28/08/2022
बिना प्राकृतिक पद्धति के ही फिर से भ्रूण पैदा करने में सफलता मिली
1. इस भूण में दिमाग और धड़क रहा दिल भी है
2. तीन स्टेम सेलों की मदद से हुआ काम
3. जेनेटिक विज्ञान की तरक्की का नया काम
4. भविष्य में इंसानी अंग भी ऐसे तैयार हो सकेंगे
राष्ट्रीय खबर
रांचीः चूहों पर निरंतर जारी प्रयोग में एक और कामयाबी मिली है। इस बार इस कामयाबी का सेहरा यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के शोध दल के सर पर बंधा है। इस दल ने भी निरंतर कोशिशों के बाद अंततः प्रयोगशाला में एक चूहे का भ्रूण पैदा किया है, जिसे बनाने के लिए किसी भी प्राकृतिक पद्धति का सहारा नहीं लिया गया था।
यानी इसके विकसित होने में नर और मादा के संपर्क अथवा किसी किस्म गर्भ का उपयोग नहीं किया गया है। यह पूरी तरह कृत्रिम है और सब कुछ कृत्रिम तरीके से प्रयोगशाला में ही तैयार किया गया है। इस प्रयोग से अब चूहे का जो भ्रूण पैदा हुआ है, उसमें दिमाग और एक दिल भी है। इस दिल को धड़कता हुआ भी वैज्ञानिक देख रहे हैं। इस शोध दल का नेतृत्व प्रोफसर मैगडालेना जेरनिका गोइट्ज ने किया है। अब तक यह भ्रूण पूरी तरह सही ढंग से विकसित हो रहा है और अगर उसे यूं ही विकसित किया गया तो वह अपने किस्म का पहला जीवित प्राणी होगा, जिसके पैदा होने में किसी माता पिता की भूमिका नहीं होगी।
इस काम को अंजाम देने के लिए वैज्ञानिकों ने स्टेम सेलों का ही सहारा लिया। जेनेटिक विज्ञान के विकसित होने की वजह से यह काम दिनोंदिन आसान होता चला जा रहा है। इस प्रयोग के सफल होने की वजह से फिर से यह दावा मजबूत हुआ है कि शरीर के किसी भी अंग को इस पद्धति से तैयार किया जा सकता है। दरअसल सारे वैज्ञानिक इंसानी अंगों को प्रयोगशाला में उगाने के बाद उन्हें किसी बीमार के शरीर में प्रत्यारोपित करने की योजना पर ही काम कर रहे हैं। इसके पीछे की सोच यह है कि इस प्रयोग के सफल होने पर दुनिया के अरबों लोगों को फायदा होगा, जो किसी न किसी अंग के खराब होने की वजह से परेशान है। इसमें स्टेम सेल की सबसे प्रमुख भूमिका है, जिसे अब किसी भी शरीर का आधार माना जाने लगा है। इसके विकसित होने के कारण ही धीरे धीरे पूरा शरीर विकसित होता है।
जेनेटिक एडिटिंग का सहारा लेते हुए शोध दल ने तीन किस्म के स्टेम सेलों से यह काम प्रारंभ किया था। इस दल ने पहले इन स्टेम सेलों को आपस में संपर्क स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ाया। इनके बीच संवाद स्थापित होने के बाद इन्होंने आपसी सहयोग से कई जीन पैदा किये और विकास की प्रक्रिया को और विस्तार दिया। इनके विकास के लिए प्रयोगशाला में सारा माहौल बिल्कुल वैसा ही रखा गया था, जैसा प्राकृतिक तौर पर होता है। धीरे धीरे इस भ्रूण के दिल और दिमाग को विकसित होते हुए भी देखा गया। इस आधार पर शोधदल इस नतीजे पर पहुंचा है कि तीन किस्म के स्टेम सेल ही आपस में संवाद स्थापित कर लेने के बाद आपस में रासायनिक और विद्युतीय संकेतों का आदान प्रदान कर आगे का काम पूरा करते हैं। लिहाजा इस पद्धति को और अधिक विकसित किये जाने की तमाम बारिकियों को समझ लेने के बाद किसी खास अंग को भी प्रयोगशाला में तैयार कर पाना संभव होगा। अभी यह परीक्षण चूहों पर चल रहा है। यह तकनीक पूरी तरह विकसित और सुरक्षित साबित होने के बाद जाहिर तौर पर इंसानी स्टेम सेलों की मदद से इंसानी भ्रूण के जरिए अंग उगाने की तकनीक पर काम होगा।