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31/08/2026

NCERT की संशोधित कक्षा 8 की इतिहास की किताब भारत के अतीत को अधिक सीधे और स्पष्ट तरीके से प्रस्तुत करने के कारण काफी चर्चा में है।

नई सामग्री खास तौर पर इसलिए ध्यान खींच रही है क्योंकि इसमें बाबर और औरंगज़ेब जैसे शासकों तथा उनके शासन से जुड़ी नीतियों पर पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट भाषा में चर्चा किए जाने की बात सामने आ रही है।

रिपोर्टों के अनुसार, संशोधित पाठ्यपुस्तक कुछ युद्धों, राजनीतिक फैसलों और ऐतिहासिक घटनाओं को समझाते समय अधिक सख्त और सीधी भाषा का उपयोग करती है। इसके समर्थकों का मानना है कि छात्रों को इतिहास के कठिन और विवादित अध्यायों से बचाने के बजाय उन्हें तथ्यात्मक रूप से स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।

वहीं दूसरी ओर, इतिहासकारों, शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच इस बदलाव को लेकर बहस भी जारी है। कुछ लोग इसे अधिक स्पष्ट इतिहास लेखन की दिशा में कदम मानते हैं, जबकि अन्य का कहना है कि किसी भी ऐतिहासिक शासक को केवल एक सरल छवि या लेबल तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

यह बहस एक बड़ा सवाल उठाती है—क्या इतिहास की पढ़ाई केवल घटनाएँ याद कराने के लिए होनी चाहिए, या छात्रों को प्रमाण, संदर्भ और अलग-अलग दृष्टिकोण समझना भी सिखाना चाहिए?

बेहतर इतिहास शिक्षा वही होगी जो सत्यापित तथ्य बताए और साथ ही आलोचनात्मक सोच को भी बढ़ावा दे।

23/08/2026

“मुझे ₹25,000 ऑफर किए गए थे, छात्र बनकर राहुल गांधी के कार्यक्रम में जाओ!” Riya Khanolkar के दावे से ‘Chhatron Ki Goonj’ पर बड़ा सवाल। 😳

इन्फ्लुएंसर Riya Khanolkar ने अपने वीडियो में दावा किया कि उन्हें ₹25,000 देकर छात्र की तरह कार्यक्रम में शामिल होने, राहुल गांधी से इंटरैक्ट करने और बाद में सोशल मीडिया पर प्रमोशनल PR वीडियो पोस्ट करने का ऑफर मिला था।

अगर उनका दावा सही है, तो सवाल सिर्फ influencer marketing का नहीं, बल्कि यह भी है कि क्या छात्र संवाद को scripted PR की तरह पेश किया जा रहा था?
नाम था ‘छात्रों की गूंज’... लेकिन Riya के दावे ने पूछ दिया, आवाज़ छात्रों की थी या PR brief की?

20/08/2026

राहुल गांधी पर शहजाद पूनावाला का ऐसा तंज... कि राजीव गांधी को भी “मोदी समर्थक” बता दिया! 😄

बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह राजीव गांधी के शुक्रगुजार हैं, क्योंकि उन्होंने देश को राहुल गांधी दिए।

पूनावाला का तंज था कि राहुल गांधी की राजनीति ने ही नरेंद्र मोदी की 2014, 2019 और 2024 की जीत का रास्ता आसान किया, और अब वही 2029 की राह भी बना रहे हैं।

फिर उन्होंने व्यंग्य को और तेज करते हुए कहा, “राजीव गांधी भी मेरी तरह बड़े मोदी समर्थक हैं।”

मतलब निशाना राहुल पर था... लेकिन पंचलाइन ऐसी कि पूरी कांग्रेस फैमिली फ्रेम में आ गई!

17/08/2026

1947–50 के राजनीतिक माहौल को देखना जरूरी है। भारत को हिंदू राष्ट्र न बनाने का फैसला केवल गांधी या नेहरू का व्यक्तिगत फैसला नहीं था, बल्कि संविधान सभा में बनी व्यापक सहमति का परिणाम था।
गांधी और नेहरू भारत को हिंदू राष्ट्र क्यों नहीं बनाना चाहते थे?

1. गांधी की सोच — भारत सभी धर्मों का देश रहे
गांधी का मानना था कि भारत में हिंदू बहुसंख्यक हैं, लेकिन देश केवल हिंदुओं का नहीं है। विभाजन के बाद भी वे चाहते थे कि भारत में मुसलमान, सिख, ईसाई और अन्य समुदाय बराबर नागरिक रहें। उनके लिए धर्म व्यक्तिगत आस्था था, राज्य की नागरिकता का आधार नहीं।

2. नेहरू — आधुनिक लोकतांत्रिक राष्ट्र की कल्पना
नेहरू चाहते थे कि भारतीय राज्य नागरिकों को धर्म के आधार पर अलग-अलग राजनीतिक अधिकार न दे। उनका विचार था कि अगर पाकिस्तान ने स्वयं को मुस्लिम राष्ट्र बनाया है, तो भारत को उसका धार्मिक प्रतिबिंब बनने के बजाय समान नागरिकता वाला लोकतांत्रिक राष्ट्र बनना चाहिए।

3. विभाजन के बाद की हिंसा
1947 में हिंदू-मुस्लिम हिंसा और बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ। ऐसे समय में भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने से भारत में बचे मुसलमानों की सुरक्षा और राष्ट्रीय एकता पर गंभीर असर पड़ सकता था। गांधी विशेष रूप से इस खतरे को लेकर चिंतित थे।
4. संविधान सभा में धार्मिक राज्य के बजाय मौलिक अधिकार
संविधान सभा ने नागरिकों के लिए समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और धर्म के आधार पर भेदभाव न करने के सिद्धांतों को स्वीकार किया। यही आगे भारतीय गणराज्य की संवैधानिक पहचान बनी।

लेकिन उस समय हिंदू राष्ट्र के पक्ष में कौन थे?
यहाँ एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है: “हिंदू राष्ट्र” चाहने वाले सभी लोग एक ही राजनीतिक दल या एक ही विचार के नहीं थे।

विनायक दामोदर सावरकर — हिंदुत्व की राजनीतिक अवधारणा के सबसे प्रमुख विचारकों में थे। वे भारत को हिंदू राष्ट्र की सांस्कृतिक-राजनीतिक अवधारणा में देखते थे।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी — वे हिंदू महासभा से जुड़े प्रमुख नेता थे और विभाजन के समय हिंदू हितों के मजबूत राजनीतिक प्रतिनिधि थे। हालांकि उनके विचारों को सीधे सावरकर के हिंदू राष्ट्र सिद्धांत के समान मानना ठीक नहीं होगा।

हिंदू महासभा के अनेक नेता और कार्यकर्ता — वे भारत को हिंदू सभ्यता और हिंदू राजनीतिक पहचान वाला राष्ट्र बनाने की मांग करते थे।

आरएसएस की विचारधारा — उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत को हिंदू सांस्कृतिक राष्ट्र के रूप में देखता था। हालांकि RSS स्वयं उस समय चुनावी राजनीतिक दल नहीं था।

सबसे महत्वपूर्ण बात
पाकिस्तान का मुस्लिम राष्ट्र बनना और भारत का धर्मनिरपेक्ष गणराज्य बनना दो अलग संवैधानिक रास्ते थे।
विभाजन के बाद भारत के सामने एक विकल्प यह था कि:
“पाकिस्तान मुस्लिम राष्ट्र है, इसलिए भारत हिंदू राष्ट्र हो।”
लेकिन संविधान सभा में प्रभावशाली नेतृत्व ने दूसरा रास्ता चुना:

“भारत की पहचान किसी एक धर्म के राज्य के रूप में नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के समान अधिकार वाले लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में होगी।”

और ध्यान रखें—1950 के मूल संविधान में “सेक्युलर” शब्द नहीं था। “धर्मनिरपेक्ष” शब्द प्रस्तावना में 1976 में 42वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया।

09/08/2026

JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और धांधली के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन आज 16वें दिन भी जारी है. छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डेरा डाले हुए हैं और 14वीं JPSC परीक्षा समेत कई मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्र आंदोलन के टेबल टॉक को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार छात्रों की मांगो पर सहमति जताने को तैयार हो गई है. JPSC 14वीं परीक्षा को कैंसिल करने पर सरकार की सहमति बनने की खबर मिल रही है. परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच ED से कराने पर सहमति बनी है. सरकार जेपीएससी रिफॉर्म के लिए एक विशेष समिति बनाएगी, जिसमें शिक्षाविदों और छात्र प्रतिनिधियों को शामिल करने की योजना है. यह समिति परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सुझाव देगी. आंदोलन खत्म होने के बारे में जल्द ही सरकार की ओर से औपचारिक घोषणा होने की संभावना है. फिलहाल, छात्र आधिकारिक फैसले का इंतजार कर रहे हैं

07/08/2026

झारखंड विरोध |'
300 में से 299 नंबर लाए, फिर भी सिलेक्शन नहीं हुआ': selection Ho kiska raha hai aur kaise CBI jaanch hona chahie

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