23/12/2025
विनोद कुमार शुक्ल साहब, एक व्यक्तित्व है ✨ हम युवा पीढ़ी सौभाग्यशाली है जो हिंदी साहित्य के इस सियान से मिल पाए, विनम्र श्रद्धांजलि नमन 💐
- अपने हिस्से में लोग आकाश देखते हैं
और पूरा आकाश देख लेते हैं
सबके हिस्से का आकाश
पूरा आकाश है।
- "सब सुख का दुख है, दुख का कोई दुख नहीं"
- "आदिवासी नाचते नहीं नचाये जाते है"
- "मेरा सारा लिखा हुआ मेरी आत्मकथा है"
ये हिंदी साहित्य के हमारे विनोद कुमार शुक्ल जी है 💌
आयोजन - "कविता समय" की संझा 27/02
- साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ साहित्य परिषद
ऐतिहासिक तस्वीर, आभार - स्टार, खोमन भाई ✨