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The LokMedia द लोक मीडिया Vibe!

01/05/2026

वैसे तो हम छत्तीसगढ़ में गर्मी के दिनों में रोज़ बोरे-बासी खा लेते हैं, लेकिन क्या इसे एक दिन के रूप में भी मनाया जा सकता है?
"बोरे-बासी दिवस" मनाने का आइडिया कहाँ से आया?

मेरी नज़रों के सामने यह घटना घटी थी —
मूल आइडिया 💡 👑🫰

#लोकसंस्कृति

23/02/2026

रसोई से आंदोलन तक – Tuta Protest
Chhattisgarh Cooks Demand Justice!

छत्तीसगढ़ के तूता में मिड-डे मील रसोइयों का आंदोलन जारी है।
रसोई से सड़क तक पहुँची ये आवाज़ सिर्फ वेतन की नहीं, सम्मान और अधिकार की भी है।

Ground report से देखिए असली कहानी – Reel नहीं, Real।

आप क्या सोचते हैं? Comment में बताइए





23/02/2026

रसोई से आंदोलन तक – Tuta Protest
Chhattisgarh Cooks Demand Justice!

छत्तीसगढ़ के तूता में मिड-डे मील रसोइयों का आंदोलन जारी है।
रसोई से सड़क तक पहुँची ये आवाज़ सिर्फ वेतन की नहीं, सम्मान और अधिकार की भी है।

Ground report से देखिए असली कहानी – Reel नहीं, Real।

आप क्या सोचते हैं? Comment में बताइए







📸

22/02/2026

आंदोलन महोत्सव तूता से ग्राउंड रिपोर्ट आने वाले हे!
- किस्तों में आंदोलन के रियल किस्से में...

19/02/2026
19/02/2026
18/02/2026

गुजरात के जूनागढ़ से एक दिलचस्प और हैरान कर देने वाला दृश्य सामने आया। शादी समारोह खत्म हो चुका था, मेहमान जा चुके थे, लेकिन तभी जंगल के असली “वीआईपी गेस्ट” अपने परिवार के साथ दावत में शामिल होने पहुंच गए। ये कोई आम मेहमान नहीं, बल्कि जंगल के राजा थे — शेरों का परिवार।
देर रात शादी स्थल के आसपास शेर शेरनियों की मौजूदगी से लोगों में हलचल मच गई। बताया जा रहा है कि समारोह के बाद बचे खाने की खुशबू उन्हें वहां तक खींच लाई। कुछ देर तक उन्होंने पूरे इलाके का मुआयना किया, लेकिन शायद “मेन्यू” उनके स्वाद के मुताबिक नहीं था। नतीजा — राजा साहब और उनका परिवार बिना कुछ खाए ही शांतिपूर्वक लौट गए।
जूनागढ़ और गिर क्षेत्र में शेरों की आवाजाही आम बात है, लेकिन शादी की दावत में उनका यूं पहुंचना चर्चा का विषय बन गया। यह घटना एक बार फिर इंसानी बस्तियों और वन्यजीवों के बढ़ते आमने-सामने को उजागर करती है — जहां कभी-कभी मेहमान सूची में नाम न होते हुए भी जंगल के असली मालिक शामिल हो जाते हैं।

17/02/2026

छत्तीसगढ़ के ये बाबा 28 सालों से कर रहें हैं तपस्या
बचपन में भगवान शिव को अर्पित कर दी अपनी जीभ

13 साल का एक लड़का… स्कूल के लिए घर से निकला और लौटकर कभी नहीं आया।
कोसमनारा की मिट्टी में बैठा वही हलधर आज 28 सालों से तप में लीन सत्यनारायण बाबा हैं।
दिन–रात, ठंड–बरसात, जंगल–जानवर… बस मौन, शिव और साधना।

कहते हैं 16 फरवरी 1998 से उन्होंने आंखें बस दिन में एक बार खोली हैं।
एक पत्थर को शिव मानकर जीभ अर्पित करने से शुरू हुई कहानी अब आस्था, हठयोग और मानसिक शक्ति की मिसाल बन चुकी है।

पर सवाल अभी भी ज़िंदा है—
यह चमत्कार है?
अत्यंत तपस्या?
या इंसानी मन की ऐसी दृढ़ता जिसे हम समझ नहीं पाए?

कोसमनारा में जलती वो ज्योति सिर्फ तेल से नहीं, विश्वास से जलती है। 🔥
और कहीं न कहीं, एक मां आज भी मंदिर में बेटे की वापसी की प्रार्थना कर रही है।

16/02/2026

गांव की पगडंडी से लेकर भारतीय सेना की वर्दी तक…
ये कहानी है मुंगेली की बेटी सुप्रिया सिंह की


16/02/2026

छत्तीसगढ़ में इन दिनों 📸
महोत्सव और आंदोलन चलत हे!

आपकी नज़र में क्या है बताओ ? माने कमेंट में लिखना हे!

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