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30/05/2026

गोंडी नृत्य | Gondi Dance

"गोंडी नृत्य आदिवासी संस्कृति, परंपरा और प्रकृति से जुड़ाव का जीवंत प्रतीक है। ढोल की थाप और लोकगीतों के साथ प्रस्तुत यह नृत्य गोंड समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।"

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29/05/2026

सोला दारी तीनवाले | Gondi Dance |





22/05/2026

बड़ादेव (जिसे बड़ा देव, परसा पेन, या पर्सा पेन भी कहा जाता है) गोंड संस्कृति और धर्म के सबसे प्रमुख देवता माने जाते हैं। गोंड समाज में बड़ादेव को प्रकृति, जीवन और पूरे ब्रह्मांड का रचयिता और रक्षक माना जाता है।
बड़ादेव कौन हैं?
बड़ादेव को गोंड समुदाय:
सबसे बड़े देवता के रूप में मानता है
निराकार दिव्य शक्ति मानता है
मनुष्य, पशु, जंगल, नदी और धरती का निर्माता मानता है
गोंड समाज और कुलों का रक्षक मानता है

गोंड मान्यताओं के अनुसार बड़ादेव का संबंध प्रकृति के पाँच तत्वों से है:
पृथ्वी
जल
अग्नि
वायु
आकाश

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21/05/2026

वेलपाडी राधाल | Gondi Dance | Gondi Song





17/05/2026

आदिवासी मांदरी नृत्य

गोंडी मांदरी विवाह नृत्य गोंड आदिवासी समाज की पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह नृत्य शादी-विवाह के अवसर पर खुशी, एकता और सामुदायिक उत्सव को दर्शाता है। मंडारी नृत्य में पुरुष और महिलाएं एक साथ गोलाकार या कतार में नाचते हैं और पारंपरिक ढोल, मादर, टिमकी और बांसुरी की धुन पर ताल मिलाते हैं।

इस नृत्य की खास बातें:

रंग-बिरंगे पारंपरिक आदिवासी वस्त्र

समूह में तालबद्ध कदम और घूमने की शैली

लोकगीतों के साथ उत्साहपूर्ण प्रस्तुति

विवाह समारोह में दूल्हा-दुल्हन के स्वागत और आनंद का प्रतीक

प्रकृति, प्रेम और सामुदायिक जीवन की झलक

मंडारी नृत्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि गोंड समुदाय की पहचान, परंपरा और सामाजिक जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है। यह नृत्य विशेष रूप से महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और तेलंगाना के गोंडी क्षेत्रों में लोकप्रिय है।





10/04/2026

Gondi Khapri Dance | गोंडी खापरी नृत्य

गोंडवाना की मिट्टी की महक और पुरखों की विरासत! यह है हमारा पारंपरिक ‘खापरी गोंडी नृत्य’। संस्कृति को संजोए रखना ही हमारी असली पहचान है।

04/04/2026

चना पुंगारी | Chana Pungari | Gondi Dance

🌿 चना पुंगारी – पारंपरिक गोंडी लोकगीत 🌸
“चना पुंगारी” गोंड आदिवासी संस्कृति का एक सुंदर लोकगीत है, जिसमें एक लड़की की सुंदरता की तुलना जंगल में खिले फूल से की जाती है। यह गीत प्रकृति, युवावस्था और आदिवासी जीवन की खुशियों को दर्शाता है।
यह गीत अक्सर त्योहारों और पारंपरिक नृत्यों के दौरान गाया जाता है, जहाँ लोग एक साथ नाचते-गाते हुए अपनी संस्कृति और परंपरा का उत्सव मनाते हैं।
आदिवासी संस्कृति की यह झलक हमें प्रकृति के करीब रहने और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है। 🌿✨

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03/04/2026

खापरी नृत्य - Khapri Dance

खापरी नृत्य महाराष्ट्र के पूर्वी विदर्भ क्षेत्र, विशेष रूप से नागपुर जिले में किया जाने वाला एक पारंपरिक आदिवासी लोक नृत्य है। यह नृत्य मुख्य रूप से गोंड और परधान जनजाति समुदाय द्वारा किया जाता है और उनकी संस्कृति, आस्था और परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यह नृत्य गोंड जनजाति के देवता कुंवारा भिवसन, जिन्हें गोंडी भाषा में भीमाल पेन (Bhimal Pen) कहा जाता है, के उत्सव के दौरान किया जाता है। खापरी नृत्य का आयोजन सामान्यतः चैत्र माह में होता है और इस अवसर पर पूरे समुदाय के लोग — बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक इसमें भाग लेते हैं।
इस नृत्य की सबसे खास बात यह है कि नर्तक अपने हाथ में जलती हुई खापरी (मिट्टी का पात्र) लेकर नृत्य करते हैं। गोंड और परधान जनजाति के लोग अपने देवता को प्रसन्न करने के लिए इस नृत्य के साथ बलि अर्पित भी करते हैं।

वेशभूषा:
इस नृत्य में पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा पहनी जाती है:
महिलाएँ लुगड़ा और दुपट्टा पहनती हैं।
पुरुष धोती पहनकर नृत्य करते हैं।

संगीत और वाद्य यंत्र:
खापरी नृत्य के दौरान पारंपरिक लोक वाद्य यंत्रों का उपयोग किया जाता है, जैसे:
ढोल
शहनाई

इन वाद्य यंत्रों की ताल पर नर्तक पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ नृत्य करते हैं, जिससे वातावरण पूरी तरह से उत्सवमय हो जाता है।

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मातृशक्ति 🙏🙏
19/01/2020

मातृशक्ति 🙏🙏

26/12/2019

नन्हे बच्चों का खूबसूरत नृत्य |
गीत - आबे हमर पारा

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