04/06/2026
क्या आपको पता है कि भारत में आज से लगभग 25 साल पहले एक पूरी तरह #भारतीय #इलेक्ट्रिक_कार सड़कों पर दौड़ रही थी?
और मैं यहाँ किसी #पौराणिक “ #पुष्पक विमान” जैसी कहानी नहीं बता रहा हूँ, बल्कि यह 1990 और 2000 के दशक की वास्तविक घटना है।
शहर था — #बेंगलुरु
कंपनी थी — “Maini Group”
और उस इलेक्ट्रिक कार का नाम था — “REVA”
जब पूरी दुनिया यह मानती थी कि #इलेक्ट्रिक कारें केवल भविष्य का सपना हैं, तब #भारत में एक युवा #इंजीनियर चेतन मैनी ने 1994 के आसपास रिसर्च शुरू करके एक वास्तविक इलेक्ट्रिक कार बना दी थी।
REVA सिर्फ भारत की सड़कों पर ही नहीं चली, बल्कि रिपोर्ट्स के अनुसार यह कार दुनिया के लगभग 26 देशों तक एक्सपोर्ट भी हुई थी।
आज जब लोग और को Revolution का सबसे बड़ा चेहरा मानते हैं, तब यह याद रखना जरूरी है कि Tesla की शुरुआत से पहले भारत में EV टेक्नोलॉजी पर आधारित एक कार आम सड़कों पर दौड़ रही थी।
REVA की सबसे खास बातें क्या थीं?
• यह पूरी तरह इलेक्ट्रिक थी
• इसका आकार छोटा और शहरों के लिए बेहद उपयुक्त था
• यह कम स्पेस में आसानी से चल सकती थी
• उस समय के हिसाब से इसकी टेक्नोलॉजी काफी एडवांस थी
• यह प्रदूषण कम करने की दिशा में भारत का शुरुआती बड़ा कदम थी
दिलचस्प बात यह है कि 2009 में लॉन्च हुई Nano जितनी कॉम्पैक्ट कार का कॉन्सेप्ट भारत में REVA पहले ही दिखा चुकी थी।
लेकिन फिर क्या हुआ?
2004 के बाद Tesla के आने से पूरी दुनिया में EV सेक्टर की जबरदस्त चर्चा शुरू हुई। #अमेरिका में निवेशकों ने अरबों डॉलर लगाए। ने EV कंपनियों को टेक्नोलॉजी, फंडिंग और global ecosystem दिया।
दूसरी तरफ भारत में REVA जैसी कंपनी को न तो पर्याप्त सरकारी समर्थन मिला, न बड़ा निवेश, न मजबूत चार्जिंग और न ही समाज का भरोसा।
2010 में ने REVA को अधिग्रहित कर लिया और बाद में उसी #टेक्नोलॉजी को “Mahindra e2o” के रूप में लॉन्च किया।
आज Mahindra भारत के EV सेक्टर में मजबूत खिलाड़ी बन चुकी है। लेकिन इसकी शुरुआती नींव REVA से जुड़ी हुई थी, यह बात बहुत कम लोग जानते हैं।
हाँ, यह भी सच है कि Tesla और REVA में जमीन-आसमान का अंतर था।
Tesla की कारें अधिक प्रीमियम, तेज, हाई-टेक और ग्लोबल स्तर की थीं। लेकिन हमें यह भी समझना होगा कि Elon Musk के पास जिस स्तर की funding, निवेशक, रिसर्च ecosystem और टेक्नोलॉजी सपोर्ट था, उसका 10% भी उस समय भारत की REVA के पास नहीं था।
किसी भी क्रांतिकारी तकनीक को सफल बनाने के लिए सिर्फ अच्छा आइडिया काफी नहीं होता। उसके पीछे चाहिए —
• लंबी अवधि का निवेश
• सरकार का भरोसा
• उद्योगों का समर्थन
• रिसर्च ecosystem
• ग्राहक जागरूकता
• और सबसे महत्वपूर्ण — समाज का vision
अमेरिका, चीन और कुछ अन्य देश आज टेक्नोलॉजी में इसलिए आगे हैं क्योंकि उन्होंने नए विचारों को समय रहते समर्थन दिया।
भारत में प्रतिभा की कभी कमी नहीं रही।
कमी रही है तो visionary ecosystem की।
कभी-कभी लगता है —
अगर उस समय REVA को सही समर्थन मिला होता, तो शायद आज दुनिया EV Revolution में सिर्फ Tesla नहीं, बल्कि भारत की REVA का भी नाम ले रही होती।
यह सिर्फ एक कार की कहानी नहीं है…
यह उस भारत की कहानी है जो अक्सर दुनिया से पहले सोचता है, लेकिन अपने ही सिस्टम में पीछे छूट जाता है।