Bhar Kshatriya Empire

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04/08/2026

भर कोई जाति नहीं है पता नही कितने दोगले के बाप है पापा बोलो भरो के रखैलो औलादों

कड़ा और कलिंजर  दलकी और मलकी ( 1216-47 ई . ) बलकी और मलकी की राजधानी कड़ा और कलिंजर थी . उनके पूर्वज अजयगढ़ किले के शासक...
04/08/2026

कड़ा और कलिंजर दलकी और मलकी ( 1216-47 ई . ) बलकी और मलकी की राजधानी कड़ा और कलिंजर थी . उनके पूर्वज अजयगढ़ किले के शासक थे . पर उनके नाम का पता अभी तक नहीं चल पाया है . दलकी और मलकी शासकों का इतिहास बड़ा उलझाव भरा है . इन्डियन एन्टिक्वयरी , ( 1872 ) , भाग एक , पृष्ठ 265 में इन्न सी . बेनेट दलकी और मलकी को भर वंश का शासक तो मानते हैं , पर इन नामों को वे इलमऊ तथा रायबरेली के भरवंशीय शासक डल और बल से जोड़ते हैं तथा एक समान मानने का प्रयास करते हैं . बेनेट की इस अवधारण में सच्चाई नहीं दिखाई देती है कि दलकी - मलकी तथा डल - बल दोनों एक ही नाम हैं . साक्ष्यों से ज्ञात होता है कि दलकी और मलकी अंतिम युद्ध में दिल्ली के शासक नासिरुद्दीन ( 1246-66 ) से पराजित हुए थे . जबकि डल और बल जौनपुर के शासक इब्राहिम शाह शर्की ( 1402-1440 ई . ) से पराजित हुए . दोनों तिथियों में 156 से 174 वर्षों का अन्तर है . अतः दलकी - मलकी तथा डल - बल नामों में समानता स्थापित करना अमान्य किया जाता है . दोनों युगल शासकों की राजधानियां भी समान नहीं हैं . दलकी और मलकी शासकों का सर्व प्रथम उल्लेख मिनहाजुद्दीन द्वारा लिखित “ तबक्वत ई नसीरी " ( Tabqat -I - Nasiri ) में किया गया है . जिसका अंग्रेजी अनुवाद इस प्रकार दिया गया in 545 ( 1246-47 A D. ) Sultan Nasiruddin marched through the centre of the Doab and took the Tilsindah ( ? ) Fort , and in the same year advancing towards Karra laid waste the village of Dalki and Malki and took prisoners a number of their family and servants . This Dalki and Malki were kings in the neighbourhood of the Jamna , and had formerly royal stations at Kalinjar and Karra . " अर्थात " 545 ( 1246-47 ई . ) में सुल्तान नासिरुद्दीन दोआब के मध्य से मार्च करता हुआ गया और तिलसिन्दह ( ? ) किले को फतह किया तथा उसी वर्ष दलकी एवं मलकी नामक शासकों के गावों को नष्ट - भ्रष्ट किया और उन शासकों के परिवार वालों तथा सेवकों को बंदी बनाया , यह दलकी और मलकी यमुना के पडोष के शासक थे और ये दोनों कलिंजर तथा कड़ा के अति प्रतापी शासकों में से थे . " उक्त विवरणा से यह ज्ञात नहीं हो पाता है कि दलकी और मलकी किस वंश के शासक थे . पर इस तथ्य को वेनेट ने इस प्रकार स्वीकार किया है कि वे भर वंश के शासक थे . • The Dalki and Malki at history are no others than the great Bhar kings of tradi tional अर्थात , " इतिहास के दलकी और मलकी , महान मर शासकों की वंश परंपरा के अलावा और कोई नहीं थे . " 1. Indian Antiquary , ( 1872 ) , Voli.P.265 207 इल्तुतमिश ने 1224 ई . में इसी नासिरुद्दीन को सर्व प्रथम जब बहराइच का गवर्नर बनाया जो उसस्ने पुरैना के शासक पूरनमल ( 1194-1126 ई . ) को भी पराजित कर दिया था . बहराइच गजेटियर , पृष्ठ 119 , के अनुसार भर शासक पूरनमल द्वारा एक लाख बीस हजार मुसलमानों को मारे जाने के कारण नासिरुद्दीन ने बड़ी निर्ममता से भरों का कत्लेआम किया . आइने अकबरी में अजयगढ़ तथा कलिंजर के किले सरकार कलिंजर के अन्तर्गत आते थे ऐसा दिखाया गया है . अकबर के शासन काल में कलिंजर तथा अजयगढ़ क्षेत्रों में भरों की जनसंख्या पायी जाती थी . अजयगढ़ का किला पत्थर का बना पहाड़ पर स्थित था जबकि कलिंजर का किला चौरस भाग में बनाया गया था . यहाँ काल - भैरव की अनेक मूर्तियां स्थापित की गयी थी . अवध गजेटियर , भाग दो , के पृष्ठ 458 के अनुसार कड़ा ( Karra ) का निर्माण भर शासक कोरा ( Kora ) ने किया था . यह कड़ा गंगा के दाहिने किनारे पर बसा है जो इलाहाबाद से उत्तर - पश्चिम के कोने पर 40 मील दूरी पर स्थित है . वर्तमान समय में कड़ा फतेहपुर जिले के अन्तर्गत स्थित है . इस कड़ा पर कभी भर वंश के शासक राज्य करते थे , आज भी किला भग्नावशेष अवस्था में विद्यमान है . Karah is now a ruined town on the right bank of the Ganges , 40 miles N. W. of Allahabad..1 इसी तरह की संभावना कलिंजर के निर्माण में भी व्यक्त की जाती है . फरिस्ता रेकार्ड के अनुसार कालिंजर का निर्माण भर शासक केदार ( Kedar ) ने कराया था , जहाँ काल भैरव की स्थापना की गयी . एम . ए . शेयरिंग इस तथ्य से पूरी तरह सहमत हैं कि महोबा तथा दोआब का सम्पूर्ण प्रदेश चन्देलों के शासनकाल के पहले भरों , कोलों तथा गोंड़ों के कब्जे में था . इन प्राचीन जातियों से टूटकर अनेक नवीन जातियां भी बन गयी . इन्हीं में से राजपूत जातियां भी बनी . " Here they either formed new clans , or new branches of the old tribe . The absorp tion of their lands by thier enemies would be ill - brooked by a proud and coura geous people . And moreover , in those earlier days , extensive tracts of country seem to have been entirely in the hand of aboriginal tribes , like the Bhars , Kols Gonds and the like , whose lands must have appeared very tempting to a warlike people dispossessed of their own estates . ' ' ? यदि उक्त तथ्य को नजर अन्दाज न किया जाय को अजयगढ़ के किले का शासक भर शासक ही हो सकता है जिसके वंश की छठवीं पीढ़ी में दलकी - मलकी नामक प्रबल भर शासक हुए . महाराजा दलकी अनेक किलों का निर्माण करवाया . बंगाल सिबिल सर्विस अधिकारी बेनेट बताते हैं कि दलकी की मृत्यु 1247 ई . के पहले हुई . ( The date of their death is therefore 1247 AD - Indian Antiguary , ValIP 265 ) . उनके एक और विवरण के अनुसार कनपुरिया वंश के राजपूत साहस और राहस ने भर - वंश के शासक तिलोकी और विलोकी को अवध क्षेत्र में स्थित प्रतापगढ़ जिले के पश्चिमी भाग में हराया , ( The ance stors of the great Kanpuria clan ol 2 Hindu Tribes and Castes ( 1872 ) , Vol . I. P. 181 , By M. A. SHEARING . 1 Ain Akban . Vol . I.P 178 , Trans by Colonnel Jarrett 209

01/08/2026

सुअर चरवाहे भर बन रहे हैं लेकिन भरो की कुल देवी नहीं बता सकते

17/07/2026

चरवाहे चले आते हैं गाली गलौज करने पहले अपने गिरेबान में झांक कर देख लें

कोई तलवार के डर से खटिया के नीचे पैदा हो रहा है

कोई दूसरी समाज से सोने पैदा हो गया

कोई ताड़ी उतारकर पैदा हो गया

कोई के से तुर्क पासी हो गया

कोई चराते चराते उत्पत्ति हुई

17/07/2026

मैं सोच रहा हूं पासी समाज राजा कंस के किले पर सूअर क्यों नहीं लेकर जाता सारे मुहम्मदन अपने आप भाग जाते बल्कि पांच कोस दूर रहते पासी समाज अपने सेनाओं का उपयोग क्यों नहीं करते हैं ?

*वाराणसी के दशाश्वमेध घाट* के बारे में है 🙏*अखबार में क्या लिखा है - सार:**दशाश्वमेध घाट, वाराणसी*1.  *महत्व*: गंगा तट प...
14/07/2026

*वाराणसी के दशाश्वमेध घाट* के बारे में है 🙏

*अखबार में क्या लिखा है - सार:*

*दशाश्वमेध घाट, वाराणसी*
1. *महत्व*: गंगा तट पर सबसे प्राचीन और सुप्रसिद्ध घाटों में से एक है। धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
2. *कथा*: काशीखंड के अनुसार शिव के आदेश पर ब्रह्मा जी ने काशी आकर यहीं *दस अश्वमेध यज्ञ* किए थे। इसलिए इसका नाम "दशाश्वमेध" पड़ा।
3. *शिव रहस्य के अनुसार*: पहले यहां रुद्रसरोवर था। गंगा के आने के बाद इसकी चारों दिशा में 4 तीर्थ बन गए:
- *पूर्व*: गंगाधार
- *दक्षिण*: दशहरेश्वर
- *पश्चिम*: अगस्त्यकुंड
- *उत्तर*: सोमनाथ
4. *मंदिर*: यहां *प्रयागेश्वर का मंदिर* है।
5. *इतिहास*: काशीप्रसाद जायसवाल के मत से भारशिव राजभर राजाओं ने भी यहीं दस अश्वमेध यज्ञ किए थे।
6. *खुदाई*: सन् 1929 में रानी पुटिया के मंदिर के नीचे खुदाई में अनेक *यज्ञकुंड* निकले थे।
7. *मान्यता*: त्रितीर्थी में यहां स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है।

*खास बात*
दशाश्वमेध घाट शाम की *गंगा आरती* के लिए दुनिया भर में फेमस है।

क्या आप इसके बारे में और कुछ जानना चाहते हैं? जैसे:
- *गंगा आरती का समय*
- *वहां कैसे पहुंचे*
- *आसपास के मंदिर*

भर राजाओं और बघेल राजाओं का इतिहास कोठी रियासत सतना
12/07/2026

भर राजाओं और बघेल राजाओं का इतिहास कोठी रियासत सतना

चरवाहों का नया अविष्कार सालों जब नजाएज ही बनना है तो सही से बाप मानलो 😅😅😅🤣
11/07/2026

चरवाहों का नया अविष्कार सालों जब नजाएज ही बनना है तो सही से बाप मानलो 😅😅😅🤣

🚩 क्या आप जानते हैं? 🚩कई परंपराओं और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, लखनऊ का नाम "लक्ष्मणपुर" या "लखनपुर" से विकसित हुआ मान...
07/07/2026

🚩 क्या आप जानते हैं? 🚩
कई परंपराओं और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, लखनऊ का नाम "लक्ष्मणपुर" या "लखनपुर" से विकसित हुआ माना जाता है, जिसका संबंध भगवान श्रीराम के अनुज भगवान लक्ष्मण से जोड़ा जाता है।
ऐतिहासिक परंपराओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि लाखन राजभर ने इस क्षेत्र पर शासन किया था। इसलिए इतिहास को समझते समय स्थापना, नामकरण और शासन—इन तीनों पहलुओं को अलग-अलग देखना आवश्यक है।
📖 इतिहास का सम्मान करें, तथ्यों को जानें और प्रमाणों के साथ चर्चा करें।
जय श्री राम! 🚩

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