08/02/2026
16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन की तैयारी, देश में प्रति यूजर मासिक डेटा खपत में 399 गुना उछाल
भारत में डिजिटल दुनिया के तेजी से विस्तार के बीच सरकार अब बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाने की दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है। 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने को लेकर गंभीर मंथन शुरू हो गया है। इसी बीच सरकारी आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि देश में प्रति यूजर मासिक मोबाइल डेटा खपत पिछले एक दशक में 399 गुना तक बढ़ गई है।
16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन की चर्चा तेज
सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और बच्चों पर इसके मानसिक, सामाजिक और शारीरिक दुष्प्रभावों को देखते हुए सरकार और नीति-निर्माताओं के बीच यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में है। संसद में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अकाउंट बनाने पर रोक लगाने से जुड़ा प्रस्ताव सामने आया है।
प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन शोषण, डेटा चोरी, साइबर बुलिंग और डिजिटल लत से बचाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग से बच्चों की पढ़ाई, नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
हालांकि, यह प्रस्ताव अभी कानून का रूप नहीं ले पाया है, लेकिन केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी पहलुओं पर विचार कर ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा। कुछ राज्य सरकारें भी इस विषय पर अध्ययन और रिपोर्ट तैयार कर रही हैं।
ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से मिली प्रेरणा
हाल के वर्षों में ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को सीमित करने के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं। इन्हीं उदाहरणों को देखते हुए भारत में भी ऐसी नीति पर विचार किया जा रहा है, जिसमें बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
भारत में डेटा खपत में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
इसी बीच सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में मोबाइल इंटरनेट उपयोग में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है।
साल 2014 में जहां एक औसत भारतीय यूजर की मासिक डेटा खपत करीब 61.66 एमबी थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 24 जीबी प्रति माह तक पहुंच गई है। यह वृद्धि करीब 399 गुना मानी जा रही है।
इस भारी बढ़ोतरी के पीछे प्रमुख कारणों में 4G-5G नेटवर्क का विस्तार, सस्ते डेटा प्लान, स्मार्टफोन की आसान उपलब्धता और वीडियो स्ट्रीमिंग व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का बढ़ता उपयोग शामिल है।
डिजिटल विकास के साथ बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि जहां एक ओर बढ़ती डेटा खपत भारत की डिजिटल प्रगति को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर बच्चों और किशोरों के लिए यह एक गंभीर चिंता का विषय भी बन रही है। यही वजह है कि सरकार अब डिजिटल स्वतंत्रता और डिजिटल सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
आगे क्या?
सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि सोशल मीडिया बैन को लेकर जल्द ही विस्तृत चर्चा के बाद कोई ठोस नीति सामने आ सकती है। अगर यह नियम लागू होता है, तो भारत उन देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जहां बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर कड़े कानून मौजूद हैं।