31/08/2026
9 महीने की गर्भवती को उसके पति ने समुद्र में मरने छोड़ा, साथ खड़ी प्रेमिका मुस्कुराती रही... लेकिन एक गुप्त फोन ने 10 साल पुराना सच खोल दिया!
रात के 11 बजे गोवा के एक सुनसान बीच पर ठंडी हवाएं चल रही थीं।
9 महीने की गर्भवती रिया मेहरा की आंखें जैसे ही खुलीं, उसके सामने भयानक अंधेरा था।
उसकी दोनों कलाई एक छोटी नाव के लोहे के हैंडल से कसकर बंधी हुई थीं।
सामने एक तेज रफ्तार मोटरबोट खड़ी थी, जिससे जुड़ी रस्सी रिया की नाव को गहरे पानी की तरफ खींच रही थी।
रिया का शरीर दर्द से कांप रहा था।
उसने सामने देखा।
किनारे पर उसका पति विक्रम मेहरा खड़ा था।
उसके ठीक बगल में उसकी सेक्रेटरी तान्या शर्मा खड़ी होकर मुस्कुरा रही थी।
— विक्रम! यह क्या कर रहे हो? रिया चिल्लाई।
— मुझे बचाओ! डॉक्टर ने कहा है कि मुझे किसी भी वक्त दर्द उठ सकता है!
विक्रम ने अपनी जेब में हाथ डाला और ठंडे स्वर में बोला।
— रिया, तुम्हें क्या लगा था? मैं जिंदगी भर तुम्हारे एहसानों तले दबा रहूंगा?
— एहसान? रिया की आंखों से आंसू बहने लगे।
— 10 साल से मैंने तुम्हारे साथ हर तंगी झेली है।
— जब तुम्हारे पास 100 रुपये भी नहीं थे, तब मैंने अपना हर सपना छोड़ दिया था।
विक्रम ने हंसते हुए तान्या का हाथ पकड़ लिया।
— लेकिन तुमने मुझे कभी अपनी असली औकात नहीं बताई।
— तुम राजस्थान के सबसे बड़े उद्योगपति देवराज राठौड़ की इकलौती बेटी हो, यह बात तुमने 10 साल तक मुझसे छिपाई!
तान्या ने बीच में कहा।
— और अब जब हमें सच पता चल चुका है, तो इस कंपनी और संपत्ति पर हक सिर्फ विक्रम का होगा।
— तुम्हारे इस बच्चे और तुम्हारा अब इस दुनिया में कोई काम नहीं है।
रिया को समझ आ गया कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि उसकी हत्या की सोची-समझी साजिश थी।
3 घंटे पहले विक्रम ने उसे प्यार से एक ग्लास जूस दिया था।
— रिया, थकावट दूर हो जाएगी, यह दवाई पी लो।
रिया ने अपने पति पर अंधा भरोसा किया था।
उसे नहीं पता था कि उस जूस में बेहोशी की दवा मिलाई गई थी।
समुद्र की ऊंची लहरें नाव से टकरा रही थीं।
पानी नाव के अंदर आने लगा था।
रिया का पेट दर्द से फटने लगा था।
— विक्रम! मेरे बच्चे का क्या कसूर है? रिया ने गिड़गिड़ाते हुए कहा।
विक्रम ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसने मोटरबोट के ड्राइवर को इशारा किया।
ड्राइवर ने एक्सीलेटर दबाया और रस्सी खिंचने लगी।
रिया की नाव तेजी से गहरे समुद्र की तरफ बढ़ने लगी।
विक्रम और तान्या किनारे पर खड़े होकर यह भयानक मंजर देख रहे थे।
तभी रिया को अपनी कलाई पर बंधी पुरानी स्मार्टवॉच का ध्यान आया।
वह साधारण घड़ी नहीं थी।
उसके पिता देवराज राठौड़ ने रक्षा मंत्रालय के विशेष इंजीनियरों से उसे बनवाया था।
उसमें एक गुप्त जीपीएस और इमरजेंसी पैनिक बटन लगा हुआ था।
रिया ने अपने बंधे हुए हाथों की उंगलियों को मोड़कर घड़ी का बटन 3 सेकंड तक दबाया।
घड़ी में एक हल्की बीप की आवाज हुई।
दूर दिल्ली के एक बंगले में देवराज राठौड़ का फोन बज उठा।
स्क्रीन पर लाल रंग की इमरजेंसी लोकेशन ब्लिंक कर रही थी।
— रिया? देवराज राठौड़ की भारी आवाज आई।
— पापा... रिया की आवाज कांप रही थी।
— विक्रम और तान्या मुझे गोवा के समुद्र में मार रहे हैं... पापा, मेरे बच्चे को बचा लीजिए!
फोन पर 2 सेकंड के लिए सन्नाटा छा गया।
देवराज राठौड़ देश के पूर्व रक्षा सलाहकार रह चुके थे।
उनकी आवाज में एक कठोरता आ गई।
— बेटी, आंखें बंद मत करना।
— 10 मिनट में मेरी टीम तुम्हारे पास होगी।
किनारे पर खड़ा विक्रम अपनी जीत का जश्न मना रहा था।
तभी आसमान में अचानक 3 कोस्ट गार्ड हेलीकॉप्टरों की गड़गड़ाहट गूंज उठी।
समुद्र में चारों तरफ से सर्चलाइट की तेज रोशनी पड़ी।
विक्रम और तान्या का चेहरा एकदम पीला पड़ गया।
— यह हेलीकॉप्टर कहां से आए? तान्या घबराकर बोली।
कुछ ही सेकंड में कोस्ट गार्ड के गोताखोरों ने समुद्र में छलांग लगाई और रिया की नाव को सुरक्षित किनारे पर खींच लिया।
रिया को तुरंत स्ट्रेचर पर लिटाया गया।
उसकी सांसें बहुत धीमी चल रही थीं।
जैसे ही विक्रम उसके पास आने का नाटक करने लगा, रिया ने अपना हाथ उठाया और पुलिस अधिकारी की तरफ देखा।
— इस आदमी को गिरफ्तार करो... इसने मुझे मारने की कोशिश की है।
अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के बाहर सन्नाटा था।
डॉक्टरों ने बाहर आकर खबर दी कि रिया और उसकी बच्ची दोनों सुरक्षित हैं।
लेकिन रिया के दिल में 10 साल के प्यार का वजूद हमेशा के लिए खत्म हो चुका था।
अगली सुबह देवराज राठौड़ अपनी बेटी के पास पहुंचे।
उनके हाथ में एक पुरानी सीक्रेट फाइल थी, जो विक्रम के लॉकर से मिली थी।
उस फाइल के पन्नों पर एक नाम लिखा हुआ था— "रुद्रा ग्रुप ऑफ़ इंडस्ट्रीज"।
रिया ने कांपते हाथों से कागज पलटे।
उसमें लिखा था— "पता लगाओ कि रुद्रा ग्रुप का असली मालिक कौन है।"
रिया की सांसें थम गईं।
विक्रम सालों से उसकी पीठ पीछे उसकी पहचान और उसकी गुप्त संपत्ति की जांच कर रहा था।
लेकिन सवाल यह था कि विक्रम को यह सब किसने बताया?
और उसके पीछे असली मास्टरमाइंड कौन था?