06/06/2026
क्या आप जानते हैं कि पूरी दुनिया में मुस्लिम आबादी कितनी है?
190 करोड़, जो दुनिया की कुल आबादी (780 करोड़) का 24% है।
क्या आप जानते हैं कि इनमें से अब तक कितने लोगों को विज्ञान में नोबेल पुरस्कार मिला है?
सिर्फ 3 लोग।
मैं फिर से कह रहा हूँ, सिर्फ 3 लोग।
अब तक विज्ञान में कुल कितने नोबेल पुरस्कारों की घोषणा की जा चुकी है?
609।
उस हिसाब से नोबेल पुरस्कार जीतने वाले मुस्लिम वैज्ञानिकों का प्रतिशत मात्र 3 \div 609 = 0.50\% बैठता है।
अब बात करते हैं हिंदू आबादी की:
क्या आप जानते हैं कि पूरी दुनिया में हिंदू आबादी कितनी है?
120 करोड़, जो दुनिया की कुल आबादी का 15% है।
क्या आप जानते हैं कि इनमें से कितने लोगों को अब तक विज्ञान में नोबेल मिला है?
सिर्फ 5 लोग (भारतीय मूल के दो लोगों को मिलाकर)।
उस हिसाब से यह संख्या मात्र 5 \div 609 = 0.80\% बैठता है।
अब जरा एक अलग धर्म के मानने वाले यहूदियों (Jews) पर नजर डालते हैं
क्या आप जानते हैं कि पूरी दुनिया में यहूदियों की कुल संख्या कितनी है?
सिर्फ 147 लाख।
मैं फिर से कह रहा हूँ, सिर्फ 1 करोड़ 47 लाख।
क्या आप जानते हैं कि इनमें से कितने लोगों ने विज्ञान में नोबेल पुरस्कार जीता है?
150 लोगों ने!!!! जो विज्ञान में घोषित कुल नोबेल पुरस्कारों का 150 \div 609 = 25\% है!!!!
सोचिए जरा!!! इतनी छोटी सी आबादी के भीतर इतने सारे नोबेल विजेता!! ऊपर दिए गए आंकड़ों का जिक्र करने की एक खास वजह है।
फेसबुक और सोशल मीडिया का हाल
आज फेसबुक खोलते ही भारतीय उपमहाद्वीप के लोग धार्मिक ग्रंथों के भीतर विज्ञान की खोज करते हुए नजर आते हैं। ये लोग बड़े चाव से विज्ञान के हर आविष्कार की व्याख्या धार्मिक ग्रंथों के जरिए करने में जुटे रहते हैं।
हिंदुओं को अपने ग्रंथों में 'बिग बैंग' मिल जाता है, ब्रह्मांड के निर्माण का पूरा विवरण दिख जाता है, यहाँ तक कि परमाणु की दुनिया का भी सटीक वर्णन मिल जाता है।
मुस्लिम भी इसी तरह अपने ग्रंथों में 'बिग बैंग' ढूंढ लेते हैं, पृथ्वी के निर्माण का विवरण पा लेते हैं और विज्ञान के अन्य आविष्कारों को भी खोज निकालते हैं।
इनमें से हर किसी का दावा है कि उनके अपने-अपने धार्मिक ग्रंथों में विज्ञान के सभी आविष्कार इशारों-इशारों में पहले से ही लिखे हुए हैं! वे खुद इसे समझ या डिकोड नहीं पा रहे हैं, बस इसीलिए आज वे विज्ञान में पिछड़े हुए हैं!
कितना हास्यास्पद है!!
जिस यहूदी वैज्ञानिक ने नोबेल पुरस्कार जीता है, उसने शायद अपने जीवन में कभी हिंदू या मुस्लिम धर्मग्रंथों को खोलकर भी नहीं देखा होगा। दूसरी ओर, हिंदू और मुस्लिम इन ग्रंथों को रट-रटकर पन्ने फाड़ देने के बाद भी कोई नोबेल पुरस्कार घर नहीं ला पा रहे हैं! वे कोई क्रांतिकारी आविष्कार नहीं कर पा रहे हैं!
अतीत का गौरव बनाम वर्तमान की सच्चाई
एक समय था जब मुस्लिमों ने विज्ञान में बहुत बड़ा योगदान दिया था। बीजगणित (अल-ख्वारिज्मी), रसायन शास्त्र, चिकित्सा विज्ञान (इब्न सीना) और खगोल विज्ञान में उनका ज्ञान असाधारण था। लेकिन विज्ञान की प्रगति के साथ-साथ उनकी वह लौ अब लगभग बुझ चुकी है।
इसी तरह, एक समय हिंदुओं ने भी विज्ञान में अभूतपूर्व योगदान दिया था। शून्य (Zero) की अवधारणा, दशमलव प्रणाली (Decimal System), बाइनरी संख्या पद्धति, फाइबोनैचि संख्याओं की अवधारणा, चिकित्सा विज्ञान और ज्योतिष विज्ञान के क्षेत्र में उनका बहुत बड़ा योगदान था। दुख की बात यह है कि हिंदुओं की वह विरासत समय के साथ जितनी आगे बढ़नी चाहिए थी, उतनी नहीं बढ़ पाई।
फर्जी लेखकों और अंधविश्वास का बाजार
आजकल हमारे समाज में कई ऐसे फर्जी लेखकों का उदय हुआ है जो विज्ञान की व्याख्या धर्म के चश्मे से करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। ये लोग 'बिग बैंग' और 'ब्लैक होल' जैसी जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को धार्मिक रोशनी में समझाते हैं। जरा सोचिए!!
किसी कौम या समाज को हजारों साल पीछे धकेलने का इससे बेहतर उदाहरण और कोई नहीं हो सकता। ये लेखक जनता को बेवकूफ बनाकर अपनी जेबें भर रहे हैं, और जनता उनकी इस काल्पनिक दवा को खाकर झूठे सुख और आत्मसंतुष्टि की डकार ले रही है। ये लोग अनजाने में आने वाली पीढ़ी का जो नुकसान कर रहे हैं, उसका अहसास भले ही आज न हो, लेकिन आने वाले समय में देश और समाज को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
निष्कर्ष
आज सभ्यता बुलेट ट्रेन की रफ्तार से आगे बढ़ रही है। ज्ञान और विज्ञान के क्षेत्र में हर रोज नए-नए आविष्कार जुड़ रहे हैं। विकसित देश मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यान भेज रहे हैं, और हम आज भी अपनी पुरानी रूढ़ियों, अंधविश्वासों और कुतर्कों में उलझे हुए हैं। हम हर दिन इस फिराक में रहते हैं कि नारी को घर की चहारदीवारी में कैसे कैद किया जाए!
यदि कोई समाज हमेशा दूसरों पर निर्भर और गुलाम बनकर रहना चाहता है, और इसके लिए वह खुद अपने हाथों से गड्ढा खोद रहा है, तो इसका दोष किसी और के सिर मढ़ा नहीं जा सकता!
WB News