08/06/2026
"शहाबुद्दीन की क्या औकात थी"?, अगर साधु यादव अपनी माँ का दूध पिया था तो उनके ज़िंदा रहते यह पूछता, वरना कुतिया का दूध पिया है।
एक बार की बात है मरहूम डॉ मोहम्मद शहाबुद्दीन ने लालू यादव के निष्काषित साले बलात्कारी साधु यादव के इतना ज़ोर का थप्पड़ मारा था कि इसका गाल और गर्दन दोनों लाल पड़ गए थे। आपको पूरी कहानी बताता हूँ, दरसल लालू यादव की एक बेटी की शादी थी उसी समय साधु यादव ने पटना के एक गाड़ी के शोरूम से गाड़ियां उठा लीं, और वहाँ के गार्ड को मारा पीटा भी, उसके बाद शिवानंद तिवारी जो रजद के नेता थे उन्होने साधु यादव को समझाया कि ऐसा क्यों किया ऐसा नहीं करना चाहिये थे, लेकिन उनकी बात का इस बुडबक पर कोई असर नहीं हुआ, उसके थोड़ी ही देर बाद मरहूम शहाबुद्दीन मुख्यमंत्री आवास पहुचे और वहाँ जाकर साधु यादव से बोले, तुम लोग कितने घटिया आदमी हो, अगर तुमको गाड़ी ही चाहिय थी तुम लोग बिहार के टाटा के gm को फ़ोन करते वो गाड़ी यहीं आवास पर लगा देते, उस गरीब गार्ड को क्यों मारा? इतने में जब बहस शुरू हहुई तो वहीँ शहाबुद्दीन साहब ने इसको इतना ज़ोर का तमाचा वहीँ लालू जी के सामने ऐसा मारा कि इसकी कनपट्टी लाल हो गयी। बेचारा उस थप्पड़ की भड़ास कभी मरहूम सांसद जी के ज़िंदा रहते हुए तो निकाल नहीं पाया, अब उनके दुनिया से जाने के बाद मुँह से पेचिस कर रहा है। लोग यह भी कहते हैं जब लालू यादव इससे भयंकर नाराज़ हो गये थे, तो दिवंगत शहाबुद्दीन ने इसे अपने पास रख लिया था और खूब इससे पानी और अपने घर की सफाई के काम पर लगवा दिया था। बोल रहा है की रजद से शहाबुद्दीन था? 2024 लोकसभा चुनाव हुआ था, उसमे शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शाहब निर्दलीय लड़ी थीं और 3 लाख से ज़्यादा वोट लायी जबकि रजद से उसके कद्दावर नेता, कई बार के विधायक और विधानसभा स्पीकर अवध बिहारी चौधरी की ज़मानत जबत हो गयी थी। और आपको जानकर हैरानी होगी शहाबुद्दीन साहब के कोर वोटर ठाकुर समाज से हैं, क्यूंकि जिस वक़्त बिहार में लाल क्रांति चली थी, कम्युनिस्ट लोग ठाकुर ज़मीनदारों की ज़मीने छिन रहे थे, उस वक़्त मरहूम शहाबुद्दीन ने उनको मार कर वहाँ से भगाया, और ठाकुर समाज को उनकी ज़मीने वापस दिलवाने का काम किया। जिसका एहसान ठाकुर समाज आज भी मानता है। यही वजह है साधु यादव पागल हुआ पड़ा है।
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