Purvanchal Surya

Purvanchal Surya A Hindi daily by highly motivated socialist and writer

ब्रिक्स देशों ने एकतरफा व्यापारिक कदमों पर जताई चिंता, बातचीत और कूटनीति को बताया अहम रास्तानई दिल्ली।ब्रिक्स देशों ने न...
12/09/2026

ब्रिक्स देशों ने एकतरफा व्यापारिक कदमों पर जताई चिंता, बातचीत और कूटनीति को बताया अहम रास्ता

नई दिल्ली।ब्रिक्स देशों ने नई दिल्ली घोषणा में विश्व में बढ़ रहे एकतरफा व्यापारिक फैसलों पर गंभीर चिंता जताई है। समूह ने कहा कि टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों का ऐसा इस्तेमाल,जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित होता है और जो विश्व व्यापार संगठन के नियमों के मुताबिक नहीं है,चिंता की बात है।ब्रिक्स देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ उठाए जाने वाले एकतरफा दबाव वाले कदमों की भी निंदा की है।

घोषणा में विश्व के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ रहे संघर्षों को रोकने और उनके पीछे की असली वजहों पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई है।ब्रिक्स देशों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विवादों को बातचीत,आपसी सलाह और कूटनीति के जरिए शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए।इस बात पर भी जोर दिया कि विश्व की बड़ी समस्याओं से निपटने के लिए ऐसी बहुपक्षीय व्यवस्था होनी चाहिए,जिसमें अलग-अलग देशों के विचारों और रुख का सम्मान किया जाए।

नई दिल्ली घोषणा में व्यापार से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। ब्रिक्स देशों ने कहा कि हाल के दिनों में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों का इस्तेमाल बढ़ा है।खासकर ऐसे कदमों पर चिंता जताई गई,जो वैश्विक व्यापार को प्रभावित करते हैं और विश्व व्यापार संगठन के नियमों के मुताबिक नहीं हैं।
ब्रिक्स देशों ने उन एकतरफा दबाव वाले कदमों का भी विरोध किया,जो अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं। ब्रिक्स देशों ने कहा कि विश्व की व्यापार व्यवस्था में सहयोग बढ़ाने और तय नियमों का सम्मान करने की जरूरत है।

संघर्षों को रोकने पर भी घोषणा में जोर दिया गया। ब्रिक्स देशों ने परमाणु खतरे और विश्व में बढ़ रहे संघर्षों के जोखिम को लेकर चिंता जताई।कहा कि अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सिर्फ संघर्ष शुरू होने के बाद कदम उठाना पर्याप्त नहीं है।इसके साथ ही संघर्षों को रोकने और उनकी मूल वजहों को दूर करने पर भी काम करना जरूरी है।

ब्रिक्स देशों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विवादों को बातचीत और कूटनीति के जरिए शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए। ब्रिक्स देशों ने आपसी विचार-विमर्श को भी इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा बताया। ब्रिक्स देशों ने कहा कि विश्व की बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए ऐसी बहुपक्षीय व्यवस्था जरूरी है,जिसमें अलग-अलग देशों के नजरिए और अहम वैश्विक मुद्दों पर उनके रुख का सम्मान किया जाए।

आर्थिक सहयोग को लेकर भी ब्रिक्स देशों ने सीमा पार भुगतान को आसान बनाने की दिशा में बातचीत जारी रखने का समर्थन किया।कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतों का समाधान निकालने के लिए चर्चा को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

बता दें कि नई दिल्ली घोषणा में ब्रिक्स देशों ने व्यापार, आर्थिक सहयोग,संघर्ष रोकने,कूटनीति और बहुपक्षीय व्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर अपना साझा रुख सामने रखा।

तेल के तीनों रास्‍ते बंद,विश्व में फिर मचेगा कोहराम,भारत पर भी गंभीर असरनई दिल्ली।भारत समेत पूरे विश्व में एक नया संकट आ...
12/09/2026

तेल के तीनों रास्‍ते बंद,विश्व में फिर मचेगा कोहराम,भारत पर भी गंभीर असर

नई दिल्ली।भारत समेत पूरे विश्व में एक नया संकट आ रहा है, जिन तीन रास्‍तों से गल्‍फ का तेल भारत में आता था,अब इन रास्‍तों पर भारी संकट दिख रहा है।विश्व में एनर्जी का संकट पहले से है,स्ट्रेट होर्मुज पहले से ही प्रभावित है और अब सऊदी अरब ने इराकी क्षेत्र से किए गए कई ड्रोन हमलों के बाद अपनी कच्चे तेल की पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।इसके साथ यमन के लाल सागर तट पर 18 घंटे तक चले भीषण हमले में हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर कंट्रोल करने के कगार पर पहुंच चुके हैं।

ये तीनों रास्‍ते विश्व की तेल सप्‍लाई के लिए काफी महत्‍वपूर्ण हैं।होर्मुज विश्व का 20 फीसदी तेल आयात करता था,जबकि सऊदी अरब के पाइपलाइन से हर दिन 40 से 50 लाख बैरल तेल सप्‍लाई होती थी।वहीं बाब अल-मंदेब से भी विश्व के कुल समुद्री तेल और गैस व्यापार का लगभग 5 फीसदी से 12 फीसदी हिस्सा यानी 4 से 5 मिलियन बैरल हर दिन तेल सप्‍लाई होता है।

इसका मतलब है कि इन तीनों रास्‍ते से लगभग 30 फीसदी सप्‍लाई प्रभावित होगी,क्‍योंकि होर्मुज और बाब अल-मंदेब के बाद ईरान तेल सप्‍लाई को अपने तरीके से चला सकता है और वह मिडिल ईस्‍ट से आने वाले तेल-गैस को रोक सकता है।

अब अगर इन तीनों रास्‍तों को पूरी तरह बंद कर दिया जाता है तो विश्व की लगभग 30 फीसदी सप्‍लाई पूरी तरह ठप हो जाएगी,इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि यूरोप,भारत और चीन जैसे देशों को जाने वाली एनर्जी सप्‍लाई ज्‍यादा प्रभावित हो जाएंगी और अगर ये लंबे समय तक बंद रहता है तो विश्व को एक भारी संकट का सामना करना पड़ सकता है।

पेट्रोल-डीजल और एलपीजी के दामों में बढ़ोतरी होगी।सप्‍लाई चेन प्रभावित होने से अंतरराष्‍ट्रीय बाजारों से आने वाली चीजें काफी महंगी हो जाएंगी,भारत से इन देशों को निर्यात भी प्रभावित होगा।कच्‍चा माल महंगा होने से प्रोडक्‍ट्स की कीमतें बढ़ जाएंगी,जिससे बाजार में खरीदारी कम होगी और महंगाई के कारण इकोनॉमी प्रभावित होगी।

शेयर बाजार भी इससे अछूता नहीं रहेगा,जियो-पॉलिटिकल तनाव बढ़ने से महंगाई बढ़ेगी,कंपनियों की कमाई भी तेजी से घट सकती है,जिससे इनके शेयरों पर असर होगा,ऐसे में भारत से लेकर ग्‍लोबल लेवल पर बाजारों में मंदी की स्थिति आ सकती है।

सबसे पहले सऊदी अरब का तेल,उसके पूर्वी क्षेत्र से होते हुए Arabian Peninsula के अंदर से पश्चिम की ओर Yanbu Port की ओर जाता है,फिर यहां से लाल सागर में जाकर मिलता है और वहां से टैंकरों के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सप्‍लाई होता है।यह रास्‍ता विश्व के कुल तेल का 4 से 5 फीसदी ही सप्‍लाई करता है,लेकिन इसकी खास बात ये है कि इससे कई देशों की आपूर्ति पूरी होती है। अब इस रास्‍ते के बंद होने से यूरोप के कई देश प्रभावित हो सकते हैं।

भारत पर इसका असर उतना गंभीर नहीं होगा,क्‍योंकि भारत पहले ही अपने तेल जरूरतों का ज्‍यादातर हिस्‍सा दूसरे देशों या रास्‍तों से आयात कर रहा है।हालांकि एक असर ये होगा कि गल्‍फ से आने वाले तेल की सप्‍लाई कम हो जाएगी,क्‍योंकि पहले से ही होर्मुज का रास्‍ता प्रभावित है और अब होर्मुज को सरपास करने वाला ये रूट भी बंद कर दिया गया है।

ईरान सर्पोटिव यमन, अब लाल सागर तट (बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य) पर 18 घंटे तक चले भीषण हमले के बाद कंट्रोल होने के करीब है।यह जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी और उससे आगे अरब सागर से जोड़ता है।

हूतियों के नियंत्रण से 29 किलोमीटर चौड़े इस जलमार्ग को तेहरान अपने नियंत्रण में ले सकता है और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसी रणनीति अपनाकर हिंद महासागर में खाड़ी देशों से होने वाले ऊर्जा निर्यात को प्रभावी ढंग से रोक सकता है।भारत के लिए यह मामला विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।भारत कच्चे तेल और अन्य पेट्रोकेमिकल्स के आयात के साथ-साथ यूरोप तक पहुंचने के लिए भी बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर निर्भर है।ईंधन,दवाइयां,मशीनरी और अन्य वस्तुओं का परिवहन करने वाले जहाज नियमित रूप से नीदरलैंड के रॉटरडैम और फ्रांस के मार्सिले जैसे बड़े यूरोपीय बंदरगाहों तक पहुंचने के लिए इस जलडमरूमध्य का उपयोग करते हैं।

ऐसे में बाब अल-मंदेब पर कब्जा भारत को तेल की महत्वपूर्ण आपूर्ति को बाधित कर सकता है,जिसे अमेरिका- ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद से खाड़ी देशों से पेट्रोलियम शिपमेंट में पहले ही काफी व्यवधान का सामना करना पड़ा है।

कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की जो आपूर्ति भारत से होकर गुजरती है, वह 2023 में प्रतिदिन 93 लाख बैरल से घटकर 2025 की पहली छमाही में लगभग 42 लाख बैरल प्रतिदिन रह जाएगी।अभी तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल है, लेकिन अगर ये आगे भी बंद रहता है तो ये अंदाजा लगाना मुश्किल है कि ये कितनी महंगी हो सकती हैं।

भारत,रूस और चीन एक हो जाए तो,बदल जाएगी दुनिया,समझिए ब्रिक्स की ताकतधनंजय सिंह।भारत,चीन और रूस आर्थिक तौर पर एकजुट हो जाए...
12/09/2026

भारत,रूस और चीन एक हो जाए तो,बदल जाएगी दुनिया,समझिए ब्रिक्स की ताकत

धनंजय सिंह।भारत,चीन और रूस आर्थिक तौर पर एकजुट हो जाएं तो विश्व में अर्थव्यवस्था का संतुलन रातों-रात बदल सकता है।ब्रिक्स एक ऐसा मंच है,इसके जरिये भारत,चीन और रूस के रिश्तों में मजबूती आ सकती है।अगर ये तीनों महाशक्तियां पूरी तरह से एकजुट हो जाती हैं तो यह अमेरिकी वर्चस्व और डॉलर के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होगी।

मौजूदा समय में भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है,वहीं चीन ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग का हब बन चुका है।रूस ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों का केंद्र है। भारत,चीन और रूस मिलकर वैश्विक जीडीपी का 30 फीसदी से अधिक और विश्व की आबादी का लगभग 40 फीसदी हिस्सा संभालते हैं।

अगर भारत, चीन और रूस एकजुट हो जाते हैं,तो अमेरिकी डॉलर के विकल्प को तलाशना थोड़ा आसान हो जाएगा, इससे स्थानीय मुद्राओं या ब्रिक्स करेंसी में व्यापार को धीरे-धीरे करके बढ़ाया जा सकता है।फिर अमेरिकी मौद्रिक नीति का प्रभाव कमजोर पड़ जाएगा।अमेरिका और पश्चिमी देशों का आर्थिक प्रतिबंध लगाने वाला हथियार निष्प्रभावी हो जाएगा।

लद्दाख सीमा पर तनाव और आपसी प्रतिस्पर्द्धा के कारण भारत और चीन के बीच सुरक्षा व कूटनीतिक स्तर पर गहरा अविश्वास है।भारत किसी ऐसे ब्लॉक का हिस्सा नहीं बनना चाहता है,जिसका नेतृत्व चीन के हाथों में पूरी तरह चला जाए,क्योंकि चीन और रूस जहां स्पष्ट रूप से अमेरिका-विरोधी एजेंडे पर आगे बढ़ना चाहते हैं वहीं भारत गैर-पश्चिमी नीति पर चलता है।भारत का अमेरिका,यूरोप और जापान के साथ बेहद मजबूत व्यापारिक और तकनीकी रिश्ते हैं,जिन्हें भारत रूस या चीन के लिए दांव पर नहीं लगाएगा।

बता दें कि शुरुआती दौर में ब्रिक्स को चीन और रूस के प्रभुत्व वाला मंच माना जाता था,लेकिन पिछले कुछ सालों में भारत इस ग्रुप का एक अत्यंत महत्वपूर्ण संतुलन-केंद्र बन गया है।चीन और रूस शुरुआत में ब्रिक्स को अमेरिका और पश्चिमी देशों के खिलाफ एक अमेरिका-विरोधी मंच बनाना चाहते थे। भारत ने मजबूती से रुख अपनाया कि ब्रिक्स पश्चिम-विरोधी नहीं,बल्कि गैर-पश्चिमी मंच होना चाहिए।भारत के इस रुख का समर्थन ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे सदस्यों ने भी किया।

इसके अलावा चीन,भारत और रूस का अमेरिका के खिलाफ एक एकीकृत सैन्य या ब्लॉक-स्तरीय गठजोड़ बनना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं दिखता।भारत ब्रिक्स में रहते हुए भी अमेरिका के साथ संतुलन बनाए रखेगा, ताकि कोई भी एक महाशक्ति वैश्विक व्यवस्था पर अपना एकाधिकार न जमा सके।

ब्रिक्स बैंक के गठन में भारत की अहम भूमिका रही और इसके पहले अध्यक्ष भारत के केवी कामथ बनाए गए थे। भारत ने ब्रिक्स के मंच पर अपने डिजिटल मॉडल जैसे कि UPI, Aadhaar, DigiLocker को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दिया,जिससे विकासशील देश भारत के तकनीकी समाधानों को अपनाने के लिए उसकी ओर देख रहे हैं।

भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। ब्रिक्स के भीतर भारत का आर्थिक और आर्थिक-नीतिगत वजन चीन के एकाधिकार को चुनौती देने के लिए सबसे मजबूत आधार प्रदान करता है। ब्रिक्स के विस्तार के समय भारत ने यह सुनिश्चित किया कि केवल उन्हीं देशों को एंट्री मिले जो गुटनिरपेक्षता और वैश्विक संतुलन में विश्वास रखते हों,ताकि यह मंच किसी एक देश का मोहरा न बने।

इंडोनेशिया का ब्रिक्स में शामिल होना संगठन के विस्तार की रणनीति का हिस्सा है। ब्रिक्स के 2023 जोहान्सबर्ग सम्मेलन के दौरान ही इंडोनेशिया के नाम पर सहमति बनी थी।हालांकि अपनी घरेलू चुनावी प्रक्रियाओं के कारण इंडोनेशिया ने औपचारिक रूप से 2025 की शुरुआत में इसमें अपनी पूर्ण सदस्यता दर्ज कराई।इंडोनेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

अमेरिका ब्रिक्स के जरिए चीन के बढ़ते वैश्विक आर्थिक दबदबे से चिंतित है,जबकि भारत खुद ब्रिक्स के भीतर चीन के एकाधिकार को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। अमेरिका चाहता है कि भारत ब्रिक्स की अमेरिका-विरोधी नीतियों पर अंकुश लगाए। वहीं ब्रिक्स के सदस्य भारत के आर्थिक वजन का लाभ उठाना चाहते हैं।

सात साल बाद भारत पहुंचे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, पीएम मोदी से मुलाकात में LAC, व्यापार और रिश्तों पर होगी बड़ी चर्चान...
12/09/2026

सात साल बाद भारत पहुंचे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, पीएम मोदी से मुलाकात में LAC, व्यापार और रिश्तों पर होगी बड़ी चर्चा

नई दिल्ली।चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को दो दिवसीय भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे।शी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आए हैं।सात साल बाद उनकी यह भारत यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को फिर से बेहतर दिशा देने के लिहाज से अहम मानी जा रही है।

दिल्ली एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का स्वागत किया।इस दौरान सांस्कृतिक कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य पेश कर शी का स्वागत किया।शी के साथ चीन सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और बड़े कारोबारी नेताओं का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम 6 बजे शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे।इस बैठक में दोनों नेता भारत-चीन संबंधों की मौजूदा स्थिति पर चर्चा कर सकते हैं।

पीएम मोदी और शी जिनपिंग की बातचीत में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर हालात की समीक्षा हो सकती है।भारत और चीन सीमा पर शांति बनाए रखने और रिश्तों को सामान्य करने के आगे के तरीकों पर भी पीएम मोदी और शी जिनपिंग चर्चा कर सकते हैं।इसके साथ ही व्यापार और निवेश के रिश्तों को बढ़ाने के मुद्दे पर भी बात होने की उम्मीद है।

भारत और चीन के रिश्ते 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़पों के बाद काफी खराब हो गए थे।इसके बाद पूर्वी लद्दाख में चार साल से ज्यादा समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा। पिछले एक साल में भारत और चीन ने भरोसा बढ़ाने और रिश्तों में सुधार की दिशा में कई कदम उठाए हैं।

शी जिनपिंग का भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है,जब भारत और चीन के बीच कई स्तरों पर बातचीत हुई है।पिछले महीने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बीजिंग में विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत हुई थी।इस बैठक में सीमा विवाद,सीमा निर्धारण, सीमा पार सहयोग और LAC पर शांति बनाए रखने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

भारत और चीन के बीच सीमा वार्ता के लिए विशेष प्रतिनिधि तंत्र 2003 में बनाया गया था। इसका उद्देश्य करीब 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा से जुड़े विवाद का समाधान तलाशना है। डोभाल और वांग यी इसी तंत्र के तहत दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि हैं।

इससे पहले मोदी और शी जिनपिंग ने पिछले साल 31 अगस्त को चीन के तियानजिन शहर में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान भी व्यापक बातचीत की थी।शी की मौजूदा यात्रा को भारत और चीन के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के एक और अहम मौके के तौर पर देखा जा रहा है।

ब्रिक्स का सफरनामा:येकातेरिनबर्ग से शुरू होकर भारत तक,2009 से 2026 तक ऐसे बदला यह संगठनधनंजय सिंह।यह चौथा अवसर है जब भार...
12/09/2026

ब्रिक्स का सफरनामा:येकातेरिनबर्ग से शुरू होकर भारत तक,2009 से 2026 तक ऐसे बदला यह संगठन

धनंजय सिंह।यह चौथा अवसर है जब भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।इससे पहले भारत ने साल 2012 में नई दिल्ली), 2016 में गोवा और 2021 में कोविड-19 महामारी के कारण वर्चुअल सम्मेलन में ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों की मेजबानी की थी।

साल 2001 में गोल्डमैन सैक्स में ग्लोबल इकनॉमिक रिसर्च के प्रमुख जिम ओ नील ने एक शोध पत्र में ब्रिक संक्षिप्त नाम गढ़ा था,जिसमें उन्होंने तर्क दिया था कि ब्राजील,रूस,भारत और चीन,या ब्रिक,चार तेजी से उभरती ऐसी बाजार अर्थव्यवस्थाएं हैं जो भविष्य के वैश्विक आर्थिक विकास की प्रमुख वाहक होंगी।

ब्रिक देशों की पहली सरकार-स्तरीय बैठक उनके विदेश मंत्रियों की थी,जो साल 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के मौके पर हुई थी।तब उनके एजेंडे में ईरान और पश्चिम एशिया की स्थिति शामिल थी।पश्चिम एशिया संघर्ष नई दिल्ली में हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी चर्चा का एक प्रमुख विषय होगा,इसमें ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान शामिल हो रहे हैं।

साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका के ब्रिक में शामिल होने के साथ इस समूह का नाम बदलकर ब्रिक्स कर दिया गया। मिस्र,इथियोपिया,ईरान,सऊदी अरब और यूएई 2024 में ब्रिक्स के पूर्ण सदस्य बने।इंडोनेशिया जनवरी 2025 में शामिल हुआ,जिससे यह 11 सदस्यीय समूह बन गया।
बेलारूस,बोलीविया,कजाकिस्तान,क्यूबा,मलेशिया, नाइजीरिया,थाईलैंड,युगांडा,उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले साल ब्रिक्स के 10 साझेदार देशों के रूप में शामिल हुए।

संयुक्त रूप से ब्रिक्स देशों की आबादी दुनिया की लगभग 49.5 प्रतिशत और जीडीपी की लगभग 40 फीसदी है। वित्त वर्ष 2025 में ब्रिक्स राष्ट्रों का वैश्विक सामान निर्यात में लगभग 24 फीसदी और वैश्विक माल आयात में 19 फीसदी हिस्सा था।

वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में ईरान के कुल माल व्यापार में सालाना आधार पर 22.8 फीसदी की गिरावट आई और संयुक्त अरब अमीरात के व्यापार में 10 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई।चीन के कुल माल व्यापार में लगभग 21 फीसदी बढ़ोतरी हुई,दक्षिण अफ्रीका के लिए यह आंकड़ा 20 फीसदी रहा। भारत और रूस के माल व्यापार में क्रमशः लगभग 12 और 11.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में अन्य 10 ब्रिक्स देशों का भारत के माल निर्यात में लगभग 20 फीसदी और भारत के माल आयात में 43 फीसदी हिस्सा था।हालांकि अन्य 10 ब्रिक्स देशों से भारत के आयात का मूल्य,उन्हें किए गए निर्यात के मूल्य का लगभग 3.7 गुना था।

ब्रिक का पहला संयुक्त बयान 16 बिंदुओं का था,जबकि 17वें संयुक्त बयान में 126 पैराग्राफ थे।इससे सदस्य देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में इन वर्षों में बढ़ी सहभागिता जाहिर होती है

पहला ब्रिक शिखर सम्मेलन,9 जून 2009, येकातेरिनबर्ग, रूस

रूस,ब्राजील,भारत और चीन के नेताओं ने समूह के संस्थापक सदस्यों के रूप में भाग लिया। यह 2008 के वित्तीय संकट के बाद हुआ।शिखर सम्मेलन ने वित्तीय संकट से निपटने में जी20 द्वारा निभाई गई केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया।इसमें अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को अधिक महत्त्व दिए जाने पर जोर दिया गया।नेताओं ने ऊर्जा संसाधनों और आपूर्ति के विविधीकरण,ऊर्जा पारगमन मार्गों की सुरक्षा और नए ऊर्जा निवेश और बुनियादी ढांचे के निर्माण का समर्थन किया।

दूसरा ब्रिक शिखर सम्मेलन, 15 अप्रैल 2010, ब्रासीलिया, ब्राजील

इसने वित्तीय संकट से निपटने में जी20 की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया।शामिल हुए नेताओं ने कहा कि जी20 पिछले समझौतों की तुलना में अधिक समावेशी है।नेताओं ने कहा कि आईएमएफ और विश्व बैंक को तत्काल अपनी वैधता की कमी को दूर करने की आवश्यकता है।राष्ट्र प्रमुखों ने अपने वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों से ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान व्यवस्था सहित क्षेत्रीय मौद्रिक व्यवस्थाओं की संभावनाएं खंगालने के लिए कहा।

तीसरा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन,सान्या,हेनान,चीन,अप्रैल 2011

नेताओं ने दक्षिण अफ्रीका के ब्रिक्स में शामिल होने का स्वागत किया।उन्होंने वस्तुओं के डेरिवेटिव बाजार के नियमन को मजबूत करने का आग्रह किया।

चौथा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली,मार्च 2012

शिखर सम्मेलन में नए ब्रिक्स विकास बैंक की स्थापना पर चर्चा हुई।इसने ब्रिक्स इंटरबैंक सहयोग तंत्र के तहत स्थानीय मुद्रा में ऋण सुविधा का विस्तार करने के समझौते का स्वागत किया।

पांचवां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन,डरबन, दक्षिण अफ्रीका,मार्च 2013

नेताओं ने अफ्रीका के विकास के लिए नई साझेदारी (नेपैड) की घोषणा की। उन्होंने न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) की स्थापना पर सहमति जताई। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (सीआरए) बनाए जाने पर भी सहमति व्यक्त की, जिसका प्रारंभिक आकार 100 अरब डॉलर तय किया गया।

छठा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन,फोर्टालेजा,ब्राजील,जुलाई 2014

फोर्टालेजा घोषणा में एनडीबी की स्थापना के समझौते पर हस्ताक्षर की घोषणा की गई। शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स निर्यात ऋण और गारंटी एजेंसियों पर हस्ताक्षर की भी घोषणा की गई।इसने अपनी संबंधित सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों (एसओसी) को सहयोग के तरीकों का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित किया।

आठवां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन,गोवा,भारत,अक्टूबर 2016

इसने एक स्वतंत्र ब्रिक्स क्रेडिट रेटिंग एजेंसी स्थापित करने की संभावना तलाशने पर सहमति व्यक्त की।

दसवां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन,जोहानेसबर्ग,दक्षिण अफ्रीका, जुलाई 2018

इसने औपचारिक रूप से ब्रिक्स ऊर्जा अनुसंधान सहयोग प्लेटफॉर्म की स्थापना की।

12वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, रूस की मेजबानी में वर्चुअल तरीके से आयोजित, नवंबर 2020

महामारी के मद्देनजर इसमें सदस्य देशों को 10 अरब डॉलर तक के आपातकालीन ऋण प्रदान करने के लिए एनडीबी के आपातकालीन सहायता कार्यक्रम की सराहना की गई।

14वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन,चीन की मेजबानी में वर्चुअल तरीके से आयोजित, जून 2022

भागीदार देशों ने औपचारिक रूप से ब्रिक्स वैक्सीन अनुसंधान एवं विकास केंद्र शुरू किया।

15वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका, अगस्त 2023

इसमें 1 जनवरी, 2024 से अर्जेंटीना, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई को ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बनने के लिए आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया।

16वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, कजान, रूस, अक्टूबर 2024

इसने ब्रिक्स इंटरबैंक सहयोग तंत्र (आईसीएम) का स्थानीय मुद्राओं में स्वीकार्य वित्तपोषण तंत्र खोजने के लिए स्वागत किया। इसने ब्रिक्स क्लियर(एक स्वतंत्र क्रॉस-बॉर्डर निपटान और डिपॉजिटरी इन्फ्रास्ट्रक्चर) और ब्रिक्स स्वतंत्र पुनर्बीमा क्षमता स्थापित करने के लिए अध्ययन पर सहमति व्यक्त की।

17वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, रियो डी जेनेरियो, ब्राजील, जुलाई 2025

शिखर सम्मेलन ने इंडोनेशिया का ब्रिक्स सदस्य के रूप में स्वागत किया।इसने ब्रिक्स के 10 भागीदार देशों – बेलारूस, बोलीविया,कजाकिस्तान,क्यूबा,नाइजीरिया,मलेशिया, थाईलैंड,वियतनाम,युगांडा और उज्बेकिस्तान का भी स्वागत किया।शिखर सम्मेलन ने एआई के वैश्विक संचालन पर ब्रिक्स स्टेटमेंट जारी किया, जिसमें मानव-केंद्रित, समावेशी एआई नियमों की वकालत की गई।

अमेरिका द्वारा लगाए गए जवाबी शुल्क (जिसमें भारत पर लगाए गए शुल्क भी शामिल हैं) के संदर्भ में, नेताओं ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ कदमों में वृद्धि को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की और डब्ल्यूटीओ के महत्त्व पर जोर दिया। इसने ब्रिक्स न्यू इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म (एनआईपी) पर चर्चा की और बुनियादी ढांचे तथा सतत विकास के लिए निजी निवेश जुटाने के लिए ब्रिक्स मल्टीलेटरल गारंटी (बीएमजी) पहल शुरू किए जाने पर चर्चा की।

इसने ब्रिक्स इंटरबैंक सहयोग तंत्र (आईसीएम) का भी स्वागत किया, ताकि स्थानीय मुद्राओं में वित्त पोषण की स्वीकार्य व्यवस्था पर विचार किया जा सके। इस सम्मेलन में वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों से ब्रिक्स क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स इनिशिएटिव पर चर्चा जारी रखने पर जोर दिया गया।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर आज विश्व की निगाहें,भारत मंडपम में एक साथ नजर आएंगे पीएम मोदी,शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिननई दि...
12/09/2026

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर आज विश्व की निगाहें,भारत मंडपम में एक साथ नजर आएंगे पीएम मोदी,शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन

नई दिल्ली।भारत मंडपम में आज से 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन शुरू हो रहा है।दो दिनों तक चलने वाले इस वैश्विक सम्मेलन में विकासशील और उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाले 11 देश शामिल होंगे,इसमें ब्राजील,चीन,मिस्र,इथियोपिया, इंडोनेशिया,भारत,ईरान,रूस,सऊदी अरब,दक्षिण अफ्रीका और संयुक्‍त अरब अमीरात शामिल हैं।ब्रिक्‍स शिखर सम्‍मेलन 2026 भारत की अध्यक्षता में हो रहा है।इसका थीम है लचीलापन,नवाचार,सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण। वैश्विक कूटनीति के लिहाज से आज का दिन भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है।बता दें कि भारत 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।यह भी जानना महत्वपूर्ण है कि भारत ने एक जनवरी को चौथी बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता संभाली। 2026 में ब्रिक्स अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर रहा है।

इस उच्चस्तरीय सम्मेलन के दौरान,ब्रिक्स सदस्य देशों के नेता कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा,स्वास्थ्य सेवा,आपदा से निपटने की क्षमता और आवश्यक आपूर्ति श्रृंखला वैश्विक शासन व्यवस्था,व्यापार और निवेश,बहुपक्षवाद जैसे मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस से मुलाकात की थी।दोनों नेताओं ने अलग-अलग जगहों पर जारी संघर्ष,नौवहन की स्वतंत्रता,सतत विकास,मानव-केंद्रित एआई और वैश्विक खाद्य सुरक्षा समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। आज शनिवार से शुरू हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन,ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान,दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और कई अन्य नेता शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए शनिवार सुबह नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत करने का प्लान है।सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक शी पीएम मोदी के बुलावे पर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए बीजिंग से रवाना हुए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर-जनरल डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत पहुंचे।बता दें कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए विश्व के दिग्गज भारत पहुंच रहे हैं।रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान,दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और विश्व के कई अन्य नेता शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे।वे आज से शुरू होने वाले दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे।मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी,युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो और नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति काशिम शेट्टिमा भी इस शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रीय राजधानी पहुंच चुके है।कुछ देर पहले बेलारूस गणराज्य के विदेश मंत्री मैक्सिम रायझेनकोव ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत पहुंचे।

ढांगी पहाड़ के नीचे सिर कटा शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधिबलियापुर।बलियापुर थाना अंतर्गत ढांगी ...
11/09/2026

ढांगी पहाड़ के नीचे सिर कटा शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी

पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि

बलियापुर।बलियापुर थाना अंतर्गत ढांगी पहाड़ के नीचे कल्याणडीह के पास किशोरी का सिर कटा शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फ़ैल गयी है।खबर पाकर बलियापुर पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए शहीद निर्मल महतो मेमोरियल अस्पताल भेज दिया है।

ग्रामीण सुबह शौच के लिए जंगल की ओर गए थे,किशोरी के शव देखने के बाद ग्रामीणों ने बलियापुर पुलिस को सूचना दिया।खबर मिलते ही बलियापुर पुलिस दलबल के साथ पहुंची।किशोरी का धड़ से सिर की दूरी लगभग 100 मीटर है। शव पेड़ के नीचे मिला।

सूचना मिलने पर मृतक किशोरी के परिजन घटनास्थल पहुंचे। शव की पहचान पूनम कुमारी 17 वर्ष के रूप में किया गया। किशोरी के परिजन ने कहा कि मृतक किशोरी एवं उसके प्रेमी कृष रवानी 6 महीना से घर से फरार होकर प्रेम विवाह कर कर्माटांड़ में भाड़े का आवास में रह रहे हैं।

किशोरी के बुधवार से गायब होने की बातें कहीं।किशोरी के परिजन को सूचना मिलने पर पहुंचे एवं गुरुवार को बलियापुर थाना में गुमशुदगी का शिकायत दर्ज किया। शुक्रवार को किशोरी की ढंगी पहाड़ी की तलहटी में शव मिला,जबकि घटना स्थल से कर्माटांड़ की दूरी लगभग 5 किलोमीटर है। किशोरी का शव कैसे पहुंचा पुलिस के लिए जांच का विषय है।

किशोरी का सिर काटकर नरबलि देने की भी बातें कही जा रही हैं।किशोरी के पिता संदीप रवानी गांव बहादुरपुर गिरिडीह के रहने वाला है,जबकि किशोरी के प्रेमी कृष रवानी पिता संतोष रवानी मनियाडीह थाना मनियाडीह के रहने वाला है।पुलिस ने हत्या के आरोपी तक पहुंचाने के लिए खोजी कुत्ता बुलाकर शव तक ले गयी,उसके बाद खोजी कुत्ता के निशानदेही पर करमाटांड़ के इंद्रजीत रजवार को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही हैं। घटना की खबर पाकर झामुमो नेता जग्गू महतो, जेएलकेएम नेता आशीष महतो, पूर्व मुखिया जंग बहादुर महतो भी घटना स्थल पर पहुंचे।

पीएम मोदी के जन्मदिन पर झारखंड के हर घर में जलेंगे दीप, भाजपा चलाएगी सेवा अभियानपूर्वांचल सूर्य संवाददाता रांची।झारखंड भ...
11/09/2026

पीएम मोदी के जन्मदिन पर झारखंड के हर घर में जलेंगे दीप, भाजपा चलाएगी सेवा अभियान

पूर्वांचल सूर्य संवाददाता

रांची।झारखंड भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में राज्य भर में व्यापक सेवा अभियान चलाने की घोषणा की है। इस विशेष अवसर पर झारखंड के हर घर के दरवाजे और मंदिरों में पीएम मोदी के लिए आशीर्वाद के दीप जलाए जाएंगे। इसके साथ ही सांगठनिक मंडलों के गांवों को विशेष रूप से सजाया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उत्सव और सेवा भाव के साथ आम जनता तक पहुंचाना है।

आदित्य साहू भाजपा प्रदेश कार्यालय में शुक्रवार को प्रेस वार्ता में बोल रहे थे।साहू ने आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा साझा की।साहू ने बताया कि 17 सितंबर को भारतीय जनता युवा मोर्चा की ओर से सभी जिला मुख्यालयों में विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा।इसके बाद 21 और 29 सितंबर से आंगन मिलन सेवा,वाराणसी सेवा यात्रा और सेतु अभियान की शुरुआत होगी। कार्यक्रमों की इस श्रृंखला में सेवा के रंग के तहत विभिन्न स्थानों पर रंगोलियां बनाई जाएंगी और कार्यकर्ताओं की ओर से पीएम मोदी के शासन के 25 साल पर 25 कहानियां लिखकर उनके सेवा कार्यों का वर्णन किया जाएगा।

आदित्य साहू ने 2014 से पहले की देश की स्थिति को दयनीय बताते हुए कहा कि उस समय घोटालों का बोलबाला था और गरीब एवं किसान बुनियादी सुविधाओं के लिए तड़पते थे।साहू ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने अपनी सही नीति और नीयत से देश में विकास की एक मजबूत श्रृंखला खड़ी की है। गुजरात भूकंप के दौरान मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यों और वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में हो रहे चौतरफा विकास का उल्लेख करते हुए साहू ने वैश्विक स्तर पर भारत का मान बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री के प्रयासों की जमकर सराहना की।

पीएम मोदी की निरंतर कार्यक्षमता को ईश्वर की असीम कृपा बताते हुए आदित्य साहू ने कहा कि पिछले 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन में वे एक दिन भी बीमार नहीं पड़े हैं और अनवरत काम कर रहे हैं।साहू ने जोर देकर कहा कि सबका साथ,सबका विकास और सबका प्रयास के मूल मंत्र से देश बिना किसी भेदभाव के आगे बढ़ रहा है। भाजपा के इन सभी सेवा अभियानों का अंतिम लक्ष्य प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को धरातल पर उतारना है।

प्रेसवार्ता में प्रदेश महामंत्री मनोज सिंह और मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह भी उपस्थित थे।

उपायुक्त ने जिले में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर प्रज्ञा केंद्र संचालकों के साथ गूगल मीट के माध्यम से की बैठ...
11/09/2026

उपायुक्त ने जिले में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर प्रज्ञा केंद्र संचालकों के साथ गूगल मीट के माध्यम से की बैठक,फर्जीवाड़े पर दिए सख्त निर्देश

पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि

चतरा। जिले में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम-2026 के सफल और पारदर्शी क्रियान्वयन को लेकर शुक्रवार को जिले के प्रज्ञा केंद्र और सीएससी संचालकों के साथ गूगल मीट के माध्यम से बैठक आयोजित की गई। बैठक का आयोजन मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी-सह-सचिव, एवं जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त चतरा रवि आनंद के निदेशानुसार किया गया। बैठक की अध्यक्षता उप निर्वाचन पदाधिकारी चतरा रवींद्र कुमार द्वारा की गई।

बैठक में मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम-2026 के तहत ऑनलाइन आवेदन और दस्तावेजों के सत्यापन से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर संचालकों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए। उप निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर दस्तावेजों से छेड़छाड़, फर्जीवाड़ा अथवा गलत दस्तावेज को वैध दर्शाकर ऑनलाइन आवेदन करने की अनुमति नहीं होगी।

वर्ष 2003 की मतदाता सूची से छेड़छाड़ पर रोक

बैठक में वर्ष 2003 की मतदाता सूची के संबंध में विशेष सावधानी बरतने का निर्देश दिया गया। संचालकों को निर्देशित किया गया कि उपलब्ध अभिलेखों का उपयोग निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही किया जाए तथा मतदाता सूची में किसी प्रकार का अनधिकृत संशोधन, छेड़छाड़ अथवा फर्जीवाड़ा न किया जाए।

संदिग्ध एवं फर्जी दस्तावेजों पर होगी कार्रवाई

अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि किसी भी विदेशी नागरिक का नाम अथवा किसी फर्जी व्यक्ति के दस्तावेज को गलत तरीके से शामिल नहीं किया जाए। यदि किसी आवेदक या उसके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज संदिग्ध अथवा फर्जी प्रतीत होते हैं, तो ऐसे आवेदन को ऑनलाइन दर्ज नहीं किया जाएगा तथा इसकी सूचना तत्काल संबंधित पदाधिकारी को दी जाएगी।

खतियान एवं वंशावली के सत्यापन पर जोर

मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम-2026 के अंतर्गत खतियान के साथ वंशावली अथवा पारिवारिक सूची संलग्न होने की स्थिति में संबंधित अंचल अधिकारी द्वारा सत्यापन किए जाने के पश्चात ही आवेदन को ऑनलाइन करने का निर्देश दिया गया। संचालकों को दस्तावेजों की जांच में पूरी सावधानी एवं निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया।

अनियमितता पाए जाने पर होगी कानूनी कार्रवाई

बैठक में सभी प्रज्ञा केंद्र और अन्य संबंधित केंद्र संचालकों को निर्देश दिया गया कि वे उपर्युक्त सभी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करें। किसी भी स्तर पर अनियमितता, फर्जीवाड़ा अथवा निर्वाचन संबंधी निर्देशों की अवहेलना में संलिप्तता पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध बी एन एस के प्रावधानों के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

साथ ही जिला सूचना विज्ञान पदाधिकारी और सीएससी जिला प्रबंधक द्वारा दिए गए आवश्यक निर्देशों और विभाग द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का भी सावधानीपूर्वक एवं अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया।

बैठक में जिला सूचना विज्ञान पदाधिकारी कौस्तव सरकार, चतरा जिले के सीएससी मैनेजर प्रेम प्रताप सिंह,विभिन्न प्रज्ञा केंद्र संचालक समेत अन्य संबंधित उपस्थित रहे।

सोशल मीडिया पर अपुष्ट,भड़काऊ व भ्रामक सूचना फैलाने वालों पर पुलिस की पैनी नजर,होगी सख्त कार्रवाईलोग आप उसे एवं भ्रामक खब...
11/09/2026

सोशल मीडिया पर अपुष्ट,भड़काऊ व भ्रामक सूचना फैलाने वालों पर पुलिस की पैनी नजर,होगी सख्त कार्रवाई

लोग आप उसे एवं भ्रामक खबरों को सोशल मीडिया पर वायरल करने से बचें: पुलिस अधीक्षक

पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि

चतरा।सोशल मीडिया पर अफवाह,अपुष्ट सूचना और भ्रामक संदेश फैलाकर लोगों को गुमराह करने वालों के खिलाफ चतरा पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है।पुलिस अधीक्षक अनिमेष नैथानी ने चेतावनी दी है कि जानबूझकर गलत या भ्रामक सूचना फैलाने तथा बिना सत्यापन ऐसी सूचनाओं को आगे प्रसारित करने वालों पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

वायरल संदेश को बिना पुष्टि के फॉरवर्ड करना पड़ सकता है भारी

जिला पुलिस अधीक्षक अनिमेष नैथानी ने कहा कि सोशल मीडिया सूचना प्रसारित करने का तेज माध्यम है,लेकिन अपुष्ट संदेश,वीडियो या खबर कुछ ही समय में बड़े स्तर पर फैलकर भ्रम, भय और तनाव की स्थिति पैदा कर सकती है। इससे सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है।उन्होंने बताया कि पुलिस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भ्रामक, आपत्तिजनक और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली पोस्ट पर लगातार नजर रख रही है। अफवाह तैयार करने के साथ उसे जानबूझकर आगे बढ़ाने वालों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

आधिकारिक सूचना पर ही करें भरोसा

अनिमेष नैथानी ने जिलेवासियों से अपील की कि किसी संवेदनशील घटना से जुड़ी सूचना मिलने पर उसे तुरंत शेयर या फॉरवर्ड न करें। पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करें और पुलिस-प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें। संदेह होने पर संबंधित पुलिस पदाधिकारी या प्रशासनिक माध्यम से जानकारी सत्यापित की जा सकती है।

चतरा जिला पुलिस अधीक्षक अनिमेष नैथानी ने कहा कि शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में आम लोगों का सहयोग जरूरी है।

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