Dakshin Kosal

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सन् १९७० की बात है नागपुर में RSS की एक महत्वपूर्ण बैठक में एक कार्यकर्ता ने कहा, "वहाँ का समाज ही मरा हुआ है, उत्साह दि...
25/03/2026

सन् १९७० की बात है नागपुर में RSS की एक महत्वपूर्ण बैठक में एक कार्यकर्ता ने कहा, "वहाँ का समाज ही मरा हुआ है, उत्साह दिखाई ही नहीं देता।"

यह सुनते ही श्री गुरुजी गंभीर हो गए और बोले

"समाज के प्रति ऐसी धारणा रखकर काम करोगे तो कैसे सफलता मिलेगी? हम कार्य-क्षेत्र में इसलिए भेजे गए हैं कि समाज की दुर्बलताओं को दूर करें। स्वस्थ दृष्टिकोण से ही स्वस्थ समाज का निर्माण होगा।"

समाज को बदलना है तो पहले अपनी सोच को स्वस्थ बनाओ।

#प्रेरणा #स्वस्थदृष्टिकोण #गुरुजी #राष्ट्रनिर्माण

सच्चा नेता वही है - जो खुद करके दिखाए!स्वर्गीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी संसद-भवन से लौटकर घर की वाटिका में सा...
24/03/2026

सच्चा नेता वही है - जो खुद करके दिखाए!

स्वर्गीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी संसद-भवन से लौटकर घर की वाटिका में साग-सब्जी लगाते, गोड़ाई करते और पानी देते थे। जब सेवक ने रोकने की कोशिश की तो शास्त्री जी बोले -
"पर-उपदेश करने वाले बहुत हैं। हमारी वाणी तथा क्रिया में कोई अन्तर नहीं होना चाहिए। हम यदि परिश्रम करेंगे तो देश के किसान भी करेंगे।"
यही है सच्चा नेतृत्व - सादगी, श्रम और कथनी-करनी की एकता। 🙏

📖 प्रेरणा | अंक : 028 | दक्षिण कोसल टुडे
#प्रेरणा #लालबहादुरशास्त्री #सादगी

बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः। अनात्मनस्तु शत्रुत्वे वर्तेतात्मैव शत्रुवत्।। जिस मनुष्य ने अपने मन को जीत ल...
22/03/2026

बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः। अनात्मनस्तु शत्रुत्वे वर्तेतात्मैव शत्रुवत्।।

जिस मनुष्य ने अपने मन को जीत लिया है, वह अपना ही मित्र है।
लेकिन जो मन को नहीं जीत पाया, उसका मन ही उसका सबसे बड़ा शत्रु है।

— भगवद्गीता

#सुभाषित #भगवद्गीता

आत्मविश्वास वो ताकत है जो असंभव को भी संभव बना देती है! वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस ने भरी सभा में खुद को जहर का इंजेक्शन ...
21/03/2026

आत्मविश्वास वो ताकत है जो असंभव को भी संभव बना देती है!

वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस ने भरी सभा में खुद को जहर का इंजेक्शन लगाकर साबित किया कि उनका विज्ञान सच्चा है — यही होता है सच्चा आत्मविश्वास!
जब आप अपने काम पर पूरा भरोसा रखते हैं, तो दुनिया भी आपकी तारीफ करती है।

🌟 प्रेरणा | अंक : 023
📖 जीवन को दिशा देती कथाएँ
#आत्मविश्वास

महाभारत की अमर वाणी ✨"अहिंसा परमो धर्मः, धर्म हिंसा तथैव च।तस्मात् धर्मार्थात् सत्यं ब्रूयात्, न हि सत्यं परो धर्मः।।"— ...
21/03/2026

महाभारत की अमर वाणी ✨
"अहिंसा परमो धर्मः, धर्म हिंसा तथैव च।
तस्मात् धर्मार्थात् सत्यं ब्रूयात्, न हि सत्यं परो धर्मः।।"
— महाभारत

🌸 अहिंसा सर्वोच्च धर्म है और जब धर्म की रक्षा के लिए हो, तो हिंसा भी धर्म बन जाती है।
सत्य से बड़ा कोई धर्म नहीं इसलिए सदा सत्य बोलो, धर्म के लिए बोलो।
💡 महाभारत केवल एक ग्रंथ नहीं, जीवन का दर्पण है।
👇 आप इस सुभाषित से क्या सीखते हैं? कमेंट में बताएं!
मेरी संस्कृति… मेरा देश… मेरा अभिमान 🇮🇳

#सुभाषित #महाभारत #अहिंसापरमोधर्म #सनातनधर्म #हिंदीसुविचार

श्रेष्ठ साधक कौन है?एक बार महात्मा बुद्ध के शिष्य ने पूछा — "भगवन्! श्रेष्ठ साधक के क्या लक्षण होते हैं?"तथागत ने चूहों ...
20/03/2026

श्रेष्ठ साधक कौन है?

एक बार महात्मा बुद्ध के शिष्य ने पूछा — "भगवन्! श्रेष्ठ साधक के क्या लक्षण होते हैं?"
तथागत ने चूहों की चार प्रकृतियों से समझाया —
और साधकों को भी चार भागों में बाँटा।
📖 जो शास्त्र भी पढ़े और जीवन में उतारे भी —
वही है श्रेष्ठ साधक।
अब तुम ही निर्णय करो — तुम किस श्रेणी में हो? 🙏

✨ जीवन को दिशा देती कथाएँ — प्रेरणा | अंक 022
#प्रेरणा #श्रेष्ठसाधक #महात्माबुद्ध #बुद्धकथा #जीवनदर्शन #आत्मचिंतन #दक्षिणकोसलटुडे

सादगी और सच्ची लगन — डॉ. बीरबल साहनी की प्रेरक कहानी!जब लखनऊ विश्वविद्यालय का बरामदा ही बन गया एक महान वैज्ञानिक की प्रय...
10/03/2026

सादगी और सच्ची लगन — डॉ. बीरबल साहनी की प्रेरक कहानी!

जब लखनऊ विश्वविद्यालय का बरामदा ही बन गया एक महान वैज्ञानिक की प्रयोगशाला…

उन्होंने कहा - "बड़े काम सदैव ऐसे ही किये जाते हैं। बस निष्ठा और लगन की आवश्यकता होती है।"

✨ सफलता भौतिक सुविधाओं की नहीं, एकाग्रता और सच्ची मेहनत की मोहताज होती है।
📖 प्रेरणा — जीवन को दिशा देती कथाएँ | अंक : 027
#प्रेरणा #बीरबलसाहनी

✨ विद्या ही सबसे बड़ा धन है! ✨जब पेशवा महाराज के जन्मदिन पर सभी सोना-चाँदी और अन्न-वस्त्र का दान ले रहे थे, तब एक छोटे स...
07/03/2026

✨ विद्या ही सबसे बड़ा धन है! ✨

जब पेशवा महाराज के जन्मदिन पर सभी सोना-चाँदी और अन्न-वस्त्र का दान ले रहे थे, तब एक छोटे से ब्राह्मण बालक ने कहा —
"दान देना है तो किसी स्थायी वस्तु का दीजिए… विद्या का!" 🙏
वह बालक जो न सोना चाहता था, न वस्त्र — आगे चलकर बना महान न्यायाधीश रामशास्त्री!
💡 सोना चोरी हो सकता है, नष्ट हो सकता है…लेकिन विद्या न चुराई जा सकती है, न नष्ट होती है, उल्टा बढ़ती ही है!

क्या आप अपने बच्चों को असली धन दे रहे हैं? 🤔
#विद्याधन #प्रेरणा #शिक्षाहीशक्ति

🪔✨ भाईदूज पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ! ✨🪔भाई और बहन का यह पवित्र रिश्ता दुनिया का सबसे खूबसूरत बंधन है। इस पावन भाईदूज पर...
05/03/2026

🪔✨ भाईदूज पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ! ✨🪔

भाई और बहन का यह पवित्र रिश्ता दुनिया का सबसे खूबसूरत बंधन है।
इस पावन भाईदूज पर्व पर आपको और आपके पूरे परिवार को ढेर सारी खुशियाँ, समृद्धि और नई ऊर्जा मिले। यह त्योहार आपके जीवन में प्यार और खुशहाली लेकर आए!
भाईदूज का यह उत्सव आप सभी के लिए मंगलमय हो! 🙏
#भाईदूजपर्व #भाईबहन #पवित्रबंधन #भाईदूजकीशुभकामनाएं

🙏 महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं! 🙏सत्य का प्रकाश, मानवता का उत्थान आधुनिक भारत के महान समाज सुधारक औ...
12/02/2026

🙏 महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं! 🙏

सत्य का प्रकाश, मानवता का उत्थान
आधुनिक भारत के महान समाज सुधारक और आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती (1824-1883) का जीवन ज्ञान और त्याग का प्रतीक है।

उन्होंने 'वेदों की ओर लौटो' का उद्घोष कर समाज को पाखंडमुक्त बनाने और मानवता को सत्य का मार्ग दिखाने का अमूल्य कार्य किया।

आइए, उनके विचारों और आदर्शों को अपने जीवन में उतारें!

#महर्षिदयानंदसरस्वती #आर्यसमाज #दक्षिणकोसल
Chhattisgarh Tourismसुनील नाथ सोडा

वात्सल्य और ममता की प्रतिमूर्ति माता यशोदा जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं! 🌸आज का यह पावन दिन हमें उस निस्वार्थ प्रेम की या...
07/02/2026

वात्सल्य और ममता की प्रतिमूर्ति माता यशोदा जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं! 🌸

आज का यह पावन दिन हमें उस निस्वार्थ प्रेम की याद दिलाता है, जिसने स्वयं पूर्ण ब्रह्म भगवान श्रीकृष्ण को अपनी उंगलियों पर नचाया। माता यशोदा का प्रेम केवल एक पुत्र के लिए नहीं, बल्कि पूरे संसार के लिए ममता का सर्वोच्च उदाहरण है।

आइए, इस विशेष अवसर पर हम सब भी अपने जीवन में उसी निस्वार्थ प्रेम और समर्पण को आत्मसात करने का संकल्प लें।

भारतीय इतिहास में मंदिर और मस्जिदों के विवाद में न्यायालयीय आदेशों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने कई बार सर्वेक...
29/01/2026

भारतीय इतिहास में मंदिर और मस्जिदों के विवाद में न्यायालयीय आदेशों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने कई बार सर्वेक्षण और उत्खनन करके ऐसे विवादों के तथ्य-संग्रह में भूमिका निभाई है। धार स्थित भोजशाला का विवाद भी इसी श्रेणी में आता है। आइए विस्तार से जानते है, इस मंदिर के बारे में...

भारतीय इतिहास में परमार वंशीय राजाओं का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। वे केवल राजनीतिक उपलब्धियों के लिए ही नहीं, बल्कि कला और स्थापत्य के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए भी प्रसिद्ध हैं। 10वीं से 13वीं शताब्दी के बीच मध्य भारत के बड़े भूभाग पर शासन करने वाले इन शासकों की राजधानी वर्तमान मध्यप्रदेश की धार नगरी थी।

इस वंश के सर्वाधिक प्रतापी राजा, जिन्हें राजा भोज के नाम से जाना जाता है, कला-प्रेमी और विद्या-समर्थक बताए जाते हैं। उन्होंने 11वीं शताब्दी के प्रारम्भ से मध्यकाल में शासन करते हुए अपनी राजधानी में ज्ञान की देवी माँ सरस्वती (वाग्देवी) के लिए एक मंदिर का निर्माण करवाया। यह मंदिर उस समय शिक्षा-ग्रहण और विद्या-चर्चा का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

कहा जाता है कि उस काल में दूर-दूर से लोग वाग्देवी के दर्शन और विद्या-साधना के लिए यहां आते थे। परंतु मध्यकालीन मुस्लिम आक्रमणों के दौरान अन्य मंदिरों की तरह भोजशाला का वैभव भी प्रभावित हुआ। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि ने आगे चलकर विवाद के प्रश्न को जन्म दिया।

आधुनिक काल में धरोहरों के पुनर्मूल्यांकन और ऐतिहासिक तथ्यों की पुनर्स्थापना की प्रवृत्ति भी तेज हुई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का ध्येय-वाक्य “प्रत्नकीर्तिमपावृणु” इसी दृष्टि को रेखांकित करता है। हालिया वर्षों में काशी विश्वनाथ परिसर से जुड़े निष्कर्षों की चर्चा इसी संदर्भ में होती रही है।

भोजशाला के पुरातात्विक सत्य को जानने के लिए माननीय उच्च न्यायालय ने एएसआई को सर्वेक्षण का आदेश दिया था। यहां यह उल्लेखनीय है कि एएसआई की वार्षिक पत्रिका इंडियन आर्कियोलॉजिकल रिव्यू 1984-1985 (IAR 1984-1985) के पृष्ठ 183 पर धार स्थित भोजशाला को मूलतः माँ सरस्वती के लिए निर्मित मंदिर बताया गया है। उसी संदर्भ में भोजशाला के पश्चिम और उत्तर में मंदिर के अधिष्ठान के चिह्नों का उल्लेख भी मिलता है।

एएसआई द्वारा मुद्रित कॉर्पस इंसक्रिप्शन्स इंडिकारम, खण्ड 7 में भी एक महत्वपूर्ण उल्लेख मिलता है। उसके अनुसार एक ब्रिटिश अधिकारी को भोजशाला के अवशेषों के पास से सरस्वती (वाग्देवी) की मूर्ति प्राप्त हुई थी, जिसे वर्तमान में ब्रिटिश म्यूज़ियम में प्रदर्शित बताया गया है। पुस्तक में दिए विवरण के अनुसार यह प्रतिमा वाग्देवी की है और इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में राजा भोज द्वारा करवाया गया था।

इस विवरण का आधार प्रतिमा पर अंकित अभिलेख को बताया गया है। उसी पुस्तक में यह भी संकेत मिलता है कि भोज द्वारा निर्मित भोजशाला में यह प्रतिमा स्थापित रही होगी। 1987 में एएसआई द्वारा किए गए उत्खनन में भोजशाला से हिन्दू धर्म से संबंधित 32 मूर्तियां प्राप्त होने का उल्लेख भी किया जाता है।

इन शोध-सूचनाओं के आधार पर लेखक का निष्कर्ष है कि भोजशाला का मूल स्वरूप हिन्दू मंदिर का रहा है। इसी संदर्भ में भोजशाला को मस्जिद कहना लेखक के अनुसार तथ्यहीन माना जाना चाहिए। परिसर में दिखाई देने वाले स्तम्भ और उनके अलंकरणों को परमार कालीन (11वीं शताब्दी) शैली का बताया जाता है।

यह भी कहा गया है कि भोजशाला के आसपास बनी कुछ कब्रों के निर्माण में परमारकालीन मंदिर-अवशेषों का उपयोग किया गया। इन अवशेषों पर हरा रंग पोतकर पहचान बदलने का प्रयास किए जाने का भी उल्लेख मिलता है। ऐसे संकेत विवाद के पुरातात्विक पक्ष को और जटिल बनाते हैं।

पुरातत्व विभाग के दल ने सर्वेक्षण के दौरान भोजशाला और निकट स्थित, कालांतर में बनी दरगाह में प्रस्तर पर अंकित शिलालेखों के छापे (स्टांपेज) लिए थे। पूर्व में भी भोजशाला से कई अभिलेख मिलने का उल्लेख मिलता है। पुरातत्वविद के. के. लेले के अनुसार भोजशाला के दो स्तम्भों पर अंकित अभिलेख इस ओर संकेत करते हैं कि इन्हें व्याकरण के किसी आचार्य द्वारा लिखवाया गया था।
उनके अनुसार इन अभिलेखों का उपयोग छात्रों के ज्ञानार्जन में होता होगा। यह संकेत भोजशाला की शैक्षिक भूमिका के पक्ष को भी मजबूत करता है। हालांकि, इन निष्कर्षों का अंतिम मूल्यांकन विस्तृत रिपोर्ट और न्यायालयीय परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।

एएसआई ने उत्खनन, स्टांपेज, फोटोग्राफी और प्रलेखन सहित भोजशाला में किए गए कार्य की विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष 2024 में प्रस्तुत कर दी है। अपेक्षा है कि यह रिपोर्ट भोजशाला के निर्माण, उसके ऐतिहासिक परिवर्तन और उसके विध्वंस से जुड़े पक्षों पर अधिक प्रकाश डालेगी। वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में लंबित इस विवाद के निर्णय की प्रतीक्षा बनी हुई है।

डॉ. शुभम केवलिया
सहायक आचार्य (इतिहास)
शहीद भगत सिंह महाविद्यालय (दिल्ली विश्वविद्यालय)

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