DIL KI BATEN

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🕉️ पुरुषोत्तम एकादशी का महत्व * **दुर्लभ व्रत:** यह एकादशी हर साल नहीं आती, बल्कि तीन साल में एक बार आने के कारण इसका मह...
26/05/2026

🕉️ पुरुषोत्तम एकादशी का महत्व
* **दुर्लभ व्रत:** यह एकादशी हर साल नहीं आती, बल्कि तीन साल में एक बार आने के कारण इसका महत्व अन्य एकादशियों से कहीं अधिक माना गया है।🌹🪷 ☺️🙂😊

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17/05/2026

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आज (16 मई 2026) की **शनि जयंती** बेहद खास और दुर्लभ मानी जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इस बार कई अद्भुत ज्योति...
16/05/2026

आज (16 मई 2026) की **शनि जयंती** बेहद खास और दुर्लभ मानी जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इस बार कई अद्भुत ज्योतिषीय संयोग (astrological combinations) एक साथ बन रहे हैं, जो कई सालों बाद आते हैं। 🌠💫🕉️✨

वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आय...
15/05/2026

वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए बरगद (वट) के वृक्ष की पूजा करती हैं।
यहाँ वट सावित्री व्रत की मुख्य कथा दी गई है:
# # वट सावित्री व्रत कथा
प्राचीन काल में मद्र देश के राजा **अश्वपति** की कोई संतान नहीं थी। उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए १८ वर्षों तक कठिन तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर देवी सावित्री ने उन्हें एक कन्या का वरदान दिया। राजा ने अपनी कन्या का नाम **सावित्री** रखा।
# # # सत्यवान और सावित्री का विवाह
सावित्री जब विवाह योग्य हुई, तो उसने द्युमत्सेन के पुत्र **सत्यवान** को अपने पति के रूप में चुना। सत्यवान के पिता का राज्य छिन चुका था और वे अंधे होकर अपनी पत्नी के साथ वन में रहते थे। जब ऋषि नारद को यह पता चला, तो उन्होंने सावित्री के पिता को बताया कि सत्यवान अल्पायु हैं और ठीक एक वर्ष बाद उनकी मृत्यु हो जाएगी। राजा ने सावित्री को बहुत समझाया, लेकिन वह अपने निर्णय पर अडिग रही और सत्यवान से विवाह कर लिया।
# # # यमराज से संघर्ष
विवाह के बाद सावित्री अपने सास-ससुर और पति के साथ वन में रहने लगी। नारद जी द्वारा बताई गई सत्यवान की मृत्यु की तिथि जैसे-जैसे निकट आने लगी, सावित्री ने कठिन तप और व्रत शुरू कर दिया।
निश्चित तिथि पर जब सत्यवान जंगल में लकड़ी काटने गए, तो सावित्री भी उनके साथ गई। अचानक सत्यवान के सिर में तेज दर्द हुआ और वे एक **वट वृक्ष (बरगद)** के नीचे लेट गए। कुछ ही देर में यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए। सावित्री ने देखा कि यमराज सत्यवान के प्राण लेकर दक्षिण दिशा की ओर जा रहे हैं, तो वह भी उनके पीछे-पीछे चल पड़ी।
# # # सावित्री की चतुराई और वरदान
यमराज ने सावित्री को वापस लौटने के लिए कहा, लेकिन सावित्री ने अपनी बुद्धिमत्ता और पतिव्रत धर्म से यमराज को प्रभावित कर लिया। प्रसन्न होकर यमराज ने उसे तीन वरदान मांगने को कहा (पति के प्राणों को छोड़कर):
1. **पहला वरदान:** सावित्री ने अपने ससुर की आंखों की रोशनी मांगी।
2. **दूसरा वरदान:** उसने अपने ससुर का खोया हुआ राज्य वापस मांगा।
3. **तीसरा वरदान:** सावित्री ने सौ पुत्रों की माता बनने का आशीर्वाद मांगा।
यमराज ने बिना सोचे "तथास्तु" कह दिया। तब सावित्री ने कहा, "हे देव, मैं एक पतिव्रता स्त्री हूँ और पति के बिना मैं मां कैसे बन सकती हूँ? अतः आपको अपना वरदान पूरा करने के लिए मेरे पति के प्राण लौटाने होंगे।"
# # # सत्यवान का पुनर्जीवन
अपनी ही बातों में फंसकर और सावित्री के साहस से प्रभावित होकर यमराज ने सत्यवान के प्राण छोड़ दिए। सावित्री उसी वट वृक्ष के पास लौटी जहां सत्यवान का मृत शरीर पड़ा था। सावित्री के आते ही सत्यवान जीवित हो उठे।
# # # पूजा का महत्व
> तभी से सुहागिन महिलाएं वट (बरगद) वृक्ष को साक्षी मानकर सावित्री और सत्यवान की पूजा करती हैं। बरगद के पेड़ की आयु बहुत लंबी होती है, इसीलिए इसे अक्षय माना जाता है। महिलाएं इस वृक्ष पर सूत लपेटकर अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं।✍️🌹🥭🌲🌄

14/05/2026

Premer suta dhoria Bandhu dure takia tane go
Gyanmati Devi

13/05/2026

Yah Kali jab talak phool banke khile Gyanmati Devi

10/05/2026

Ham v mile the kavi jamuna
Gyanmati Devi

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