20/12/2025
दाग़ दामन न छुए खुद को बचाएं कैसे
हम वफ़ा तुमसे निभाएं तो निभाएं कैसे
हम यहां वो हैं वहां बीच में लंबी दूरी
हाले - दिल उनको सुनाएं तो सुनाएं कैसे
हैं ज़माने की नज़र हम पे बड़ी मुद्दत से
इन निगाहों से निगाहों को मिलाएं कैसे
चाहता शाम सहर सिर्फ तुम्हें अब ये दिल
बिन तुम्हें देखें सुने जी को मनाएं कैसे
भीड़ रहती है हमारे तो सदा कूचे में
ऐसे आलम में उन्हें घर पे बुलाएं कैसे
प्यार को हमने कई बार लिखा है ख़त में
रूबरू प्यार मगर उनसे जताएं कैसे
रूठ हमसे वे गए पास खड़ा था कोई
अब सुधा सोचती है उनको मनाएं कैसे
मियां भाई झारखंड
20/12/2025