14/09/2026
“पत्रकारों से ऐसा व्यवहार क्यों?”—सहरसा सदर अस्पताल में डॉक्टर के रवैये पर सवाल
सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद अस्पताल की कार्यशैली और कुछ कर्मियों के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
इस पूरे मामले में डॉ. एसके आजाद के रवैये को लेकर भी चर्चा तेज है। आरोप है कि पत्रकारों के साथ उनका व्यवहार पहले भी विवादों में रहा है। ऐसे में सवाल है कि क्या सरकारी अस्पताल में खबर संकलन करने पहुंचे पत्रकारों को दबाव या धमकी का सामना करना पड़ेगा?
स्थानीय पत्रकारिता से जुड़े लोगों का कहना है कि दिवंगत पत्रकार संजय झा, जो सौरबाजार से हिंदुस्तान के लिए पत्रकारिता करते थे, के समय भी अस्पताल से जुड़े कई मामलों में पत्रकारिता और अस्पताल प्रशासन के बीच तीखे सवाल-जवाब होते रहे थे।
आज संजय झा हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके दौर की पत्रकारिता को याद करते हुए सवाल उठ रहा है—क्या पत्रकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार की जगह दबंगई की संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है?
मामला सिर्फ एक पत्रकार का नहीं है। सवाल यह है कि अगर अस्पताल में खबर कवरेज करने पहुंचे पत्रकार सुरक्षित नहीं हैं, तो आम मरीज और उनके परिजनों के साथ व्यवहार कैसा होता होगा?
अब जरूरत है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
नोट: इस स्क्रिप्ट में शामिल आरोपों और पुराने विवादों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।
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