Abua Disum

Abua Disum Abua Disum is a media organisation based in Ranchi, Jharkhand. It works in the field of culture and Communication.

It works in the field of culture and communication. In the past three years it has made several interview episodes with prominent intellectuals of Jharkhand and video songs in tribal language. Abua Disum is dedicated to promote the authentic voices from the ground, language and culture of the tribes and current issues affecting them.

संयुक्त राष्ट्र के इंडिजीनियस फेलोशिप के लिए गुंजल इकिर मुंडा का चयन -    #झारखंड
08/06/2026

संयुक्त राष्ट्र के इंडिजीनियस फेलोशिप के लिए गुंजल इकिर मुंडा का चयन - #झारखंड

31/05/2026
भारतीय संविधान की पाँचवी अनुसूची (Fifth Schedule) उन राज्यों पर लागू होती है जहाँ बड़ी संख्या में अनुसूचित जनजातियाँ (ST...
18/02/2026

भारतीय संविधान की पाँचवी अनुसूची (Fifth Schedule) उन राज्यों पर लागू होती है जहाँ बड़ी संख्या में अनुसूचित जनजातियाँ (ST) रहती हैं। झारखण्ड पाँचवी अनुसूची के अंतर्गत आने वाला राज्य है। इससे झारखण्ड को ये मुख्य फायदे मिलते हैं:



1. अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) की विशेष मान्यता

झारखण्ड के कई जिलों को “अनुसूचित क्षेत्र” घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में:
• जमीन की खरीद–बिक्री पर विशेष नियम लागू होते हैं
• आदिवासियों की जमीन गैर-आदिवासियों को आसानी से हस्तांतरित नहीं की जा सकती
👉 इससे जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।



2. राज्यपाल की विशेष शक्तियाँ

पाँचवी अनुसूची के तहत राज्यपाल को अधिकार है कि:
• वे अनुसूचित क्षेत्रों के लिए अलग से नियम बना सकते हैं
• किसी कानून को इन क्षेत्रों में लागू करने या न करने का निर्णय ले सकते हैं
👉 इससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कानून लागू हो पाते हैं।



3. जनजातीय सलाहकार परिषद (Tribal Advisory Council – TAC)
• राज्य में TAC का गठन होता है
• इसमें अधिकांश सदस्य आदिवासी विधायक होते हैं
• यह परिषद आदिवासी हितों से जुड़े मामलों में सरकार को सलाह देती है
👉 इससे नीति निर्माण में आदिवासी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होता है।



4. संस्कृति और परंपराओं की सुरक्षा
• पारंपरिक रीति-रिवाज, ग्राम सभा की भूमिका और सामुदायिक जीवन को संरक्षण मिलता है
• स्थानीय स्वशासन को बढ़ावा मिलता है (जैसे PESA कानून के तहत)
👉 इससे आदिवासी पहचान और संस्कृति सुरक्षित रहती है।



5. विकास योजनाओं में प्राथमिकता
• केंद्र सरकार से विशेष अनुदान और योजनाएँ मिलती हैं
• शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के लिए विशेष प्रावधान होते हैं

CNT Act (Chotanagpur Tenancy Act, 1908) के कुछ मूल बिंदु ये हैं: 📜 1. भूमि हस्तांतरण पर रोक • आदिवासी (Scheduled Tribe) ...
14/02/2026

CNT Act (Chotanagpur Tenancy Act, 1908) के कुछ मूल बिंदु ये हैं:

📜 1. भूमि हस्तांतरण पर रोक
• आदिवासी (Scheduled Tribe) की जमीन गैर-आदिवासी को बेची या ट्रांसफर नहीं की जा सकती।
• बिना डिप्टी कमिश्नर (DC) की अनुमति भूमि हस्तांतरण अवैध माना जाएगा।

🏞 2. आदिवासी भूमि की सुरक्षा
• अगर किसी आदिवासी की जमीन अवैध तरीके से छीन ली गई है, तो उसे वापस दिलाने का प्रावधान है।

👨‍🌾 3. रैयत के अधिकार
• रैयत (किसान/भूस्वामी) को अपनी जमीन पर खेती और उपयोग का अधिकार है।
• बेदखली से संरक्षण दिया गया है।

🏠 4. बटाईदार/किरायेदार के अधिकार
• बटाईदारों को भी कुछ सुरक्षा दी गई है ताकि उन्हें मनमाने तरीके से हटाया न जा सके।

⚖ 5. रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (ROR)
• जमीन का स्पष्ट रिकॉर्ड रखने का प्रावधान, ताकि विवाद कम हों।

🌿 6. परंपरागत व्यवस्था की मान्यता
• आदिवासी समाज की पारंपरिक भूमि व्यवस्था और रीति-रिवाजों को कानूनी मान्यता।

🏛 7. औद्योगिक/गैर-कृषि उपयोग पर नियंत्रण
• जमीन का उपयोग बदलने के लिए प्रशासनिक अनुमति जरूरी है।

डॉ. रामदयाल मुंडा झारखंड आंदोलन के प्रमुख वैचारिक और सांस्कृतिक नेताओं में से एक थे। उन्होंने झारखंड आंदोलन के दौरान केव...
12/02/2026

डॉ. रामदयाल मुंडा झारखंड आंदोलन के प्रमुख वैचारिक और सांस्कृतिक नेताओं में से एक थे। उन्होंने झारखंड आंदोलन के दौरान केवल अलग राज्य की मांग ही नहीं की, बल्कि आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और स्वशासन को लेकर कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार थीं:

1. अलग झारखंड राज्य
• बिहार से अलग एक स्वतंत्र झारखंड राज्य का गठन।
• यह राज्य आदिवासी बहुल क्षेत्रों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान के आधार पर बने।

2. जल, जंगल, जमीन पर अधिकार
• स्थानीय आदिवासी समुदायों का प्राकृतिक संसाधनों (जल, जंगल, जमीन) पर प्राथमिक अधिकार।
• खनन और उद्योगों से पहले स्थानीय लोगों की सहमति और लाभ सुनिश्चित करना।

3. पारंपरिक स्वशासन की मान्यता
• ग्रामसभा और पारंपरिक आदिवासी शासन व्यवस्था (मांझी-परगनैत, मुंडा-मानकी प्रणाली आदि) को संवैधानिक मान्यता।
• निर्णय लेने की शक्ति गांव स्तर पर हो।

4. सांस्कृतिक और भाषाई पहचान
• आदिवासी भाषाओं (जैसे मुंडारी, संथाली, हो, कुड़ुख आदि) को शिक्षा और प्रशासन में स्थान।
• आदिवासी संस्कृति, सरना धर्म और पारंपरिक त्योहारों को सरकारी मान्यता।

5. विस्थापन और शोषण का विरोध
• बड़े बांध, खनन और उद्योगों से होने वाले विस्थापन को रोकना।
• यदि विकास परियोजना हो तो पहले पुनर्वास और उचित मुआवजा।

6. शिक्षा और विकास का वैकल्पिक मॉडल
• आदिवासी जीवन-पद्धति के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था।
• विकास ऐसा हो जो प्रकृति और समुदाय के संतुलन को न बिगाड़े।

जयपाल सिंह मुंडा ने संविधान सभा (1946–49) में आदिवासियों की ओर से बेहद स्पष्ट और साहसी भाषण दिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी...
10/02/2026

जयपाल सिंह मुंडा ने संविधान सभा (1946–49) में आदिवासियों की ओर से बेहद स्पष्ट और साहसी भाषण दिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी भारत के मूल निवासी हैं, लेकिन सदियों से सबसे ज़्यादा शोषित, वंचित और उपेक्षित रहे हैं। आज़ादी के बाद भी यदि उनके साथ न्याय नहीं हुआ तो यह नए भारत की नैतिक विफलता होगी।

उन्होंने चेतावनी दी कि विकास के नाम पर आदिवासियों की जमीन, जंगल और जीवन-पद्धति छीनी जा रही है। इसलिए संविधान में आदिवासी क्षेत्रों के लिए विशेष सुरक्षा, जमीन पर अधिकार, स्वशासन, और उनकी संस्कृति व परंपराओं के सम्मान की गारंटी होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासियों को “सभ्य बनाने” की मानसिकता छोड़कर उन्हें बराबरी का नागरिक माना जाए।

उनके भाषणों का असर यह हुआ कि संविधान में पाँचवीं और छठी अनुसूची, आदिवासी क्षेत्रों की सुरक्षा, और विशेष प्रावधान शामिल किए गए।
संक्षेप में, जयपाल सिंह मुंडा का भाषण आदिवासी अस्मिता, अधिकार और आत्मसम्मान की ऐतिहासिक आवाज़ था।

01/02/2026

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