Against Breaking India Force

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We stand against Corruption,Anti-India Brigade(tukde-tukde gang),Lutyens Media Lobby,caste politics and Supports Development, sanatan civilization and united hindus

18/06/2025

नेहरू चचा ने इतना सशक्त भारत बनाया कि 𝟏𝟗𝟖𝟒 में जब इंदिरा जी की मृत्यु हुई और राजीव जी प्रधानमंत्री बने तो देश मे आम नागरिक को दो बोरी सीमेन्ट लेने के लिये तहसीलदार से परमिट लेना पड़ता था।

एक किलो चीनी खरीदने तक के लिये भी परमिट लगता था। शादी विवाह में एक क्विंटल चीनी लेने के लिये तो लोग महीनों पहले से सोर्स सिफारिश खोजते फिरते थे।

तब भारत में एलपीजी के कनेक्शन के लिये 7 से 10 साल की वेटिंग थी। यकीन मानिए घर में एलपीजी होते हुए भी गृहणियां स्टोव जलाती थीं, क्योंकि उन्हें डर रहता था कि अगर गैस खत्म हो गयी तो ब्लैक और लम्बी लम्बी लाइनों में रात भर लगने के बाद अगला पूरा दिन खड़े रहकर गैस सिलेंडर भरवाना बहुत बड़ा काम था।

ये वो ज़माना था जब देश मे बजाज स्कूटर प्रीमियम पर बिकते थे, मतलब 𝟓𝟎𝟎𝟎 का स्कूटर और 𝟔𝟎𝟎𝟎 ब्लैक तब 𝟏𝟏,𝟎𝟎𝟎 में स्कूटर मिलेगा। तब टेलीफोन के कनेक्शन मिलने में 𝟕 से 𝟏𝟎 साल लग जाते थे और बहुत जबरदस्त ब्लैक होती थी। 1988 में दिल्ली में अर्जेंट फोन लगवाने की कीमत/रिश्वत 25000 रु थी.
आज 2025 में उस 25000 की inflated value लगभग 8 लाख रु है.
सोच के देखिये एक फोन लगवाने के लिए 8 लाख की रिश्वत???????
ऐसा सशक्त भारत बनाया था नेहरू इंदिरा राजीव G ने?

उस नेहरु खानदान के शासनकाल के जमाने में हर किसी वस्तु का ब्लैक मार्केटिंग होता था। साथ ही हर खाद्य पदार्थ और सीमेंट जैसी अनेक वस्तुओं में मिलावट होती थीं।

आधुनिक भारत के निर्माता नेहरू चचा कितने बड़े युगद्रष्टा थे इसका एक और क़िस्सा सुनिये। नेहरू चचा ने 𝟏𝟗𝟓𝟕 में राजधानी दिल्ली के विकास के लिए 𝐃𝐃𝐀 की स्थापना की।

ऐसी एजेंसी जो मास्टर प्लान बनाती थी उसमें अगले 𝟓𝟎 वर्षों की ही प्लानिंग करती थी कि 𝟓𝟎 साल बाद ये शहर कैसा होगा। इसकी प्लानिंग करके ही शहर बसाया जाता है। उसकी सड़कें, पुल, सार्वजनिक परिवहन, रेलवे स्टेशन, बिजली पानी की व्यवस्था सब 𝟓𝟎 साल का सोच कर की जाती है।

नेहरू चाचा कहते थे "मेरे सपनों का भारत" चचा ने सपने में भी कभी नही सोचा था कि दिल्ली वाले जिंदगी में कभी कार तो क्या स्कूटर भी खरीद पाएंगे, इसलिये 𝟔𝟎 और 𝟕𝟎 के दशक में बने दिल्ली के 𝐃𝐃𝐀 फ्लैट्स देख लीजिये। किसी फ्लैट में कार तो छोड़ो स्कूटर खड़ा करने तक की जगह नहीं है।

नेहरू चिचा कितने बड़े युगद्रष्टा थे इसकी एक और मिसाल '𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚 𝐔𝐧𝐛𝐨𝐮𝐧𝐝𝐬' नामक किताब के लेखक गुरुचरण दास ने दी है। आप 𝟔𝟎 और 𝟕𝟎 के दशक में 𝐏&𝐆 के 𝐂𝐄𝐎 रहे हैं। नेहरू और इंदिरा के भारत में किसी कंपनी को टूथपेस्ट की ज़्यादा ट्यूब बनाने के लिए भी भारत सरकार से आज्ञा लेनी पड़ती थी।

𝟕𝟎 के दशक में एक बार तमिलनाडु में फ्लू फैल गया।𝐏&𝐆 का मशहूर विक्स इन्हेलर और विक्स वेपोरब तब भी बनता था। फ्लू फैला तो विक्स बाजार से गायब हो गई। कंपनी ने भारत सरकार से 𝟓 लाख अतिरिक्त विक्स इन्हेलर बनाने की इजाजत मांगी। वो इजाजत डेढ़ महीने में आयी तब तक फ्लू ठीक हो चुका था।

बजाज के पास तब भी क्षमता थी कि वे लाखों स्कूटर बना देते पर नेहरू और इंदिरा ने उनको कभी भी बड़ी संख्या में स्कूटर बनाने नहीं दिए जिससे ब्लैक मार्केटिंग बंद हो सके।

गुरुचरण दास लिखते हैं कि बिड़ला जी के बेटे आदित्य बिड़ला ने भारत मे जब हिंडाल्को खड़ी की तो नेहरू इंदिरा ने उनको इतना परेशान किया कि उन्होंने फिर कभी देश में लम्बे समय तक कोई फैक्ट्री नहीं लगाई। जबकि उन्होंने अपने जीवन मे देश के बाहर 𝟑𝟐 बहुत बड़ी बड़ी फैक्टरी लगाई।
🤔😳😢
इसलिये आज के बाद यदि आपके मित्र कांग्रेसी ये कहे कि नेहरू जी ने 𝐈𝐈𝐓, 𝐀𝐈𝐈𝐌𝐒, 𝐈𝐒𝐑𝐎 बनाए तो उसके मुंह पर यह पोस्ट दे मारना।🫣 🇮🇳🙇‍♂️

17/05/2025

आतंकवाद के खिलाफ़ लड़ाई बहुत लंबी चलेगी, हमें उम्मीद है.. हम जरूर जीतेंगे 👊✊️

ऑपरेशन सिंदूर मोदी ने नहीं सेना ने किया है।बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में इंदिराजी पीठ पर संजयजी को बाँधे हुए खुली जीप मे...
13/05/2025

ऑपरेशन सिंदूर मोदी ने नहीं सेना ने किया है।

बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में इंदिराजी पीठ पर संजयजी को बाँधे हुए खुली जीप में सवार होकर दोनों हाथों में रायफल और मुँह में देसी कट्टा दबाकर चौतरफा फायरिंग करती हुई देखी गई थी।

मोदीजी कभी इंदिरा की बराबरी नहीं कर सकते। समझे अंधभक्तों?

#इस्त्री_स्त्री

जलनखोर भक्त इसे AI जनरेटेड इमेज कहेंगे किंतु रोमिला थापर सर्टिफाइड इमेजनरी इतिहासकार इसे असली फ़ोटो कहते है।

13/05/2025

भारत में कुछ मोदी हेटर लोग इस हद तक नीचता पर उतरे हुए हैं कि मन ही मन चाहते हैं कि भारत का कुछ तो नुक्सान हो ताकि मोदी को गाली देने का मौका मिले।

नीचता से शुरू कर देशद्रोह तक की चरम सीमा तक पहुंचे हुए हैं ये लोग।

लानत है इन पर और फिर यही लोग सवाल उठाते हैं कि भारत के राजा एक क्यों नहीं हुए।

10/05/2025

Pakistani accounts are circulating a video and claiming that 12 Indian Soldiers were killed in Dharamshala and Battal sector. This is fake news.

Two things you need to know.

1) Fact: This is video of 12 terrorists killed in Kashmir in 2011.

2) Check the name of account I mentioned here. The name of account is 'Major Araohi Rajput'. Pakistani propagandists have created several fake accounts in the name of Indians and Indian Army personnel to spread propaganda against India. Beware of this.

09/05/2025

जो बात टीवी अभिनेत्री फ़लक नाज़ बोल रही है वो सबको सुनना चाहिए। 🙏🏽

09/05/2025

भारतीय लिबरल सेक्युलर एक अजीब जंतु है।

आतंकवादी हमले के बाद वह बोलेगा- युद्ध चाहिए। अभी चाहिए। सरकार कुछ करती क्यों नहीं? किस बात का इंतज़ार है? सरकार निकम्मी है।

पर भारत जब पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाएगा तो कहेगा: “हाय मर गया। दर्द हो रहा है। रोक दो प्लीज़। De-Escalate, No to War”

सेक्युलर-लिबरल अक्सर ख़ानदानी रईस और सामाजिक पायदान पर ऊपर वाला होता है। वह न मित्र-बोध जानता है न शत्रु-बोध। राष्ट्र उसकी कल्पना से परे है।

ये परम स्वार्थी जीव है। राष्ट्र के प्रति इनकी आस्था संदिग्ध है।

07/05/2025
07/05/2025

मॉक ड्रिल के नाम से ज्यादा पैनिक होने की जरूरत नही है।
मॉक ड्रिल हमे अलग अलग सिनेरियो यानी परिदृश्यों में हमारी ड्यूटी क्या बनती है वो सिखाती है ।
उदाहरण के लिये हम किसी ऑर्गनाइजेशन पर बम्ब अलर्ट पर मॉक ड्रिल करें तो हमे बस ये पता करना है कि मॉक ड्रिल का उद्देश्य क्या है।उस दौरान प्रभावित होने वाले लोगो की ड्यूटी क्या है और हमारी रोल और रिस्पांसिबिलिटी क्या है।
नॉर्मल बड़ी कंपनियों में और सरकारी संस्थाओं में ये एक रेगुलर अभ्यास होता है जो सब मिलकर करते रहते है।

अब मान लो किसी ने फोन किया या किसी को सन्देह हुआ कि कम्पनी में इस एरिया में बम रखा है तो आप बम बम करके सबको डरा तो नही दोगे।
अगर न हो तो किसी ने ऐसे ही फोन किया हो तो??
बिना बम के भगदड़ में लोग मर जायेंगे।
इसलिए मॉक ड्रिल हमे अपनी ड्यूटी सिखाती हैं।
अब बम का डाउट हुआ तो कोई हमे फोन करेगा।
हम उस एरिया को सर्च करेंगे।
बम निरोधक टीम को सूचित करेंगे,
दूसरी सुरक्षा एजेंसियां को बताएंगे।

अगर हमें बम दिख गया तो उस एरिया को कोडन कर देंगे।
आसपास की आबादी या कीमती चीजो को हटाने की कोशिश करेंगे।
इस दौरन किस किस का काम क्या है वो पता चलता है।
युद्ध के हालत में आम पब्लिक का क्या काम है मॉक ड्रिल वही सिखाती है।
एक दूसरे के सहयोगी बने,।देश की एकता अखंडता की बातें करें।
हवाई हमलों से कैसे बचना है सीखे।।

फालतू अफवाह पर ध्यान न दे।अगर दूध पानी की सप्लाइ न हो पाए,गैस की सप्लाइ न हो ।
या दूसरे खाने की चीजो की तो कैसे कंट्रोल करके काम चलाये वो सब देखना होगा।
ये नही की युद्ध को अवसर समझ कर चन्दा मांगने लग जाओ।
और अपना घर भर लो।
जंहा जिससे खुद लोगो का भला हो सके करो।
आपदा में अवसर न देखकर एक दूसरे के सहयोगी बने।





ये माथे पर तिलक लगा कर पाकिस्तान की ओर से बैटिंग हो रही है न, बस यही पूरी पॉलिटिक्स है कांग्रेस की...                   ...
06/05/2025

ये माथे पर तिलक लगा कर पाकिस्तान की ओर से बैटिंग हो रही है न, बस यही पूरी पॉलिटिक्स है कांग्रेस की...

30/04/2025

That's how pseudo secularism works !

Terrorism has a religion !
30/04/2025

Terrorism has a religion !

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