02/01/2026
“विश्वगुरु” का दावा ताक़त नहीं, असुरक्षा दिखाता है। जब देश भूख, शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोज़गारी, महिला सुरक्षा, प्रेस फ़्रीडम और पर्यावरण में पिछड़ रहा हो, तब सभ्यता और आध्यात्मिक श्रेष्ठता के नारे हकीकत से ध्यान भटकाते हैं। जो देश अपने बच्चों को पढ़ा नहीं पा रहा, वो दुनिया को पढ़ाने का दावा कैसे कर सकता है? ये गर्व नहीं—विफलताओं पर डाला गया भावनात्मक पर्दा है।