11/11/2014
सरकारी कैंप में नसबंदी के बाद आठ महिलाओं की मौत, 32 की हालत खराब
सरकारी कैंप में नसबंदी के बाद आठ महिलाओं की मौत, 32 की हालत खराब
फोटोः तबीयत बिगड़ने के बाद बिलासपुर जिला अस्पताल में महिलाओं को ले जाते परिजन।
बिलासपुर (छत्तीसगढ़). नसबंदी का टारगेट पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ में लगाए गए एक शिविर में कुछ ही घंटों में 83 महिलाओं की नसबंदी कर दी गई। घर जाने के कुछ ही घंटे बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें उल्टियां आने लगीं। एक दिन बाद ही महिलाओं की मौत का सिलसिला शुरू हो गया। अब तक आठ की जान चली गई है और 32 की हालत गंभीर है। सरकार ने तीन डॉक्टरों को सस्पेंड किया है।
इन्होंने किए थे ऑपरेशन
शनिवार को बिलासपुर से करीब 10 किमी दूर कानन पेंडारी के नेमीचंद अस्पताल में शिविर लगा था। राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम में नसबंदी करवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को टारगेट मिला हुआ है। इसी टारगेट को पूरा करने के लिए शिविर लगाया गया था। जिला अस्पताल के डॉ. आरके गुप्ता, डॉ. केके ध्रुव और डॉ. निखटा ने दूरबीन पद्धति से ऑपरेशन के चंद घंटे बाद सभी महिलाओं को छुट्टी दे दी।
महिलाएं अपने-अपने घरों तक पहुंची तो एक-एक कर सभी की तबीयत बिगड़ने लगी। रविवार को उन्हें उल्टियां आने लगीं। हालत बिगड़ती देख उन्होंने स्थानीय स्तर पर डॉक्टरों से संपर्क किया। सोमवार को स्थिति और बिगड़ गई। सुबह से जिला अस्पताल और सिम्स में महिलाओं के आने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह देर रात तक जारी रहा। एक महिला की मौत तो उस समय हुई, जब कलेक्टर वार्ड में ही पीड़ितों का हालचाल जान रहे थे।
शनिवार को 83 महिलाओं के ऑपरेशन किए गए थे। सोमवार को सबसे पहले दो महिलाओं की मौत हुई और रात होते-होते दो और की मौत हो गई। इसके बाद आंकड़ा बढ़ता गया। जिला अस्पताल, सिम्स और अपोलो में अभी भी 56 महिलाएं भर्ती हैं। इनमें से 32 की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। सरकारी शिविर में हुई मौतों के बाद प्रशासन ने सभी कैंप रद्द कर दिए गए हैं।
रमन ने दिए जांच के निर्देश
मरने वाली महिलाओं के परिवार को 2-2 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की गई है। गंभीर रूप से बीमार महिलाओं को 50 हजार रुपए मुआवजा दिए जाने की घोषणा की गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमिटी बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग के निदेशक को तत्काल बिलासपुर के लिए रवाना भी किया है। सोमवार देर रात स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल सिम्स में पीड़ितों को देखने पहुंचे तो वहां हंगामा खड़ा हो गया। परिजनों ने अग्रवाल से लापरवाही पर जवाब मांगा और उनका घेराव भी किया। इस बीच पुलिस वहां आई और मामले को शांत कराया।
कांग्रेस ने मांगा रमन सिंह का इस्तीफा
घटना की जानकारी मिलने के बाद कांग्रेस नेता सोमवार रात करीब 9 बजे जिला अस्पताल आ धमके। उन्होंने पहले तो सीएचएमओ को धमकाते हुए उनसे इस्तीफे की मांग की। बाद में नारेबाजी करते हुए स्वास्थ्य मंत्री से भी इस्तीफा मांगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और विधायक दल के नेता टीएस सिंहदेव मंगलवार को पीड़ितों और उनके परिजनों से मिलने के लिए बिलासपुर जाएंगे। बघेल ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का इस्तीफा भी मांगा है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपए देने की मांग की है। कांग्रेस मंगलवार को बिलासपुर बंद का भी अाह्वान कर सकती है।
सरकारी शिविरों में लगातार हो रही लापरवाही
प्रदेश में लगने वाले सरकारी शिविरों में इस तरह की लापरवाही लगातार हो रही है। डॉक्टरों के गैरजिम्मेदाराना कृत्यों की वजह से पहले भी लोगों को नुकसान होता रहा है। वर्ष 2011 में बालोद के शिविर में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद 48 लोगों की आंखें खराब हो गई थीं। 2012 में दुर्ग में 12 और कवर्धा में 4 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी। वहीं, 2013 में बागबाहरा में छह लोगों की आंखें खराब हो गईं।