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“आधी रात का दरवाज़ा”रात के ठीक 12 बजे थे। गाँव के किनारे बने पुराने मकान में रवि अकेला रहता था। उस रात तेज़ बारिश हो रही...
24/06/2026

“आधी रात का दरवाज़ा”

रात के ठीक 12 बजे थे। गाँव के किनारे बने पुराने मकान में रवि अकेला रहता था। उस रात तेज़ बारिश हो रही थी और बिजली भी बार-बार चमक रही थी।

अचानक… ठक-ठक… ठक-ठक…

किसी ने दरवाज़ा खटखटाया।

रवि ने घड़ी देखी। इतनी रात को कौन हो सकता है? उसने हिम्मत करके पूछा, “कौन है?”

बाहर से कोई जवाब नहीं आया।

कुछ देर बाद फिर वही आवाज़…

ठक-ठक… ठक-ठक…

रवि ने धीरे-धीरे दरवाज़ा खोला। बाहर कोई नहीं था। सिर्फ़ भीगी हुई ज़मीन पर एक पुराना लिफाफा पड़ा था।

लिफाफे पर लिखा था—
“इसे अभी मत खोलना।”

रवि डर गया, लेकिन जिज्ञासा उससे ज़्यादा थी। उसने लिफाफा खोल दिया।

अंदर एक तस्वीर थी।

तस्वीर देखकर उसके हाथ काँपने लगे…

वह तस्वीर उसी की थी, और तस्वीर के पीछे लिखा था—

“मैं तुम्हें देख रहा हूँ। पीछे मत मुड़ना।”

रवि का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। लेकिन इंसान की फितरत ही ऐसी है…

वह धीरे-धीरे पीछे मुड़ा।

पीछे कोई नहीं था।

उसी समय उसके फोन पर एक मैसेज आया—

“गलती कर दी… मैंने पीछे मत मुड़ने को कहा था।”

रवि ने काँपते हाथों से फोन नीचे किया।

तभी कमरे की लाइट बंद हो गई।

अंधेरे में उसे अपने कान के पास किसी की धीमी आवाज़ सुनाई दी—

“अब मैं तुम्हारे पीछे खड़ा हूँ…”

और अगले ही पल पूरे गाँव में रवि की चीख गूँज उठी।

सुबह जब लोग उसके घर पहुँचे, तो रवि वहाँ नहीं था।

कमरे में सिर्फ़ एक नई तस्वीर पड़ी थी…

उस तस्वीर में रवि डरा हुआ खड़ा था।

और उसके पीछे कोई धुंधली परछाई मुस्कुरा रही थी।



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24/06/2026


23/06/2026

❤️  “बारिश और तुम”  ❤️शाम का समय था। हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। सड़क किनारे एक छोटी-सी चाय की दुकान पर आरव खड़ा था। तभ...
23/06/2026

❤️ “बारिश और तुम” ❤️

शाम का समय था। हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। सड़क किनारे एक छोटी-सी चाय की दुकान पर आरव खड़ा था। तभी उसकी नज़र सामने खड़ी एक लड़की पर पड़ी, जो बारिश की बूंदों को हथेलियों में समेटने की कोशिश कर रही थी।

उस लड़की का नाम अनाया था।

आरव ने मुस्कुराकर पूछा, “बारिश इतनी पसंद है?”

अनाया ने भी मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, क्योंकि बारिश में लोग अपने चेहरे नहीं, अपने दिल छुपाते हैं।”

उस एक जवाब ने आरव का दिल छू लिया।

धीरे-धीरे दोनों की मुलाकातें बढ़ने लगीं। कभी चाय पर, कभी पार्क में, तो कभी बस यूँ ही बारिश में भीगते हुए। हर मुलाकात के साथ उनका रिश्ता और गहरा होता गया।

एक दिन तेज बारिश हो रही थी। आरव ने अनाया का हाथ थामकर कहा,

“मुझे नहीं पता मेरी जिंदगी में कितनी खुशियाँ आएंगी, लेकिन मैं चाहता हूँ कि हर खुशी में तुम्हारा साथ हो।”

अनाया की आँखों में आँसू आ गए। उसने धीरे से कहा,

“और मैं चाहती हूँ कि हर बारिश में मेरा हाथ तुम्हारे हाथ में हो।”

बारिश की बूंदें गिरती रहीं, लेकिन उस दिन दो दिल एक हो गए।

सीख:
सच्चा प्यार किसी बड़े इज़हार का मोहताज नहीं होता, कभी-कभी एक मुस्कान और थोड़ा-सा साथ ही काफी होता है। ❤️🌹

23/06/2026
रात के बारह बज रहे थे। इंस्पेक्टर विक्रम अपनी मेज पर झुके हुए थे, जहाँ एक पुरानी, धूल से भरी फाइल खुली थी। यह फाइल 10 सा...
22/06/2026

रात के बारह बज रहे थे। इंस्पेक्टर विक्रम अपनी मेज पर झुके हुए थे, जहाँ एक पुरानी, धूल से भरी फाइल खुली थी।
यह फाइल 10 साल पुराने 'मल्होत्रा मर्डर केस' की थी,
जिसे आज बंद किया जाना था क्योंकि कोई सुराग नहीं मिला था।

तभी उनके फोन की घंटी बजी। स्क्रीन पर कोई नंबर नहीं था, सिर्फ लिखा था—'अज्ञात'।

विक्रम ने फोन उठाया, "हेलो?"
दूसरी तरफ से एक गहरी, ठंडी आवाज आई,

"फाइल बंद मत करना, इंस्पेक्टर। कातिल अभी मरा नहीं है... और न ही वह सुरागरहित है।"

विक्रम के कान खड़े हो गए। "तुम कौन हो? और तुम्हें इस केस के बारे में क्या पता है?"

"मैं वही हूँ जो उस रात वहाँ था," आवाज ने कहा। "मल्होत्रा की हवेली के पीछे जो पुराना कुआं है, उसके अंदर झांक कर देखो। तुम्हें तुम्हारा जवाब मिल जाएगा। लेकिन याद रहे, सच जानने की एक कीमत होती है।" फोन कट गया।

हवेली का रहस्य

विक्रम ने बिना वक्त गंवाए अपनी जीप उठाई और मल्होत्रा हवेली की तरफ निकल पड़े। हवेली सालों से सुनसान पड़ी थी, चारों तरफ सन्नाटा और घने पेड़ थे। टॉर्च की रोशनी में उन्होंने हवेली के पिछले हिस्से में मौजूद उस पुराने कुएं को ढूंढा।
कुएं के पास पहुंचते ही उन्हें एक अजीब सी सड़न की बदबू आई। विक्रम ने टॉर्च की रोशनी नीचे डाली। कुएं का पानी सूख चुका था, लेकिन नीचे कुछ चमक रहा था।

उन्होंने तुरंत अपनी टीम को बैकअप के लिए बुलाया।

घंटों की मशक्कत के बाद, कुएं से जो निकला उसने सबके होश उड़ा दिए:

• एक पुराना, जंग लगा हुआ लोहे का संदूक।
• मल्होत्रा की डायरी, जो प्लास्टिक में लिपटी होने के कारण सुरक्षित थी।
• एक सोने की चेन, जिस पर 'V' अक्षर खुदा हुआ था।

डायरी का आखिरी पन्ना
विक्रम ने संदूक से डायरी निकाली और उसके पन्ने पलटने लगे। आखिरी पन्ने पर मल्होत्रा की कांपती हुई लिखावट में लिखा था:

"वह मेरे बहुत करीब है। जिसे मैं अपना सबसे वफादार दोस्त समझता था, वही मेरी जान का दुश्मन बन गया है। उसने मेरी सारी संपत्ति के कागजात चुरा लिए हैं। अगर कल सुबह मैं जिंदा न बचूं, तो समझ जाना कि 'V' नाम का वह शख्स..."

पन्ना वहीं फट गया था। नाम अधूरा था।
विक्रम गहरी सोच में डूब गए। 'V' से कौन हो सकता था? मल्होत्रा का बिजनेस पार्टनर विवेक? या उनका भतीजा वरुण?
असली कातिल
तभी विक्रम के फोन पर दोबारा उसी अज्ञात नंबर से मैसेज आया:
"पीछे देखो।"

विक्रम ने जैसे ही मुड़कर देखा, उनके सिर पर किसी भारी चीज से वार हुआ। वह लड़खड़ाकर गिर पड़े। उनकी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा, लेकिन धुंधली रोशनी में उन्होंने हमलावर का चेहरा देख लिया।

वह कोई और नहीं, बल्कि खुद उनका सीनियर ऑफिसर, कमिश्नर विजय था!

विजय के हाथ में एक बंदूक थी और उसके गले में ठीक वैसी ही सोने की चेन थी, जैसी कुएं से मिली थी।
विजय मुस्कुराया, "तुमने बहुत देर कर दी विक्रम। 10 साल पहले मल्होत्रा को मैंने ही मारा था क्योंकि उसने मेरी बेइमानी पकड़ ली थी। और आज, इस राज को जानने वाले तुम आखिरी इंसान हो।"

विजय ने बंदूक तानी। लेकिन इससे पहले कि वह ट्रिगर दबाता, चारों तरफ से पुलिस के सायरन की आवाज गूंज उठी।
विक्रम ने गिरते-गिरते भी अपने वायरलेस का 'ऑन' बटन दबा दिया था, जिससे उनकी और विजय की सारी बातचीत हेडक्वार्टर में रिकॉर्ड हो रही थी। बैकअप टीम ने समय रहते विजय को चारों तरफ से घेर लिया।

विजय के हाथों से बंदूक छूट गई। 10 साल पुराना सस्पेंस आखिरकार खत्म हो चुका था, लेकिन इस सच ने पुलिस महकमे की बुनियाद हिला कर रख दी थी।

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