Jharkhand Corruption

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खाट पर झारखंड सरकार!2023 में एयर एम्बुलेंस सेवा लागू हुई, पता नहीं कितना पास कितना फेल. लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बहुत न...
25/11/2025

खाट पर झारखंड सरकार!

2023 में एयर एम्बुलेंस सेवा लागू हुई, पता नहीं कितना पास कितना फेल. लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बहुत नाजुक है. हमारे बड़बोले स्वास्थ्य मंत्री खाली उलजुलल बातें करने में मस्त है, झारखंड के मुख्या अपने शांत और मस्त है. ना एम्बुलेंस है ना एम्बुलेंस चालकों के वेतन का ठिकाना, आए दिन वो हड़ताल पर बैठे मिलेंगे। स्वर्ग जैसे झारखंड की हालत नर्क करके बैठे है.

नेता मंत्री या उनके परिवार के किसी सदस्यों की थोड़ी सी तबियत खराब हो जाए तो दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु निकल लेते है और आम जनता तड़पते रहे.

22/11/2025

आज एक बहन इस दुनिया में नहीं रही, एक भाई को बेबस होकर विडियो बनाना पड़ रहा है सिस्टम पर.

लानत है ऐसी सरकार पर जो अपनी जनता की मौत पर चुप बैठी है. एक बड़बोले स्वास्थ्य मंत्री खाली भाषण बाजी करते रहते है. राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल RIMS का ये हाल है और सरकार दूसरा RIMS बनाने के पीछे पड़ी है. अरे भाई एक की तो हालत सही कर लो. झारखंड की जनता के दर्द का मजाक बना दिया है.

भगवान बहन की आत्मा को शांति दे, परिवार को इस दुखद घड़ी में सहनशक्ति दे.

विडियो क्रेडिट : इंस्टाग्राम पेज instantjharkhand

परिवारवाद की एक झलक स्वर्गीय शिबू सोरेनस्वर्गीय लालू सोरेन ( स्वर्गीय शिबू सोरेन के भाई )स्वर्गीय शिबू सोरेन के बेटे और ...
20/11/2025

परिवारवाद की एक झलक

स्वर्गीय शिबू सोरेन
स्वर्गीय लालू सोरेन ( स्वर्गीय शिबू सोरेन के भाई )

स्वर्गीय शिबू सोरेन के बेटे और बेटी

स्वर्गीय दुर्गा सोरेन
हेमंत सोरेन
बसंत सोरेन
अंजनी सोरेन

सीता सोरेन (स्वर्गीय दुर्गा सोरेन की पत्नी )
कल्पना सोरेन ( हेमंत सोरेन की पत्नी)

पूरा सोरेन परिवार का पोलिटिकल करियर है ये सभी राजनीति से जुड़े थे और है. जनता का जीवन गरीबी में बीत रहा है, और ये परिवार करोड़पति बन कर राज कर रहा है. ये सेवा नहीं व्यवसाय है.

5 साल का नेता का जीवन स्वर्ग से कम नहीं!ना पैसे की कमी होगी ना पावर कीपढ़ाई करके हजार और लाख में कमा सकते होऔर अनपढ़ नेता ...
10/11/2025

5 साल का नेता का जीवन स्वर्ग से कम नहीं!
ना पैसे की कमी होगी ना पावर की
पढ़ाई करके हजार और लाख में कमा सकते हो
और अनपढ़ नेता करोड़पति बन जाता है.

झारखंड में पैसा नहीं है क्योंकी 1.36 लाख करोड़ कोयला का केंद्र सरकार का बकाया है जो सरकार दे नहीं रही राज्य सरकार को, ऐसा मुख्यमंत्री जी के बोल है इसलिए ना नौकरी दे पा रहे है, ना अच्छी सरकारी शिक्षा, ना अच्छी स्वास्थ्य सेवा और ना ही झारखंड का अच्छे से विकास कर पा रहें है.

तो मेरे प्रिय जनता झारखंड के गरीब, आदिवासी, मूलवासी जनता को केंद्र सरकार पैसा नहीं दे रही वो नहीं चाहती है वो आगे बड़े. लेकिन मैं इस राज्य का मुख्यमंत्री हूँ और मुझे पता है झारखंड को कैसे लूटा जा सकता है. तो 300 करोड़ का सबसे पहले नेताओं के लिए महल बना देता हूँ. जनता जाए तेल लेने, उनका घर पूरी बरसात में टपकता रहे. उनको साफ़ पानी पीने को मिले या नहीं उससे क्या मतलब पहले नेताओं के परिवार के लिए स्विमिंग पूल बनाओ।

अब समझ आ रहा किसका विकास हो रहा है झारखंड में.
मुखिया सिर्फ अपनी जेब भर रहा है.

JMM झूठ और जुमलों की सरकार!  30 पॉइंट का घोषणा पत्र एक भी काम पूर्ण रूप से पूरा नहीं 2019 का JMM का मैनिफेस्टो छोड़ दिजिए...
31/10/2025

JMM झूठ और जुमलों की सरकार!
30 पॉइंट का घोषणा पत्र एक भी काम पूर्ण रूप से पूरा नहीं

2019 का JMM का मैनिफेस्टो छोड़ दिजिए वो मुख्यमंत्री जी के साथ साथ आप भी भूल गए होंगे।
बात करेंगे 2024 में दोबारा सरकार बनाने वाले JMM के मैनिफेस्टो की, 30 पॉइंट का घोषणा पत्र जारी किया था अब लगता है वो किसी कबाड़ में बिक गया. झारखंड में गरीबी बहुत है हर युवा पढ़ाई इसलिए करता है की एक सरकारी जॉब मिल जाए तो वो अपने परिवार के साथ एक अच्छा जीवन जी सके. लेकिन एक खबर पिछले हफ्ते आती है AAJTAK न्यूज़ इसे कवर करती है.

खबर -----------झारखंड में नौकरी पाना भगवान मिलने जैसा!....

*झारखंड में सरकारी नौकरियों की स्थिति गंभीर बनी हुई है. कुल 3,48,000 स्वीकृत पदों में से 1,60,000 पद अभी भी खाली हैं. JSSC द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं और नियुक्तियों की प्रक्रिया में वर्षों लग रहे हैं, कई मामलों में 10 साल से अधिक का समय बीत चुका है. 2015 और 2016 में निकाली गई भर्तियां भी अभी तक पूरी नहीं हुई हैं. कई मामले कोर्ट में लंबित हैं, जिससे युवाओं को नौकरी मिलने में और देरी हो रही है*...

खतियान और मूलवासी की जो आप मैनिफेस्टो में बात करते है, उन छात्रों को बेरोजगार क्यों बना कर रखे हुए हो. कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर जो दूसरे राज्य के कंपनी से लेकर काम करने वालों पर ताला कब लगेगा। जिसका झारखंड वो न खा के दूसरे राज्य के लोगों को मलाई बाँट रहे है.

अरे भाई 1,60,000 अगर आदिवासी, मूलवासी को ये जॉब मिल जाए तो आपकी छवि ज्यादा बेहतर होगी। ना की "मईया सम्मान के एक झूठे वादे" से 2500 में आप महिलाओं से एक वोट की उम्मीद कर बैठे है और अगर आप नौकरी देते हो तो शायद उसका पूरा परिवार आपके साथ हो. झारखंडवासियों को भीख नहीं उनका हक़ चाहिए।

मैंने एक लाइन लिखि है "मईया सम्मान के एक झूठे वादे" क्योंकी उनके मैनिफेस्टो में सभी महिलाओं को देने का वादा किया था, जो झूठ ही है विधान सभा चुनाव 2024 में 1,27,12,266 महिला वोटर्स थी और कई महिलाओं ने वोट नहीं भी किया हो तो... महिला का नंबर और भी बढ़ेगा। मुख्यमंत्री जी ने तो चाल चल दी आधे से ज्यादा गायब लिस्ट से.

मुख्यमंत्री जी तो महीनों में एक दो बार 200-250 नियुक्ति पत्र बांट के खुश हो जाते है. सिर्फ मंत्रियों विधायकों के महल और गाड़ियों बांटने से जनता खुश नहीं होती। जनता सर पर चढ़ाती है तो कदमों पर उतारने भी जानती है.

मेरा सवाल ये की गलती किसकी जिन्होंने 7 बच्चों का जीवन बर्बाद कर दिया?कोई नेता मंत्री बीमार हो जाए दिल्ली- मुंबई -बेंगलूर...
28/10/2025

मेरा सवाल ये की गलती किसकी जिन्होंने 7 बच्चों का जीवन बर्बाद कर दिया?

कोई नेता मंत्री बीमार हो जाए दिल्ली- मुंबई -बेंगलूर-चेन्नई चले जाए और गरीब जनता सरकार की चरमराई स्वास्थ्य सेवा से लाभ ले!
ऐसा झारखंड कोई नहीं चाहता।

एम्बुलेंस झारखंड----- गूगल कर लेना झारखंड की स्वास्थ्य सेवा और बड़बोले मंत्री जी का पूरा कच्चा चिट्ठा दिख जाएगा। कितनी सेवा दे रहे है.

झारखंड की स्वास्थ्य सेवा की बात करो, तो सीधे भाषा में कहूं तो मौत परोसी जा रही है.
झारखंड के बड़बोले स्वास्थ्य मंत्री अपने नाम के आगे Dr. लगाते है. यूक्रेन के किसी यूनिवर्सिटी से डिग्री लिए है. मीडिया में बड़ी बड़ी बातें करते है और बेटा रील बना कर हॉस्पिटल्स में निरीक्षण करता फिरता है. मानो एक नहीं दो मंत्री झारखंड की स्वास्थ्य सेवा को बेहतर करने में लगे है लेकिन असलियत ये है दोनों फेल है. एक रिम्स को ठीक से चला नहीं पा रहें नगड़ी में दूसरा खोलने के पीछे पड़े है. मतलब झारखंड की जनता का पहले जमीन ले लो फिर उन्हीं को ढंग का मेडिकल सेवा भी न दो. ये सेवा नहीं धंधा है.

चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित 7 बच्चों को HIV संक्रमित ब्लड चढ़ा दिया गया.

थैलेसीमिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर में ब्लड नहीं नहीं बनती। एक सामान्य शरीर में रोजाना खाना -पानी से ही ब्लड बन जाता है. लेकिन थैलेसीमिया जैसे बिमारी में शरीर में अपने आप ब्लड बनता नहीं। एक ब्लड की थैली अमूमन रूप से 20-30 या 50 दिन तक काम करती है. जैसे जैसे patient की उम्र बढ़ती है, ब्लड चढ़ाने के दिन कम होते जाते है. उन्हें शारीरिक रूप से कम काम करने को कहा होता है. Patient के परिवार को हमेशा ध्यान रखना पड़ता है. जब लगता है की उनके बच्चे के शरीर में ब्लड कम हो रहा है तो एक दिन समय निकालकर ब्लड टेस्ट करना पड़ता है, फिर डोनर ढूढ़ने में क्योंकी हर ब्लड बैंक आपको हर महीने ऐसे ही ब्लड डोनेट नहीं करता। फिर मिलने के बाद बच्चे में ब्लड चढ़ाया जाता है. जिसमें पूरा दिन चला जाता है. क्योंकी patient को ब्लड चढ़ाने के समय कई बार बुखार या कमजोरी लगने लगता है तो इसमें लगभग आपका एक दिन जाता है. मेरा कहना ये है की परिवार पहले से जूझ रहा होता है.

इस बीच खबर आती है की चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित 7 बच्चों को HIV संक्रमित ब्लड चढ़ा दिया गया है. जो बच्चें पहले से एक खतरनाक बीमारी से जूझ रहें है उन्हें अब लाइलाज बीमारी से ग्रसित कर दिया। उन 7 बच्चों का जीवन खराब कर दिया और मुख्यमंत्री बच्चों के परिजनाें को दो-दो लाख रुपये मुआवजा और संक्रमित सभी बच्चों के इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात रखते है. ये बात उन बच्चों से पूछे 2 लाख में उनका हो जाएगा सब ठीक.

पहले लाइलाज बीमारी दी और अब पैसों से तौला जा रहा है, लाचार सिस्टम है ये.

सरकार मानती है की उनकी स्वास्थ्य सेवा फेल है, इसके जिम्मेदारी तो स्वास्थ्य मंत्री को भी लेना चाहिए एक ढंग का काम नहीं हो पा रहा, एम्बुलेंस नहीं है, जो है उनके ड्राइवर्स को सही समय और सही वेतन नहीं दे पा रहें। मैंने पहले भी बताया पूरी स्वास्थ्य सेवा खाली है, हॉस्पिटल्स में डॉक्टर्स,नर्सस और मेडिकल स्टाफ की भारी कमी है. लेकिन मौज में नेता सिर्फ अपनी सोचता है.

बस कहने का आदिवासियों का झारखंड!झारखंड बस कहने के लिए आदिवासियों का रह गया है. यहां के विधायक और मंत्री तो बन जाते है ले...
26/10/2025

बस कहने का आदिवासियों का झारखंड!

झारखंड बस कहने के लिए आदिवासियों का रह गया है. यहां के विधायक और मंत्री तो बन जाते है लेकिन पार्टी प्रवक्ता आदिवासी नहीं रखते सिर्फ झंडा ढोने के कार्यकर्ता अपने क्षेत्र के आदिवासियों को रहते है. जिसकी सरकार है वो आदिवासियों की सरकार की बात करती बस अपने आगे पीछे दूसरों को रखना पसंद करती है. वो मलाई खाते है. झारखंड के मूलवासी को न नौकरी मिल रही न स्वास्थ की अच्छी सेवा, ना ही अच्छी शिक्षा। कोई भी मंत्री अपना काम ढंग से नहीं कर रहा. सिर्फ बीजेपी कांग्रेस JMM एक दूसरे को कोसते रहते है.

पार्टियां और उसके नेता सिर्फ अपनी जेब भर रहे है. पिछले साल भर में सरकार का फोकस सिर्फ मंईयां सम्मान योजना किस्त पर लगा हुआ है. स्कूल में टीचर्स की कमी है, हॉस्पिटल्स में डॉक्टर्स और नर्सस की, ब्लॉक में क्लर्क की और कई सरकारी संस्थान राम भरोसे चल रहें है.

सरकार सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर जॉब देना चाहती है, आधा वेतन पूरा काम, 1 साल का बोल के उसी वेतन में कार्यकाल बढ़ रही है.

जब सब कॉन्ट्रैक्ट ही करना है तो नेता मंत्री भी कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर ही बने, आधे वेतन में काम करें, बिना पेंशन और सरकारी लाभ के.

चिंता का विषय है की नेता, मंत्री झारखंड की जनता को लाभ देने के बजाय दूसरे को लाभ दे रही है. वो खुद सिर्फ नाम के मंत्री और विधायक बन बैठे है. उनको चलाने वाला दूसरे प्रदेश से है. तो वो क्या जानेगा झारखंडियों का दर्द। जल, जंगल, जमीन सब तो इललीगल तरीके से बेचे ही जा रहें है.

75% प्रतिसत से ज्यादा गैर आदिवासी या गैर मूलवासी पार्टियों के प्रवक्ता बन कर बैठे है. 1932 का खतियान मांग दो तो पसीना उतर जाएगा।

मैंने लास्ट पोस्ट में दिखाया था कैसे झारखंड के श्रम मंत्री संजय यादव (RJD) अपने बेटे को भविष्य बनाने में लगे है. खुद झार...
25/10/2025

मैंने लास्ट पोस्ट में दिखाया था कैसे झारखंड के श्रम मंत्री संजय यादव (RJD) अपने बेटे को भविष्य बनाने में लगे है. खुद झारखंड से मंत्री है लेकिन बेटे को बिहार में कहलगांव विधान सभा चुनाव में उम्मीदवार बना दिया है. खुद झारखंड में बेटा रजनीश यादव (RJD ) बिहार से चुनाव लड़ रहा है, ये कैसा लालच है भाई. क्या नेता का बेटा ही नेता बनेगा! और जो कार्यकर्ता सालों से लगे है वो सिर्फ झंडा उठाने के लिए है. ये तो लोकतंत्र नहीं लग रहा, ये तो खुलेआम राजतंत्र है. राजा का बेटा राजा बनेगा, जनता जाए तेल लेने।

पहले लालच की खबर और अब आई इनकी भौकाली की, सरकारी कार (टोयोटा फॉर्च्यूनर) अपने मन से सफ़ेद रंग से काला करा दिया और जाहिलीयत की भी हद होती है. खुद के पैसे से नहीं बिल आ गया श्रम विभाग को 5.23 लाख रुपये का.

मतलब एक तो मंत्री जी को सरकार के तरफ से कार मिली और मंत्री जी ने 5.23 लाख का रंग पोत दिया।

बात वही है सैलरी से ज्यादा इन्वेस्टमेंट!

अगर सभी विधायक और मंत्री सैलरी से चले तो अपना घर चलाना मुश्किल हो जाए. ये जितना दिखाते है कहाँ से इतना पैसा लाते है?

संजय प्रसाद यादव (RJD) गोड्डा से विधायक और तत्काल उद्योग, श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग झारखंड मंत्री है....
23/10/2025

संजय प्रसाद यादव (RJD) गोड्डा से विधायक और तत्काल उद्योग, श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग झारखंड मंत्री है. झारखंड में खुद तो कुछ कर नहीं रहें ढंग का. बेटा को अच्छी शिक्षा तो दी ही होगी, तो फिर राजनीति का विकल्प क्यों चुना बेटा रजनीश यादव कहलगांव बिहार से चुनाव लड़ रहे है. जनता तो यही मानेगी की कोई सरकारी या प्राइवेट सेक्टर में काम करने के लायक नहीं होंगे तभी तो आसान से विकल्प चुन लिया। लोगों को चूना लगाने का. कोई भी नेता अपने बच्चे की लिए कभी भी कोई भी सरकारी सेवा नहीं लेता, न सरकारी स्कूल, न सरकारी अस्पताल लेकिन बच्चे को नेता बनाना है. जो खुद के दम पर खुश कर नहीं सकता, वो जनता की सेवा करेगा। एक ऐसी नौकरी जिसमें एक बार विधायक बन गए तो पेंशन जिंदगी पर बनती रहेगी।

ये लोकतंत्र से ज्यादा राजतंत्र होता जा रहा है. पूरे देश का सिस्टम स्लो मोशन में चल रहा है को भी सेवा टाइम पर नहीं मिलती, न एग्जाम, न नौकरी , न एम्बुलेंस न पुलिसिया सेवा , न कोर्ट का फैसला। कोई भी टाइम पर नहीं मिलती, लेकिन राजनीति चुनाव सही टाइम पर होगा।

किसी ने सही कहा है, चुनाव सब लड़ो एक बार में हजारों नामांकन, सबको मौका मिलना चाहिए।

26/03/2025

इस पेज में कॉमेंट करके अपना सुझाव दे. हम कैसे और क्या सवाल उठाए. किसी मुद्दे पर बात करें.

26/03/2025

झारखंड के प्रिय जनता, क्या आप जानते है, आपके विधायक और सांसद के बच्चे क्या पढाई कर रहें है और कहाँ से कर रहे है. मईया सम्मान योजना से घर नहीं चलेगा. परिवार को खाना तो हो जायेगा लेकिन आपके छोटे बच्चे की पढ़ाई कैसे होगी? उनको jobs कैसे मिलेगी. सवाल उठाओ. ये आपका हक है. 3500 अपने जेब से नहीं दे रही सरकार. आपको खरीदा नहीं गया उस पैसे से. आप आजाद हो.

जनता के पैसे से मैच खेला जा रहा. क्या लगता है इस मैच को कराने में कितनी लागत आई होगी
26/03/2025

जनता के पैसे से मैच खेला जा रहा. क्या लगता है इस मैच को कराने में कितनी लागत आई होगी

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