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जिला मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर टीकरी कस्बे के रहने वाले पंकज की शादी 8 साल पहले पूजा से हुई थी। उनके दो बच्चे हैं। पंक...
15/02/2026

जिला मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर टीकरी कस्बे के रहने वाले पंकज की शादी 8 साल पहले पूजा से हुई थी। उनके दो बच्चे हैं। पंकज के अनुसार, शादी के तीन साल बाद पूजा का अपने ही सगे भतीजे संजीव से संबंध बन गया।

जब पंकज को इस बात का पता चला तो उसने पूजा को समझाने की कोशिश की और संजीव से मिलने से रोका। मामला पंचायत तक पहुंचा, लेकिन पूजा और संजीव नहीं माने। इस वजह से घर में रोज झगड़े होने लगे और पंकज मानसिक तनाव में रहने लगा। उसका कहना है कि बच्चों पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा था।

आखिरकार, लगातार विवाद से परेशान होकर पंकज और संजीव के परिवार वालों ने दोनों की शादी कराने का फैसला लिया। शुक्रवार को वे सभी थाने पहुंचे, जहां पुलिस ने समझाकर वापस भेज दिया। थाने से बाहर निकलते ही पंकज ने पूजा की शादी संजीव से करा दी।

15/02/2026

भारत ने पाकिस्तान को 61 रन से हराया

बताओ अगर ऐसा हो जाए तो?
11/02/2026

बताओ अगर ऐसा हो जाए तो?

11/02/2026

Putin कह रहे है–"अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है,तो भारत को 9-10 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ेगा!भारतीय जनता अ...
09/02/2026

Putin कह रहे है–

"अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है,
तो भारत को 9-10 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ेगा!

भारतीय जनता अपने लीडर द्वारा लिए गए निर्णयों पर कड़ी नज़र रखेगी और वे किसी के भी सामने अपमानित होना कभी स्वीकार नहीं करेगी"

पर Trump के लिए मोदी जी ने रूस से तेल लेना बंद कर दिया!

बता दूं, भारत के लिए रूसी तेल काफी सस्ता है!

वहीं ट्रांसपोर्ट, बीमा और तेल की रिफाइनिंग को ध्यान में रखते हुए, अमेरिका–वेनेजुएला या अन्य जगहों से आने वाले तेल भारत के लिए अधिक महंगे है!

पर क्या कर सकते है, मोदी जी ने सीचा है तो अच्छा ही सोचा होगा!

समाचार समाप्त 🙏🙏🙏
09/02/2026

समाचार समाप्त 🙏🙏🙏

16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन की तैयारी, देश में प्रति यूजर मासिक डेटा खपत में 399 गुना उछालभारत में डि...
08/02/2026

16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन की तैयारी, देश में प्रति यूजर मासिक डेटा खपत में 399 गुना उछाल
भारत में डिजिटल दुनिया के तेजी से विस्तार के बीच सरकार अब बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाने की दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है। 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने को लेकर गंभीर मंथन शुरू हो गया है। इसी बीच सरकारी आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि देश में प्रति यूजर मासिक मोबाइल डेटा खपत पिछले एक दशक में 399 गुना तक बढ़ गई है।

16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन की चर्चा तेज

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और बच्चों पर इसके मानसिक, सामाजिक और शारीरिक दुष्प्रभावों को देखते हुए सरकार और नीति-निर्माताओं के बीच यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में है। संसद में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अकाउंट बनाने पर रोक लगाने से जुड़ा प्रस्ताव सामने आया है।

प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन शोषण, डेटा चोरी, साइबर बुलिंग और डिजिटल लत से बचाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग से बच्चों की पढ़ाई, नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

हालांकि, यह प्रस्ताव अभी कानून का रूप नहीं ले पाया है, लेकिन केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी पहलुओं पर विचार कर ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा। कुछ राज्य सरकारें भी इस विषय पर अध्ययन और रिपोर्ट तैयार कर रही हैं।

ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से मिली प्रेरणा

हाल के वर्षों में ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को सीमित करने के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं। इन्हीं उदाहरणों को देखते हुए भारत में भी ऐसी नीति पर विचार किया जा रहा है, जिसमें बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।

भारत में डेटा खपत में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

इसी बीच सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में मोबाइल इंटरनेट उपयोग में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है।
साल 2014 में जहां एक औसत भारतीय यूजर की मासिक डेटा खपत करीब 61.66 एमबी थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 24 जीबी प्रति माह तक पहुंच गई है। यह वृद्धि करीब 399 गुना मानी जा रही है।

इस भारी बढ़ोतरी के पीछे प्रमुख कारणों में 4G-5G नेटवर्क का विस्तार, सस्ते डेटा प्लान, स्मार्टफोन की आसान उपलब्धता और वीडियो स्ट्रीमिंग व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का बढ़ता उपयोग शामिल है।

डिजिटल विकास के साथ बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि जहां एक ओर बढ़ती डेटा खपत भारत की डिजिटल प्रगति को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर बच्चों और किशोरों के लिए यह एक गंभीर चिंता का विषय भी बन रही है। यही वजह है कि सरकार अब डिजिटल स्वतंत्रता और डिजिटल सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

आगे क्या?

सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि सोशल मीडिया बैन को लेकर जल्द ही विस्तृत चर्चा के बाद कोई ठोस नीति सामने आ सकती है। अगर यह नियम लागू होता है, तो भारत उन देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जहां बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर कड़े कानून मौजूद हैं।

🚕 सहकारी मॉडल पर आधारित सरकारी टैक्सी सेवा ‘भारत टैक्सी’ लॉन्चनई दिल्ली।केंद्र सरकार के सहयोग से देश में एक नई सहकारी आध...
08/02/2026

🚕 सहकारी मॉडल पर आधारित सरकारी टैक्सी सेवा ‘भारत टैक्सी’ लॉन्च

नई दिल्ली।
केंद्र सरकार के सहयोग से देश में एक नई सहकारी आधारित टैक्सी सेवा भारत टैक्सी की शुरुआत की गई है। इस सेवा का उद्देश्य टैक्सी चालकों को सीधा लाभ पहुंचाना और यात्रियों को किफायती व पारदर्शी किराए पर सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराना है। यह प्लेटफॉर्म ऐप-आधारित होगा और ओला-उबर जैसी निजी कंपनियों के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

सरकार की ओर से बताया गया कि भारत टैक्सी को सहकारी मॉडल पर तैयार किया गया है, जिसमें ड्राइवर केवल सेवा प्रदाता नहीं बल्कि प्लेटफॉर्म के भागीदार और मालिक भी होंगे। इस मॉडल के तहत ड्राइवरों से भारी कमीशन नहीं लिया जाएगा, जिससे उनकी आमदनी में सीधा इजाफा होगा।

ड्राइवरों को मिलेगा सीधा फायदा

भारत टैक्सी से जुड़े चालकों को अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खुद रखने का अवसर मिलेगा। साथ ही उन्हें बीमा, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य में अन्य सरकारी योजनाओं से जोड़ने की भी योजना है। सरकार का मानना है कि इससे ड्राइवरों का आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण होगा।

यात्रियों के लिए क्या खास

यात्रियों को इस ऐप के माध्यम से टैक्सी बुक करने पर पारदर्शी किराया मिलेगा और सर्ज प्राइसिंग जैसी शिकायतों से राहत मिलने की उम्मीद है। शुरुआती चरण में सेवा कुछ चुनिंदा शहरों में शुरू की गई है, जिसे आने वाले समय में पूरे देश में विस्तार देने की योजना है।

डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम

भारत टैक्सी को डिजिटल इंडिया और सहकारिता आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह मॉडल न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि परिवहन क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी लाएगा।

संक्षेप में, भारत टैक्सी एक ऐसी सरकारी-समर्थित पहल है जो ड्राइवरों और यात्रियों—दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई है और आने वाले समय में यह देश की टैक्सी सेवाओं के परिदृश्य को नया आकार दे सकती है।

08/02/2026

“ज़िंदगी में मुश्किलें इसलिए नहीं आतीं कि हम हार मान लें, बल्कि इसलिए आती हैं कि हमें अपनी ताक़त का एहसास हो। जब इंसान खुद पर भरोसा रखना सीख लेता है, तब हालात भी धीरे-धीरे उसके हक़ में झुकने लगते हैं।” 💫

19/01/2026

उन्नाव कस्टोडियल डेथ मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को ज़मानत देने से किया इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव बलात्कार कांड से जुड़े कस्टोडियल डेथ मामले में पूर्व विधायक Kuldeep Singh Sengar को ज़मानत देने से इनकार कर दिया है। यह मामला उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत से जुड़ा है, जिसे न्यायालय ने अत्यंत गंभीर अपराध माना है।

मामले की पृष्ठभूमि

2017 के उन्नाव बलात्कार कांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन प्रभावशाली नेता कुलदीप सिंह सेंगर ने उसके साथ बलात्कार किया। जब पीड़िता के पिता ने इस मामले को लेकर आवाज़ उठाई, तो उन्हें कथित तौर पर झूठे मामलों में फंसाकर पुलिस हिरासत में लिया गया, जहां उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इसे कस्टोडियल डेथ माना गया और इस मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई।

सीबीआई अदालत ने सेंगर को इस कस्टोडियल मौत के मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल की सज़ा सुनाई थी। सेंगर वर्तमान में अन्य मामलों में भी सज़ा काट रहा है।

हाईकोर्ट का फैसला

ज़मानत याचिका पर सुनवाई करते हुए Delhi High Court ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें ज़मानत देने का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने यह भी नोट किया कि सेंगर सज़ा का बड़ा हिस्सा भले ही काट चुका हो, लेकिन मामले की प्रकृति, अपराध की गंभीरता और न्याय प्रक्रिया में हुई देरी के लिए स्वयं आरोपी की भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि कस्टोडियल मौत जैसे मामलों में समाज और न्याय व्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए ऐसे अपराधों में नरमी नहीं बरती जा सकती।

कानूनी और सामाजिक महत्व

यह फैसला न सिर्फ पीड़िता के परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि सत्ता और प्रभाव के बावजूद कानून से ऊपर कोई नहीं है। कस्टोडियल हिंसा और मौतों के मामलों में सख्त रुख अपनाना न्यायपालिका की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को दर्शाता है।

निष्कर्ष

दिल्ली हाईकोर्ट का यह निर्णय एक बार फिर यह रेखांकित करता है कि गंभीर अपराधों, विशेषकर कस्टोडियल डेथ जैसे मामलों में, ज़मानत कोई सामान्य अधिकार नहीं बल्कि न्यायिक विवेक पर आधारित निर्णय है। कुलदीप सिंह सेंगर को फिलहाल इस मामले में राहत नहीं मिली है और उन्हें सज़ा पूरी होने तक जेल में ही रहना होगा।

😬😬😬

11/01/2026

आधार कार्ड में पिता का नाम सुधार करने तरीका

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