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04/12/2025

दिल्ली MCD उप चुनाव तो AIMIM नही लड़ी,फिर BJP 12 में सीट में से 7 पर BJP कैसे जीत गई, अरे ज़हनी गुलामों का कोई हॉस्पिटल में इलाज कराओ

نوجوان ہوشیار رہیںبنگال میں 6 دسمبر اور بابری مسجد کی بنیاد رکھنے کی خبر ایک سیاسی چالحالیہ دنوں یہ خبر گردش کر رہی ہـے ...
03/12/2025

نوجوان ہوشیار رہیں

بنگال میں 6 دسمبر اور بابری مسجد کی بنیاد رکھنے کی خبر ایک سیاسی چال
حالیہ دنوں یہ خبر گردش کر رہی ہـے کہ مغربی بنگال میں 6 دسمبر کو بابری مسجد کی "بنیاد رکھنے" کا اعلان کیا جا رہا ہـے۔ یہ تاریخ، یہ عنوان، اور یہ وقت—تینوں چیزیں خود اس بات کی طرف اشارہ کرتی ہیں کہ معاملہ سادہ مذہبی نہیں، بلکہ گہری سیاسی چال ہـے

آخر 6 دسمبر ہی کیوں؟
ہر مسلمان جانتا ہـے کہ یہ تاریخ بھارت کے سیاسی اور مذہبی ماحول میں کتنی حساس ہـے۔ یہی وہ دن ہـے جب ایودھیا کی تاریخی مسجد شہید کی گئی تھی۔ ایسے دن پر کوئی بھی "بنیاد" رکھنے کا اعلان کرنا صرف اور صرف جذبات بھڑکانے کی کوشش ہـے
مقصد واضح ہـے
مسلمانوں کو مشتعل کرنا
نوجوانوں کو سڑکوں پر لانا
ماحول کو گرم کرنا
اور سیاسی فائدہ حاصل کرنا
آج کے حالات میں سب سے زیادہ نشانہ جوان اور جذباتی نوجوان بنتے ہیں۔ سوشل میڈیا، افواہیں، اور جذباتی ویڈیوز کے ذریعے انہیں اس طرح کے معاملات میں دھکیلا جاتا ہـے، لیکن جب نقصان ہوتا ہـے، مقدمے بنتے ہیں، نوکریاں متاثر ہوتی ہیں، پھر وہی نوجوان سب سے زیادہ مارے جاتے ہیں۔
اسی لیـے آپ سے گزارش ہـے
کہ کسی بھی اشتعال انگیز اعلان کا حصہ نہ بنیں
یہ کام مذہبی نہیں، بلکہ سیاسی ہـے
سیاسی لوگ فائدہ اٹھا کر نکل جاتے ہیں، نقصان صرف غریب اور عام مسلمان کو ہوتا ہـے
قانون اپنے ہاتھ میں نہ لیں
ملک کا قانون بالکل واضح ہـے اگر کسی جگہ متنازع تعمیر ہو رہی ہـے تو یہ حکومت اور عدالت کا معاملہ ہـے عوام کا نہیں
نوجوان اپنے آپ کو خطرے میں نہ ڈالیں
پرووکیشن کے جال میں نہ پھنسیں
یہ زمانہ سوشل میڈیا کا ہـے
جعلی پوسٹ، بـے بنیاد ویڈیو اور اشتعال انگیز پیغامات لمحوں میں عام ہو جاتے ہیں
لیکن جوش میں اٹھایا گیا ایک قدم پورے مستقبل کو تباہ کر سکتا ہـے
آپ اپنی تعلیم، مستقبل اور خاندان کو مقدم رکھیں
اگر واقعی دل میں مسجدوں کے لئے درد ہـے تو اپنے محلے کی مسجد کو آباد کریں اور پنج وقتہ نماز پڑھیں
قرآن و سنت کے پیغام کو زندہ رکھیں
ہماری اصل طاقت عبادت، امن، علم اور اتحاد ہـے not street politic

02/12/2025

نوجوان ہوشیار رہیں

بنگال میں 6 دسمبر اور بابری مسجد کی بنیاد رکھنے کی خبر ایک سیاسی چال
حالیہ دنوں یہ خبر گردش کر رہی ہـے کہ مغربی بنگال میں 6 دسمبر کو بابری مسجد کی "بنیاد رکھنے" کا اعلان کیا جا رہا ہـے۔ یہ تاریخ، یہ عنوان، اور یہ وقت—تینوں چیزیں خود اس بات کی طرف اشارہ کرتی ہیں کہ معاملہ سادہ مذہبی نہیں، بلکہ گہری سیاسی چال ہـے

آخر 6 دسمبر ہی کیوں؟
ہر مسلمان جانتا ہـے کہ یہ تاریخ بھارت کے سیاسی اور مذہبی ماحول میں کتنی حساس ہـے۔ یہی وہ دن ہـے جب ایودھیا کی تاریخی مسجد شہید کی گئی تھی۔ ایسے دن پر کوئی بھی "بنیاد" رکھنے کا اعلان کرنا صرف اور صرف جذبات بھڑکانے کی کوشش ہـے
مقصد واضح ہـے
مسلمانوں کو مشتعل کرنا
نوجوانوں کو سڑکوں پر لانا
ماحول کو گرم کرنا
اور سیاسی فائدہ حاصل کرنا
آج کے حالات میں سب سے زیادہ نشانہ جوان اور جذباتی نوجوان بنتے ہیں۔ سوشل میڈیا، افواہیں، اور جذباتی ویڈیوز کے ذریعے انہیں اس طرح کے معاملات میں دھکیلا جاتا ہـے، لیکن جب نقصان ہوتا ہـے، مقدمے بنتے ہیں، نوکریاں متاثر ہوتی ہیں، پھر وہی نوجوان سب سے زیادہ مارے جاتے ہیں۔
اسی لیـے آپ سے گزارش ہـے
کہ کسی بھی اشتعال انگیز اعلان کا حصہ نہ بنیں
یہ کام مذہبی نہیں، بلکہ سیاسی ہـے
سیاسی لوگ فائدہ اٹھا کر نکل جاتے ہیں، نقصان صرف غریب اور عام مسلمان کو ہوتا ہـے
قانون اپنے ہاتھ میں نہ لیں
ملک کا قانون بالکل واضح ہـے اگر کسی جگہ متنازع تعمیر ہو رہی ہـے تو یہ حکومت اور عدالت کا معاملہ ہـے عوام کا نہیں
نوجوان اپنے آپ کو خطرے میں نہ ڈالیں
پرووکیشن کے جال میں نہ پھنسیں
یہ زمانہ سوشل میڈیا کا ہـے
جعلی پوسٹ، بـے بنیاد ویڈیو اور اشتعال انگیز پیغامات لمحوں میں عام ہو جاتے ہیں
لیکن جوش میں اٹھایا گیا ایک قدم پورے مستقبل کو تباہ کر سکتا ہـے
آپ اپنی تعلیم، مستقبل اور خاندان کو مقدم رکھیں
اگر واقعی دل میں مسجدوں کے لئے درد ہـے تو اپنے محلے کی مسجد کو آباد کریں اور پنج وقتہ نماز پڑھیں
قرآن و سنت کے پیغام کو زندہ رکھیں
ہماری اصل طاقت عبادت، امن، علم اور اتحاد ہـے not street politics

28/11/2025

मोदी के 15 लाख वाले जुमले पर तो जुम्मन मियाँ भक्तों का खूब मजाक उड़ाते हैं पर मुलायम ने 18% आरक्षण वाले जुमले से जो इन्हें बेवकूफ बनाया था उसपर कुछ नही बोलते हैं :) :)

Admission B.A/ B.sc /M.A /M.sccourse subjects all languages urdu, hindi, english bangali, Sanskrit, kurukh, Nagpuri, kud...
27/11/2025

Admission
B.A/ B.sc /M.A /M.sc
course subjects all languages urdu, hindi, english bangali, Sanskrit, kurukh, Nagpuri, kudmali santhali methli
All subjects course social science
All subjects course B.sc combination
keliye sampark kare
Session final 2026
https://whatsapp.com/channel/0029Vb2N9MWICVfjBGNeRX14

इस तस्वीर से चिढ़ने वाले मुसलमान भाइयों से बस एक सीधी बात कहना चाहता हूँ—इसको गाली देकर तुम्हें आखिर मिलता क्या है?ज़रा ...
24/11/2025

इस तस्वीर से चिढ़ने वाले मुसलमान भाइयों से बस एक सीधी बात कहना चाहता हूँ—
इसको गाली देकर तुम्हें आखिर मिलता क्या है?
ज़रा सोचो… अगर ये शख़्स भी नीतीश कुमार को छोड़ देता,
तो आज मुसलमान की तरफ़ से CM के सामने खड़े होकर बोलने वाला बचता कौन?
तुम लोग कहते हो कि नीतीश ने तुम्हारे लिए क्या किया—
अच्छा बताओ, क्या नीतीश को गाली देने से वक़्फ़ क़ानून वापस हो गया?
क्या नीतीश मुख्यमंत्री की कुर्सी से उतर गए?
कुछ भी नहीं बदला।
अब जब नीतीश फिर से मुख्यमंत्री बन ही चुके हैं,
तो मुसलमान उनसे दूर भागकर क्या हासिल करेगा?
वोट भी नहीं देना चाहते,
और उम्मीद भी रखते हो कि नीतीश मुसलमानों की बात मानें—
ये कैसी सियासत है?
सोच कर देखो—
अगर मुसलमान उनके पास रहेगा ही नहीं,
तो नीतीश से अपनी बात मनवाएगा कौन?
बात तो वही रख पाएगा जो दरवाज़ा खुला रखेगा।
और जो लोग सिर्फ़ एक तस्वीर देखकर आगबबूला हो रहे हैं,
उनसे पूछना चाहता हूँ—
अगर बिहार में नीतीश जैसा नेतृत्व भी खो दिया
तो फिर मुसलमानों के लिए बचेगा क्या?
यूपी की तरफ देख लो,
जहाँ मुसलमानों की हालत क्या है किसी से छुपी नहीं है।
बिहार आज भी संभला हुआ है तो इसलिए
क्योंकि कुछ लोग समय देखकर, हालात समझकर,
रिश्ते बनाए रखते हैं।
मुसलमान अगर खुद ही अपने लिए रास्ते बंद कर लेगा
तो कल बोलने का हक भी खो देगा।
इसलिए समझदारी यह नहीं कि तस्वीर पर गाली दी जाए—
समझदारी यह है कि कमज़ोरी नहीं,
अपनी सियासी ताक़त बनाई जाए।”
Gulam Rasool Balyawi Nitish Kumar

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24/11/2025

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*बिहार की राजनीति: 'B-Team' का शोर और हार का असली सच (एक विश्लेषण)*राजनीति में हार-जीत एक सिक्के के दो पहलू हैं, लेकिन ब...
24/11/2025

*बिहार की राजनीति: 'B-Team' का शोर और हार का असली सच (एक विश्लेषण)*
राजनीति में हार-जीत एक सिक्के के दो पहलू हैं, लेकिन बिहार में हार के बाद 'आत्मचिंतन' की जगह 'ठीकरा फोड़ने' की रवायत बन गई है। शिक्षित होने के बावजूद, कुछ लोग और राजनीतिक दल अपनी रणनीतिक विफलताओं को स्वीकारने के बजाय अपनी हार का जिम्मेदार किसी तीसरी पार्टी को ठहराने लगते हैं। आज जरूरत है कि हम भावनाओं से ऊपर उठकर आंकड़ों की कसौटी पर पिछले 15 सालों के चुनावी इतिहास को परखें। क्या वाकई AIMIM जैसी पार्टियां किसी को हराने के लिए लड़ रही हैं, या फिर तथाकथित 'सेक्युलर' दलों की जमीन ही खिसक चुकी है? आइए, तथ्यों के आईने में हकीकत देखते हैं।

*2010 का आईना: जब ओवैसी नहीं थे, तब कौन जिम्मेदार था?

चलिए फ्लैशबैक में चलते हैं। साल 2010, केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार थी। बिहार विधानसभा चुनाव में AIMIM का कोई नामो-निशान नहीं था। मैदान में कांग्रेस, राजद, लोजपा, और एनडीए (भाजपा-जदयू) थे। परिणाम क्या हुआ? एनडीए को 206 (जदयू+भाजपा) सीटों पर प्रचंड बहुमत मिला। वहीं, राजद महज 22 सीटों पर सिमट गई। जिस सीमांचल को आज राजद अपना गढ़ मानती है, वहां की 24 सीटों में से राजद को सिर्फ 1 सीट (कोचाधामन) मिली थी। दिलचस्प बात यह है कि वो एक सीट जीतने वाले कोई और नहीं, बल्कि वर्तमान AIMIM प्रदेश अध्यक्ष जनाब अख्तरुल ईमान ही थे (जो तब राजद में थे)। कांग्रेस ने सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ा और मात्र 4 सीटें जीतीं (जिसमें 3 सीमांचल से थीं)। उस वक्त सीमांचल में भाजपा ने 13 सीटें जीती थीं। अब सवाल यह है कि 2010 में तो ओवैसी साहब चुनाव लड़ने नहीं आए थे, फिर राजद और कांग्रेस की इतनी बुरी दुर्गति क्यों हुई? तब "वोट कटवा" कौन था?

• 2015 का चुनाव: जब 'B-Team' का प्रोपेगेंडा फेल हो गया

साल 2015 का चुनाव इस बहस का सबसे बड़ा अपवाद और सबूत है। इस चुनाव में राजद, जदयू और कांग्रेस का महागठबंधन बना। दूसरी तरफ, असदुद्दीन ओवैसी ने पहली बार सीमांचल की 6 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे। ओवैसी बंधुओं (असदुद्दीन और अकबरुद्दीन) ने जमकर प्रचार भी किया। तर्क के हिसाब से तो भाजपा को जीतना चाहिए था, लेकिन हुआ क्या? महागठबंधन ने प्रचंड जीत हासिल की। सीमांचल की 24 में से 18 सीटें महागठबंधन (कांग्रेस-8, जदयू-6, राजद-4) ने जीतीं। भाजपा की लहर के बावजूद और AIMIM के मैदान में होने के बावजूद, अगर जनता को विकल्प दिखा तो उन्होंने महागठबंधन को वोट दिया। यह साबित करता है कि अगर आपकी रणनीति और गठबंधन मजबूत है, तो किसी के चुनाव लड़ने से आप नहीं हारते।

• 2020 का जनादेश: अलग राहें, अलग नतीजे

2020 में समीकरण फिर बदले। राजद ने 144 सीटों पर लड़कर 75 सीटें जीतीं (जो एक शानदार प्रदर्शन था), जबकि कांग्रेस 70 सीटों पर लड़कर महज 19 पर सिमट गई। सीमांचल में AIMIM ने अपनी ताकत दिखाई और 5 सीटें जीतीं। इसके बावजूद राजद राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। अगर ओवैसी की वजह से ही हार होती, तो राजद 75 सीटें कैसे जीतती? सच्चाई यह है कि चिराग पासवान की लोजपा ने जदयू को नुकसान पहुंचाया, जिसका फायदा राजद को मिला, न कि ओवैसी ने राजद को हराया।

• 2025 के नतीजे और रणनीतिक दिवालियापन

अब आते हैं वर्तमान यानि 2025 के चुनाव परिणामों पर जिसमें भाजपा 89, जदयू 85, लोजपा 19, HAM 5, RLM 4 , राजद: 25 सीटें कांग्रेस: 6 सीटें, माले 2, IIP 1, AIMIM 5 सीटें जीतने में कामयाब हुई । राजद 25 सीटों पर आ गई है, जो कि तकनीकी रूप से एक बड़ी हार है। लेकिन विडंबना देखिए, बुद्धिजीवी वर्ग अभी भी यही कह रहा है कि AIMIM के लड़ने से जमानत जब्त हुई। यह विश्लेषण हास्यास्पद है। जब पार्टी का जनाधार ही खिसक गया हो, तो 5 सीटों पर जीतने वाली पार्टी को पूरे राज्य में हार का जिम्मेदार बताना अपनी कमियों पर पर्दा डालने जैसा है। यह स्पष्ट रूप से राजद और कांग्रेस की रणनीतिक विफलता (Strategic Failure) है।

• 18% बनाम 82%: डर की राजनीति कब तक?

एक नैरेटिव यह चलाया जाता है कि "अगर कोई मुस्लिम नेतृत्व उभरेगा, तो बहुसंख्यक समाज (82%) एकजुट हो जाएगा।" यह तर्क भारतीय लोकतंत्र की धर्मनिरपेक्षता पर एक तमाचा है। अगर हम इसी डर (Compromising Attitude) के साथ जीते रहे कि 'कहीं वो नाराज न हो जाएं', तो मुसलमान कभी भी 'डिसीजन मेकिंग' की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाएंगे। हम हमेशा सिर्फ दरी बिछाने और वोट देने के लिए रह जाएंगे।

क्या हमारा संविधान किसी धर्म विशेष को सीएम बनने से रोकता है? अगर नहीं, तो फिर यह डर क्यों? 2005 का इतिहास गवाह है—जब रामविलास पासवान ने राजद के सामने शर्त रखी थी कि "किसी मुस्लिम को सीएम बना दो, मैं समर्थन दे दूंगा।" तब लालू यादव ने मुस्लिम सीएम बनाने के बजाय सत्ता गंवाना मंजूर किया। नतीजतन, बिहार में एनडीए का रास्ता खुला। भाजपा को सत्ता में लाने का रास्ता परोक्ष रूप से उसी जिद ने खोला था।

• निष्कर्ष: बदलाव का वक्त

राजद और कांग्रेस का यह विलाप कि EVM में गड़बड़ी है या ओवैसी 'B-Team' हैं, अब पुराना हो चुका है। 2005 में भी लालू जी ने परिणामों को 'रहस्यमयी' बताया था, जबकि केंद्र में कांग्रेस थी। 2025 में भी वही राग अलापा जा रहा है। समय की मांग है कि बिहार की राजनीति में अब 'आमूलचूल परिवर्तन' (Radical Change) हो। मुस्लिम समाज और धर्मनिरपेक्ष लोगों को उस "कॉम्प्रोमाइजिंग एटीट्यूड" से बाहर निकलना होगा। जब तक हम अपनी शर्तों पर राजनीति नहीं करेंगे, तब तक हमें कभी 'वोट बैंक' और कभी 'वोट कटवा' कहकर इस्तेमाल किया जाता रहेगा।

हकीकत यह है कि भाजपा की B-Team वो नहीं जो चुनाव लड़ रही है, बल्कि B-Team वो है जिसने अपनी जिद और परिवारवाद के लिए 2005 में एक मुस्लिम को सीएम बनने से रोका और भाजपा को सत्ता की चाबी सौंप दी।

विद्यार्थी: राजनीतिक शास्त्र (स्नाकोत्तर)
Copy- Riyaz Rahi

उत्तरप्रदेश के मुसलमानों ये याद है न या भूल गए Akhilesh Yadav की सरकार थी 70 मुस्लिम विधायक एवं मंत्री थे लेकिन कोई मदद ...
24/11/2025

उत्तरप्रदेश के मुसलमानों ये याद है न या भूल गए Akhilesh Yadav की सरकार थी 70 मुस्लिम विधायक एवं मंत्री थे लेकिन कोई मदद करने नही गया था ठंड में ठिठुरते मुसलमानों के कैम्प पर समाजवादी बुलडोजर चलवा रही थी तब असदउद्दीन ओवैसी साहब संसद से लेकर सड़क तक इस जुल्म के खिलाफ आवाज़ उठा रहे थे और कैम्प का दौरा करने आये थे दवा कम्बल खाना पीना से लेकर हर मुनासिब मदद असदउद्दीन ओवैसी साहब की तरफ से की गई थी उस वक़्त सपा सरकार और उनके नेता मुसलमानों की लाशों पर सैफई में नाच व मुजरा देख रहे थे।


22/11/2025

1952 के बाद पहली बार बिहार विधानसभा में सबसे कम ग्यारह मुस्लिम विधायक पहुंचा ।
क्या फैक्टर रहा अपनी राय कमेंट में दें।

जनाब असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व में, मजलिस के एक शिष्टमंडल ने अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री श्री श्री वाले इमरान प्रतापगढ़ी से...
21/11/2025

जनाब असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व में, मजलिस के एक शिष्टमंडल ने अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री श्री श्री वाले इमरान प्रतापगढ़ी से मिलकर सीमांचल के विकास के लिए पैकेज देने की मांग की।

इमरान प्रतापगढ़ी द्वारा २०२० में किया गया दावा आज सच साबित हुआ। मजलिसियों को फंड मांगने उन्ही के पास जाना पड़ा...!!

बहरहाल, केंद्रीय मंत्री इमरान प्रतापगढ़ी ने आश्वासन दिया कि इस मामले में सूबे के मुख्यमंत्री जनाब तेजस्वी यादव और उपमुख्यमंत्री मुकेश सहनी से चर्चा के बाद पैकेज की घोषणा करेंगे....

"2010 Bihar Election Results: Kya us waqt bhi AIMIM ne chunav lada tha? Ab ro-na dhona chhodo… West Bengal ki baari haiA...
18/11/2025

"2010 Bihar Election Results: Kya us waqt bhi AIMIM ne chunav lada tha? Ab ro-na dhona chhodo… West Bengal ki baari hai
Asaduddin Owaisi Majid Hussain Imran Solanki

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