सरकार अपराधियों को संरक्षण देते-द...
09/01/2026

मेरठ में माँ की हत्या और बेटी को उठाकर ले जाने का बेहद गंभीर मामला सामने आया है।

भाजपा सरकार अपराधियों को संरक्षण देते-देते आज जिस स्तर पर पहुँच गयी है, वहाँ से वापस नहीं लौट सकती क्योंकि अपराधी उनके राज़ खोल देंगे।

सरकार से कोई उम्मीद ही न बचे, इससे बुरा और कुछ नहीं हो सकता। भाजपा पूरी तरह नाकाम सरकार है ।

कोई है! 🤕😱👮‍♂️💔😢👀

08/01/2026

मौलाना अरशद मदनी व मौलाना महमूद मदनी आज कल चर्चा मे है आइये आज 5 दिसम्बर है मौलाना महमूद मदनी के दादा व मौलाना अरशद मदनी के पिता
हुसैन अहमद मदनी को खिराज ए अकीदत पेश करते है
आप मौलाना हुसैन अहमद मदनी की पैदाईश 16 अक्टूबर 1879 बाँगरमऊ (उन्नाव) मे हुई
1915 मे रेशमी रूमाल तहरीक के बानी व उस्ताद मौलाना महमूद हसन देवबंदी के साथ मक्का मे गिरफ्तार कर मालटा की जेल मे कैद कर दिया गया जहाँ आपको सख्त परेशान किया गया 5 साल जेल मे रहने के बाद आप 1920 ई. मे रिहा हुए आप तहरीके आजादी मे पूरे जोश व खरोश के साथ फिर शामिल हो गये आपने अपनी एक तकरीर मे फरमाया हिन्दुस्तान का दुनिया मे अगर कोई सबसे बडा दुश्मन कोई है तो वे अन्ग्रेंज है उसने हिन्दुस्तानियों को किस हद तक नुकसान पहुंचाया है उसकी कल्पना भी नही की जा सकती है आप शुरू से आखिर तक हिन्दु-मुस्लिम-सिख एकता के साथ अपने मुल्क को आजाद मे अव्वल रहे मौलाना हुसैन अहमद मदनी का एक वाकिया बडा मशहूर है देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदानो और कुरबानियों के फलस्वरूप जब आजादी मिलने का समय आया तो बटवारें का एक दर्दनाक मंजर पेश आ गया मौलाना साहब ने बटवारे का कडा विरोध किया पहले आजादी के लिये कडा संघर्ष किया और अब देश को बटवारें से बचाने के लिये फिर मैदान पर उतरना पडा लेकिन उनकी ये कोशिश नाकामयाब हो गयी और मुल्क तकसीम हो गया 1954 मे आपको नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया ये पुरष्कार प्राप्त करने वाले पहले भारतीय थे
5 दिसम्बर 1957 को आप इस दुनिया से अलविदा हुए

भारत के महान क्रांतिकारी (पार्ट 4 )
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▶️उत्तराखंड के देहरादून में नस्लीय गालियों का विरोध करना एक होनहार छात्र के लिए जानलेवा साबित हुआ।▶️त्रिपुरा के 24 वर्षी...
31/12/2025

▶️उत्तराखंड के देहरादून में नस्लीय गालियों का विरोध करना एक होनहार छात्र के लिए जानलेवा साबित हुआ।

▶️त्रिपुरा के 24 वर्षीय एमबीए छात्र एंजेल चकमा ने 14 दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद अस्पताल में दम तोड़ दिया।

▶️9 दिसंबर की शाम देहरादून सेलाकुई इलाके में छात्र के साथ वारदात हुई थी।

▶️इस घटना ने पूरे पूर्वोत्तर में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है।

▶️घटना वाले दिन एंजेल अपने छोटे भाई माइकल चकमा के साथ स्थानीय बाजार में खरीदारी के लिए गए थे।

▶️तभी कुछ युवकों ने दोनों को नस्लीय गालियां दीं और 'चीनी' कहकर अपमानित किया।

▶️एंजेल ने शांत शब्दों में जवाब दिया, "हम चीनी नहीं हैं, हम भारतीय हैं। अपनी भारतीयता साबित करने के लिए हमें कौन सा सर्टिफिकेट दिखाना चाहिए?"

▶️बस यही बात आरोपियों को नागवार गुजरी। कुछ ही मिनटों में बहस हिंसा में बदल गई और आरोपियों ने उसे चाकू से गोद दिया।

पढ़ें पूरी खबर कमेंट बॉक्स में...



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