06/09/2026
झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन, 56 वर्ष की उम्र में हार्ट अटैक से गई जान
झारखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू का शनिवार देर रात निधन हो गया। 56 वर्षीय सोनू की गिरिडीह स्थित अपने आवास पर अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल मर्सी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान रात करीब सवा दो बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि उनकी मौत हार्ट अटैक के कारण हुई।
सुदिव्य कुमार सोनू गिरिडीह विधानसभा सीट से लगातार दूसरी बार विधायक थे। हेमंत सोरेन सरकार में उनके पास उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद और युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी थी।
तीन दशक से ज्यादा का राजनीतिक सफर
सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर तीन दशक से भी ज्यादा लंबा रहा। 26 जुलाई 1970 को गिरिडीह में जन्मे सोनू ने 1989 में झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़कर सक्रिय राजनीति की शुरुआत की।
राजनीति के शुरुआती दौर में उन्होंने पार्टी के लिए दीवार लेखन किया, हाथों में झामुमो का झंडा लेकर गांव-गांव तक संगठन को मजबूत करने का काम किया और झारखंड आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।
1992 में उन्हें झामुमो का नगर अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद 2003 से 2010 तक उन्होंने गिरिडीह के जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गुरुजी से था बेहद करीबी रिश्ता
सुदिव्य कुमार सोनू का झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन से बेहद करीबी और पारिवारिक रिश्ता माना जाता था। बताया जाता है कि शिबू सोरेन ने उनके पिता से सोनू को अपने साथ रखने का अनुरोध किया था। इसके बाद सोनू लंबे समय तक गुरुजी के बेहद करीब रहे।
2004 में जब शिबू सोरेन कानूनी मामलों में घिरे, तब भी सुदिव्य कुमार सोनू मजबूती से उनके साथ खड़े रहे। झारखंड आंदोलन के दौरान उन्हें कई आपराधिक मामलों का सामना करना पड़ा और 2009 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें नौ दिन जेल में भी रहना पड़ा।
दो चुनाव हारने के बाद 2019 में मिली पहली जीत
सुदिव्य कुमार सोनू ने 2009 और 2014 में गिरिडीह विधानसभा सीट से झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
हालांकि, उन्होंने संघर्ष जारी रखा और 2019 के विधानसभा चुनाव में पहली बार जीत हासिल की। उन्होंने भाजपा के निर्भय कुमार शहबादी को करीब 15 से 16 हजार वोटों के अंतर से हराया।
इसके बाद 2024 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की और लगातार दूसरी बार गिरिडीह के विधायक बने। इस चुनाव में उनकी जीत का अंतर करीब 3,838 वोट रहा।
हेमंत सोरेन के करीबी रणनीतिकार
सुदिव्य कुमार सोनू को झामुमो में हेमंत सोरेन के बेहद करीबी और भरोसेमंद रणनीतिकारों में गिना जाता था। पार्टी संगठन और चुनावी रणनीति में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती थी।
झामुमो नेता कल्पना सोरेन के सक्रिय राजनीति में आने के दौरान भी सोनू की भूमिका अहम रही। उन्होंने गांडेय विधानसभा सीट से कल्पना सोरेन के चुनाव लड़ने की सिफारिश की थी और उनकी चुनावी जीत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसी वजह से पार्टी के भीतर उन्हें कई बार झारखंड की राजनीति का 'चाणक्य' और मास्टर स्ट्रैटेजिस्ट भी कहा गया।
मंत्री बनने के बाद शिक्षा और विकास पर जोर
दिसंबर 2024 में सुदिव्य कुमार सोनू हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। उनके मंत्री बनने के साथ गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र को करीब 24 साल बाद मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिला।
विधायक और मंत्री के तौर पर उन्होंने गिरिडीह में शिक्षा और बुनियादी विकास से जुड़े कई मुद्दों पर जोर दिया। लाइब्रेरी के नवीनीकरण के साथ-साथ सर जेसी बोस यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज जैसे प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने की दिशा में उन्होंने काम किया।
जमीनी कार्यकर्ता से मंत्री तक का सफर
सुदिव्य कुमार सोनू की पहचान झामुमो के एक ऐसे नेता के तौर पर रही, जिन्होंने जमीनी कार्यकर्ता के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरू किया और संगठन में लगातार काम करते हुए मंत्री पद तक पहुंचे।
तीन दशक से ज्यादा के राजनीतिक जीवन में उन्होंने पार्टी नहीं बदली और झामुमो के प्रति अपनी वफादारी कायम रखी।
उनका निधन झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ-साथ झारखंड की राजनीति के लिए भी एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनके असमय निधन से पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर है। झामुमो ने भी सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।