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🔱 प्रदोष व्रत का रहस्य: क्या शाम की पूजा के बाद अन्न ग्रहण कर सकते हैं? 🌙प्रदोष व्रत को लेकर अक्सर शिवभक्तों के मन में य...
20/07/2026

🔱 प्रदोष व्रत का रहस्य: क्या शाम की पूजा के बाद अन्न ग्रहण कर सकते हैं? 🌙
प्रदोष व्रत को लेकर अक्सर शिवभक्तों के मन में यह शंका रहती है कि क्या सूर्यास्त के बाद की पूजा संपन्न होने पर भोजन किया जा सकता है? आइए जानते हैं प्रदोष व्रत के सही नियम और 'व्रत' व 'उपवास' का वास्तविक अर्थ! 👇
✨ क्या शाम की पूजा के बाद अन्न खा सकते हैं?
जी हाँ! शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव की विधिवत पूजा करने के बाद आप नमक सहित पूर्ण भोजन (अन्न) ग्रहण कर सकते हैं।
🙏 भोजन से पहले क्या है अनिवार्य?
व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब आप सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में शिव-पार्वती का ध्यान और आराधना करें। आप अपनी क्षमता के अनुसार इनमें से कुछ भी कर सकते हैं:
'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप
शिव सहस्त्रनाम या शिव पंचाक्षर स्तोत्र
शिव महिम्न स्तोत्र या रुद्राष्टक
रुद्र पाठ या शिव चालीसा
🤔 'व्रत' और 'उपवास' का सही अर्थ क्या है?
अक्सर लोग अन्न न खाने को ही व्रत मान लेते हैं और दिनभर चाय, कॉफी या फलाहारी पकवान खाते रहते हैं। लेकिन शास्त्रों के अनुसार इसका अर्थ बहुत गहरा है:
व्रत का अर्थ: किसी भी ईश्वरीय कार्य या संकल्प को धारण करना। व्रत का सीधा संबंध भगवान के मंत्र जाप, पाठ और पूजा के संकल्प से है, न कि सिर्फ भूखे रहने से।
उपवास का अर्थ: यह व्रत को सफल बनाने का एक 'सहयोग' है। उपवास का मुख्य लक्ष्य हल्का और सात्विक आहार लेना है, ताकि शरीर में आलस्य न आए और मन पूरी तरह से ईश्वर के ध्यान (जप-पाठ) में लगा रहे।
अल्प आहार का विधान: पूरी तरह निराहार रहने से शरीर में कमजोरी आ सकती है, जिससे पूजा-पाठ में मन नहीं लगता। इसलिए शरीर की क्षमता के अनुसार सात्विक और अल्प आहार लेने का विधान बनाया गया है।
🌸 कितना सरल है प्रदोष व्रत!
प्रदोष व्रत अत्यंत सरल और कल्याणकारी है। सुबह भगवान शिव की सामान्य आराधना करें, शाम को प्रदोष काल में विधिवत शिव पूजा और मंत्र जाप करें, और उसके बाद प्रसन्न मन से शिवजी का स्मरण करते हुए नमक सहित पूर्ण भोजन ग्रहण करें।
हर हर महादेव! 🔱 ॐ नमः शिवाय!
क्या आप भी प्रदोष व्रत रखते हैं? कमेंट्स में "हर हर महादेव" लिखकर अपनी हाजिरी लगाएं और इस महत्वपूर्ण जानकारी को अन्य शिवभक्तों के साथ अवश्य शेयर करें।

20/07/2026
🌟 मृत्यु और आत्मा के गहरे रहस्य: जब यमराज ने स्वयं नचिकेता को दिया ज्ञान! 🌟सनातन धर्म के पुराणों में एक बहुत ही अद्भुत क...
17/07/2026

🌟 मृत्यु और आत्मा के गहरे रहस्य: जब यमराज ने स्वयं नचिकेता को दिया ज्ञान! 🌟
सनातन धर्म के पुराणों में एक बहुत ही अद्भुत कथा है, जहां स्वयं मृत्यु के देवता यमराज को एक साधारण बालक के हठ के आगे झुकना पड़ा था।
जब महर्षि वाजश्रवस ने यज्ञ में कमज़ोर और बीमार गायें दान कीं, तो उनके ज्ञानी पुत्र नचिकेता ने इसका विरोध किया। क्रोध में आकर महर्षि ने नचिकेता को 'यमराज को दान' कर दिया। एक आज्ञाकारी पुत्र की तरह नचिकेता यमलोक चले गए और बिना कुछ खाए-पिए 3 दिन तक यमराज के द्वार पर प्रतीक्षा करते रहे।
बालक की इस निष्ठा से प्रसन्न होकर यमराज ने नचिकेता को दर्शन दिए और मृत्यु व आत्मा से जुड़े वो गूढ़ रहस्य बताए, जो मानव जाति के लिए परम ज्ञान हैं:
🔹 मनुष्य का शरीर है ब्रह्म की नगरी:
हमारा शरीर 11 दरवाजों (दो आंखें, दो कान, दो नाक के छिद्र, एक मुंह आदि) वाला एक नगर है, जिसमें स्वयं ब्रह्म का वास है। जो मनुष्य इस रहस्य को समझकर ध्यान करता है, वह जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है।
🔹 आत्मा अजर-अमर है:
जो आत्मा को मरने या मारने वाला मानता है, वह सत्य से भटक गया है। आत्मा न तो कभी जन्म लेती है और न ही मरती है। यह अनंत, अनादि और दोष रहित है।
🔹 हृदय में बसते हैं परमात्मा:
परमात्मा का वास मनुष्य के हृदय में (अंगूठे के आकार में) माना गया है। जो व्यक्ति स्वयं में परमात्मा को देखता है, वह दूसरों के हृदय में भी उन्हें ही महसूस करता है और किसी से घृणा नहीं करता।
🔹 मृत्यु के बाद कर्मों का फल:
यमदेव के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा को उसके अच्छे-बुरे कर्मों, ज्ञान और संगति के आधार पर नया जन्म मिलता है। अधिक पाप करने वालों को पशु-पक्षी या अन्य योनियों (जैसे पेड़-पौधे, पहाड़) में भी जन्म लेना पड़ सकता है।
🔹 शरीर छूटने के बाद क्या शेष रहता है?
प्राण और इंद्रियों का ज्ञान निकल जाने के बाद भी शरीर में वह 'परब्रह्म' शेष रहता है, जो इस ब्रह्मांड के हर चेतन और प्राणी में विद्यमान है।
🔹 आत्मज्ञान और 'ॐ' (Om) का रहस्य:
यमराज ने बताया कि अविनाशी प्रणव यानी 'ॐ' ही परब्रह्म का सच्चा स्वरूप है। सारे वेदों और मंत्रों में ॐ को ही परमात्मा को पाने का सर्वश्रेष्ठ और अंतिम माध्यम बताया गया है।
🙏 क्या आपने कभी नचिकेता और यमराज का यह प्रसंग पढ़ा था?
कमेंट्स में 'ॐ' या 'ॐ शांति' जरूर लिखें और इस परम ज्ञान को अपने परिवार व मित्रों के साथ शेयर करें! ✨

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