06/08/2026
भारतीय खुफिया एजेंसियों ने इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित ऐसे कई डीपफेक वीडियो की पहचान की है, जिनके बारे में दावा किया जा रहा है कि इन्हें पाकिस्तान से जुड़े हैंडल संचालित कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन वीडियो का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाना और छात्रों के बीच भ्रम व असंतोष फैलाकर उन्हें आंदोलन के लिए उकसाना है।
खुफिया अधिकारियों का कहना है कि दर्जनों वीडियो में यह भ्रामक दावा किया जा रहा है कि हाल में आंदोलन करने वाले छात्रों के खिलाफ केंद्र सरकार सख्त कार्रवाई करने जा रही है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इन वीडियो को सुनियोजित तरीके से इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर फैलाया जा रहा है, ताकि ऐसा माहौल बनाया जा सके कि सरकार छात्रों के खिलाफ कठोर कदम उठाने वाली है।
इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस अभियान का मुख्य निशाना प्रधानमंत्री मोदी हैं। उनका कहना है कि वीडियो का मकसद छात्रों को फिर से सड़कों पर उतरने के लिए उकसाना और उनका गुस्सा सीधे प्रधानमंत्री की ओर मोड़ना है।
अधिकारियों के अनुसार, पहले ऐसे कई फर्जी वीडियो भारतीय सेना को निशाना बनाकर प्रसारित किए जाते थे, लेकिन हाल के दिनों में इनका फोकस प्रधानमंत्री मोदी पर केंद्रित हो गया है। उनका मानना है कि इसके जरिए भारत में अस्थिरता पैदा करने और राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
इस बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। दिल्ली समेत बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और महाराष्ट्र सरकारें भी छात्रों को इसी तरह का भरोसा दे चुकी हैं। दिल्ली सरकार ने हाल ही में नीट-यूजी प्रदर्शनों से जुड़ी 13 एफआइआर में आगे की कार्रवाई रोकने का आदेश भी दिया है।
अधिकारियों का कहना है कि सरकार के इस रुख से फर्जी प्रचार अभियान चलाने वाले तत्वों को झटका लगा है, जिसके बाद डीपफेक वीडियो और भ्रामक दावों का प्रसार बढ़ा दिया गया। उनका यह भी दावा है कि भारत में भ्रम फैलाने की यह कोशिश गुलाम जम्मू-कश्मीर (पीओजेके), बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में चल रही आंतरिक समस्याओं से ध्यान भटकाने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।